उत्तर कोरिया में चुनाव के बाद एक बार फिर, सत्ता की कमान किम जोंग उन के पास रहेगी। उत्तर कोरिया की संसद ‘सुप्रीम पीपुल्स असेंबली’ में 15 मार्च को चुनाव आयोजित हुए थे। चुनावों में वोटर टर्नआउट 99.99 प्रतिशत रहा। चुनाव की खास बात यह रही कि उम्मीदवारों को 99.93 फीसदी वोट मिले।
करीब हर वोटर ने वोट दिया और लगभग सभी ने सरकार की ओर से पहले ही चुने गए एक-एक उम्मीदवार को समर्थन दिया। यह चुनाव असल में एक दिखावा था। दिखावा इसलिए, क्योंकि हर सीट पर सिर्फ एक ही उम्मीदवार था, जिसे पहले से ही किम जोंग उन ने मंजूरी दी थी।
मतदाताओं के पास किम जोंग की ओर से तय किए गए नेता के अलावा, कोई दूसरा विकल्प नहीं होता है। लोग मजबूरन उन्हें ही वोट करते हैं। दुनिया भर की मीडिया और एक्सपर्ट इस चुनाव को फर्जी खबर बता रहे हैं।
उत्तर कोरिया में असली ताकत, वर्कर्स पार्टी के पास होती है, जिसके नेता किम जोंग उन हैं। संसद सिर्फ पार्टी के फैसलों को औपचारिक मंजूरी देती है। किम जोंग उन खुद चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे, लेकिन वे देश के सर्वोच्च नेता बने हुए हैं। वह वर्कर्स पार्टी के जनरल सेक्रेटरी, स्टेट अफेयर्स कमीशन के अध्यक्ष और आर्मी के कमांडर हैं।
चुनाव के बाद क्या होगा?
चुनाव के बाद 22 मार्च को संसद की बैठक होगी। संविधान में बदलाव पर चर्चा की जाएगी। राज्य के प्रमुख पदों पर चुनाव होगा। किम जोंग उन का एक बार फिर चुना जाना तय माना जा रहा है। इस चुनाव में किम जोंग उन की बहन किम यो-जोंग की स्थिति और मजबूत हुई है। पार्टी कांग्रेस में उन्हें ऊंचा पद मिला था। किम यो जोंग भविष्य में किम जोंग उन के बाद सत्ता संभाल सकती हैं। वह किम की बेटी किम जू-ए के लिए रास्ता तैयार कर सकती हैं।
उत्तर कोरिया में चुनाव, लोकतंत्रिक दिखने के लिए होते हैं। ज्यादातर प्रक्रियाएं, सिर्फ औपचारिकता ही हैं। किम जोंग, दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि जनता एकजुट है, सरकार को समर्थन है। जनता के पास असल में कोई विकल्प ही नहीं होता। किम जोंग के परिवार के पास सारी ताकत है। ज्यादातर देशों ने इस चुनाव को अध्यादेश की तरह पेश किया है।
उत्तर कोरिया की शासन व्यवस्था कैसी है?
उत्तर कोरिया में सिर्फ एक दलीय व्यवस्था है। यहां की सत्ता किम जोंग परिवार के पास है। वह राज्य, सेना और पार्टी के प्रमुख हैं। उनका फैसला, अंतिम फैसला होता है। वह वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (WPK) के अध्यक्ष हैं। यही पार्टी, इस देश की सबसे बड़ी और इकलौती राजनीतिक शक्ति है। यहां, सैन्य प्रधान नीतियां ही बनाई जाती हैं। हर संवैधानिक संस्था पर सिर्फ किम जोंग का नियंत्रण है।
दिल्ली विधानसभा में सोमवार को कैग की रिपोर्ट पेश की गई। इसमें दावा किया गया कि पिछली आम आदमी पार्टी की सरकार ने 6 फ्लैगस्टाफ रोड स्थित केजरीवाल के सरकारी आवास के मरम्मत पर 33.66 करोड़ रुपये खर्च किए थे। यह रकम अनुमानित लागत से 342 प्रतिशत अधिक थी। कैग की रिपोर्ट पर बुधवार को दिल्ली विधानसभा में चर्चा हुई तो लोक निर्माण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने एक लंबी-चौड़ी सूची पढ़ी और अरविंद केजरीवाल की तुलना धुरंधर फिल्म के रहमान डकैत से की। उन्होंने आरोप लगाया कि 88 इंच का टीवी 28 लाख रुपये में खरीदा गया। वहीं छह लाख रुपये का मिनी बार बनवाया गया।
