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कोरियन कल्चर पर फिदा क्यों हैं युवा, आखिर इसमें है क्या?


भारत में आज साउथ कोरियन कल्चर का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इसकी शुरुआत कोरियन ड्रामा से हुई है यानी कि कोरियन ड्रामा की वजह से लोग कोरिया के कल्चर से रूबरू हुए थे। भारत के लोगों ने लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा कोरियन ड्रामा देखना शुरू किया। फिर कोरियन ड्रामा की वजह से वहां का कल्चर लोगों को पसंद आने लगा जिसके बाद दक्षिण कोरिया के कल्चर का दबदबा बढ़ता जा रहा है। दक्षिण कोरिया के फूड, स्किन केयर, फैशन, के-ड्रामा और के-पॉप हर चीज को भारत के लोग फॉलो कर रहे हैं। भारत की जेनरेशन जेड आजकल कोरियन कल्चर की दीवाने हो गए है। जेनरेशन जेड के लड़के खुद को कोरियन फैशन में ढाल रहे हैं, ताकि लड़कियां उन्हें पसंद करें।

 

साउथ कोरिया के संस्कृति, खेल और पर्यटन मंत्रालय की एक रिपोर्ट आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 89 प्रतिशत लोग कोरियन कल्चर को पसंद करते हैं। इस आंकड़े से साफ होता है कि भारत में साउथ कोरिया के कल्चर को लेकर सकारात्मक इमेज है। अब सवाल यह उठता है कि भारत के कई लोगों को कोरिया के ड्रामा, के-पॉप और संस्कृति इतने पसंद क्यों हैं? साथ ही सवाल यह भी उठता है कि लोग कोरियन ड्रामा इतना क्यों देखते हैं?

 

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भारत में कोरियन ड्रामा का दौर कब से शुरू हुआ?

जब भारत और पूरी दुनिया कोरोना की महामारी झेल रही थी, उस दौर में पूरी दुनिया लॉकडाउन में रह रही थी। लॉकडाउन की वजह से सिनेमा घर बंद थे। भारत में कंटेंट देखने के लिए ज्यादा विकल्प नहीं बचे थे। उसी वक्त लोग विदेशी फिल्में और ड्रामा देखने लगे थे। उसी दौरान लोगों ने कोरियन ड्रामा देखना शुरू किया, जिसके बाद से यूट्यूब और ओटीटी पर कोरियन ड्रामा की 370 फीसदी बढ़ोतरी देखने को मिली। लॉकडाउन के दौरान से ही भारत में कोरियन ड्रामा ने अपनी जड़ें जमा लीं। जिसके बाद से ही कोरियन ड्रामा का ट्रेंड पूरी दुनिया में बढ़ने लगा।

 

आज के समय में कोरियन ड्रामा लोग बड़े चाव से देखते हैं क्योंकि लोगों को के-ड्रामा बेहद पसंद है। लोग ज्यादातर कोरियन ड्रामा हिंदी और इंग्लिश डब में देखते हैं, लेकिन वे ड्रामा भी देख लेते हैं जो हिंदी या इंग्लिश में डब न हों। बिना डब वाले ड्रामा लोग केवल सबटाइटल के आधार पर देखते हैं। भारत में कई लोगों के फेवरेट ड्रामा स्क्विड गेम, विन्सेन्जो और वेन लाइफ गिव्स यू टेंजरिन्स हैं। अब सवाल उठता है कि कोरियन ड्रामा लोग क्यों देखते हैं और इनकी क्या खासियत है जिसकी वजह से ये इतने पसंद किए जाते हैं।

 

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साउथ कोरियन ड्रामा लोगों को इसलिए पसंद हैं क्योंकि इनकी कहानी ज्यादा लंबी नहीं होती है। यह ड्रामा 15-20 एपिसोड में पूरी कहानी खत्म कर देते हैं। जिस वजह से लोग ड्रामा से बोर नहीं होते हैं। कोरियन ड्रामा में सिर्फ कहानी ही नहीं बल्कि कोरिया का कल्चर भी दिखाया जाता है। कहानी छोटी होने की वजह से लोग एक ड्रामा खत्म होने के बाद दूसरा ड्रामा देखने लगते हैं, जिससे लोगों को कोरियन ड्रामा की आदत लग जाती है। नए-नए ड्रामा देखने के बाद लोग कोरिया के कल्चर को अपनाने लगते हैं। अपने फेवरेट हीरो-हीरोइन के फूड, कपड़े और फैशन को फॉलो करने लगते हैं। भारत और पूरी दुनिया में कोरियन ड्रामा के साथ के-पॉप भी बड़ी मात्रा में पसंद किया जा रहा है।

 

के-पॉप उसे कहते हैं जिसमें कलाकार स्टेज पर डांस के साथ-साथ बेहतरीन गाना भी गाते हैं। आजकल कोरिया के BTS और BLACKPINK बेहद फेमस के-पॉप ग्रुप हैं। बीटीएस की एक डिजिटल फैन फॉलोइंग है जिन्हें ‘बीटीएस आर्मी’ कहा जाता है। बीटीएस में कुल 7 लोगों की टीम है, जो अपने कॉन्सर्ट में डांस और गाना गाते हैं। इन्हें लोग इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि के-पॉप स्टार अपने हुनर जैसे गाना और डांस की हर दिन प्रैक्टिस करते हैं। जिस वजह से वे स्टेज पर बेहतरीन परफॉर्म करते हैं। बीटीएस ग्रुप के 7 कलाकारों को लोग उनके बेहतरीन हुनर की वजह से पसंद करते हैं। बीटीएस के गाने आज कई लोगों को जुबानी याद हैं।

