
इस साल 30 जुलाई से सावन महीने की शुरुआत हो चुकी है। इस महीने को शिव भक्ति के लिए सबसे पावन महीना माना जाता है। इसी वजह से कई भक्त इस महीने कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं, जहां वे लाखों की संख्या में गंगा या किसी पवित्र नदी का जल लेकर आते हैं। इसी जल से शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, कांवड़ यात्रा के दौरान भक्तों को कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तभी यात्रा सफल मानी जाती है।
इस साल सावन का महीना 30 जुलाई से लेकर 28 अगस्त तक चलने वाला है। इस दौरान कई भक्त सोमवार का व्रत रखते हैं, तो कई लोग रुद्राभिषेक कराते हैं। इसके अलावा कई लोग कांवड़ यात्रा पर भी जाते हैं। अब सवाल उठता है कि भक्तों को कांवड़ यात्रा के दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए? आइए जानते हैं कांवड़ यात्रा के 5 विशेष नियम।
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कांवड़ यात्रा के 5 नियम
1.जमीन पर कांवड़ न रखें – इस यात्रा के दौरान कांवड़ियों को अपनी कांवड़ जमीन पर नहीं रखनी चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जल से भरी कांवड़ को जमीन पर रखना उचित नहीं माना जाता। यदि किसी भक्त से गलती से कांवड़ जमीन पर रख दी जाए, तो उसे दोबारा जल भरकर लाना चाहिए। मान्यता है कि जमीन पर रखी गई कांवड़ के जल से जलाभिषेक करने पर शिवजी का आशीर्वाद नहीं मिलता और पूजा खंडित मानी जाती है।
2.पवित्र नदी का जल लें – कांवड़ यात्रियों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे बहती हुई पवित्र नदी का जल ही लेकर जाएं। कुएं या तालाब का जल कांवड़ के लिए नहीं लेना चाहिए।
3.तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें – भक्तों को यात्रा के दौरान तामसिक भोजन यानी लहसुन, प्याज, मांस और मछली का सेवन नहीं करना चाहिए। साथ ही शराब, सिगरेट, गुटखा और अन्य नशे से भी पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
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4.चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग न करें – कांवड़ यात्रा के दौरान चमड़े से बनी वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। यानी चमड़े के पर्स, बेल्ट और जूते आदि का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
5.चप्पल न पहनें – इस यात्रा के दौरान भक्तों को न सिर्फ साफ-सुथरे कपड़े पहनने चाहिए, बल्कि धार्मिक मान्यता के अनुसार यथासंभव नंगे पैर यात्रा करनी चाहिए और चप्पल या जूते पहनने से बचना चाहिए।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।