प्रवेश साहिब सिंह ने आरोप लगाया, ‘टेंडर आवंटन में धांधली की गई। उन्होंने आगे कहा कि देश में धुरंधर फिल्म बहुत ही चर्चा में है। उसके एक किरदार रहमान डकैत की खूब चर्चा है। दिल्ली के ‘डकैत’ अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के पैसे में डांका डाला। मगर हमारे धुरंधर मतदाताओं ने दिल्ली के डकैतों को एक साल पहले हरा दिया, क्योंकि वे समझ गए थे कि ये लोग 11 साल से झूठ बोल रहे थे। आज यह हालत हो गई है कि अरविंद केजरीवाल कुछ भी बोलते हैं तो न केवल दिल्ली, बल्कि देश का हर व्यक्ति कहता है कि ये व्यक्ति झूठ ही बोलता है।’
प्रवेश साहिब सिंह का आरोप है कि बिना परमिशन घरों को तोड़वाने और पेड़ों को कटवाने के बाद शीश महल का निर्माण शुरू किया गया। उन्होंने विधानसभा में दो अलग-अलग फोटो दिखाई और बताया कि कैसे शीश महल बनने से पहले और बाद में वहां पेड़ों को काटा गया है।
‘चंद कुर्सी के कीड़े पूरी दिल्ली को खा गए’
उन्होंने कहा, ‘शीशमहल के बारे में हम सभी ने बहुत बार सुना है। ‘मैं बचाता रहा दीमक से घर अपना, और चंद कुर्सी के कीड़े पूरी दिल्ली को खा गए।’ पहली आपदा कोविड की और दूसरी आम आदमी पार्टी की थी। जब 2021 में देश में बार-बार कर्फ्यू लगता था, जब कोई फैक्ट्री नहीं चल रही थी, कोई कारखाना नहीं चल रहा था, कोई ऑफिस नहीं खुल रहा था, सारे लोग वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे, घरों में बैठे थे, एक भी गाड़ी सड़क पर नहीं दिख रही थी, मगर शीश महल के कंस्ट्रक्शन का काम एक भी दिन नहीं रुका।’
प्रवेश साहिब सिंह ने आरोप लगाया, ’24 घंटे और 365 दिन शीश महल का काम चला, क्योंकि यह केजरीवाल… राजा का महल बन रहा था।’ उन्होंने विधानसभा में एक सूची पढ़ी और कथित तौर पर आरोप लगाया कि यह सामान शीशमहल में लगाया गया है। उन्होंने कहा, ‘फर्नीचर और सोफा लगाया गया। पहला टेंडर 35 और दूसरा डेढ़ लाख रुपये का हुआ। 1 करोड़ 5 लाख रुपये की 76 टेबल लगाई गई। 40 लाख रुपये के आठ बेड लगाए गए। 28 लाख रुपये की अलमारी, 60 लाख रुपये की कुर्सी, साढ़े पांच लाख रुपये की पांच रिक्लाइनर कुर्सी, पांच लाख रुपये के बुक सेल्फ, 60 लाख रुपये की कालीन और डेढ़ करोड़ रुपये पर्दे खरीदे गए।
दिल्ली और आसपास के इलाकों खासकर NCR में बढ़ता प्रदूषण अब आने वाली पीढ़ी के लिए बड़ा खतरा बन गया है। डॉक्टरों का कहना है कि हवा में मौजूद बारीक कण (PM 2.5) प्रेग्नेंट महिलाओं के शरीर में सूजन पैदा कर रहे हैं, जिससे उनका खून गाढ़ा हो रहा है। इस स्थिति में गर्भ में पल रहे बच्चे तक सही मात्रा में ऑक्सीजन और न्यूट्रीशन नहीं पहुंच पाता, जो बच्चे की ग्रोथ को रोक सकता है।
बदलते दौर में खराब लाइफस्टाइल और देरी से प्रेग्नेंसी (30-35 की उम्र के बाद) की वजह से भी इस दौरान मुश्किलें बढ़ रही हैं। यही वजह है कि दिल्ली के बड़े अस्पतालों में अब एक्सपर्ट्स महिलाओं को एस्पिरिन या हेपरिन जैसे ‘ब्लड थिनर’देने की सलाह दे रहे हैं, ताकि प्लेसेंटा में खून के थक्के न जम सकें और बच्चा सुरक्षित रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन दवाओं का चलन बढ़ने के पीछे कुछ मुख्य कारण हैं। सबसे पहला और जरूरी जहरीली हवा शरीर में ‘इन्फ्लेमेशन’ पैदा करती है, जिससे रक्त के थक्के जमने का डर रहता है। जहरीले कण खून में फाइब्रिनोजेन के स्तर को बढ़ा देते हैं, जो थक्का बनाने वाला मुख्य प्रोटीन है।
इस कारण कई महिलाओं में ‘एंटीफॉस्फोलिपिड सिंड्रोम’ जैसी दिक्कतें आ रही हैं, जहां शरीर खुद ही खून के थक्के बनाने लगता है। जो महिलाएं IVF के जरिए मां बन रही हैं या ज्यादा उम्र में गर्भधारण कर रही हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने के लिए ये दवाएं दी जा रही हैं।
प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करें?
