होली रंगों और मिठास का त्योहार है। इस दिन घरों में तरह-तरह की मिठाइयां बनती हैं। खासतौर से महिलाओं का ज्यादातर समय किचन में खाना पकाते हुए बिताता है। महिलाएं घरवालों के तरह-तरह के पकवाना बनाती हैं।
ऐसे में अगर आप भी कुछ भी आसानी से बनने वाली मिठाइयां घर पर बनना चाहते हैं तो हम आपको कुछ आसान सी रेसिपी बता रहे हैं जिसे आप आसानी से बना सकते हैं।
नारियल का लड्डू आसानी से बनने वाली मिठाई हैं। इसे बनाने के लिए आपको एक पैन में कद्दूकस करके नारियल रख लें और उसमें दूध मिलाकर पकाएं। जब ये मिश्रण पैन से छूटने लगे तो इलायची पाउडर डालें। जब मिश्रण हल्का ठंडा हो जाए तो छोटे-छोटे लड्डू बना लें।
चॉकलेट की बर्फी
आप घर पर आसानी से चॉकलेट की बर्फी बना सकते हैं। इसे बनाने के लिए आपको नॉन स्टिक पैन में कंडेस्ज मिल्क डालना है और उसमें कोको पाउडर मिलाना है। इस मिश्रण को हल्के हाथों से पकाएं। जब मिश्रण पैन छोड़ने लगे तो उसमें घी मिलाएं। मिश्रण को एक ट्रे में हल्का घी मिलाकर स्पैचुला से बराबर करें। आप मिश्रण पर कटे हुए ड्राई फ्रूट्स डालें। इस मिश्रण को फ्रीज में सेट होने के लिए रख दें।
आजकल मार्केट में रेडी टू मिक्स गुलाब जामुन मिलता है। इसके लिए आपको एक कटोरी में इस मिश्रण में थोड़ा सा दूध डालकर आटा गूंथ लेना है। इसके बाद उस आटे की छोटी-छोटी बॉल्स काट लें ताकि दरार न पड़े। इसके बाद कढ़ाई में घी गर्म कर लें और उन बॉल्स को गोल्डन ब्राउन होने तक तलें। दूसरी तरफ चीनी पानी और इलायची की चाशनी तैयार कर लें। तले हुए गुलाब जामुन को गर्म चाशनी में 2 से 3 घंटे के लिए भिगोकर रखें ताकि रस अंदर तक जाएं।
ज्योतिष दृष्टि से 27 फरवरी का दिन ऊर्जा और सकारात्मक बदलावों से भरा रहने वाला है। शुक्रवार का दिन होने और मूलांक 9 (मंगल) का प्रभाव होने के कारण, आज उन लोगों को विशेष लाभ मिलेगा जो अपनी बातों को प्रभावी ढंग से रखना जानते हैं या कुछ नया शुरू करने की सोच रहे हैं। सितारों की चाल बता रही है कि आपकी बुद्धिमत्ता और मेहनत मिलकर आपको सफलता की ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।
मिथुन राशि में चंद्रमा का होना बातचीत और सामाजिक रिश्तों को मजबूती देगा। यह दिन न केवल नई योजनाओं पर काम करने के लिए अच्छा है बल्कि रचनात्मक कार्यों के लिए भी भाग्य का पूरा साथ मिलने की उम्मीद है। आइए जानते हैं आपकी राशि के हिसाब से कैसा बीतेगा आज का दिन।
28 फरवरी से अब तक इजरायल ने ईरान की पूरी टॉप की लीडरशिप को खत्म कर दिया है। सर्वोच्च नेता अली खामेनेई से ईरानी सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी तक की जान जा चुकी है। बसीज फोर्स के मुखिया गुलामरेजा सुलेमानी को भी ढेर कर दिया गया। ईरान ने अली लारीजानी और गुलामरेजा सुलेमानी की मौत का बदला लेने की कसम खाई है।
ईरान को सबसे बड़ा झटका 28 फरवरी की सुबह लगा, जब अमेरिका-इजरायल की बमबारी में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की जान गई। इसके अलावा आईआरजीसी कमांडर मोहम्मद पाकपुर, खामेनेई के शीर्ष सुरक्षा सलाहकार अली शमखानी, रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह और सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ मूसावी की भी मौत हुई। आइये जानते हैं, उन ईरानी नेताओं के बारे में जिन्हें अब तक इजरायल ढेर कर चुका है।
17 मार्च को इजरायल ने कहा कि उसने एयर स्ट्राइक में ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी को मार दिया है। आईडीएफ ने लारीजानी को ईरानी शासन का वास्तविक नेता बताया और कहा कि उसके निर्देश पर ही इजरायल समेत अन्य देशों पर हमले किए जा रहे थे। पिछले साल अगस्त में लारीजानी को ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिद का सचिव बनाया गया था।