कोरियन ड्रामा सिर्फ मनोरंजन नहीं, पूरी लाइफस्टाइल

के-पॉप और के-ड्रामा अब सिर्फ मनोरंजन नहीं रह गए हैं। लोग के-पॉप और ड्रामा देखकर अपनी जीवनशैली बदल रहे हैं। लोग अपना फैशन सेंस अपने फेवरेट एक्टर और एक्ट्रेस जैसा कर रहे हैं। कोरियन कपड़ों से लेकर ब्यूटी ट्रेंड और फूड तक हर चीज लोग अपना रहे हैं। मतलब कोरिया के ड्रामा से लोग इतना प्रभावित हो रहे हैं कि कोरियन कल्चर को अपनाते जा रहे हैं।

 

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कोरियन कल्चर से बढ़ती चिंता

कोरियन ड्रामा जहां एक तरफ आकर्षण का केंद्र है, वहीं दूसरी तरफ यह कोरियन कंटेंट भारतीय युवाओं को उनकी खुद की संस्कृति से दूर कर रहा है। कोरिया के लोग सुंदरता को लेकर बेहद सजग रहते हैं। दक्षिण कोरिया में प्लास्टिक सर्जरी कराना कोई बड़ी बात नहीं मानी जाती। वहीं, आज भारत के लोग भी सुंदरता को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं। कुछ लोग खुद को दूसरों से कम सुंदर मानने लगते हैं और सुंदर दिखने की अनेक कोशिशें कर रहे हैं। जो कि भारत के लोगों के लिए चिंताजनक हो सकता है।

वृषभ राशि में चंद्रमा का प्रवेश और केतु का प्रभाव, जानें कैसा रहेगा आपका बुधवार


 

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ज्योतिषीय दृष्टि से बात करें तो 25 फरवरी का दिन सभी राशियों के लिए बहुत ही खास संयोग लेकर आया है। बुधवार का दिन और उस पर मूलांक 7 के साथ यह बताता है कि यह दिन केवल मेहनत ही नहीं बल्कि आपकी सूझ-बूझ और बुद्धिमानी भी आपको बड़ी सफलता दिला सकती है। केतु का प्रभाव होने के कारण आपको अचानक कोई अच्छा विचार या ज्ञान मिल सकता है जो आपके करियर या पर्सनल लाइफ को नई दिशा दे दे। 

 

चूंकि चंद्रमा आज वृषभ राशि में गोचर कर रहे हैं। यह समय केवल भागदौड़ का नहीं बल्कि थोड़ा रुककर अपनी उपलब्धियों और सुख-सुविधाओं का आनंद लेने का है। आर्थिक दृष्टिकोण से भी आज का दिन काफी स्थिर और मजबूती देने वाला साबित होगा।

 

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कैसा रहेगा आपकी राशि का हाल?

मेष राशि

आज आप पूरे जोश में रहेंगे। अगर आप किसी नए आइडिया पर काम करना चाह रहे हैं तो इसे शुरू करने के लिए यह दिन बढ़िया है।

क्या करें: अपनी टीम को मोटिवेट करें। इंवेस्टमेंट की प्लानिंग करें।

क्या न करें: किसी भी सूरत में जल्दबाजी में फैसले न लें और किसी भी बहस से दूर रहें।

वृषभ राशि

चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं। इससे आपका व्यक्तित्व निखरेगा। धन लाभ के योग बनेंगे।

क्या करें: घर की सजावट करें या खुद के लिए कुछ खरीदारी करें।

क्या न करें: फालतू के खर्चों पर कंट्रोल रखें और किसी से झगड़ा न करें।

मिथुन राशि

आज आपकी बातचीत का जादू चलेगा। नेटवर्किंग से आपको नए और बड़े मौके मिल सकते हैं।

क्या करें: मीटिंग्स में हिस्सा लें और नए लोगों से संपर्क बढ़ाएं।

क्या न करें: अधूरी जानकारी पर भरोसा न करें और अफवाहें न फैलाएं।

कर्क राशि

आज आपका मन घर-परिवार में अधिक लगेगा। माता-पिता के साथ रिश्ते और मजबूत होंगे।

क्या करें: घर में पूजा-पाठ करें। परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं।

क्या न करें: बीती हुई बातों को सोचकर दुखी न हों। गुस्से पर काबू रखें।

सिंह राशि

आज आप काफी रचनात्मक महसूस करेंगे। शिक्षा या बच्चों की ओर से कोई सुखद समाचार मिल सकता है।

क्या करें: आर्ट से जुड़े कामों में रुचि लें। छोटी यात्रा का प्लान बना सकते हैं।

क्या न करें: किसी भी तरह का सट्टा न लगाएं और किसी भी बात पर घमंड बिल्कुल न करें। 

कन्या राशि

नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन राहत भरा है। अटके हुए छोटे काम आज पूरे हो जाएंगे।

क्या करें: अपनी सेहत पर ध्यान दें। काम की बारीकियों को समझें।

क्या न करें: काम में ढिलाई न बरतें। दूसरों की बुराई करने से बचें।

तुला राशि

रिश्तों के लिहाज से यह दिन बेहद खूबसूरत रहने वाला है। पार्टनर के साथ तालमेल बहुत अच्छा रहेगा।