डॉक्टरों ने प्रेग्नेंट महिलाओं को ‘हाउस अरेस्ट’ यानी ज्यादा समय घर के अंदर ही बिताने की सलाह दी है। इसके अलावा कुछ जरूरी टिप्स दिए गए हैं।
N-95 मास्क: अगर घर से बाहर निकलना बहुत जरूरी हो, तो साधारण मास्क के बजाय N-95 मास्क ही पहनें।
घर की हवा सुधारें: किचन में अच्छा एग्जॉस्ट फैन लगाएं और घर के अंदर अगरबत्ती या धूपबत्ती जलाने से बचें। घर में हवा साफ करने वाले पौधे लगाएं।
धूम्रपान से दूरी: खुद धूम्रपान न करें और ऐसे लोगों से भी दूर रहें जो सिगरेट पीते हों ।
इस बात का जरूर ध्यान रखें कि ब्लड थिनर दवाओं का इस्तेमाल बिना डॉक्टरी सलाह के बिल्कुल न करें। इनका गलत इस्तेमाल डिलीवरी के दौरान अधिक ब्लीडिंग या चोट लगने पर खून न रुकने जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
अंक गणित के अनुसार, गुरुवार 26 फरवरी का दिन लोगों के लिए विशेष ऊर्जा लेकर आया है। इस दिन चंद्रमा मिथुन राशि में बैठा हुआ है जो बुद्धि, संवाद और नई चीजों को सीखने की क्षमता को बढ़ाता है। ज्योतिष शास्त्र की मानें तो मिथुन राशि अनुकूलनशीलता का प्रतीक है मतलब आज के दिन लोग परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सफल रहेंगे।
यह दिन मूलांक 8 का है, जिसका प्रतिनिधित्व शनि देव करते हैं। शनि अनुशासन, कड़ी मेहनत और धीरज का प्रतीक हैं। गुरुवार का दिन और मूलांक 8 का यह मेल उन लोगों के लिए बेहतरीन साबित होगा जो भविष्य के लिए बड़ी योजनाएं बना रहे हैं। कुल मिलाकर, आज का दिन सकारात्मकता और दूरदर्शी फैसलों के नाम रहेगा।
इस दिन आपके लिए साहस और ऊर्जा का संचार होने का दिन है। क्या करें: नए प्रोजेक्ट्स और लीडरशिप पर ध्यान दें। क्या न करें: जल्दबाजी में फैसले न लें। किसी भी विवाद से बचें।
वृषभ
धन लाभ और आर्थिक मजबूती के योग हैं। क्या करें: पुराने निवेश और परिवार को समय दें। क्या न करें: उधार देने और जोखिम भरे निवेश से बचें।
मिथुन
बिना किसी कंफ्यूजन के बातचीत और दूसरों से संवाद बढ़ेगा। क्या करें: नई स्किल सीखें और यात्रा की योजना बनाएं। क्या न करें: अफवाहों पर भरोसा और काम अधूरा न छोड़ें।
कर्क
घर में सुख-शांति और भावनात्मक मजबूती आएगी। क्या करें: पुराने रिश्तों को सुधारें और साथ ही अपनों का ख्याल रखें। क्या न करें: भावुक होकर बड़े खर्चे करने से बचें।
सिंह
करियर में चमक और मान-सम्मान मिलेगा। क्या करें: आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और काम करें। क्या न करें: अहंकार और फालतू की बहस से दूर रहें।
कन्या
हेल्थ बेहतर होगा और काम करने की क्षमता बढ़ेगी। क्या करें: पेंडिंग काम निपटाएं और सेहत का ध्यान रखें। क्या न करें: आलस्य और नकारात्मक विचारों को पास न आने दें।
तुला
रिश्तों और पार्टनरशिप में सुधार होगा। क्या करें: नए एग्रीमेंट और आपसी तालमेल पर ध्यान दें। क्या न करें: अकेले फैसले न लें और निवेश में जल्दबाजी न करें।
छिपे हुए लाभ और रिसर्च में सफलता मिलेगी। क्या करें: गहरे चिंतन और शोध वाले काम करें। क्या न करें: किसी भी विवादित मुद्दों पर बोलने से बचें।
धनु
भाग्य का साथ मिलेगा और साथ ही यात्रा के योग बन रहे हैं। क्या करें: पढ़ाई और लंबी दूरी की यात्रा से लाभ उठाएं। क्या न करें: नियम न तोड़ें और ओवरकॉन्फिडेंस से बचें।
