अकाल मृत्यु के कारण और उससे बचने के उपाय वेद-पुराणों से समझिए

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हिंदू धर्म में जीवन और मृत्यु को संसार का परम सत्य माना गया है, जिसे कोई भी व्यक्ति टाल नहीं सकता। कई लोगों की अकाल मृत्यु होती है, यानी किसी दुर्घटना, एक्सीडेंट या उम्र से पहले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार व्यक्ति को उसके कर्मों की वजह से अकाल मृत्यु मिलती है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि कोई भी व्यक्ति अपने पुण्य कर्मों की वजह से जीवन को खुशहाल बना सकता है, जबकि बुरे कर्म करके व्यक्ति अपने जीवन को कष्टदायी बना देता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भी सामना करना पड़ सकता है।

 

वेदों में अकाल मृत्यु के कारणों का ज्यादा उल्लेख नहीं किया गया है, बल्कि व्यक्ति की आयु बढ़ाने वाले यानी अकाल मृत्यु से बचने के उपाय बताए गए हैं। वेदों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में कुछ खास कर्म करता है, वह न सिर्फ अपने जीवन के कष्टों को दूर कर सकता है, बल्कि अकाल मृत्यु जैसी स्थिति से भी बच सकता है। आइए जानते हैं कि गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु के क्या कारण बताए गए हैं। उसके बाद जानते हैं अकाल मृत्यु से बचने के क्या उपाय हैं।

 

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अकाल मृत्यु के कारण

 

धर्म का त्याग गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जो व्यक्ति धार्मिक कार्य नहीं करता, उसका आचरण दूषित हो जाता है। इससे वह दुष्कर्म करने लगता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को अकाल मृत्यु प्राप्त हो सकती है।

 

विश्वासघात – जो व्यक्ति अपने रिश्तों में धोखा देता है, यानी यदि पति या पत्नी का किसी अन्य व्यक्ति के साथ प्रेम संबंध हो, तो ऐसे कर्मों को गंभीर पाप माना गया है और इनके कारण अकाल मृत्यु का सामना करना पड़ सकता है।

 

बड़ों और गुरुओं का अपमान-  जो व्यक्ति अपने माता-पिता का अपमान करता है तथा गुरुओं का तिरस्कार करता है, उसके इन कर्मों को पाप कर्म माना गया है।

 

पिछले जन्म के बुरे कर्म-  गरुड़ पुराण में बताया गया है कि केवल इस जन्म के कर्मों की वजह से ही व्यक्ति की अकाल मृत्यु नहीं होती, बल्कि पिछले जन्म के बुरे कर्मों के कारण भी अकाल मृत्यु मिल सकती है।

 

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अकाल मृत्यु से बचने के उपाय

 

हिंदू धर्म के धार्मिक ग्रंथ यजुर्वेद और ऋग्वेद में अकाल मृत्यु से बचने के कई उपाय बताए गए हैं, जबकि गरुड़ पुराण में अकाल मृत्यु के कारण बताए गए हैं।

 

1. महामृत्युंजय मंत्र

 

ऋग्वेद में बताया गया है कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से व्यक्ति अपने जीवन की रक्षा के लिए भगवान शिव से प्रार्थना कर सकता है। ऋग्वेद में रुद्र यानी शिव भगवान को मृत्यु पर विजय दिलाने वाले देवता माना गया है।इस मंत्र के बारे में परंपरागत मान्यता है कि इसमें आरोग्य प्रदान करने वाली शक्तियां हैं, जिनके जप से ऐसी सकारात्मक तरंगें उत्पन्न होती हैं जो व्यक्ति को मृत्यु के भय से मुक्त करती हैं। इसी कारण इसे मोक्ष मंत्र भी कहा जाता है। इस मंत्र के माध्यम से व्यक्ति भगवान शिव से मृत्यु पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद मांगता है।

 

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥

 

 इस मंत्अर का अर्थ हे भगवान शिव हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें। धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से व्यक्ति के मन में ऐसी ऊर्जा जागती है, जिससे वह मृत्यु के भय से मुक्त हो जाता है। इसलिए इसे मोक्ष मंत्र भी कहा जाता है।

 

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2. हवन-यज्ञ करें

 

यजुर्वेद में महामृत्युंजय मंत्र के जाप के साथ-साथ हवन-यज्ञ की विधि का भी उल्लेख किया गया है। यजुर्वेद के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र के माध्यम से व्यक्ति भगवान शिव का स्मरण कर सकता है। इसके साथ रुद्राभिषेक तथा घी की आहुति देकर हवन करने से भी व्यक्ति अकाल मृत्यु जैसी विपत्तियों से रक्षा की प्रार्थना कर सकता है।

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