क्या करें: जीवनसाथी के साथ रोमांटिक समय बिताएं। आपसी सहमति से काम करें।

क्या न करें: किसी बात पर अड़ियल रवैया न अपनाएं और कंफ्यूजन में बिल्कुल न रहें।

वृश्चिक राशि

आज आपको अपनी मेहनत का गुप्त लाभ मिल सकता है। मन में शांति रहेगी और रिसर्च के कामों में मन लगेगा।

क्या करें: ध्यान और योग करें, अपनी योजनाओं को छुपा कर रखें।

क्या न करें: मन में किसी के प्रति नफरत न पालें। राज की बातें किसी के साथ शेयर न करें।

धनु राशि

शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में आज चमकेंगे। लंबी दूरी की यात्राएं फलदायी हो सकती हैं।

क्या करें: कोई नया कोर्स शुरू करें या धार्मिक स्थल की यात्रा करें।

क्या न करें: किसी भी विषय पर बहस न करें और अपनी सीमाएं न लांघें।

मकर राशि

करियर की गाड़ी सही पटरी पर दौड़ेगी। अधिकारियों का पूरा सहयोग आपको मिलेगा।

क्या करें: अपने लक्ष्य पर फोकस रखें और कड़ी मेहनत करें।

क्या न करें: ऑफिस के नियमों की अनदेखी न करें और काम को पेंडिंग न छोड़ें।

कुम्भ राशि

दोस्तों और सामाजिक दायरे से लाभ मिल सकता है। समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ेगा।

क्या करें: सोशल मीडिया या ग्रुप एक्टिविटी में हिस्सा लें।

क्या न करें: मन में नकारात्मक विचार न लाएं और अकेलेपन से बचें।

मीन राशि

आर्थिक रूप से आज का दिन जैकपॉट जैसा हो सकता है। पूजा-पाठ में मन लगेगा और मानसिक शांति मिलेगी।

क्या करें: दान-पुण्य करें और किसी भी निवेश से पहले जानकारों की सलाह जरूर लें।

क्या न करें: बिना सोचे-समझे किसी को उधार न दें और अंधविश्वास से दूर रहें।

 

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

अली लारिजानी की मौत से टूट जाएगा ईरान? ट्रंप-नेतन्याहू के लिए नई मुसीबत आ रही है

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी की मौत हो गई है। वह ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के बाद दूसरे सबसे बड़े नेता थे, जिनके हाथों में देश की सैन्य कमान थी। इजरायल ने उन्हें एक हवाई हमले में मार गिराया है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी उनकी मौत की पुष्टि की है। वह 67 साल के थे। इस हमले में उनके बेटे और कुछ सुरक्षा कर्मी भी मारे गए। 

अमेरिका, इजरायल और ईरान की जंग के 2 सप्ताह बीत चुके हैं। यह जंग खत्म होती नजर नहीं आ रही है। ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई को खो दिया है, अली लारिजानी मारे गए, उनसे पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई दिग्गज अधिकारी खत्म हो चुके हैं। ईरान गुस्से में खाड़ी और पड़ोसी देशों में कहर बरपा रहा है। 

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28 फरवरी से चल रही जंग, अब और खिंचेगी। अली लारिजानी की मौत, ईरान का गुस्सा बढ़ाएगा। वह ईरान की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति के मुख्य वास्तुकार थे। अली लारिजानी हाल के हफ्तों में ईरान के डी फैक्टो लीडर बन गए थे। सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद सारी ताकत, उनके हाथों में आ गई थी। 

अली लारिजानी के जाने से क्या होगा?

ईरान के सैन्य और सुरक्षा तंत्र के सबसे बड़े अधिकारी थे। वह अलग-अलग गुटों को साथ लेकर जंग में चल रहे थए। अब उनकी मौत से ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव आ सकता है। युद्ध खत्म करने वाली बातचीत मुश्किल हो सकती है। 

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अली लारिजानी की मौत से ईरान टूटेगा क्यों?

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े हमले शुरू किए। हमले के अगले दिन यह खबर आई कि सुप्रीम लीडर अली खामेनेई मारे गए। इसके बाद अली लारिजानी ने सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी के तौर पर कमान संभाली। वह ईरान की सैन्य कार्रवाई और कूटनीति के निर्णायक नेता बने। सोशल मीडिया पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनौती देने वाले मुख्य चेहरा अली लारिजानी ही थे। अली लारिजानी ने हाल ही में तेहरान में एक रैली में हिस्सा लिया था, जहां वह इजरायल के निशाने पर थे। 

कौन थे अली लारिजानी?