लारीजानी के अलावा बासिज फोर्स के कमांडर गुलामरेजा सुलेमानी को भी इजरायल मार चुका है। इजरायल का दावा है कि सुलेमानी की अगुवाई में बासिज फोर्स ईरान में प्रदर्शनकारियों का दमन किया और विरोध प्रदर्शनों को दबाने में उसकी अहम भूमिका थी।
ईरान ने अली लारीजानी और गुलामरेजा सुलेमानी की मौत का बदला लेने की कसम खाई है। बुधवार की रात ही ईरान ने प्रतिशोध में सैकड़ों मिसाइलों से इजरायल हमला किया। इन हमलों में तेल अवीव में दो लोगों की मौत की खबर है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला हुआ। वहीं दुबई समेत खाड़ी के अन्य इलाकों में भी हमले की खबर आई।
अयातुल्ला अली खामेनेई: ईरान के सर्वोच्च नेता अब्दुल-रहीम मूसावी: ईरानी चीफ ऑफ स्टाफ मोहम्मद हुसैन बाघेरी: ईरान के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ हुसैन सलामी: आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ गुलाम अली रशीद: कमांडर खतम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय अमीर अली हाजीजादे: आईआरजीसी वायुसेना कमांडर हुसैन महदवी: कुद्स फ़ोर्स के सीरिया-लेबनान कोर के कमांडर जलाली पोर हुसैन: ईरानी खुफिया मंत्रालय में जासूसी निदेशालय के मुखिया मोहम्मद शिराजी: खामेनेई के सैन्य ब्यूरो के मुखिया गुलाम रजा रेजाइयन: आंतरिक सुरक्षा बलों के खुफिया निदेशालय के मुखिया हसन अली ताजिब: ईरानी सशस्त्र बलों में आपूर्ति विभाग के प्रमुख सैयद याह्या हमदी: इजरायली मामलों के लिए खुफिया उप मंत्री मोहसेन दर्रेह-बाघी: ईरानी सशस्त्र बलों में आपूर्ति, रसद और औद्योगिक अनुसंधान निदेशालय के प्रमुख अखर इब्राहिम जादेह: सर्वोच्च नेता के सैन्य ब्यूरो के कार्यवाहक मुखिया बहराम हुसैनी मोतलाक: ईरानी सशस्त्र बलों में संचालन और योजना विभाग के प्रमुख मोहम्मद फखपुर: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के कमांडर अली शमखानी: सर्वोच्च नेता के सुरक्षा मामलों के सलाहकार और रक्षा परिषद के सचिव अजीज नासिहजादेह: रक्षा मंत्री सईह असदी: खतम अल-अंबिया आपातकालीन कमान के खुफिया निदेशालय के प्रमुख हुसैन जबल अमेलियन: रक्षा नवाचार और अनुसंधान संगठन के मुखिया रेजा मताफारी-निया: रक्षा नवाचार और अनुसंधान संगठन के पूर्व प्रमुख
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर रणनीति तेज कर दी है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि देश LPG गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए हर संभव विकल्प तलाश रहा है। सरकार का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए भारत अपने सोर्स को अलग-अलग करने पर काम कर रहा है।
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि सरकार का प्राथमिक लक्ष्य आम जनता की जरूरतों को पूरा करना है। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘हम हर उस जगह से LPG खरीदने की कोशिश कर रहे हैं जहां यह उपलब्ध है। अगर रूस से आपूर्ति संभव है तो हम वहां भी जाएंगे। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में हमें यह सुनिश्चित करना है कि हमारे नागरिकों की ईंधन संबंधी आवश्यकताएं हर हाल में पूरी हों।’
MEA के अनुसार भारत को बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव समेत कई पड़ोसी देशों से ऊर्जा आपूर्ति के लिए अनुरोध मिले हैं। भारत पहले से ही 2007 से बांग्लादेश को डीजल की आपूर्ति कर रहा है और मौजूदा समय में भी अपनी क्षमता और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पड़ोसी देशों की मदद जारी रखे हुए है।
होर्मुज स्ट्रेट पर संकट का असर
