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बृहस्पति के दिन रुके हुए सारे काम होंगे पूरे, जानें किन राशियों की बदलेगी किस्मत


ज्योतिष नजरिए से अगर देखा जाए तो हर दिन किसी न किसी राशि के लिए बेहद खास होता है। 12 मार्च, गुरुवार का दिन, मूलांक 3 भी है, जिसके स्वामी खुद  बृहस्पति हैं। जब गुरु का प्रभाव इतना ज्यादा हो और चंद्रमा धनु राशि में गोचर कर रहे हों, तो यह समय नई शुरुआत, पढ़ाई-लिखाई और लंबी यात्राओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता।

 

आज की ऊर्जा हमें पॉजीटिव रहने और बड़े सपने देखने की प्रेरणा दे रही है। अगर आप काफी समय से किसी नए काम की योजना बना रहे थे, तो आज का दिन उसे धरातल पर उतारने के लिए सबसे सटीक है। छोटे-छोटे प्रयास भी आज आपको उम्मीद से बड़ा परिणाम दे सकते हैं।

 

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जानें आपकी राशि का हाल

मेष राशि

किस्मत आपके साथ कदम से कदम मिलाकर चलेगी। नए प्रोजेक्ट हाथ में लें और टीम का नेतृत्व करें।

क्या करें: अच्छे लोगों से सलाह लें। इंवेस्टमेंट की ओर कदम बढ़ाएं।

क्या न करें: गुस्से में कोई फैसला न लें। पुरानी गलतियों को याद न करें।

वृषभ राशि

आर्थिक मोर्चे पर यह दिन राहत भरा है। कुछ ऐसे मौके मिल सकते हैं जिनकी आपने उम्मीद नहीं की थी।

क्या करें: घर-परिवार के साथ वक्त बिताएं। पैसों के लिए सही बजट बनाएं।

क्या न करें: बिना सोचे-समझे पैसे खर्च न करें। फालतू के झगड़ों से दूर रहें।

मिथुन राशि

आज आपकी बातों का जादू चलेगा। लोगों से मिलना-जुलना आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।

क्या करें: मीटिंग्स और बातचीत में एक्टिव रहें, कुछ नया सीखने की कोशिश करें।

क्या न करें: सुनी-सुनाई बातों या अफवाहों पर भरोसा न करें।

कर्क राशि

मानसिक शांति और सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी का दिन है। घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।

क्या करें: बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लें। घर के जरूरी काम निपटाएं।

क्या न करें: अकेले भारी फैसले न लें। भावनाओं में न बहे।

सिंह राशि

आज आपके आत्मविश्वास और साहस का कोई जवाब नहीं। समाज में मान-सम्मान बढ़ने के योग हैं।

क्या करें: बड़े प्रोजेक्ट्स की जिम्मेदारी लें। अपनी कला का प्रदर्शन करें।

क्या न करें: घमंड से बचें और अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें।

कन्या राशि

नौकरी और सेहत के मामले में स्थितियां बेहतर होंगी। अनुशासन में रहकर आप बड़ी जीत हासिल कर सकते हैं।

क्या करें: अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखें और रूटीन चेकअप करवाएं।

क्या न करें: दूसरों की बुराई करने से बचें और बेवजह की चिंता न पालें।

तुला राशि

रिश्तों और पार्टनरशिप के लिए आज का दिन बेहतरीन है। भाग्य आपके हर काम में सहयोग करेगा।

क्या करें: अपने पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं।

क्या न करें: किसी भी बात को टालने की आदत न रखें और विवाद से बचें।

 

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वृश्चिक राशि

आज आपको कुछ ऐसी छिपी जानकारियां मिल सकती हैं जो भविष्य में लाभ देंगी। रिसर्च के काम में सफलता मिलेगी।

क्या करें: सोच-समझकर निवेश करें और अपने काम पर बारीकी से ध्यान दें।

क्या न करें: जल्दबाजी में कोई काम न बिगाड़ें और गुस्से पर काबू रखें।

धनु राशि

आज आप सबसे ज्यादा भाग्यशाली हैं क्योंकि चंद्रमा आपकी ही राशि में हैं। आपके सपने सच होने का समय आ गया है।