मकर
करियर में स्थिरता के साथ-साथ आपको अपनी मेहनत का मीठा फल मिलेगा। क्या करें: अनुशासन में रहकर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ें। क्या न करें: पुरानी गलतियों को न दोहराएं। सेहत के साथ खिलवाड़ न करें।
कुंभ
सोशल लाइफ एक्टिव रहेगी, नेटवर्किंग का फायदा होगा। क्या करें: दोस्तों और करीबियों से मदद लें। क्या न करें: ऑनलाइन विवादों और अफवाहों से दूरी बनाएं।
मीन
मन को शांति मिलेगी और अध्यात्म की ओर झुकाव होगा। क्या करें: दान-पुण्य और क्रिएटिव काम करें। क्या न करें: अकेलापन महसूस न करें और फालतू के खर्च न करें।
डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।
इजरायल, अमेरिका और ईरान की जंग के 18 दिन बीत चुके हैं। पश्चिम एशिया में भीषण तबाही मची है। सऊदी अरब, दुबई, कतर, बहरीन और साइप्रस जैसे देशों पर ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर इतने हमले किए हैं कि वहां अमेरिकी सैन्य बेस, अपने सबसे बुरे दौर में पहुंच गए हैं। जंग के नतीजे कुछ ऐसे हैं कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अपने घर में ही घिर गए हैं। अमेरिका के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर (NCTC) के प्रमुख जोसेफ केंट ने जंग की विभीषिका को देखते हुए पहले ही इस्तीफा दे दिया है।
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप से नाराजगी की कई वाजिब वजहें भी हैं। जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, तब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया था कि वह ईरान के साथ लंबे संघर्ष में नहीं जाना जाना चाहते। उन्होंने कहा था कि वह ईरानी जमीनी पर अपने सैनिक नहीं भेजना चाहते हैं। अब पल-पल हालात बदल रहे हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने जून 2025 में कहा था, ‘हम किसी लंबे संघर्ष में नहीं जाना चाहते। हमें जमीन पर सैनिक भेजने में कोई दिलचस्पी नहीं है।’
अब जंग के हालात बदल रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, अब जमीन पर सैनिकों को भेजने की संभावना से इनकार नहीं कर रहे हैं। जंग के शुरुआती हमलों में ही डोनाल्ड ट्रंप को एहसास हो गया है कि वह यह जंग, आसानी से जीत नहीं रहे हैं। अब कुछ रणनीतिक वजहों से छोटे स्तर पर सैन्य कार्रवाई करना एक विकल्प बन रहा है।
अमेरिकी लोग ईरान में सैन्य कार्रवाई पर क्या सोचते हैं?
CNN ने हाल ही में एक सर्वे कराया था। अमेरिकी, जमीनी स्तर पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के पक्षधर हैं या नहीं। 60 फीसदी लोगों ने विरोध किया। 12 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया। क्विनिपियक यूनिवर्सिटी के पोल में यह आंकड़ा और भी ज्यादा है मिला। 74 फीसदी लोगों ने विरोध किया, 20 फीसदी लोगों ने समर्थन में वोट दिया। रिपब्लिकन वोटर्स भी नहीं चाहते हैं कि यह जंग आगे बढ़े। CNN पोल में सिर्फ 27 फीसदी रिपब्लिकन्स ने जंग का समर्थन किया, वहीं क्विनिपियक में 37 फीसदी लोगों ने हां में जवाब दिया।
ईरानियों का एक समूह, लोकतंत्र की मांग कर रहा है। Photo Credit: PTI
ट्रंप प्रशासन अब क्या कह रहा है?
डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट के साथ हुई बातचीत में यह कहा था कि जमीनी स्तर पर सेना की जरूरत नहीं पड़ेगी। अब वह सेना को सुरक्षित विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। जब ग्राउंड ऑपरेशन से जुड़े सवाल उनसे पूछे जा रहे हैं तो वह खीझ जा रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने फॉक्स न्यूज के साथ एक इंटरव्यू में दावा किया, ‘यह साल 2003 के इराक युद्ध जैसा नहीं होगा। कोई लाखों सैनिक शहरों में कब्जा नहीं करेंगे। सेना, ट्रंप को हर तरह के ऑप्शन्स दे रही है और सैनिक तैयार हैं।’
ईरान, अमेरिका और ईरान की जंग अब सिर्फ हवाई हमलों पर सीमित नहीं है। अगर ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोकना है, न्यूक्लियर मेटल को जब्त करना है तो बिना जमीन पर गए बात नहीं बनेगी। खार्ग आइलैंड पर कब्जा करना हो या होर्मुज स्ट्रेट पर सीधा कंट्रोल चाहिए तो ईरान में सेना भेजनी ही होगी। अगर ईरान से संवर्धित यूरेनियम हासिल करना है तो ज्यादा सैनिकों की जरूरत पड़ेगी।
अमेरिका ने मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट को पश्चिम एशिया के देशों में भेजा है। इस टुकड़ी में करीब ग 2,500 मरीन्स और नेवी के जवान हैं। अमेरिका के ‘USS ट्रिपोली’ जैसे जहाज सिंगापुर के पास देखे गए हैं। यह तेजी से खाड़ी के देशों की तरफ आ रहे हैं। क्यों आ रहे हैं, अमेरिका ने यह अभी तक साफ नहीं किया है। अचानक इतनी बड़ी संख्या आने की सबसे बड़ी वजह, जंग ही हो सकती है।
अमेरिकी सेना। Photo Credit: US Army
ट्रंप की सनक से उनके अपने ही परेशान हैं
डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक और अमेरिकी संसद में रिपबल्किन के साथी भी जमीनी कार्रवाई के खिलाफ हैं। रिक स्कॉट, टिम बर्चेट, जोश हॉली और नैन्सी मेस जैसे लोग, इस तरह की कार्रवाई से बचने के लिए कह रहे हैं। सीनेटर जॉन केनेडी जैसे नेताओं ने भी ट्रंप को हिदायत दी है कि ऐसे कार्यक्रमों से अमेरिका को ही नुकसान पहुंचेगा।
कई दक्षिणपंथी इन्फ्लुएंसर्स ने भी सरकार को चेताया है कि अगर ट्रंप ऐसा ही करते रहे तो उनका गठबंधन टूट सकता है। यह युद्ध अगर जमीनी स्तर पर लड़ा गया तो अमेरिका में राजनीतिक संकट के भी हालात पैदा हो सकते हैं। लोग लंबे युद्ध और सैनिकों की शहादत से डर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप, जनता की राय के उलट फैसले लेते हैं। इस बार वह बुरी तरह फंसते नजर आ रहे हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। Photo Credit: PTI
ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई, घाटे का सौदा क्यों?
ईरान, इराक जितना छोटा देश नहीं है। जग्रोस से लेकर अल्बोर्ज पर्वत श्रृंखलाएं, ईरान के लिए अभेद्य किले की तरह काम करती हैं। न तो यहां अमेरिकी टैंक पहुंच पाएंगे, न ही अमेरिकी सेना, सीधे घुसपैठ कर पाएगी। ईरान न समंदर से, न आसमान से अमेरिकी जहाजों को उतरने दे सकता है। ईरान ने अपनी सेना का इतने हिस्सों में विघटन किया है कि कई देश अगर संयुक्त रूप से भी भिड़ें तो हर मोर्चे पर एक अलग तरह की सैन्य प्रणाली काम कर रही है।
अगर सेंट्रल कमांड से भी न संपर्क हो तो ईरान की स्वायत्त सेनाएं, भिड़ती रहेंगी। ईरान छापेमार युद्ध के लिए जाना जाता है, जिसमें अमेरिकी सैनिकों को न के बराबर अनुभव है। 18 दिनों की जंग के बाद भी ईरान के पास मिसाइलों और ड्रोन का विशाल भंडार है। अमेरिका के करोड़ों रुपये वाले ड्रोन्स को ईरान कुछ हजार में बनने वाले ड्रोन से चुनौती दे रहा है। ईरान का ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर सीधा कंट्रेल है। अमेरिका की दाल यहां चाहकर भी नहीं गल रही है। सेना आने का सवाल ही नहीं बनता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के नियंत्रण को चुनौती नहीं दे पा रही है इजरायल और अमेरिकी सेनाएं। Photo Credit: PTI
ईरान पहले ही होर्मुज बंद करके अमेरिका के मित्र देशों में तेल और गैस की सप्लाई ठप कर रहा है। अगर यह जंग ऐसे ही चली तो दुनिया में मंदी भी छा सकती है। जाहिर सी बात है कि अमेरिका पर दबाव बढ़ेगा। अमेरिका को जमीनी लड़ाई में कामयाबी मिलने से रही। लेबनॉन, यमन और इराक में मौजूद हिजबुल्लाह और हूती जैसे संगठन, कई मोर्चे पर जंग छेड़ सकते हैं। डोनाल्ड ट्रंप को इसका अहसास है, इसी वजह से वह जमीनी ऑपरेशन से भी कतरा रहे हैं।
