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हफ्ते में 4 दिन काम, बुधवार को भी छुट्टी, श्रीलंका में दिख रहा गैस की कमी का असर


अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का असर पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है। युद्ध के कारण पूरी दुनिया की तेल सप्लाई पर असर पड़ रहा है, जिसके चलते तेज की कीमतों में उछाल और कई जगहों पर भारी कमी भी देखने को मिल रही है।  इस बीच सोमवार को श्रीलंका ने बुधवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया और अब हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही काम होगा। यह फैसला मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण पैदा हुए तेल संकट से निपटने के लिए लिया गया है। अभी तक श्रीलंका में 5 दिन वर्किंग होते थे लेकिन अब सिर्फ 4 दिन काम करना पड़ेगा। 

 

श्रीलंका सरकार के एक सीनियर अधिकारी प्रभात चंद्रकीर्ति ने कहा कि 18 मार्च से हर बुधवार को सार्वजनिक छुट्टी घोषित करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि यह नियम स्कूलों, यूनिवर्सिटी और न्यायपालिका पर लागू होगा। हालांकि, हेल्थ केयर, पोर्ट्स,वाटर सप्लाई और सीमा शुल्क विभागों पर यह नियम लागू नहीं होगा। श्रीलंका सरकार आने वाले दिनों में इस तरह के अन्य कदम भी उठा सकती है। 

 

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तेल की खपत कम करने की अपील

 

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण पूरी दुनिया में तेल संकट आ गया है। सरकार ने कहा कि परिवहन में इस्तेमाल होने वाले तेल की खपत कम करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है। इसके साथ ही सरकार ने लोगों से अपील की है कि  पेट्रोल-डीजल का इस्‍तेमाल संभल कर करें।

प्राइवेट सेक्टर में भी लागू होगा फैसला?

तेल की कमी के कारण सरकार ने चार दिन वर्किंग को सिर्फ सराकरी सेक्टर तक ही सीमित नहीं रखा है। सरकार ने प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है  कि वे ऊर्जा बचाने के लिए अपने वर्किंग डेज कम करने या वर्क फ्रॉम होम जैसे विकल्पों पर विचार करें। हालांकि, देश की व्यवस्था न ठप हो, इसके लिए कुछ विभागों जैसे स्वास्थ्य सेवाएं, बंदरगाह, जल आपूर्ति और सीमा शुल्क को इस कटौती से बाहर रखा गया है।  

 

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QR कोड से मिलेगा तेल

श्रीलंका में तेल की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकात है कि सरकार अब तेल की सप्लाई पर निगरानी रखने लगी है। सरकार ने तेल के वितरण पर कड़ा पहरा लगा दिया है। तेल की निगरानी बढ़ाते हुए डिजिटल राशनिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है। हर एक गाड़ी के लिए एक हफ्ते का कोटा तय कर दिया गया है। उपभोक्ताओं को पेट्रोल पंप पर QR कोड दिखाना होगा। यह फैसला कालाबाजारी को रोकने के लिए और सीमित स्टॉक में ज्यादा लोगों को सुविधा देने के लिए लिया गया है। 

‘टपोरी की तरह आते हैं’, कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर यह क्या कह दिया?


हाल ही में 84 पूर्व नौकरशाहों और 116 पूर्व सैनिकों के साथ चार वकीलों ने एक खुला पत्र लिखा। इसमें संसद के मकर द्वार पर राहुल गांधी के चाय और बिस्किट खाने की आलोचना की गई। पूर्व अधिकारियों ने राहुल गांधी से माफी मांगने की भी अपील की। अब हिमाचल प्रदेश के मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। कंगना ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के व्यवहार को ‘टपोरी जैसा’ बताया। उनका आरोप है कि राहुल गांधी के आने से महिलाएं असहज महसूस करती हैं। 

 

कगंना रनौत ने कहा, ‘हम महिलाओं को उनको देखकर बहुत असहज महसूस होता है, क्योंकि वे एकदम टपोरी की तरह आते हैं। किसी से भी ये-तू कहकर तू-तड़ाक करते हैं। जिस तरह से वह पेश आते हैं, वह बहुत ही असहज करने वाला है। अगर कोई इंटरव्यू दे रहा होता है तो वह हूटिंग कॉल करते हैं। उन्हें अपनी बहन का आचरण और व्यवहार देखना चाहिए। उनका व्यवहार बहुत अच्छा है, लेकिन राहुल गांधी खुद ही एक शर्मिंदगी का कारण है।’

 

 

 

 

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राहुल गांधी के बारे में ऐसा बोलना गलत: प्रियंका चतुर्वेदी

शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी से जब कंगना रनौत के बयान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘निजी या सियासी असहमतियां हो सकती हैं, लेकिन इस तरह से राहुल जी के बारे में बोलना, मैं मानती हूं कि गलत है। मैंने राहुल गांधी जी के साथ 10 साल काम किया है। हो सकता है कि मेरी राह अलग हो गई। मगर मैंने महिलाओं के प्रति उनके सम्मान और प्रतिबद्धता को देखा है। ऐसे व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगाना थोड़ा हास्यास्पद है। वे ऐसे परिवार से आते हैं, जहां महिलाएं नेता रही हैं। खुद इंदिरा गांधी जी हो, सोनिया गांधी जी हो या प्रियंका गांधी वाड्रा। उन पर इस तरह से आरोप लगाना हास्यापद है। आप सियासी असहमतियां करें। कड़ी से कड़ी निंदा कीजिए, लेकिन यह आरोप लगाना बिल्कुल गलत है।’

 

 

 

 

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क्या है मामला?

12 मार्च को राहुल गांधी ने संसद के मकर द्वार की सीढ़ियों पर अपने साथी सांसदों के साथ चाय और बिस्किट आते दिखे थे। इस पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद समेत 84 पूर्व नौकरशाह, 116 पूर्व सैनिक और चार वकीलों ने एक खुला पत्र लिखा था। इसमें राहुल गांधी के व्यवहार को बेहद चिंताजनक बताया गया और कहा गया कि यह संसदीय अधिकार की जानबूझकर अवहेलना को दिखाता है। एसपी वैद का कहना है कि राहुल गांधी का व्यवहार विपक्ष के नेता के तौर पर उचित नहीं है। उनका यह व्यवहार विशेषाधिकार और अहंकार की भावना को दिखाता है। उन्होंने राहुल गांधी से माफी मांगने का अनुरोध भी किया। 

होली पर रंग खरीदने से पहले ऐसे करें असली और नकली की पहचान


होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है। इस दिन लोग अपने दोस्तों और परिजनों के साथ होली खेलते हैं। घर पर तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान बनते हैं। इस बार होली 3 मार्च को मनाई जाएगी। होली के समय में बाजार में विभिन्न प्रकार के रंग और गुलाल मिलने लगते हैं। इन गुलाल और रंगों में हानिकारक केमिकल मिलाया जाता है जो आंखों और त्वचा के लिए नुकसानदायक होता है।

 

इन रंगों में सिंथेटिक रंग के साथ लीड, मरकरी, क्रोमियम के छोटे कण मिलाया जाते हैं। इन केमिकल वाले रंगों को लगाने से लोगों को त्वचा में खुजली, चकते और आंखों में जलन की समस्या होती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि असली और नकली रंगों की पहचान कैसे करें?

 

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ऐसे करें असली और नकली रंग की पहचान?

रंग की चमक और बनावट- बहुत ज्यादा चमकने वाले गुलाल में अक्सर केमिकल मिलाया जाता है जिसका टेक्सचर थोड़ा खुरदरा होता है। वहीं, प्राकृतिक गुलाल में हल्का मैट फिनिश होता है। ये रंग छूने में बहुत मुलायम होते हैं।

 

खुशबू से समझें सच्चाई- अगर रंग में पेट्रोल, केरोसिन की गंध आ रही है तो उसमें केमिकल मिलाया गया है। जबकि प्राकृतिक गुलाल में हल्की हल्की खुशबू होती है और उसमें किसी तरह की कोई गंध नहीं होती है।

 

पानी में घोलकर देखें- घर लाने के बाद रंग को थोड़ा सा पानी में डालकर घोलकर देखें। अच्छा रंग आसानी से घुल जाता है जबकि घटिया क्वॉलिटी का रंग ऊपर या फिर नीचे बैठ जाता है।

 

रंग को रगड़कर देखें- गुलाल और रंग को अपनी हथेलियों के बीच रगड़ें। केमिकल वाला रंग हाथों में खुरदरा लगता है। जबकि प्राकृतिक रंग या गुलाल बहुत मुलायम लगेगा।

 

लेबल चेक करें- रंग या गुलाल के पैकेट को खरीदने से पहले उस पर 100% नेचुरल, ऑर्गेनिक और इको-फ्रेंडली लिखा होना चाहिए। आप हल्दी, मेहंदी और फूलों के रंगों वाले प्रॉकृतिक तत्वों का इस्तेमाल होना चाहिए।

 

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होली खेलने से पहले अपनाएं ये टिप्स

  • तेल लगाएं- होली लगाने से पहले त्वचा और बालों पर नारियल और सरसों का तेल लगाएं। तेल लगाने के बाद रंग ज्यादातर देर तक नहीं टिकता है।
  • कॉन्टैक्ट लेंस न पहनें- होली खेलते समय कॉन्टैक्ट लेंस बिल्कुल न पहनें। धूप से बचने के लिए चश्मा लगाएं। चश्मा आंखों को धूप से बचाएं।
  • फुल स्लीव्स कपड़े पहनें- होली खेलते समय शरीर को पूरा ढककर रखें। फुल स्लीव्स शर्ट और लंबी पैंट पहनें।

जिस मठ के शंकराचार्य हैं अविमुक्तेश्वरानंद, वहां होता क्या है?


उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मास यानी जनवरी के महीने में मौनी अमावस्या के दिन त्रिवेणी संगम में स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। इसी दौरान कुंभ मेले का आयोजन भी होता है। सनातन धर्म में मान्यता है कि मौनी अमावस्या के दिन संगम में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

 

 इसी मौनी अमावस्या के दिन ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती भी त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उनके समर्थकों और पुलिस के बीच किसी बात को लेकर झड़प हो गई। इस घटना से नाराज होकर शंकराचार्य बिना गंगा स्नान किए ही मठ लौट गए। इसी घटना के बाद ज्योतिर्मठ देशभर में चर्चा का विषय बन गया। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि ज्योतिर्मठ आखिर है क्या, इसकी शुरुआत कब हुई और मठ के संस्थापक कौन है। आइए जानते हैं पूरी कहानी।

 

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कौन हैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद?

 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती वर्तमान में ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य हैं। वे उत्तराखंड में स्थित ज्योतिर्मठ के प्रमुख आचार्य हैं। उनका जन्म 15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के ब्राह्मणपुर गांव में हुआ था। संन्यास लेने से पहले उनका नाम उमाशंकर उपाध्याय था। उन्होंने वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री और आचार्य की शिक्षा प्राप्त की। 15 अप्रैल 2003 को उन्होंने दंड संन्यास की दीक्षा ली। उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने उन्हें नया नाम अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रदान किया।

 

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ज्योतिर्मठ की स्थापना और इतिहास

 

ज्योतिर्मठ की स्थापना आदि शंकराचार्य ने लगभग 8वीं शताब्दी में की थी। यह मठ उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है। ज्योतिर्मठ के पहले आचार्य आदि शंकराचार्य के शिष्य तोटकाचार्य थे। आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में चार मठों की स्थापना की थी जैसे ज्योतिर्मठ (उत्तर) ,श्रृंगेरी मठ (दक्षिण) ,द्वारका मठ (पश्चिम),और गोवर्धन मठ (पूर्व) में स्थापना की गई । इन सभी मठों में मुख्य रूप से अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार-प्रसार किया जाता है।

 

कुछ समय तक ज्योतिर्मठ व्यवस्थित रूप से चलता रहा, लेकिन बाद में यह लगभग निष्क्रिय हो गया। वर्ष 1941 में स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती ने ज्योतिर्मठ का पुनः पुनर्गठन किया। उनके निधन के बाद 1953 में उत्तराधिकार को लेकर विवाद शुरू हुआ, जो आज तक चला आ रहा है। कथित वसीयत के आधार पर कृष्ण बोधाश्रम को गद्दी सौंपी गई। वर्तमान में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ज्योतिर्मठ के आचार्य हैं।

कौन थे आदि शंकराचार्य?

आदि शंकराचार्य का जीवन अद्भुत और अलौकिक घटनाओं से भरा हुआ था। उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पूर्व केरल के कालड़ी गांव में हुआ था। उनके पिता शिवगुरु और माता आर्याम्बा थे। संतान प्राप्ति के लिए माता-पिता ने भगवान शिव की आराधना की, जिसके फलस्वरूप शंकराचार्य का जन्म हुआ।बचपन से ही वे असाधारण प्रतिभा के धनी थे। कहा जाता है कि बहुत कम उम्र में ही वे अपनी मातृभाषा में दक्ष हो गए थे और शास्त्रों का गहन अध्ययन करने लगे थे। आठ साल की उम्र में उन्होंने वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था और बारह साल तक सभी प्रमुख शास्त्रों में निपुण हो गए थे।

 

उन्होंने नर्मदा तट पर गोविंदपादाचार्य से दीक्षा ली और ‘शंकर भगवत्पाद’ कहलाए। महज 16 साल की उम्र में उन्होंने प्रसिद्ध शांकर भाष्य की रचना की, जिसे आज भी विद्वान अत्यंत श्रेष्ठ ग्रंथ मानते हैं। आदि शंकराचार्य ने पूरे भारत की चार बार पदयात्रा कर अद्वैत वेदांत दर्शन का प्रचार किया और बौद्ध मत सहित अन्य विरोधी विचारधाराओं का तर्क के माध्यम से खंडन किया। उन्होंने उपनिषदों, भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र पर महत्वपूर्ण भाष्य लिखे और सनातन धर्म को फिर से प्रतिष्ठित किया।

 

ज्योतिर्मठ की साधना और परंपरा

 