क्या करें: लंबी यात्रा की योजना बनाएं और ज्ञान हासिल करने पर जोर दें।

क्या न करें: आलस में न रहे और एक्टिव रहें।

मकर राशि

करियर में मजबूती आएगी। आपकी पुरानी मेहनत का मीठा फल मिलने का समय है।

क्या करें: अधूरे पड़े कामों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करें।

क्या न करें: मन में नकारात्मक विचार न लाएं, खुद पर भरोसा रखें।

कुंभ राशि

दोस्तों और सोशल नेटवर्क के जरिए कोई बड़ी मदद मिल सकती है। समाज में आपकी सक्रियता बढ़ेगी।

क्या करें: नए दोस्त बनाएं और ग्रुप एक्टिविटी में हिस्सा लें।

क्या न करें: खुद को अकेला न रखें, मेलजोल बढ़ाएं।

मीन राशि

धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी और मन शांत रहेगा। कोई अच्छी खबर आपको खुश कर सकती है।

क्या करें: दान-पुण्य करें और आध्यात्मिक गतिविधियों से जुड़ें।

क्या न करें: जरूरी फैसलों को कल पर न टालें, आज ही निपटाएं।

 

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

ईरान को मिल गया अली लारीजानी का उत्तराधिकारी, सामने चुनौतियां कौन-कौन सी?


अमेरिका और इजरायल के साथ संघर्ष के बीच ईरान को राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का नया मुखिया मिल गया है। 17 मार्च को अली लारीजानी की मौत के बाद से यह पद खाली था। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के पूर्व कमांडर मोहम्मद बगेर जोलघाद्र को राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1979 में इस्लामी क्रांति हुई। इसके बाद आईआरजीसी का गठन हुआ। जोलघाद्र तब से आईआरजीसी से जुड़े हैं। सैन्य और सुरक्षा मामलों का गहरा अनुभव रखते हैं। जोलघाद्र ने आठ साल आईआरजीसी ज्वाइंट स्टाफ के तौर पर अपनी सेवा दी। आठ साल तक डिप्टी कमांडर इन चीफ रहे। 2023 में राष्ट्रीय सलाहकार परिषद का सचिव बनाया गया।  

 

अली लारीजानी की मौत के बाद ईरान के शासन व्यवस्था में बड़ा शून्य पैदा हो गया था। युद्ध के बीच ईरान को एक ऐसे शख्स की तलाश थी, जिसे शासन प्रशान के अलावा सैन्य मामलों की भी गहरी समझ हो। उसकी यह तलाश मोहम्मद बगेर जोलघाद्र के तौर पर पूरी हुई। उनके पास इराक के साथ युद्ध लड़ने का भी अनुभव है।

 

जोलघाद्र की सामने चुनौतियां क्या?

  • माना जाता है कि अली लारीजानी की तुलना में जोलघाद्र के पास सैन्य मामलों की अच्छी समझ है। मगर उनके सामने कई चुनौतियां होंगी। अली लारीजानी जहां एक तरफ अमेरिका के खिलाफ बयानबाजी करते थे तो वहीं दूसरी तरफ बातचीत के पक्षधर थे। हाल ही हुई परमाणु वार्ता अली लारीजानी की कोशिश का ही नतीजा थी। अगर जोलघाद्र कूटनीति की जगह सैन्य हस्तक्षेप को अधिक महत्व देते हैं तो यह युद्ध और आगे खिंच सकता है।  

 

  • साल की शुरुआत में भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद ईरान में बड़ी संख्या में लोगों को पकड़ा जा रहा है। इन पर विदेशी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने का आरोप है। वहीं इराक सीमा के नजदीक हमले हो रहे हैं। पश्चिम अजरबैजान प्रांत तक को निशाना बनाया जा रहा है। यह इलाका कुर्दों का है। अमेरिका और इजरायल की पूरी कोशिश यहां ईरानी सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काना है। ऐसे में बाहरी हमलों के बावजूद जोलघद्र के सामने आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। 

 

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का परिचालन सामान्य होगा या नहीं, यह अब जोलघाद्र के रुख पर निर्भर करेगा। खाड़ी देशों के खिलाफ हमले की प्रकृति भी वह ही तय करेंगे। अगर अमेरिका के साथ कोई बातचीत होती है तो उसमें भी जोलघाद्र की भूमिका अहम होगी।  

 

 

 

 