मिडिल ईस्ट में होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री रास्तों में से एक है, जो दुनिया भर में LPG शिपमेंट का एक बड़ा कवर करता है। हाल के तनावों ने इस रास्ते पर शिपिंग में रुकावट डाली है, जिससे सप्लाई चेन पर काफी दबाव पड़ा है। भारत अपनी LPG जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी इलाके से इंपोर्ट करता है, इसलिए दूसरे रास्ते और नए पार्टनर ढूंढना भारत के लिए एक जरूरत बन गई है।
सरकार ने आम लोगों से LPG का उपयोग सोच-समझकर करने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल करने की अपील की है। वहीं, कई राज्यों में कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें छापेमारी और निगरानी बढ़ाना शामिल है। सरकार की कोशिश है कि देश में रसोई गैस की कोई कमी न हो और आम जनता को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
होली के दिन घर पर तरह- तरह की मिठाइयां बनती हैं। इस दिन खासतौर से घर पर गुझिया, मालपुआ, ठंडाई और लड्डू बनाया जाता है। इन चीजों के बिना होली अधूरी लगती है। खासतौर से जिन लोगों को डायबिटीज हैं उन्हें अपनी सेहत का खास ख्याल रखना होता है।
वे त्योहारों में मिठाइयों का लुत्फ नहीं उठा सकते हैं। हम आपको उन तरीकों के बारे में बता रहे हैं जिससे डायबिटीक मरीज बिना चिंता के त्योहार को सेलिब्रेट कर सकते हैं। न्यूट्रीप्लस की डायरेक्टर और सीनियर क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर अंजलि फाटक से जानते हैं कि डायबिटीज के मरीज को क्या करना चाहिए?
सीनियर क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट डॉक्टर अंजलि फाटक के मुताबिक कई लोग त्योहार के दिन ओवरईटिंग कर लेते हैं। ओवरईटिंग से बचना है। आपको अपनी डाइट का पोर्शन कंट्रोल करके खाना है ताकि शुगर का लेवल न बढ़ें।
लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स
डाइट में लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स लें। इन चीजों में शुगर का लेवल कम होता है जिससे ब्लड शुगर में एकदम से उछाल नहीं आता है। इसमें फाइबर वाली चीजों को शामिल करें। इसके अलावा जिन चीजों में हाई लेवल ऑफ प्रोटीन होता है उन चीजों को शामिल करना चाहिए। डाइट में साबूत अनाज को शामिल करें।
होली के त्योहार पर उन मिठाइयों को शामिल करें जो शुगर फ्री हो या फिर स्टीविया के पत्ते से बने मिठाइयों को खाएं। इसके अलावा आप ड्राई फ्रूट्स का लड्डू, बेक्ड स्नैक्स को खा सकते हैं।
खाली पेट मिठाई न खाएं
त्योहार वाले दिन लोग सबसे पहले मिठाई खा लेते हैं। आप ऐसी गलती न करें। अपने दिन की शुरुआत प्रोटीन युक्त डाइट से करें जैसे कि ओट्स, मूंग दाल का चीला, उपमा आदि चीजें खाएं। अगर आप इन चीजों के साथ कुछ मीठा खा रहे हैं तो कोई दिक्कत की बता नहीं है। इसके अलावा जूस से दूरी बनाकर रखें। जूस में हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है जो एकदम से शुगर लेवल को बढ़ाता है।
बाहर की ठंडाई पीने से बचना चाहिए क्योंकि उसमें शुगर का लेवल बहुत ज्यादा होता है। आप घर पर बनी ठंडाई का पिएं। कम मात्रा में पिएं। बाजार की चीजों को खाने से परहेज करें।
आपकी प्लेट में 50% सलाद (हरी-सब्जियां), 25% प्रोटीन (दाल, पनीर, स्प्रॉउट्स)और 25% कॉम्प्लेक्स कार्ब्स (साबूत अनाज, ब्राउन राइस) आदि चीजों को शामिल करें।
इन बातों का रखें ध्यान
एक्सरसाइज जरूर करें
हर मील के बाद 15 मिनट का वॉक जरूर करें
शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। आप शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए नींबू पानी, नारियल पानी, चीया सीड्स को बटरमिल्क के साथ ले सकता है।
शुगर की मात्रा का ध्यान रखें
डाइट में हरी-सब्जियां और फाइबर वाली चीजों को जरूर शामिल करें
इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस करके चलें
दवाएं समय से लें
क्या नहीं लेना है?