ज्योतिर्मठ में संत मुख्य रूप से अद्वैत वेदांत दर्शन का अध्ययन और प्रचार करते हैं। यहां गुरु-शिष्य परंपरा का पालन किया जाता है। वरिष्ठ संत नए संन्यासियों को दीक्षा देते हैं, जो दशनामी संप्रदाय से संबंधित होते हैं। दशनामी संप्रदाय के संत भगवा वस्त्र धारण करते हैं, शरीर पर भस्म लगाते हैं और 54 या 108 रुद्राक्ष की माला पहनते हैं। इनमें से कुछ संत नागा साधु होते हैं, जो निर्वस्त्र रहते हैं और कुंभ मेले में विशेष आकर्षण का केंद्र बनते हैं।ज्योतिर्मठ में तप, साधना और ज्ञान के माध्यम से सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया जाता है।

ईरान के सिक्योरिटी चीफ को ही मार गिराया? इजरायल के दावे से मची खलबली


इज़रायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रात को किए गए हमले में ईरान के सिक्योरिटी चीफ़ अली लारीजानी के भी निशाने पर आने की खबर है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि लारीजानी की जान चली गई है या कि वह सिर्फ घायल हुए हैं। रात में ईरान पर इज़रायल ने हमले किए गए थे।

 

इज़राइल के डिफ़ेंस मिनिस्टर, इज़राइल काट्ज़ ने भी दावा किया है कि लारीजानी मारे गए हैं लेकिन ईरान ने अभी तक इन रिपोर्ट्स पर कोई कमेंट नहीं किया है। लारीजानी, एक पूर्व न्यूक्लियर नेगोशिएटर है जो ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी के तौर पर काम करते हैं। उन्हें ईरान के पावर स्ट्रक्चर में सबसे असरदार लोगों में से एक माना जाता है।

 

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खामेनेई के करीबी साथी

अगर उनकी मौत कन्फ़र्म हो जाती है, तो लारीजानी सुप्रीम लीडर, आयतुल्ला अली खामेनेई के बाद मारे जाने वाले सबसे सीनियर ईरानी अफ़सर होंगे, जिनकी मौत युद्ध के पहले दिन हुई थी। लारीजानी अली खामेनेई के करीबी साथी थे।

खबर है कि उन्हें आखिरी बार शुक्रवार को तेहरान में कुद्स डे की रैलियों के दौरान पब्लिक में देखा गया था। उस दिन बाद में, US ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े 10 लोगों की लिस्ट में शामिल लारीजानी समेत सीनियर ईरानी मिलिट्री और इंटेलिजेंस अधिकारियों की जानकारी देने पर $10 मिलियन तक का इनाम देने की पेशकश की।


कई इज़रायली मीडिया आउटलेट्स ने यह भी कहा कि हमलों में बासिज रेजिस्टेंस फोर्स के हेड घोलमरेज़ा सुलेमानी और बासिज के दूसरे सीनियर लोगों को टारगेट किया गया था और हमलों के नतीजे का अभी भी पता लगाया जा रहा है। हालांकि, ईरान ने मिलिशिया लीडर की मौत को तुरंत नहीं माना।

लारीजानी ने जारी किया बयान

इस बीच, ईरान के सरकारी मीडिया, प्रेस टीवी ने मंगलवार को लारीजानी के नाम से एक बयान जारी किया, जिसमें ईरान के सिक्योरिटी चीफ ने US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की आलोचना की। बयान में कहा गया, ’47 साल पहले, ईरान की इस्लामिक क्रांति में लोगों की जीत से एक दिन पहले, पहलवी शासन के प्रधानमंत्री ने दावा किया था कि सड़कों पर नारे लगा रही भारी भीड़ की आवाज़ असली नहीं थी, बल्कि एक टेप रिकॉर्डिंग की आवाज़ थी! अब ट्रंप ईरानी शहरों में लाखों लोगों की एंटी-अमेरिकन और एंटी-इज़राइल सभाओं के बारे में कहते हैं कि ये तस्वीरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हैं।’

 

इसमें आगे कहा गया, ‘एपस्टीन आइलैंड के बचे हुए हिस्सों पर ईरानी लोगों की ऐतिहासिक जीत करीब है।’

 

ये रिपोर्ट ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी के मुस्लिम दुनिया को एक संदेश जारी करने के एक दिन बाद आईं, जिसमें कहा गया था कि तेहरान US और इज़रायल के खिलाफ अपनी लड़ाई में ‘दृढ़’ है।

 

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इसके अलावा यह भी दावा किया जा रहा है कि उन्होंने एक पोस्ट भी किया है। इजरायली मिलिट्री के मुताबिक जो स्ट्राइक किए गए उसका मुख्य टारगेट लारीजानी ही थे। जब ईरान पर हमला हुआ, तो लारीजानी ने मुस्लिम-बहुल देशों से समर्थन की कमी पर निराशा जताई।