अमेरिका और इजरायल ने जब से ईरान पर हमला किया है तब से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। इस तनाव का असर पूरी दुनिया में देखा जा सकता है। भारत में भी इस युद्ध का असर दिखा और एलपीजी गैस के लिए लंबी-लंबी कतारें लगने लगीं। सरकार आश्वासन देती रही की कोई संकट नहीं है लेकिन जनता असमंजस में है। इस बीच दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम आम जनता के लिए LPG ATM की एक नई सुविधा शुरू की गई है। इस LPG ATM की खास बात यह है कि इससे आप 2-3 मिनट में आसानी से सिलेंडर भर सकते हैं। यह ATM मशीन गुरुग्राम में सोहना के सेक्टर-33 स्थित सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली में लगाई गई है और इसे भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) चला रही है।
यह LPG ATM बीपीसीएल के पायलट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसमें आपको बस खाली सिलेंडर लेकर जाना होगा और इसके बदले में आपको भरा हुआ सिलेंडर मिल जाता है। इसका मतलब है कि आप जैसे किसी दुकान पर सामान लेने जाते हैं ठीक उसी तरह आप इस एटीएम पर जाएंगे और अपने खाली सिलेंडर के बदले भरा हुआ सिलेंडर ले आएंगे। अब लोगों के मन में इस एटीएम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इस एटीएम में एक बार में लगभग 10 सिलेंडर रखे जा सकते हैं। आप अपना सिलेंडर इससे जाकर भर सकते हो और जब स्टॉक घटकर दो रह जाता है, तो सिस्टम ऑटोमैटिक रूप से एजेंसी को स्टॉक फिर से भरने के लिए सूचित कर देता है। इसके बाद एजेंसी फिर से इस स्टेशन पर गैस भरेगी और यह फिर से शुरू हो जाएगा। इसका ज्यादा से ज्यादा लाभ लोगों को मिल सके इसके लिए इसकी सर्विस को 24×7 कर दिया गया है।
क्या हैं इस ATM की खासियत ?
खाली सिलेंडर के बदले भरा हुआ सिलेंडर और वह भी सिर्फ 2 से 3 मिनट में।
सिलेंडर का वजन कम होगा क्योंकि यह लोहे के बजाय कंपोजिट सिलेंडर पर काम करेगा। पुराने सिलेंडर का वजट 31 किलो होता था लेकिन इसका वजन सिर्फ 15 किलो होगा।
सिलेंडर ट्रांसपेरेंट हैं यानी आप पानी की बोतल की तरह देख सकते हैं कि सिलेंडर में कितनी गैस बची है।
ट्रांसपेरेंट होने के कारण गैस चोरी और कम मिलने का डर भी खत्म हो जाता है।
इस सिलेंडर में कभी भी जंग नहीं लगती और धूल-मिट्टी भी नहीं। यानी आपका किचन साफ रहेगा।
4 मार्च को होली का त्योहार देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा। इस त्योहार में लोग रंग-गुलाल के साथ खेलते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक को होली में रंग लगाने में मजा आता है लेकिन बाद में रंगों को छुड़ाने में हालत खराब हो जाती है। होली में कुछ रंग इतने पक्के होते हैं कि छुड़ाने में कई दिन लग जाते हैं।
रंग छुड़ाने के लिए घर पर उबटन बना सकते हैं। यह खीरा और बेसन का उबटन हो सकता है। किसी भी प्रकार का उबटन लगाने के बाद मॉश्चराइजर जरूर लगाएं ताकि ड्राइनेस की समस्या न हो। होली खेलते समय आंखों पर काला चश्मा लगाएं। आइए हम जानते हैं कि आप होली के रंगों को कैसे आसानी से छुड़ा सकते हैं?
चेहरे की त्वचा बहुत नाजुक होती है इसलिए रंग छुड़ाते समय कुछ बातों का ध्यान रखें।
सबसे पहले चेहरे पर लगे रंगों को कपड़े या हाथों से झाड़ लें। इसके बाद चेहरे को पानी से धोएं फिर माइल्ड फेसवॉश या क्लींजर का इस्तेमाल करें। इसके बावजूद रंग न छूटे तो चेहरे पर हल्दी और नींबू का रस मिलाकर पेस्ट लगा सकते हैं।
इसके अलावा चेहरे पर ड्राइनेस की समस्याा न हो इसलिए एलोवेरा जेल या कोई अन्य मॉश्चराइजर जरूर लगाएं।
इन बातों का रखें ध्यान
चेहरे पर लगे रंग को छुड़ाने के लिए केमिकल वाले साबुन या डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें। त्वचा पर रेडनेस, खुजली या सूजन की समस्या दिखने पर डॉक्टर की सलाह लें।
रंग खलने से 30 मिनट पहले बालों में नारियल या सरसों का तेल लगाएं। तेल बालों में प्रोटेक्टिव लेयर की तरह काम करता है जिसकी वजह से रंग चिपकता नहीं है। रंग खेलते समय बालों को बांध लें।
बालों में से रंग को कैसे हटाएं?