अली लारिजानी पिछले 5 दशक से ईरान की राजनीति में छाए हुए हैं। उन्होंने इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) में कमांडर के तौर पर इराक युद्ध में हिस्सा लिया था। वह राज्य टीवी के प्रमुख रह चुके थे। साल 2008 से लेकर 2020 तक,वह ईरानी संसद के स्पीकर रहे। वह न्यूक्लियर नेगोशिएटर और अली खामेनेई के सलाहकार रहे।  

अली लारिजानी, अलग-अलग गुटों के समन्वयक भी थे। साल 2015 के न्यूक्लियर डील को तैयार कराने में उनकी अहम भूमिका थी। वह रूस, लेबनान, ओमान जैसे देशों में ईरान की आवाज थे, जिन्हें इजरायल ने खत्म कर दिया। 

ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी। Photo Credit: PTI

अली लारिजानी का परिवार ईरान की सत्ता का केंद्र रहा है। उनकी पत्नी एक प्रमुख आयतुल्लाह की बेटी हैं। उनके भाई सादिक लारिजानी पूर्व चीफ जस्टिस और आयतुल्लाह हैं। वह शरीफ यूनिवर्सिटी से मैथ्स और कंप्यूटर साइंस में पढ़े। तेहरान यूनिवर्सिटी से फिलॉसफी में डॉक्टरेट किया। 

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मौत का असर क्या होगा?

अली लारिजानी की मौत से युद्ध पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा। अब ईरान के लिए सेना, सरकार और समर्थन संभालना मुश्किल हो जाएगा। वह दुनियाभर में चर्चित थे, लोग उन्हें पसंद करते थे। दुनिया के साथ राजनायिक स्तर पर संबंध उन्हीं के थे। अब ईरान में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं बचा जो अलग-अलग गुटों को एकजुट कर युद्ध खत्म करने की बातचीत कर सके। 

मसूद पेजेशकियान कमजोर पड़े?

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान जैसे नेताओं के पास सीमित अधिकार रहे हैं। उनकी भूमिका और कमजोर पड़ सकती है। मोजतबा खामनेई कहां हैं, कुछ पता नहीं है। उन्हें गंभीर रूप से घायल बताया जा रहा है।

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क्यों खतरे की घंटी है अली का जाना?

ईरान के पास अब और आक्रामक होने के अतिरिक्त कोई रास्ता नहीं बचा है। अब ईरान के पूर्व कमांडर मोहसिन रेजाई को नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई का सलाहकार बनाया गया है। मोहसिन की उम्र 71 साल है। अब जंग रोकने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत करने वाला कोई नेता नहीं बचा है।

 

‘फिल्में नहीं चल रहीं, उनको मेडिकल हेल्प चाहिए’, कंगना पर भड़कीं कांग्रेस सांसद


भारतीय जनता पार्टी की सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनौत ने बुधवार को राहुल गांधी पर एक विवादित बयान दिया।  उन्होंने कहा कि राहुल का सार्वजनिक व्यवहार गंभीर नेता जैसा नहीं लगता। कगंना ने कहा कि राहुल गांधी अक्सर टपोरी अंदाज में आते हैं और लोगों से तू-तड़ाक में बात करते हैं। कंगना ने कहा था कि राहुल गांधी से महिलाएं असहज महसूस करती हैं। अब कंगना रनौत पर विपक्षी सांसद भी हमलावर हैं। कांग्रेस सांसद ने कहा कि कंगना की फिल्में अच्छी नहीं चल रही हैं। इसलिए वह ऐसे बयान दे रही हैं। 

 

कांग्रेस सांसद  एस. ज्योतिमणी ने कंगना को करारा जवाब दिया है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘मुझे लगता है कि कंगना रनौत को तुरंत कुछ मेडिकल मदद की जरूरत है। उनके साथ कुछ बहुत ही गलत हो रहा है। शायद इसलिए कि उनकी फिल्में अच्छा नहीं कर रही हैं। वह किसी तरह के डिप्रेशन में हो सकती हैं। इसीलिए वह इस तरह के बयान दे रही हैं। वह ऐसी इंसान हैं जिन्हें राजनीति या जनता की कोई समझ नहीं है। मुझे लगता है कि आपको ऐसे लोगों की टिप्पणियों को ज्यादा अहमियत देने की जरूरत नहीं है। राहुल गांधी जैसे हैं, वैसे ही हैं। राहुल गांधी को जज करने वाली कंगना रनौत कौन होती हैं?’

 

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राहुल को बताया था टपौरी

मंडी से बीजेपी की सांसद कंगना रनौत ने बुधवार को मीडिया के साथ बातचीत करते हुए राहुल गांधी को टपौरी बोल दिया था। मीडिया ने कंगना से उस लेटर के बारे में पूछा गया था जिनमें कुछ अधिकारियों ने पत्र लिखकर राहुल गांधी के आचरण पर आपत्ति जताई है। इस पर जवाब देते हुए कंगना ने कहा, ‘निश्चित रूप से, हम महिला सांसदों को उन्हें देखकर बहुत असहज महसूस होता है। वह संसद में एकदम ‘टपोरी’ की तरह आते हैं और किसी के साथ भी तू-तड़ाक करने लगते हैं। यह किसी भी जिम्मेदार नेता को शोभा नहीं देता।’

 

‘महिलाएं असहज महसूस करती हैं’

कंगना रनौत ने दावा किया कि राहुल गांधी का व्यवहार कई बार महिलाओं को भी असहज कर देता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं को अपने आचरण और भाषा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कंगना ने नसीहत देते हुए कहा कि राहुल गांधी को अपनी बहन प्रियंका गांधी वॉड्रा से सीख लेनी चाहिए, जिनका व्यवहार उनसे ज्यादा संतुलित और शालीन लगता है। 

 

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प्रियंका चतुर्वेदी ने भी कंगना पर बोला हमला