‘कांग्रेस से जबरन शादी हुई, इसलिए तलाक देना पड़ा’, खरगे को देवेगौड़ा का जवाब


37 राज्यसभा सांसदों के विदाई के मौके पर दिया गया कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का एक बयान चर्चा में है। उन्होंने देश के पूर्व पीएम और राज्यसभा सांसद एचडी देवेगौड़ा के बारे में कहा कि उन्होंने मोहब्बत तो उनसे (कांग्रेस) की। मगर शादी मोदी साहब से कर ली। हल्के-फुल्के अंदाज में कही गई मल्लिकार्जुन खरगे की इस बात पर एचडी देवेगौड़ा ने बयान जारी किया है।

 

देवेगौड़ा का कहना है कि उनकी कांग्रेस से जबरन शादी करवाई गई थी। यही कारण है कि उन्हें तलाक देना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मैंने कांग्रेस गठबंधन नहीं छोड़ा, बल्कि कांग्रेस खुद ही छोड़कर गई है। उसने मेरे पास ‘तलाक’ देने और एक स्थिर गठबंधन खोजने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा। 

 

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अपने बयान में एचडी देवेगौड़ा ने कहा, ‘मेरे प्यारे और पुराने दोस्त मल्लिकार्जुन खरगे ने आज (बुधवार) संसद में मेरे बारे में हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस के ‘प्यार’ में था, लेकिन आखिर में मैंने मोदी जी (बीजेपी) से ‘शादी’ कर ली। उन्हें इसका कारण नहीं पता कि मैंने ऐसा क्यों किया?’ 

 

 

 

‘कांग्रेस से जबरन शादी हुई थी’

देवेगौड़ा ने आगे कहा, ‘जब खरगे बोल रहे थे तब मैं सदन में मौजूद नहीं था। अगर मैं अपने दोस्त को शादी वाली ही भाषा में जवाब दूं तो मैं यह कहना चाहूंगा कि कांग्रेस के साथ मेरी ‘जबरदस्ती की शादी’ हुई थी, लेकिन मुझे उन्हें ‘तलाक’ देना पड़ा, क्योंकि वह एक ज्यादती भरा रिश्ता था। मैंने कांग्रेस गठबंधन को नहीं छोड़ा। वे खुद ही छोड़कर गए हैं। उन्होंने मेरे पास ‘तलाक’ देने और एक अधिक भरोसे का गठबंधन खोजने के अलावा कोई और चारा नहीं छोड़ा था।’

खरगे को बनना चाहिए था सीएम: देवगौड़ा

अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री ने दावा किया कि खरगे को याद होगा कि 2018 में कांग्रेस ने  गुलाम नबी आजाद को भेजा था। कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव दिया गया था। मैंने इसकी मंजूरी नहीं दी थी और सबके सामने कहा था कि खरगे को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। सिद्धारमैया भी वहां मौजूद थे। हालांकि गुलाम नबी आजाद ने कुमारस्वामी के नेतृत्व पर बल दिया।

 

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‘धूमधाम शादी के बाद क्या किया’

देवेगौड़ा ने कहा, ‘इतनी सारी धूमधाम और शादी के बाद 2019 में उन्होंने क्या किया? उन्होंने हमें छोड़ दिया। कांग्रेस के कितने विधायक बीजेपी में चले गए और उन्हें किसने भेजा, यह अब सबको पता है। अगर कांग्रेस ने उस दिन दलबदल के लिए उकसाने वाले व्यक्ति के खिलाफ एक्शन लिया होता तो आज मेरे दोस्त खरगे कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर अच्छी स्थिति में होते।’

खेलना है केमिकल फ्री होली तो घर पर इस तरह से बनाएं हर्बल कलर


होली का त्योहार देशभर में 3 मार्च को मनाया जाएगा। इस त्योहार के आने का लोगों को साल भर इंतजार रहता है। होली को रंगों, खुशियों और मस्ती का त्योहारा माना जाता है। इस समय बाजार में केमिकल वाले रंगों की ब्रिकी बढ़ जाती है। ये रंग त्वचा और बालों के लिए खतरनाक होता है। इन रंगों की वजह से त्वचा पर जलन-खुजली और एलर्जी की समस्या होती है।

 

इस बार आप केमिकल वाले रंगों की जगह पर घर पर नेचुरल कलर इस्तेमाल करें। ये रंग त्वचा के लिए बिल्कुल भी हानिकारक नहीं होता है। आइए बिना देर किए जानते हैं घर पर हर्बल वाले रंगों को कैसे तैयार कर सकते हैं?