एयरफोर्स का जवान ही बेच रहा था सेना के राज, पाकिस्तान की ISI से लिए पैसे


भारतीय वायु सेना के एक कर्मचारी को पुलिस ने जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह कर्मचारी राजस्थान और वायु सेना की इंटेलिजेंस टीमों की कड़ी निगरानी में थी। पकड़े गए शख्स का नाम सुमित कुमार है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का रहने वाला है। वह असम के चबुआ एयरफोर्स स्टेशन पर काम कर रहा था। जांच में पता चला है कि सुमित पिछले काफी समय से पाकिस्तानी जासूसों के संपर्क में था और उसे भारतीय सेना से जुड़ी बेहद जरूरी और गोपनीय जानकारियां भेज रहा था। 

 

इस जासूसी मामले की शुरुआत जनवरी 2026 में हुई जब राजस्थान पुलिस ने जैसलमेर से झबरा राम नाम के एक आदमी को पकड़ा। झबरा राम से जब कड़ी पूछताछ हुई, तो उसने बताया कि वह एक ऐसे गिरोह का हिस्सा है जो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के लिए काम करता है। उसी की बातों और बताए गए सुरागों के आधार पर जांच सुमित कुमार तक पहुंची। इसके बाद राजस्थान और एयरफोर्स इंटेलिजेंस ने मिलकर जाल बिछाया और सुमित को असम के डिब्रूगढ़ जिले से पकड़ लिया गया। अब उसे आगे की कार्रवाई के लिए जयपुर लाया गया है।

 

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वायु सेना के ठिकानों और मिसाइल की जानकारी लीक

जांच में पता चला है कि सुमित कुमार साल 2023 से ही दुश्मनों के साथ जुड़ा हुआ था। उसने वायु सेना के लड़ाकू विमानों की लोकेशन और मिसाइल सिस्टम से जुड़ी गुप्त बातें पाकिस्तानी एजेंटों को बताई थीं। इसके अलावा उसने राजस्थान के बीकानेर और असम के चबुआ एयरफोर्स स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था और वहां तैनात बड़े अधिकारियों के बारे में भी काफी डेटा लीक किया था। सुमित ने अपने नाम से सिम कार्ड लेकर पाकिस्तानी जासूसों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट भी बनवाए थे ताकि वे आसानी से बातचीत कर सकें।

पैसों के लालच में की गई देश से गद्दारी 

पुलिस की पूछताछ में सुमित ने कबूल किया है कि उसने यह सब पैसों के लालच में किया था। वह सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी जासूसों के जाल में फंसा था। शुरुआत में छोटी बातें बताने के बाद वह धीरे-धीरे उन्हें सेना की हर बड़ी गुप्त जानकारी देने लगा। इसके बदले में पाकिस्तानी एजेंट उसे ऑनलाइन पैसा भेजते थे। यह मामला दिखाता है कि कैसे दुश्मन देश सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके सरकारी कर्मचारी को अपना शिकार बना रहे हैं।

 

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सुमित पर दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने सुमित कुमार पर जासूसी विरोधी कड़े कानूनों यानी ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट और बीएनएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उसे 22 मार्च को जयपुर के स्पेशल पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार किया गया। अब जांच एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि इस जासूसी नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि सुमित ने अब तक देश की सुरक्षा से जुड़ी और किचनी जरूरी जानकारियां दुश्मनों तक पहुंचाई हैं।

आयरन की कमी दूर करने में देसी तरीका क्यों बन रहा है डॉक्टरों की पसंद?


आज के मॉडर्न युग में जहां सप्लीमेंट्स का बोलबाला है, वहीं लोग एक बार फिर अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। लोहे की कड़ाही में खाना पकाना और गुड़, चना व हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे पारंपरिक सुपरफूड्स का सेवन करना अब केवल दादी-नानी के नुस्खे नहीं रहे। कई रिसर्च बताते हैं कि जब हम लोहे के बर्तनों में एसीडिक खाना या सब्जियां पकाते हैं, तो भोजन में आयरन की मात्रा कई गुना बढ़ जाती है, जिसे शरीर को इसे आसानी से सोखने में मदद मिलती है।

 

डॉक्टर और शोधकर्ता इस बदलाव को एक सस्टेनेबल हेल्थ यानी की सतत स्वास्थ्य के रूप में देख रहे हैं। डॉक्टर अब केवल दवाइयों पर निर्भर रहने के बजाय डायट में बदलाव की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त आयरन का अवशोषण शरीर में बेहतर होता है। साथ ही इसके नुकसान, जैसे कब्ज या पेट की समस्या, न के बराबर होते हैं।

 

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डॉक्टर और शोध क्या कहते हैं?