कंगना रनौत के बयान पर शिवसेना से सासंद प्रिंयका चतुर्वेदी ने कहा कि यह बयान काफी हास्यास्पद है। उन्होंने कहा, ‘मैं यह कह सकती हूं कि राजनीतिक विचारधाराओं में असहमति हो सकती है लेकिन राहलु गांधी के प्रति इस तरह बोलना गलत है। कंगना ने कहा कि वह राहुल गांधी से असहज महसूस करती हैं। मैंने राहुल गांधी जी के साथ 10 साल काम किया है और भले ही मेरी राह अलग हो गई हो लेकिन मैंने महिलाओं के प्रति उनका सम्मान और कमिटमेंट देखा है।’ 

प्रिंयका चतुर्वेदी ने आगे कहा कि राहुल गांधी खुद उस परिवार से हैं जहां वीमेन लीडरशिप रही है। खुद इंदिरा जी हों या सोनिया गांधी या फिर प्रियंगा गांधी हों। उन्होंने कहा कि कंगना का इस तरह का आरोप लगाना कहीं न कहीं हास्यास्पद लगता है। प्रिंयका ने कंगना को नसीहत दी कि आप राजनीतिक आरोप लगाएं, असहमति जताएं, निंदा करें लेकिन यह आरोप लगाना बिल्कुल ही गलत है।

शहर की महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है PCOS और थायरॉइड का खतरा? जानिए इसके कारण

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में ‘हॉर्मोनल इम्बैलेंस’ एक ऐसी समस्या बन गई है जो अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुंचा रही है। खासतौर पर शहरों में रहने वाली महिलाओं में PCOS (पॉली सिस्टिक ओवरी सिंड्रोम) और थायरॉइड की बीमारी एक ‘धमाके’ की तरह बढ़ी है। इसकी वजह शहर में रहने वाले लोगों और खासकर महिलाओं का खानपान हैं। अगर आप भी मैदे से बनी चीजें ज्यादा खा रही हैं तो आप भी PCOS और थायरॉइड जैसी समस्याओं को दावत दे रही हैं। 

 

शहरी जीवन की कुछ आदतें महिलाओं के हॉर्मोन पर बहुत बुरा असर डाल रही हैं। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल यानी घंटों बैठकर काम करने और एक्सरसाइज न करने से मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। इससे शरीर में फैट बढ़ता है जो हॉर्मोन बनाने वाली गांठ को नुकसान पहुंचाता है। लगातार रहने वाला क्रोनिक स्ट्रेस शरीर में कोर्टिसोल हॉर्मोन को बढ़ा देता है। जिसकी वजह से थायरॉइड और प्रजनन हॉर्मोन का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाता है।

 

रात को देर तक जागने और नींद की कमी से शरीर की बॉडी क्लॉक खराब हो जाती है, क्योंकि हॉर्मोन की मरम्मत गहरी नींद में ही होती है। हॉर्मोन एक्सपर्ट डॉ. समीर कालरा बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में इनके मरीजों की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई है। हॉर्मोन हमारे शरीर के वे छोटे-छोटे संदेश भेजने वाले सिपाही हैं, जो अगर अपना संतुलन खो दें तो वजन बढ़ना, चेहरे पर दाने आना और स्वभाव में चिड़चिड़ापन जैसी कई दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।

 

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इसके अलावा खून की जांच में LH (ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन) और FSH (फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन) नाम के दो हॉर्मोन का लेवल चेक किया जाता है। एक स्वस्थ शरीर में इनका तालमेल बराबर होता है लेकिन PCOS की स्थिति में LH का लेवल काफी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से पीरियड्स समय पर नहीं आते।

थायरॉइड की समस्या

थायरॉइड एक ऐसी गांठ है जो हमारे गले में होती है और शरीर की ऊर्जा को कंट्रोल करती है। डॉ. राजेश मेहता बताते हैं कि अगर किसी की TFT (थायरॉइड फंक्शन टेस्ट) रिपोर्ट में TSH का लेवल 4.5 से ज्यादा आता है, तो इसका मतलब है कि थायरॉइड सुस्त पड़ गया है। इसे ‘हाइपोथायरायडिज्म’ कहते हैं। इसकी वजह से शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है। जिससे महिला को हर समय थकान लगती है, बहुत ज्यादा ठंड लगती है और कम खाने के बावजूद वजन बढ़ने लगता है। रिपोर्ट में T3 और T4 का लेवल भी देखा जाता है ताकि बीमारी की गंभीरता का पता चल सके।

 

क्यों बढ़ रही है यह समस्या?

डॉक्टरों ने बताया कि शहरों में रहने वाली महिलाओं में यह समस्या ज्यादा क्यों दिख रही है। इसका सबसे बड़ा कारण है गलत खान-पान। आजकल हम मैदा, चीनी और पैकेट बंद खाना ज्यादा खाते हैं। यह खाना शरीर में ‘इंसुलिन’ के लेवल को खराब कर देता है। जिससे PCOS का खतरा बढ़ जाता है। दूसरा बड़ा कारण है शारीरिक मेहनत की कमी। ऑफिस में घंटों बैठकर काम करने और एक्सरसाइज ना करने से शरीर के हॉर्मोन सुस्त पड़ जाते है और पूरा शरीर असंतुलित हो जाता है।

 

