अचानक सिंधु जल समझौते की इतनी चर्चा क्यों, क्या पाकिस्तान सेना ने रची कोई साजिश?

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पाकिस्तान कई मोर्चों पर सिंधु जल विवाद को उठा रहा है। हर न्यूज चैनल पर सिंधु जल समझौते पर बातचीत हो रही है। भारत को धमकियां दी जा रही हैं। यह भी बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की सीमा क्या है। यहां तक कि भारत के बांधों पर हमले का प्लान मीडिया प्लेटफॉर्म पर समझाया और बताया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर भी इस मुद्दे पर व्यापक बहस छिड़ चुकी है। अचानक से सिंधु जल समझौते पर बहस का इतना तेज होना क्या संयोग है या पाकिस्तान की कोई छिपी हुई रणनीति?

 

पूरे मामले में अब खुलासा हो रहा है कि पाकिस्तान की सेना ही भारत के खिलाफ सिंधु जल समझौते पर एक कोऑर्डिनेटेड मीडिया अभियान चला रही है। पाकिस्तान के कुछ न्यूज चैनलों पर एंकर और मेहमान भी खुलकर कह चुके हैं कि हमें ग्लोबल मीडिया पर भारत के खिलाफ अभियान चलाना होगा। अन्य मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाना होगा। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हाल ही में पाकिस्तान में सिंधु जल के मुद्दे पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है। जहां से खुलकर भारत को धमकियां दी गईं।

 

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कैसे समन्वित अभियान की तैयारी?

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सेना की अंतर-सेवा जनसंपर्क महानिदेशालय (डीजी आईएसपीआर) ने समन्वित मीडिया अभियान की तैयारी की। इसमें मीडिया से जम्मू-कश्मीर में कथित अत्याचार की कवरेज को बढ़ाने और इसे ब्लॉग व टॉक शो में शामिल करने का आह्वान किया गया। पाकिस्तान सेना ने भारत में अल्पसंख्यकों की चिंताओं और मोदी सरकार की आलोचना पर फोकस करने की अपील की।

 

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पाकिस्तान सेना ने की एंकरों के साथ बैठक

लीक दिशानिर्देशों के मुताबिक डीजी आईएसपीआर लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ ने रावलपिंडी में मेनस्ट्रीम मीडिया के एंकरों और शीर्ष व्लॉगरों के साथ बैठक की। इसमें चैनलों के कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों को भारत के खिलाफ और प्रमुख भू-राजनीतिक तनाव वाले बिंदुओं पर फोकस करने को कहा गया। मीडिया कर्मियों को खालिस्तान समर्थनक और कथित जनमत संग्रह पर भी ध्यान केंद्रित करने व भारत के अंदर गरीबी और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को अधिक महत्व देने पर जोर दिया गया।

कब हुई थी सिंधु जल संधि?

बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 19 सितंबर 1960 को कराची में हुई थी। विश्व बैंक की मध्यस्थता से यह समझौता हुआ था। इसमें सिंधु नदी बेसिन की छह नदियों के पानी को दोनों देशों में बांटा गया था। समझौते पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने साइन हैं। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 निर्दोष पर्यटकों को धर्म के आधार पर मारा। इसके बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा।

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