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के विभिन्न अध्ययनों ने पुष्टि की है कि खाने में कई तरह के फायदेमंद चीजों के सेवन से एनीमिया से लड़ने में बहुत मदद मिलती है।
  • वहीं ‘जर्नल ऑफ फूड साइंस’ में छपे एक रिसर्च के अनुसार, लोहे की कड़ाही में खाना बनाने से भोजन में आयरन की मात्रा में 16% से 20% तक की वृद्धि हो सकती है।
  • कई बड़े स्वास्थ्य संस्थान जैसे टाटा ट्रस्ट और ‘द लैंसेट’ आदि ने माना है कि ‘फोर्टिफाइड’ पारंपरिक भोजन, लोहे की कड़ाही में पका भोजन ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हीमोग्लोबिन बढ़ाने में सफल रहा है।

पारंपरिक खान-पान के प्रमुख फायदे

प्राकृतिक अवशोषण: सप्लीमेंट्स की तुलना में भोजन से मिलने वाला आयरन शरीर के अंगों पर दबाव नहीं डालता क्योंकि यह आपके शरीर में नेचुरल तरीके से अवशोषित होने की ताकत रखता है। इसके साथ ही पारंपरिक भोजन में अक्सर नींबू या आंवले का प्रयोग होता है। वैज्ञानिक रूप से, विटामिन C आयरन के अवशोषण को बढ़ा देता है।

 

नेचुरल तरीके से जो भी चीजें उपलब्ध है वह महंगी दवाओं की तुलना में अत्यंत सस्ते और सुलभ है। सिंथेटिक आयरन टैबलेट्स से होने वाली प्रॉब्लम जैसे जी मिचलाने या पाचन की समस्या इसमें नहीं होती।

 

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आयरन बढ़ाने वाले प्रमुख स्रोत

  • इसमें गुड़ और काला चना का प्रयोग सबसे ज्यादा होता है। इसे आयरन और फोलेट का पावरहाउस माना जाता है। यह काफी सस्ता और आसानी से मिलने वाला ऑप्शन है।
  • सहजन या मोरिंगा जिसमें आयरन की मात्रा पालक से भी कहीं अधिक होती है।
  • लोहे की कड़ाही में खाना पकाने के दौरान भोजन में आयरन के कण मिल जाते हैं। 
  • बाजरा और रागीये मोटे अनाज आयरन के समृद्ध स्रोत हैं।

हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि हम अपनी थाली में विविधता लाएं और पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों को अपनाएं, तो एनीमिया जैसी गंभीर समस्या को बिना किसी दवा के जड़ से खत्म किया जा सकता है।

कन्याकुमारी का अनोखा शक्तिपीठ, जहां एक ही शिवलिंग में बसते हैं तीनों देव


तमिलनाडु में कन्याकुमारी के पास एक ऐसा पावन धाम है, जिसे हम ‘शुचींद्रम शक्तिपीठ’ के नाम से जानते हैं। इसे ‘स्थाणु माल अयन’ मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के एक ही शिवलिंग में आपको ब्रह्मा, विष्णु और महेश, तीनों देवताओं के दर्शन एक साथ हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर जा रहे थे, तब यहां उनके ऊपरी जबड़े का दांत गिरा था, जिसके बाद यह स्थान 51 शक्तिपीठों में शामिल हो गया।

 

इस मंदिर के नाम शुचींद्रम के पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। कहा जाता है कि महर्षि गौतम के शाप से मुक्ति पाने के लिए देवराज इंद्र ने इसी स्थान पर स्नान किया था और उन्हें शुचिता यानी पवित्रता प्राप्त हुई थी। आज भी श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां दर्शन और स्नान करने से मन पवित्र हो जाता है और पुराने पापों से मुक्ति मिलती है। यहां माता ‘नारायणी’ के रूप में विराजमान हैं और उनके साथ भगवान शिव ‘संहार भैरव’ के रूप में उनकी रक्षा करते हैं।

 

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मंदिर की कुछ खास बातें

22 फीट ऊंचे हनुमान जी: मंदिर परिसर में भगवान हनुमान की एक विशाल प्रतिमा है, जिसे सिर्फ एक ही पत्थर को तराश कर बनाया गया है। इसकी ऊंचाई और भव्यता देखकर भक्त दंग रह जाते हैं।