मानसिक तनाव और केमिक्लस का बुरा असर 

शहर की तेज जिंदगी में मानसिक तनाव सबसे बड़ा दुश्मन है। जब हम ज्यादा तनाव लेते है, तो शरीर में ‘कोर्टिसोल’ नाम का हॉर्मोन बढ़ जाता है। जो थायरॉइड और ओवरी के काम में रुकावट डालता है। डॉ समीर यह भी बताते हैं कि हम जो प्लास्टिक के डिब्बे इस्तेमाल करते हैं यह जिनमें खाना गरम करते हैं। उनमें ऐसे केमिकल्स होते हैं जो हमारे हॉर्मेन के साथ छेड़छाड़ करते हैं। कॉस्मैटिक्स और मेकअप के ज्यादा इस्तेमाल से भी हानिकारक तत्व शरीर में पहुंच जाते हैं। इन्हीं सब कारणों के मेल से आज की पीढ़ी में हॉर्मोनल असंतुलन एक बड़ी चुनौती बन गया है। 

 

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रिकवरी का रास्ता

डॉक्टरों ने साफ किया है कि चाहे वह मेटफॉर्मिन जो कि PCOS के लिए होता है या फिर लेवोथायरोक्सिन जो कि थायरॉइड के लिए होता है। इन दवाइयों से मदद होती हैं लेकिन असली सुधार जीवनशैली बदलने से ही आता है। सही समय पर अपनी रिपोटर्स जैसे TSH और LH/FSH की निगरानी करना और नेचुरल आहार के साथ योग को अपनाना इस हॉर्मेनल जंग को जीतने का एकमात्र रास्ता है। 

कांगड़ा का चमत्कारी ज्वाला मंदिर जहां 9 ज्योतियां कभी नहीं बुझतीं


हिमाचल की शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित ज्वाला देवी मंदिर अपनी रहस्यमयी नौ ज्योतियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसे माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जहां देवी की मूर्ति के बजाय पृथ्वी के गर्भ से निकल रही प्राकृतिक ज्वालाओं की पूजा की जाती है। हजारों वर्षों से जल रही इन ज्वालाओं का रहस्य आज भी लोग सुलझा नहीं पाए है। 

 

ऐसा कहा जाता है कि मुगल सम्राट अकबर से लेकर आधुनिक वैज्ञानिकों तक, कई लोगों ने इन ज्योतियों को बुझाने या इनके स्रोत का पता लगाने की कोशिश की लेकिन वे सभी इसमें सफल नहीं हो पाए। यह मंदिर न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र है बल्कि साइंस को मानने वाले लोगों के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।

 

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ज्वाला मंदिर का रहस्य और महत्व

नौ ज्योतियों का स्वरूप

मंदिर के भीतर नौ अलग-अलग स्थानों से ज्वालाएं निकलती हैं, जिन्हें देवी के विभिन्न रूपों का प्रतीक माना जाता है। इनमें प्रमुख हैं महाकाली जो कि मुख्य ज्योति है जो शक्ति का प्रतीक है। इसके अलावा अन्नपूर्णा, चंडी, हिंगलाज, विंध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका और अंजनी के रुप में मां की ज्योती जलती रहती है।

अकबर की हार और सोने का छत्र

इतिहास के अनुसार, अकबर ने इन ज्योतियों को बुझाने के लिए नहर का पानी उन पर डलवाया था लेकिन ज्वालाएं नहीं बुझीं। अपनी गलती का अहसास होने पर अकबर ने देवी को सवा मन सोने का छत्र चढ़ाया। ऐसी मान्यताएं है कि देवी ने वह भेंट स्वीकार नहीं किया और वह सोना तुरंत एक अज्ञात धातु में बदल गया, जो आज भी मंदिर में मौजूद है।

 

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वैज्ञानिक दृष्टिकोण

भूवैज्ञानिकों का मानना है कि इन पहाड़ियों के नीचे प्राकृतिक गैस जैसे मीथेन का भंडार हो सकता है, जो वहां मौजूद कई छेद के माध्यम से बाहर आकर जलती है। हालांकि, शोध के बावजूद आज तक गैस के सटीक स्रोत या उसकी मात्रा का पता नहीं चल पाया है।

51 शक्तिपीठों में स्थान

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के टुकड़े किए थे, तब यहां माता की जीभ गिरी थी। इसीलिए यहां शब्द और अग्नि का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

ईरान पर क्या गलती कर रहे ट्रंप, जिनकी वजह से जो केंट ने छोड़ा साथ? इनसाइड स्टोरी


अमेरिका, ईरान के साथ युद्ध में है लेकिन अपने ही घर में अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले की जमकर आलोचना हो रही है। कई लोगों की राय है कि अमेरिका एक ऐसे युद्ध में फंस गया है जिसकी उन्हें जरूरत नहीं थी। अब राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन में अहम भूमिका निभाने वाले जोसेफ केंट ने उनका साथ छोड़ दिया है। जोसेफ केंट ने अमेरिका के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर (एनसीटीसी) के प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में दावा किया कि ईरान युद्ध के फैसले को गलत बताते हुए ट्रंप को अपने फैसले पर फिर से सोचने के लिए कहा है। 

 

जोसेफ केंट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर अपना इस्तीफा शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया है कि ईरान से अमेरिका को तत्काल कोई खतरा नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा,’हमने (अमेरिका ने) यह युद्ध इजरायल और अमेरिका में इजरायल की शक्तिशाली लॉबी के दबाव में आकर शुरू किया है।’ जोसेफ कैंट का इस्तीफा और ईरान युद्ध से दूरी बना लेना अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है। 

 

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इस्तीफे पर क्या बोले ट्रंप?