सूखें रंग को निकालने के लिए बाल में कंघी का इस्तेमाल करें। अगर रंग गीला है तो पहले पानी का इस्तेमाल करें और उसके बाद माइल्ड शैंपू लगाएं। बालों को शैंपू से अच्छे से धोने के बाद मॉश्चराइजर जरूर लगाएं।
डिस्क्लेमर- यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है। हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। इसलिए कोई भी नुस्खा आजमाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें। जिन लोगों की त्वचा सेंसिटिव है उन्हें कुछ भी लगाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
इस्लाम धर्म में रमजान के महीने को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने दान के कामों को जरूरी माना जाता है। फितरा (जकात-उल-फितर) इन्हीं दानों में से एक हैं। फितरा इस्लाम के उन महत्वपूर्ण दान कार्यों में से एक है, जिसे रमजान के पवित्र महीने के समापन पर यानी ईद-उल-फितर की नमाज से पहले अदा करना अनिवार्य होता है। यह सिर्फ एक वित्तीय मदद नहीं है, बल्कि यह रोजे को पूर्णता प्रदान करने का एक जरिया है।
माना जाता है कि रमजान के दौरान अगर रोजेदार से कोई छोटी-मोटी चूक या गलती हुई हो, तो फितरा उसे सही करने का काम करता है। इस्लाम में फितरा हर उस मुसलमान पर जरूरी है जिसके पास अपनी जरूरत से अधिक संपत्ति या खाना उपलब्ध हो।
फितरा परिवार का मुखिया अपने साथ-साथ अपने घर के छोटे बच्चों और आश्रितों की तरफ से भी यह अदा करता है। इसका मूल संदेश सामाजिक समानता है ताकि ईद के दिन कोई भी भूखा न रहे और हर व्यक्ति सम्मान के साथ त्योहार मना सके। इसकी अहमियत को कुछ इस तरह से समझा जा सकता है जैसे इंसान होने के नाते रोजे के दौरान कभी-कभी बेवजह की बातें या छोटी गलतियां हो जाती हैं। फितरा इन कमियों को दूर कर रोजे को अल्लाह के सामने स्वीकार्य बनाता है।
ईद को खुशियों का त्योहार माना जाता है। फितरा यह सुनिश्चित करता है कि समाज का गरीब तबका भी नए कपड़े पहन सके और अच्छे भोजन का आनंद ले सके। यह समाज के अमीर और गरीब के बीच की दूरी को कम करता है। साथ ही भाईचारे की भावना को बढ़ावा देता है।
ऐसा माना जाता है कि यह अल्लाह को रमजान के महीने को ठीक से पूरा करने की शक्ति देने के लिए एक प्रकार से शुक्रिया करना है।
कितना देना होता है?
फितरे की मात्रा आमतौर पर प्रति व्यक्ति लगभग 2.045 किलोग्राम गेहूं या उसकी बाजार कीमत के बराबर होती है। इसे खजूर, जौ या किशमिश के रूप में भी दिया जा सकता है।
कब देना चाहिए?
इसे रमजान के आखिरी दिनों में या ईद की नमाज से पहले देना अनिवार्य है। नमाज के बाद दिया गया दान सामान्य सदका माना जाता है, फितरा नहीं।
फितरा किसे दिया जा सकता है?
फितरा केवल उन लोगों को दिया जाना चाहिए जो वास्तव में इसके हकदार हैं। जैसे गरीब और जरूरतमंद, अनाथ बच्चे या ऐसे लोग जिनके पास ईद के दिन के भोजन का प्रबंध न हो।
सबसे बड़ा अंतर इनके हिसाब और देने के समय में है। जकात कुल जमा संपत्ति का 2.5% होती है। इसे साल में कभी भी दिया जा सकता है जब इसकी शर्तें पूरी हो जाएं। जबकी फितरा हर व्यक्ति के लिए तय रकम होती है। इसे ईद की नमाज से पहले देना जरूरी होता है।
जकात का मकसद लंबे समय तक गरीबी को कम करना और जरूरतमंदों की मदद करना है। जबकि फितरा का मकसद यह है कि ईद की खुशी हर गरीब तक पहुंचे और कोई भी ईद के दिन दुखी न रहे।
जकात सिर्फ उन लोगों पर फर्ज है जिनकी संपत्ति निसाब से ज्यादा हो। फितरा हर सक्षम मुस्लिम परिवार पर देना जरूरी है।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने उन अवैध प्रवासियों के लिए मुफ्त उड़ान और बोनस का एलान किया है, जो स्वेच्छा से अमेरिका छोड़कर जाना चाहते हैं। अमेरिका ने अवैध प्रवासियों के लिए विज्ञापन दिया है कि जो लोग, अपनी मर्जी से अमेरिका छोड़ेंगे, उन्हें 2600 डॉलर की आर्थिक मदद दी जाएगी, जिससे वे अपने देश जा सकें।
अमेरिका ने नागरिकों लुभाने के लिए उन देशों की पहचान वाले प्रतीकों का इस्तेमाल किया है। अमेरिकी पोस्टरों में चीन की महान दीवार, कोलंबिया की इमारतें और ताजमहल को लेकर ऐड दिए गए हैं। जबरन निष्कासित करने की नीति से उलट, अब अमेरिका ने उदार तरीके से अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने की योजना तैयार की है।
अमेरिका की होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (DHS) ने अवैध तरीके से रह रहे अवैध प्रवासियों के लिए एक खास स्कीम शुरू की है, जिसका नाम ‘प्रोजेक्ट होमकमिंग’ नाम दिया है। यह स्कीम पिछले साल मई में शुरू हुई थी, जब डोनाल्ड ट्रंप ने अपना दूसरा कार्यकाल संभाला था। अब मार्च 2026 में होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लोगों से वापस अपने देश लौटने की अपील की है।
अमेरिका ने इस योजना के लिए ‘CBP होम ऐप’ लॉन्च किया है। इस ऐप में आप अपना विवरण भरकर रजिस्टर कर सकते हैं। घर लौटने पर कोई अरेस्ट, डिटेंशन या सख्ती नहीं बरती जाएगी। सब कुछ सामान्य यात्री की तरह ही होगा।
किन लोगों के लिए है यह स्कीम?