 

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घर पर ऐसे बनाएं हर्बल कलर

टेसू के फूलों से बनाएं गीला रंग

 

टेसू के फूल को तोड़ लें और धूप में सुखा लें। जब फूल पूरी तरह से सूख जाएं तो उसे पानी में डालकर छोड़ देना चाहिए कुछ घंटों बाद फूलों का रंग पानी में घुल जाएगा। आप इस रंग का इस्तेमाल पानी वाली होली खेलने के लिए कर सकते हैं।

 

कैसे बनाएं हर्बल गुलाल

 

आपको सबसे पहले टेंसू फूलों को तोड़कर अच्छे से सूखा लेना है। इन सूखे फूलों को पीसकर पाउडर तैयार कर लें। ये फूल आपके त्वचा के लिए बिल्कुल सुरक्षित है।

 

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नीला रंग

 

आप नीले रंग को बनाने के लिए अपराजिता के फूलों का इस्तमेाल कर सकते हैं। आपको इसके लिए फूलों को सुखाकर पाउडर बना लेना है। आप इस फूल की मदद से नील रंग का गुलाल बना सकते हैं। यह फूल त्वचा को ठंडक पहुंचाता है।

 

गुड़हल के फूल

 

गुड़हल के फूलों को सुखाकर पाउंडर बना लें। इसके बाद इस पाउडर को सूखे गुलाल की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा पानी डालकर गीला रंग भी तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ लोग केमिकल वाले रंगों की जगह पर फूलों वाली होली खेलना पसंद करते हैं। 

 

 

 

रमजान पर क्या करने से टूट सकता है रोजा?


इस्लाम के सबसे पाक महीने रमजान में हर सेहतमंद और बालिग मुसलमान को रोजा रखना जरूरी है। रोजा रखने का असली मकसद खुद पर काबू पाना और अल्लाह की इबादत करना है लेकिन अक्सर जानकारी के अभाव में लोग कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे उनकी इबादत अधूरी रह जाती है। जानकारों का कहना है कि रोजे के साथ पांच वक्त की नमाज पढ़ना भी उतना ही जरूरी है क्योंकि बिना नमाज के रोजा करना सही नहीं माना जाता।

 

शरीयत के अनुसार, रोजा रखने के दौरान कुछ कड़े नियम होते हैं जिनका पालन करना हर रोजेदार के लिए जरूरी है। अगर कोई जानबूझकर कुछ खा-पी लेता है तो उसका रोजा तुरंत टूट जाता है। इसके अलावा, जानबूझकर उल्टी करना, भाप लेना या शरीर में ऐसी ड्रिप लगवाना जिससे भूख-प्यास मिटती हो, रोजे को अमान्य कर देता है।

 

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किन वजहों से टूटता है रोजा?

  • जानबूझकर पानी की एक बूंद पीना या छोटा सा निवाला खाना भी रोजा खत्म कर देता है।
  • धुआं या भाप जैसे नशीली चीजें अंदर लेना वर्जित है।
  • ऐसे इंजेक्शन या ड्रिप जो शरीर को ताकत और पोषण देते हैं, उनसे रोजा टूट जाता है। हालांकि, सामान्य दवाओं के इंजेक्शन पर जानकारों की अलग-अलग राय है।
  • अगर कोई व्यक्ति लगभग 80 किलोमीटर से ज्यादा की लंबी यात्रा पर है, तो उसे रोजा छोड़ने की रियायत है लेकिन बाद में इसकी भरपाई करनी होगी।

गलती हो गई तो क्या करें?

अगर किसी मजबूरी या अनजाने में रोजा टूट जाए, तो उसकी ‘कजा’ करनी होती है, यानी रमजान के बाद उतने ही दिन का रोजा दोबारा रखना होता है लेकिन अगर किसी ने जानबूझकर रोजा तोड़ा है, तो उसे ‘कफ्फारा’ देना होगा।

 

कफ्फारा का मतलब है पछतावा या दंड। इसके लिए व्यक्ति को या तो लगातार 60 दिनों तक रोजे रखने होंगे या फिर 60 गरीबों को खाना खिलाना होगा। कफ्फारा के साथ-साथ उस एक टूटे हुए रोजे की कजा यानी एक रोजा अलग से भी रखनी पड़ती है।

किन्हें मिली है रोजे से छूट?

  • अगर रोजा रखने से बीमारी बढ़ने का डर हो।
  • प्रेग्नेंट महिलाओं को भी इससे राहत दी गई है।
  • बहुत अधिक बूढ़े व्यक्ति जो शारीरिक रूप से अक्षम हैं और छोटे बच्चों पर रोजा फर्ज नहीं है।
  • मानसिक रूप से अस्वस्थ या बेहोशी की हालत वाले लोगों के लिए भी नियम में ढील है।

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रमजान में हाइड्रेटेड रहने के प्रभावी तरीके