रिफाइंड कार्ब्स और चीनी वाली चीजों को खाने से बचना चाहिए।
शराब का सेवन नहीं करना है- शराब पीने से हाइपरग्लेसेमिया की परेशानी हो सकती है। इसका मतलब है शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पा रहा है।
उत्तर प्रदेश के वृंदावन के राधाबाग में स्थित श्री कात्यायनी शक्तिपीठ सिर्फ एक मंदिर नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। इसे माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के हिस्से किए थे, तब इस पावन भूमि पर उनके ‘केश’ यानी बाल गिरे थे। इसी वजह से इसे ‘केश पीठ’ के नाम से भी पूजा जाता है।
इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां शक्ति और भक्ति दोनों एक साथ देखने को मिलती हैं। जहां एक ओर देवी के छठे रूप मां कात्यायनी की अष्टधातु की भव्य प्रतिमा विराजमान है, वहीं दूसरी ओर यहां भगवान शिव, लक्ष्मी नारायण और गणेश जी के भी एक साथ दर्शन कर सकते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में ब्रज की गोपियों ने भगवान श्री कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए इसी स्थान पर यमुना के किनारे कठोर तपस्या की थी। उन्होंने देवी के इस रूप की पूजा कर उन्हें प्रसन्न किया था। इसी चलते आज भी यह परंपरा जारी है। देश-विदेश से श्रद्धालु, विशेषकर कुंवारी लड़कियां, शादी की बाधाओं को दूर करने और मनचाहा जीवनसाथी पाने की मनोकामना लेकर यहां मन्नत मानती है और पूजा करती है।
मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें
मंदिर के मौजूदा स्वरूप की स्थापना स्वामी केशवानंद महाराज के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। नवरात्रि में इस मंदिर की विशेष महत्ता है। यहां इस दौरान नौ दिनों में उत्सव जैसा माहौल रहता है। खासकर छठे दिन मां कात्यायनी की विशेष पूजा होती है।
भारत में देवी कात्यायनी के अन्य प्रसिद्ध मंदिर दिल्ली के छतरपुर और बिहार के खगड़िया में भी स्थित हैं लेकिन वृंदावन का यह शक्तिपीठ अपनी पौराणिकता के लिए विश्व प्रसिद्ध है। लोग ऐसा मानते हैं कि अगर मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश करनी हैं तो वृंदावन का यह सिद्ध स्थान आपके लिए सबसे उत्तम है।
नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और बसीज फोर्स के मुखिया गुलामरेजा सुलेमानी को मारने के बाद इजरायल डिफेंस फोर्सेज ने बुधवार को ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब को हवाई हमले में मार गिराया है। इजरायल का दावा है कि हाल ही में ईरान में भड़के विरोध प्रदर्शन को दबाने में इस्माइल खतीब ने अहम भूमिका निभाई थी। इस्माइल प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और हत्या में शामिल रहा। इसके अलावा इजरायल का आरोप है कि इस्माइल खतीब ने दुनियाभर में अमेरिका और इजरायल के नागरिकों के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की अगुवाई की।
इस्माइल खतीब 2021 में आईआरजीसी में कई अहम पदों पर रहा है। बाद में अली खामेनेई ने उसे खुफिया मंत्री बनाया। ईरानी खुफिया मंत्रालय कई उन्नत खुफिया क्षमताओं से लैस है। वह निगरानी, जासूसी और दुनियाभर में गुप्त अभियानों को अंजाम देने में जुटा था। ईरानी सरकार के आतंक और दमन के पीछे यही मुख्य संगठन था।
इजरायल के मुताबिक 2022-23 में भड़के हिजाब विरोधी प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और हत्याओं में इस्माइल खतीब का हाथ था। इसके अलावा उसने दुनिया भर में इजरायली और अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ ईरानी खुफिया मंत्रालय की आतंकवादी गतिविधियों की अगुवाई भी की।