अमेरिका के गृह विभाग का कहना है कि यह स्कीम उन लोगों के लिए है जो खुद वापस जाना चाहते हैं। इसमें भारत, चीन और कोलंबिया जैसे देशों के लोग शामिल हैं। पोस्ट में ताजमहल की तस्वीर लगाई गई है। चीन और कोलंबिया के बड़े लैंडमार्क्स भी दिखाए गए हैं।
कितने लोगों ने लिया फायदा?
जनवरी 2025 से अब तक 22 लाख से ज्यादा अवैध अप्रवासियों ने इस योजना का लाभ लिया है।
अमेरिकी एजेंसियों का कहना है कि जबरन डिपोर्ट करने में एक व्यक्ति पर 18,245 डॉलर खर्च आता है। इस स्कीम से सिर्फ 5,100 डॉलर लग रहे हैं। अमेरिका ऐसे डिपोर्ट पर 13,000 डॉलर से ज्यादा की बचत कर रहा है। शुरुआत में बोनस 1,000 डॉलर था फिर क्रिसमस पर 3,000 तक बढ़ा, अब 2,600 डॉलर कर दिया गया है।
क्या कह रहे हैं लोग?
सोशल मीडिया पर कई अमेरिकी नागरिकों ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार का मजाक उड़ाया है। उनका कहना है कि अपने वैध कानूनी नागरिकों को सरकार 2600 डॉलर क्यों नहीं देती है। एक शख्स ने लिखा, ‘करदाताओं का पैसा अमेरिकी सरकार ऐसे फूंक रही है।’
क्या है यह नीति?
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने प्रवासियों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है। सरकार का कहना है कि अवैध रूप से रह रहे लोग अब अपने घर लौट जाएं। कनाडा और मैक्सिको जैसे देशों से होने वाले घुसपैठ के खिलाफ अमेरिकी सरकार ने सख्ती अपनाई है और टैरिफ थोपने की धमकी भी दी है।
मोकामा से जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायक अनंत कुमार सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में जमानत मिल गई है। उम्मीद है कि वह जल्द ही जेल से रिहा होंगे। पिछले साल 30 अक्टूबर को मोकामा में दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी। 1 नंवबर 2025 को अनंत सिंह को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था।
करीब साढ़े चार महीने बाद अनंत सिंह को पटना हाई कोर्ट से जमानत मिली है। दुलारचंद यादव प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज से जुड़े थे। विधायक अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर सियासी रंजिश में हत्या करने का आरोप लगा।
अनंत सिंह 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में वोट डालने जेल से बाहर आए थे। उस वक्त उन्होंने आगे चुनाव न लड़ने का ऐलान किया था। अनंत सिंह के मुताबिक उनकी सियासी बागडोर अब उनके बेटे संभालेंगे। जब उनसे चुनाव न लड़ने की वजह पूछी गई तो अनंत सिंह ने कहा कि जब नीतीश कुमार सीएम नहीं रहेंगे तो हम ही क्या करेंगे? यह हमारा आखिरी चुनाव है।
निचली अदालत से जमानत खारिज होने के बाद अनंत सिंह ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि एक- दो दिन में उनकी रिहाई हो जाएगी। विधायक अनंत सिंह अभी बेऊर जेल में बंद हैं। राज्यसभा चुनाव से पहले वह शपथ लेने भी जेल से आए थे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचे अनंत सिंह ने 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव में मतदान किया था। तब ही उन्होंने जल्द जेल से बाहर आने की उम्मीद जताई थी।