  • इफ्तार खुलते ही एक साथ 2-3 गिलास पानी न पिएं, इससे पेट फूल सकता है। इसके बजाय खजूर और एक गिलास पानी से शुरुआत करें। हर घंटे एक गिलास पानी पीने का लक्ष्य रखें। सहरी में कम से कम 2 गिलास पानी जरूर पिएं।
  • अपने भोजन में ऐसी चीजों को शामिल करें जिनमें पानी की मात्रा 90% से ज्यादा हो। जैसे तरबूज और खरबूजा इफ्तार के लिए बेहतरीन हैं। खीरा और टमाटर को सलाद के रूप में जरूर खाएं। सहरी में दही खाने से प्यास कम लगती है और पाचन भी सही रहता है।
  • चाय और कॉफी के इस्तेमाल से शरीर से पानी जल्दी बाहर निकल जाता है और प्यास अधिक लगती है।
  • नमक शरीर में पानी को सोख लेता है, जिससे डिहाइड्रेशन होता है इसलिए ज्यादा नमक और मसाले का उपयोग न करें।
  • ज्यादा मीठे शरबत प्यास को और बढ़ा सकते हैं इसलिए चीनी वाले ड्रिंक्स से दूरी बना कर रखे। 
  • जितना हो सके सीधी धूप से बचें। अगर मुमकिन हो, तो दिन के समय घर के ठंडे हिस्से में रहें और शारीरिक मेहनत वाले काम शाम के वक्त या इफ्तार के बाद के लिए टाल दें।

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

‘ईरान युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते’, ट्रंप के सीनियर अधिकारी ने दिया इस्तीफा


अमेरिका के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर (एनसीटीसी) के प्रमुख जोसेफ केंट ने इस्तीफा दे दिया है। वह ट्रंप सरकार के सबसे बड़े अधिकारी हैं जिन्होंने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण इस्तीफा दिया है। केंट ने अपने त्यागपत्र में लिखा है कि वह ‘अंतर्आत्मा की आवाज’ की वजह से इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि ईरान ने अमेरिका के लिए कोई ‘तत्काल खतरा’ (imminent threat) नहीं पैदा किया था। उनका आरोप है कि इजरायल और अमेरिका में उनकी प्रभावशाली लॉबी ने ट्रंप पर दबाव डालकर यह युद्ध शुरू करवाया।

 

केंट ने लिखा, ‘ईरान ने हमारे देश के लिए कोई तत्काल खतरा नहीं पैदा किया था और यह साफ है कि इजरायल और उसके अमेरिकी लॉबी के दबाव के कारण हमने यह युद्ध शुरू किया।’ उन्होंने ट्रंप को याद दिलाया कि जून 2025 तक ट्रंप खुद मानते थे कि मिडिल ईस्ट के युद्ध अमेरिकी लोगों की जान लेते हैं और देश के धन को बर्बाद करते हैं। केंट का कहना है कि इजरायल के बड़े अधिकारी और अमेरिकी मीडिया के कुछ प्रभावशाली लोगों ने ‘गलत जानकारी फैलाकर’ (misinformation campaign) युद्ध के पक्ष में माहौल बनाया। उन्होंने इसे ‘इको चैंबर’ कहा, जिससे 79 साल के ट्रंप को लगाया गया कि ईरान तुरंत हमला कर सकता है और युद्ध आसानी से जीता जा सकता है।

 

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इराक युद्ध से की तुलना

केंट ने 2003 के इराक युद्ध से तुलना की। उन्होंने कहा कि इजरायल ने तब भी गलत जानकारी फैलाकर अमेरिका को इराक युद्ध में खींचा था और अब वही तरीका ईरान के साथ इस्तेमाल कर रहा है। 

एक पूर्व सैनिक और 11 बार विदेश में तैनात रह चुके केंट ने कहा कि वह ‘इजरायल द्वारा बनाए गए युद्ध’ में नई पीढ़ी को मौत के मुंह में नहीं भेज सकते, जिसमें अमेरिकी लोगों को कोई फायदा नहीं है। वह गोल्ड स्टार पति हैं (यानी उनकी पत्नी युद्ध में शहीद हुई थीं)।

दोबारा विचार करने को कहा

उन्होंने ट्रंप से अपील की कि वह इस फैसले पर दोबारा सोचें। केंट ने लिखा, ‘मैं प्रार्थना करता हूं कि आप ईरान में जो हो रहा है, उस पर विचार करेंगे और यह सोचेंगे कि हम किसके लिए यह कर रहे हैं। अब बहादुरी से फैसला लेने का समय है। आप रास्ता बदल सकते हैं और देश के लिए नया रास्ता बना सकते हैं, या हमें और अराजकता की ओर धकेल सकते हैं। फैसला आपके हाथ में है।’

 

अधिकारियों के अनुसार, ईरान में कम से कम 1,300 लोग मारे गए हैं, वहीं लेबनान में 880 से ज्यादा और इजरायल में 12 लोग मारे गए हैं। अमेरिकी सेना के 13 जवान शहीद हुए हैं और करीब 200 घायल हैं।

 