इजरायल ने हमास के नौसैनिक दस्ते के उत्तरी गाजा ब्रिगेड के कमांडर यूनुस मोहम्मद हुसैन अलियान को मार गिराया है। इजरायल का आरोप है कि हुसैन अलियान इजरायल पर जल्द ही हमले की योजना बना रहा था। पिछले कुछ हफ्तों से ब्रिगेड की क्षमताओं को दोबारा जिंदा करने की कोशिश में जुटा था। आईडीएफ सैनिक की खातिर वह बड़ा खतरा था। इस कारण उसे मारा गया है।
इजरायल ने बुधवार को ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषजद के सचिव अली लारीजानी को एयर स्ट्राइक में मारा था। लारीजानी के निर्देश पर ही ईरान की सेना और आईआरजीसी न केवल इजरायल, बल्कि खाड़ी देशों पर हमले को अंजाम दे रही थी। 28 फरवरी को अली खामेनेई की मौत के बाद अली लारीजानी ही सरकार की अगुवाई कर रहे थे। इजरायल का आरोप है कि हाल ही में प्रदर्शनकारियों के नरसंहार की अगुवाई लारीजानी ने की।
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान सामने आए रोबो डॉग विवाद को लेकर संसद में DMK के सांसद केई प्रकाश ने सवाल पूछे। पूछे गए सवालों पर सरकार का जवाब अब नए सवाल खड़े कर रहा है। लोकसभा में पूछे गए तारांकित प्रश्न संख्या 370 में साफ तौर से रोबो डॉग से जुड़े विवाद, उसकी सत्यता और जिम्मेदारी तय करने जैसे मुद्दे उठाए गए थे, लेकिन सरकार के आधिकारिक जवाब में इन अहम सवालों को सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया। इसके बजाय AI मिशन और भारत की तकनीकी उपलब्धियों का लंबा विवरण दिया गया।
संसद में दिए गए जवाब के अनुसार, रोबो डॉग विवाद का जिक्र केवल एक पंक्ति में किया गया। जिसमें बताया गया कि एक प्रदर्शक गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने रोबोटिक उत्पाद को लेकर भ्रामक दावा किया, जिसके बाद उसे एक्सपो से हटा दिया गया। हालांकि, सवाल में उठाए गए मुख्य बिंदु जैसे उत्पाद की सत्यता की जांच, जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम जैसे मुद्दों पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
सरकार के जवाब में एक और चौंकाने वाली बात यह रही कि भारतीय युवा कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और उस पर दर्ज FIR का चार पंक्तियों में विस्तृत उल्लेख किया गया। जबकि संसद में पूछे गए सवाल में इस विषय का कोई जिक्र नहीं था।
सरकार के जवाब में कहा, ‘भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के लिए समूह ने शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट स्थल पर एक प्रदर्शनी हॉल में शर्ट उतारकर विरोध प्रदर्शन किया।’ जवाब में आगे कहा गया कि पुलिस ने आपराधिक साजिश, एक लोक सेवक को चोट पुहंचाने, गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने और सामान्य इरादे का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज की।
संसद में पूछे गए प्रश्नों का केंद्र रोबो डॉग विवाद था लेकिन सरकार ने अपने जवाब का बड़ा हिस्सा ‘इंडिया AI मिशन’ और देश की AI क्षमताओं के प्रचार में लगा दिया। जवाब में 10,000 करोड़ रुपये के AI मिशन, 38,000 GPU उपलब्ध कराने, 12 बड़े भाषा मॉडल के विकास और भारत के वैश्विक AI नेतृत्व जैसे आंकड़े पेश किए गए।
हालांकि ये आंकड़े तकनीकी प्रगति को दर्शाते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि जब संसद में विशेष रूप से एक विवाद पर जवाब मांगा गया था तो उस पर ठोस जानकारी देने के बजाय उपलब्धियों का हवाला क्यों दिया गया?