जोसेफ केंट ने अपने इस्तीफे में ईरान युद्ध के फैसले को गलत बताया। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने यह फैसला इजरायल के दबाव में आकर लिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में कई अहम बातों पर जोर दिया है। जोसेफ केंट पहला ऐसा बड़ा नाम है जिन्होंने ईरान युद्ध के कारण ट्रंप प्रशासन से इस्तीफा देने का फैसला किया है। उनके इस्तीफे पर ट्रंप ने कहा कि यह अच्छा हुआ कि वह चले गए हैं क्योंकि उन्होंने कहा था कि ईरान कोई खतरा नहीं था। ट्रंप ने जोसेफ केंट को एक अच्छा व्यक्ति बताया जो सुरक्षा पर कमजरो पड़ गया। 

ईरान युद्ध का विरोध क्यों?

जोसेफ केंट ने ईरान युद्ध के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दिया है। इसके पीछे उन्होंने कई कारण बताए हैं कि वह अमेरिका-ईरान युद्ध के खिलाफ क्यों हैं।

  • ईरान से अमेरिका को तत्काल कोई खतरना नहीं था।
  • ईरान से जंग के लिए इजरायल और अमेरिका में इजरायल लॉबी ने ट्रंप पर दबाव बनाया। 
  • युद्ध से अमेरिका को कुछ भी लाभ नहीं होने वाला है तो ऐसे युद्ध में अमेरिकी सैनिकों को क्यों भेजना। 
  • मीडिया के प्रभावशाली चेहरों और इजरायली अधिकारियों पर गलत जानकारी फैलाकर युद्ध के लिए उत्साहित करने का दावा। 

ट्रंप के लिए झटका क्यों?

जोसेफ सेंट को दक्षिण पंथी यानी राइट विंग का माना जाता है। नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर के तौर पर ट्रंप प्रशासन में जिम्मेदारी संभालने से पहले उनकी गिनती धुर-दक्षिणपंथी हस्तियों में होती थी। उन्हें इसके लिए कई बार आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। इसके अलावा 6 जनवरी के दंगों का बचाव करने के लिए भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा है। एक बार तो उन्होंने हिटलर की भी तारीफ कर दी थी। इसके साथ ही उन्होंने सीनेट की सुनवाई में एक ऐसी कैंपन में शामिल होने की बात स्वीकार की जिसमें कट्टर दक्षिणपंथी हस्ती निक फुएंटेस शामिल था। 


पिछले साल जुलाई में जब उन्हें एनसीटीसी का प्रमुख बनाया गया था तब उनकी नियुक्ति पर डेमोक्रेट्स ने विरोध किया था। विरोध का कारण उनके दक्षिणपंथी चरमपंथियों के साथ संबंध ही थे। इस तरह एक बड़ी दक्षिणपंथी हस्ती के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई थी और युद्ध के समय में उनका ट्रंप को छोड़कर चले जाना ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।  

 

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क्या 2003 वाली गलती कर रहे ट्रंप?

जोसेफ केंट ने ईरान यु्द्ध की तुलना 2003 के इराक युद्ध से की। उन्होंने इजरायल पर आरोप लगाया कि इजरायल ने उस समय भी गलत जानकारी फैलाकर अणेरिका को इराक युद्ध में खींचा था और अब वही तरीका ईरान के साथ इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने ट्रंप से अपील की है कि वह ईरान युद्ध के फैसले पर दोबारा सोचें।

 

उन्होंने कहा, ‘मैं प्रार्थना करता हूं कि आप ईरान में जो हो रहा है, उस पर विचार करेंगे और यह सोचेंगे कि हम किसके लिए यह कर रहे हैं। अब बहादुरी से फैसला लेने का समय है। आप रास्ता बदल सकते हैं और देश के लिए नया रास्ता बना सकते हैं, या हमें और अराजकता की ओर धकेल सकते हैं। फैसला आपके हाथ में है।’

10वीं तक के बच्चों को मिले मिड डे मील, शिक्षा पर बढ़े खर्च, संसदीय समिति की सलाह


संसद की स्थायी समिति ने बुधवार 18 मार्च 2026 को संसद में अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए केंद्र सरकार से शिक्षा पर सार्वजनिक खर्च को जीडीपी के 6 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए समय पर कदम उठाने की सिफारिश की है। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय समिति ने चिंता जताई कि वर्तमान में केंद्र और राज्यों का कुल खर्च केवल 4.06 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के लक्ष्यों और ब्राजील (5.62%) या दक्षिण अफ्रीका (6.16%) जैसे अन्य ब्रिक्स देशों की तुलना में काफी कम है। समिति ने स्पष्ट किया कि वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने और देश के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शिक्षा बजट में यह बड़ी बढ़ोतरी जरूरी है।

 

समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के बजट में भारी कमी की गई है। साल 2025-26 के 10.27 करोड़ रुपये के मुकाबले 2026-27 के लिए इसे घटाकर केवल 2.68 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके साथ ही यूजीसी (UGC) में 67.6 प्रतिशत और एआईसीटीई (AICTE) में 63.6 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि स्टाफ की इतनी बड़ी कमी और बजट में कटौती से संस्थानों की योग्यता और शिक्षा की खूबी पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है, जिसे सुधारने के लिए निवेश बढ़ाना जरूरी है।