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कौन हैं जोसेफ केंट 

केंट जुलाई 2025 में एनसीटीसी के प्रमुख बने थे। उनकी नियुक्ति पर डेमोक्रेट्स ने विरोध किया था क्योंकि उनके पुराने संबंध दक्षिणपंथी चरमपंथियों से थे। 2022 में कांग्रेस चुनाव में उन्होंने प्राउड बॉयज ग्रुप के सदस्य से सलाह ली थी और अन्य दक्षिणपंथी लोगों का समर्थन लिया था। सीनेट सुनवाई में उन्होंने 6 जनवरी 2021 के कैपिटल हमले पर साजिश थ्योरी से दूरी नहीं बनाई और 2020 चुनाव में ट्रंप की जीत के झूठे दावों पर भी कुछ नहीं कहा। यह इस्तीफा ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध के बीच बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जो फरवरी 2026 से चल रहा है।

आंधी, बारिश और ओले, अगले 24 घंटे मौसम करेगा परेशान, किसानों के लिए खतरे की घंटी

इस साल मार्च के महीने में बारिश का दौर जारी है। देश के कई राज्यों में लगातार बारिश, तेज आंधी और कई जगह तो ओले भी गिर रहे हैं। आमतौर पर मार्च के महीने में धूप लोगों को परेशान करती है लेकिन इस बार धूप नहीं बल्कि बारिश के कारण मौसम खराब हो रहा है। मौसम विभाग ने आज भी कई राज्यों में बारिश और ओले गिरने की संभावना जताई है। 19-20 मार्च को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख समेत पर्वतीय हिस्सों पर बर्फीली हवाओं के साथ भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट घोषित किया गया है। इसके साथ ही अगले 24 से 48 घंटों में देश के कई राज्यों में मौसम बदल सकता है। 

 

दिल्ली-एनसीआर में आज मौसम खराब रहने के संकेत हैं। मौसम विभाग की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 19 और 20 मार्च को भारी बारिश और तूफान चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने बाताया है कि दिल्ली में आज 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार की हवाएं चलेंगी। बारिश और तेज हवाओं के कारण दिल्ली वालों को प्रदूषण से राहत मिलेगी। अगले 2 दिन तक एक्यूआई 200 से नीचे रहने का अनुमान है।

 

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आज का मौसम

 

यूपी-बिहार का मौसम

दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश में भी आज मौसम की गतिविधियां जारी रहेंगीं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक उत्तर प्रदेश में खराब मौसम रहने की चेतावनी जारी की है।  अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, संभल, बदायूं, मेरठ, बागपत, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर, हापुड़, नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा और फिरोजाबाद में आंधी-बारिश और ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। इस समय मौसम खराब होने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। 

 

वहीं, बिहार की बात करें तो बिहार में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक मौसम की गतिविधियां जारी रहने के संकेत दिए हैं। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटे में कई जिलों में बादल छाए रहेंगे। इसके साथ ही तेज हवाएं चलने की भी संभावना है और कुछ जगहों पर आसमानी बिजली गिरने का भी खतरा है।  मौसम विभाग ने बताया कि पटना, भागलपुर, बांका, अररिया, किशनगंज, लखीसराय, जमुई, मुंगेर, पूर्णिया, शेखपुरा और सुपौल जिलों में बारिश हो सकती है। 

पंजाब, हरियाणा और राजस्थान का हाल

खराब मौसम पंजाब और हरियाणा के किसानों की परेशानी बढ़ा सकता है। मौसम विभाग ने हरियाणा में अगले 48 घंटे तक आंधी-बारिश और ओले गिरने की संभावना जताई है, जिससे किसानों की फसलों का नुकसान हो सकता है। कल (बुधवार) देर शाम हरियाणा के दादरी, चारखी, भिवानी, महेंद्रगढ़, मेवात और हिसार में तेज आंधी और पानी के साथ ओले गिरे, जिससे गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान हुआ है। 

 

पंजाब की बात करें तो पंजाब में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिल रहा है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम की गतिविधियां पंजाब में भी जारी हैं। मौसम विभाग ने पंजाब में आज बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा राजस्थान में बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया गया है। राज्य में गर्मी और लू से मामूली राहत मिली है और चित्तौडगढ़ में अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस और सिरोही में न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं, मध्य प्रदेश में भी पश्चिम विक्षोभ के कारण बारिश और तेज हवाओं का अनुमान है। 

 

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हिमाचल-कश्मीर में मौसम कैसा?

हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में पश्चिमी विक्षोभ का असर सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा, जिससे बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। मौसम विभाग ने हिमाचल के कुल्लू, लाहौल स्पीति, रोहतांग दर्रा, अटल टनल और चोटियों पर बर्फबारी की संभावना जताई है। शिमला, मंडी, कांगड़ा, सिरमौर और सोलन में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। 

 

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी पश्चिमी विक्षोभ का असर देखने को मिलेगा। पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी। मौसम विभाग के अनुसार, कश्मीर में अगले एक हफ्ते तक मौसम की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में भी बारिश और बर्फबारी की गतिविधियां जारी रहेंगी।