पहले हमें लगता था कि बढ़ता तापमान केवल खेती या ग्लेशियरों के लिए खतरा है लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की एक बड़ी आबादी में जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या पर भी इसका असर पड़ रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की हालिया रिसर्च में कई ऐसे दावे किए गए हैं जिसमें यह बात सामने आई है कि ज्यादा गर्मी का सीधा असर इस बात पर पड़ रहा है कि कितने लड़के और कितनी लड़कियां जन्म ले रही हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने भारत और अफ्रीका के 33 देशों में हुए करीब 50 लाख जन्मों के डेटा का बारीकी से अध्ययन किया। इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का असर अब महिलाओं के गर्भाशय तक पहुंच गया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिंगानुपात को प्रभावित कर सकता है।
इस हालिया रिसर्च में सबसे हैरान कर देने वाली बात सामने आई कि जब तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है तो लड़कों के जन्म लेने की दर में गिरावट आने लगती है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि ज्यादा गर्मी प्रेग्नेंट महिला के शरीर पर शारीरिक दबाव बढ़ाती है। इससे फीटस के जीवित रहने की क्षमता प्रभावित होती है, जिसका असर जन्म के समय लड़का-लड़की के अनुपात पर दिखता है।
भारत पर असर
भारत के मामले में यह प्रभाव गर्भावस्था की दूसरी तिमाही के दौरान सबसे ज्यादा देखा गया। खासकर उन महिलाओं में जो अधिक उम्र की हैं या जिनके पहले से कोई बच्चा नहीं है। ऐसी स्थिति में जब बहुत ज्यादा गर्मी पड़ती है, तो लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम हो सकती है।
साथ ही, लिंग चयन से जुड़ी प्रक्रियाएं भी कुछ समय के लिए कम हो सकती हैं। इस वजह से थोड़े समय के लिए लड़के-लड़कियों के अनुपात में जो असंतुलन है, वह थोड़ा कम हो सकता है।
सामाजिक और आर्थिक असमानता का खतरा
यह रिपोर्ट चेतावनी देती है कि गर्मी की मार हर किसी पर एक जैसी नहीं पड़ती। ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाएं, कम पढ़ी-लिखीं और वे परिवार जिनके पास सुख-सुविधाओं के साधन कम हैं, इस बदलाव की चपेट में सबसे ज्यादा आ रहे हैं।
इसमें शामिल मुख्य शोधकर्ता, डॉ. अब्देल घानी ने कहा
तापमान सिर्फ सेहत का मुद्दा नहीं है बल्कि यह तय कर रहा है कि कौन जन्म लेगा और कौन नहीं। यह जनसंख्या के प्राकृतिक संतुलन को हमेशा के लिए बदल सकता है।
क्या होगा भविष्य पर असर?
अगर समय रहते बढ़ती गर्मी और मां के हेल्थ पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह संकट केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रहेगा। यह समाज में नई तरह की लैंगिक और सामाजिक असमानता पैदा कर सकता है। यह रिसर्च साफ करती है कि जलवायु परिवर्तन अब हमारी आने वाली पीढ़ियों की बनावट और सामाजिक स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।
फाल्गुन का महीना है और होलाष्टक की शुरुआत हो चुकी है। हर तरफ रंग नजर आ रहे हैं। कहीं पिचकारियां बिक रहीं हैं, कहीं होली मिलन समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। पूर्णिमा तिथि, अभी कुछ दिन और है। होली का रंगों से अलग, धार्मिक महत्व है। यह पर्व, दशहरा की तरह ही बुराई पर अच्छाई के जीत का प्रतीक है।
होलिका की कथा पौराणिक है। यह ऐसा पर्व है, जब एक तरफ मौसम में नए बदलावों की आमद होती है, दूसरी तरफ, आध्यात्मिक चेतना, अपने चरम पर होती है। रंगों से भरे इस त्योहार में जो लोग, साधना करते हैं, उनके आंतरिक विकार दूर होते हैं।
होली पर कई लोगों के मन में सवाल होते हैं कि कैसे होलिका दहन करें, पूजा और व्रत के नियम क्या हैं, क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए। अगर आपके मन में ऐसे सवाल उठ रहे हैं, तो आज सब जवाब जान लीजए।
आचार्य अशोक पांडेय बताते हैं, ‘होलिका दहन की पूजा होली के पहले शाम को शुभ मुहूर्त में की जाती है। इस वर्ष होलिका दहन शाम 6 बजकर 47 मिनट के बाद किया जा सकेगा। होलिका दहन का शुभ मुहूर्त 3 मार्च 2026 की शाम 6 बजकर 47 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। इस दौरान होलिका दहन कर सकते हैं।’
होलिका दहन की पूजा कैसे करें?