 

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मिड-डे मील योजना में बदलाव

संसदीय समिति ने स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए कुछ कड़े और जरूरी सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट में यह बचाया गया कि देश में अभी भी करीब 11.2 लाख बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसके अलावा 22,298 ऐसे पाए गए हैं जो बिना किसी सरकारी मान्यता के चल रहे हैं जो कि नियमों के खिलाफ है। बच्चों को स्कूल में पढ़ाई जारी रखने के लिए मिड-डे मील की सुविधा को बढ़ाने का सुझाव दिया गया है। अभी यह खाना सिर्फ कक्षा 8 तक मिलता है।

 

समिति चाहती है कि इसे तुरंत कक्षा 10 तक लागू किया जाए और अगले 5 सालों में 12वीं तक के सभी छात्रों को इसका फायदा मिले। समिति का मानना है कि स्कूल में अच्छा खाना मिलने से बच्चे बीच में पढ़ाई नहीं छोड़ेंगे, जिससे खासकर लड़कियों की शिक्षा और सेहत में बड़ा सुधार होगा।

विदेशी यूनिवर्सिटी पर भी चर्चा

संसदीय समिति ने कहा कि विशेष योजनाओं के बाद भी भारत कि कोई यूनिवर्सिटी दुनिया की टॉप 100 रैंकिग में नहीं है। अब समिति ने सिफारिश की है कि कॉलेजों को सरकारी फंडिंग तभी दिया जाए, जब वे अपनी रिसर्च और शिक्षकों की योग्यता में सुधार दिखाएं। समिति ने विदेशी यूनिवर्सिटी के भारत आने का समर्थन किया है और उनपर नजर रखने को भी कहा है। एक शर्त यह भी रखी कि ये विदेशी संस्थान भारत में शिक्षा से होने वाली अपनी सारी कमाई को यहीं दोबारा निवेश करेंगे। ताकि भारत की शिक्षा व्यवस्था को इसका पूरा फायदा मिल सके।

 

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छात्राओं के लिए नए हॉस्टल

नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी (NDU) के लिए बजट तो पास हो गया लेकिन अभी तक उस पर एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है। समिति ने सरकार से इसका पूरा प्लान मांगा है ताकि छात्र जल्द से जल्द ऑनलाइन पढ़ाई का फायदा उठा सकें। समिति ने हर जिले में छात्राओं के लिए ‘गर्ल्स स्टेम हॉस्टल’ बनाने के काम में तेजी लाने को कहा है।

 

निर्देश दिया गया है कि आदिवासी और नक्सल प्रभावित इलाकों में ये हॉस्टल सबसे पहले तैयार किए जाएं। इन हॉस्टलों में हाई-स्पीड इंटरनेट की सुविधा भी दी जाएगी ताकि लड़कियां विज्ञान और तकनीक (STEM) की पढ़ाई आसानी से कर सकें।

19 मार्च से शुरू होगी शक्ति की उपासना, जानें शुभ मुहूर्त


हिंदू कैलेंडर के अनुसार, हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस साल यह पावन पर्व 19 मार्च 2026, गुरुवार से शुरू होने जा रहा है। इसी दिन घर-घर में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के लिए कलश स्थापना की जाएगी। धार्मिक दृष्टि से इस बार की नवरात्रि बेहद खास है क्योंकि पहले ही दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। 

 

मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन यानी महानवमी को ही प्रभु श्री राम का जन्म हुआ था, जिसे हम राम नवमी के रूप में बड़े उत्साह से मनाते हैं। साल में आने वाली चार नवरात्रियों (शारदीय, चैत्र और दो गुप्त नवरात्रि) में चैत्र नवरात्रि का अपना एक अलग आध्यात्मिक महत्व होता है।

 

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कलश स्थापना के लिए दो शुभ समय

अगर आप इस दिन व्रत रख रहे हैं और कलश स्थापित करना चाहते हैं, तो पंचांग के अनुसार आपके पास दो बेहतरीन विकल्प हैं- 

  • सुबह का मुहूर्त: सवेरे 6:52 बजे से 7:43 बजे तक।
  • दोपहर का मुहूर्त (अभिजीत मुहूर्त): दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक।
  • जो लोग सुबह जल्दी पूजा नहीं कर पाएंगे, वे दोपहर वाले मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं।

बन रहे हैं बेहद शुभ ‘योग’

नवरात्रि के पहले दिन शुक्ल योग और ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है। शुक्ल योग दोपहर बाद तक रहेगा, जिसके बाद ब्रह्म योग शुरू हो जाएगा। इसके अलावा, अगले दिन की सुबह यानी 20 मार्च को सर्वार्थ सिद्धि योग भी लगेगा, जो किसी भी शुभ काम की शुरुआत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।

राहु काल का रखें ध्यान

पूजा-पाठ और किसी भी शुभ काम के लिए राहु काल को अच्छा नहीं माना जाता। 19 मार्च को दोपहर 2:00 बजे से लेकर 3:30 बजे तक राहु काल रहेगा। कोशिश करें कि अपनी पूजा या कलश स्थापना इस समय के बीच में न करें। 

 

प्रतिपदा तिथि शुरू: 19 मार्च 2026, सुबह 6:52 बजे से।

प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च 2026, सुबह 4:52 बजे तक।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।