ग्राम पंचायत महादेवा और आसपास के इलाकों में सोमवार को हुई तेज बारिश ने जहां मौसम खुशनुमा कर दिया, वहीं किसानों की चिंता भी बढ़ा दी। बारिश से धान समेत दूसरी फसलों को पानी मिलने की उम्मीद में किसानों के चेहरे पर खुशी है, लेकिन राप्ती नदी के किनारे खेती करने वाले किसानों के लिए यही बारिश परेशानी का कारण बन गई है। नदी का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में पानी जमा होने से फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। तेज बारिश से खेतों में जमा हुआ पानी सोमवार को महादेवा और आसपास के गांवों में काफी देर तक तेज बारिश हुई। बारिश के बाद खेतों में पानी जमा हो गया। धान की फसल के लिए इसे फिलहाल फायदेमंद माना जा रहा है। किसानों को उम्मीद है कि पर्याप्त नमी मिलने से फसल की बढ़वार अच्छी होगी। जिन खेतों में सिंचाई की जरूरत थी, वहां बारिश ने किसानों की परेशानी कुछ कम कर दी है। राप्ती किनारे के किसानों की बढ़ी चिंता बारिश के साथ राप्ती नदी के किनारे खेती करने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नदी से सटे खेतों में कटान का खतरा बना हुआ है। लगातार बारिश और नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर खेतों की जमीन नदी की धारा में समाने की आशंका रहती है। ऐसे में किसानों को अपनी फसल और खेत दोनों की चिंता सता रही है। निचले खेतों में जलभराव बना मुसीबत राप्ती नदी के आसपास के निचले इलाकों में बारिश का पानी जमा होने लगा है। खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहने से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों का कहना है कि धान को पानी की जरूरत होती है, लेकिन यदि खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा हो जाए और उसकी निकासी न हो तो फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। किसानों को फसल खराब होने का डर राप्ती किनारे के किसानों का कहना है कि खेती में उन्होंने काफी मेहनत और पैसा लगाया है। अगर बारिश और नदी का पानी इसी तरह खेतों में जमा रहा तो फसल को बचाना मुश्किल हो सकता है। किसानों को डर है कि जलभराव के कारण फसल सड़ सकती है। वहीं नदी का जलस्तर बढ़ने से कटान हुआ तो खेत की उपजाऊ जमीन भी प्रभावित हो सकती है। बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता महादेवा और आसपास के सामान्य इलाकों में बारिश को लेकर किसान खुश हैं, लेकिन राप्ती किनारे के किसानों की चिंता अलग है। उनके लिए बारिश राहत के साथ खतरा भी लेकर आई है। किसानों का कहना है कि यदि पानी जल्द निकल गया तो फसल को फायदा होगा, लेकिन जलभराव लंबे समय तक रहा तो उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है। ऐसे में किसान अब बारिश और राप्ती नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
कोर्ट के आदेश पर 30 साल बाद हटा अवैध कब्जा:बहादुरी बाजार...
बहादुरी बाजार में अलसहारा हॉस्पिटल के मालिक डॉ. अब्दुल्ला खान के पैतृक आवास के सामने की जमीन को 30 साल बाद कब्जामुक्त कराया गया।...





