आचार्य अशोक पांडेय ने कहा, ‘होलिका दहन, आमतौर पर लोग बिना विधि-विधान के करने लगते हैं। ऐसा नहीं करना चाहिए। शास्त्र सम्मत होलिका दहन की शुरुआत संकल्प से होती है। विष्णु पुराण और भागवत में होलिका दहन का वर्णन है। उस हिसाब से होलिका दहन की रीति, धार्मिक प्रक्रिया के तहत करनी चाहिए।’
आचार्य अशोक पांडेय:- सबसे पहले होलिका दहन करने वाले व्यक्ति को स्नान कर शुद्ध होकर पूजा स्थल को साफ करना चहिए। गंगाजल से आत्म शोधन की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। पूरब या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर, दहन संकल्प लेना चाहिए। होलिका के पास रोली, चावल, फूल, हल्दी, मूंग, बताशे, गुलाल, नारियल, कच्चा सूत रखना शुभ होता है।
आचार्य अशोक पांडेय ने कहा, ‘संकल्प लें, भगवान विष्णु और भगवान गणेश का स्मरण करें। कच्चे सूत से होलिका की तीन या सात परिक्रमा करें और सूत लपेटें। रोली-चावल से तिलक करें, फूल-धूप-दीप दिखाएं, भोग लगाएं। फिर होलिका में अग्नि दें। परिवार सहित तीन परिक्रमा करें, उबटन लगाएं, आग में अनाज-गुड़ आदि अर्पित कर नकारात्मकता जलाएं। राख घर लाकर लगाएं।’
पंडित मायेश द्विवेदी ने कहा, होली, फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह तिथि, 4 मार्च को पड़ रही है। होली, इसी दिन मानना चाहिए।
होली पर क्या करना चाहिए?
होली का पर्व भक्ति, शुद्धि और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। धार्मिक दृष्टि से होली की पूजा मुख्य रूप से ‘होलिका दहन’ के समय की जाती है।
होली 2026। Photo Credit: PTI
होली पूजा की विधि क्या है?
पंडिय मायेश द्विवेदी ने बताया, ‘होली की पूजा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करनी चाहिए। दैनिक क्रियाओं के बाद, शुद्ध मन से, होलिका दहन वाली जगह पर जाएं। अर्घ्य दें और घर के सुख-समृद्धि की कामना करें। दहन के बाद उसकी अग्नि की लौ देखना और उसकी राख को माथे पर लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। अपने से बड़ों के पैर पर और छोटों के मस्तक तक, राख का टीका लगाएं।’
होलिका को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें, ‘अहकूटा भयत्रस्तै: कृता त्वं होलि बालिशै:। अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम।’
पंडित मायेश द्विवेदी ने कहा कि भगवान नृसिंह ने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी, ठीक वैसे ही, वह हमारी रक्षा करें इसलिए ‘ॐ नृसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्’ मंत्र का जाप करना चाहिए।
होली के दिन शाम को क्या करें?
होली पर आचार्य अशोक पांडेय बताते हैं, ‘होली के बाद, नए संवत्सर की शुरुआत होती है। होली के दिन शाम को पंचांग पढ़ने की रीति रही है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन, पंचांग पढ़ने से, नया साल शुभ होता है, ग्रहों की स्थिति पता चलती है, राशिफल पढ़ा जाता है। सांयकाल में अपने से बड़ों के चरणों में गुलाल लगाना चाहिए, उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। देव स्थानों में जाकर प्रार्थना करनी चाहिए कि नया संवत्सर शुभ हो।’
क्या घर, नुक्कड़ और चौराहों पर खेलने के नियम अलग हैं?
पंडित मायेश द्विवेदी बताते हैं, ‘बुरा न मानो होली है की कहानी फर्जी है। होली अभद्रता नहीं, आत्मनियमन का पर्व है। किसी को इस दिन होली के नाम पर अभद्रता से नहीं छूना चाहिए। जहां तक संभव हो, स्पर्श से बचना चाहिए। मित्रों को रंग लगाएं, बड़ों से आशीर्वाद लें।