 

बोलते हुए संगीत स्तंभ: यहां की नक्काशी इतनी बारीक है कि मंदिर के पत्थर के खंभों को थपथपाने पर उनसे संगीत की मधुर आवाज निकलती हैं। यह प्राचीन भारतीय वास्तुकला का एक बेजोड़ नमूना है।

 

हीरों से चमकती माता: नवरात्रि और चैत्र पूर्णिमा जैसे खास मौकों पर माता नारायणी का श्रृंगार असली हीरों से किया जाता है। उस समय मां का दिव्य रूप देखने लायक होता है।

 

बाणासुर का अंत: लोक मान्यताओं के अनुसार, इसी क्षेत्र में माता ने अत्याचारी राक्षस बाणासुर का वध किया था। यहां माता के मंदिर के पास ही उनकी सखी भद्रकाली का भी मंदिर स्थित है।

 

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कैसे पहुंच सकते हैं?

यह मंदिर कन्याकुमारी-तिरुवनंतपुरम रोड पर स्थित है। अगर आप शांति, अध्यात्म और इतिहास में रुचि रखते हैं, तो यहां की यात्रा आपके लिए एक यादगार अनुभव साबित हो सकती है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

कौन था बिलाल आरिफ सलाफी जिसकी हत्या से लोग जोड़ रहे धुरंधर कनेक्शन?


पाकिस्तान के मुरीदके में ईद के मौके पर एक सनसनीखेज घटना घटी है, जहां आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर बिलाल आरिफ की हत्या कर दी गई। इस हत्या से ज्यादा उसका तरीका चर्चा का केंद्र बन गया है। हत्या के स्टाइल को देखते हुए लोगों ने सोशल मीडिया पर इसे धुरंधर फिल्म से जोड़ना शुरू कर दिया है। जिस तरह बिलाल की हत्या की गई है, उसी तरह का मर्डर सीन धुरंधर फिल्म में दिखाया गया है।

 

21 मार्च को मुरीदके में बिलाल आरिफ मस्जिद से नमाज पढ़कर बाहर आए ही थे कि हमलावरों ने उन पर गोली चलाई और चाकू से कई बार वार किए। हत्या की वजह अभी आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आई है। बिलाल के मर्डर का स्टाइल नया नहीं है, इससे पहले भी इसी तरीके से लोगों की हत्या हो चुकी है। बिलाल आरिफ की मौत के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके कमेंट बॉक्स में लोग कह रहे हैं कि यह धुरंधर फिल्म के मर्डर सीन जैसा है। अब सवाल उठता है कि बिलाल आरिफ कौन है, जिसकी इस प्रकार हत्या की गई है।

 

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कौन है बिलाल आरिफ सलाफी?

 

बिलाल आरिफ सलाफी लश्कर-ए-तैयबा का अहम चेहरा था। वह 2005 में ही इस संगठन से जुड़ा था। संगठन में नए लोगों को शामिल करने और फंडिंग इकट्ठा करने का काम करता था। बिलाल मुख्य तौर पर कई युवाओं को कश्मीर जिहाद नाम की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित कर संगठन में जोड़ चुका था। संगठन में शामिल करने के बाद युवाओं को अपराधी और आतंकी बनाने के लिए ट्रेनिंग देता था। 2005 से अब तक बिलाल अहमद ने कई अपराधों को अंजाम दिया है।

 

बिलाल आरिफ सलाफी कई सालों से पाकिस्तान के मुरीदके में रह रहा था और वहीं उसकी हत्या की गई। मुरीदके को आतंकी संगठन का गढ़ माना जाता है, जहां हमेशा हाई सिक्योरिटी रहती है। इसके बावजूद यहां बिलाल को मौत के घाट उतार दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलावरों ने पहले से प्लानिंग की थी, जिस वजह से हत्या को अंजाम दिया गया।

इस हत्या के बाद अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि किसकी साजिश से इसे अंजाम दिया गया। कई जानकारों का मानना है कि शायद संगठन के दूसरे गुट ने यह हत्या करवाई है।

 

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धुरंधर स्टाइल में की गई हत्या

 

पाकिस्तान के मुरीदके में आतंकी संगठन चैन की नींद सोते थे, लेकिन बिलाल आरिफ की हत्या ने सबकी नींद उड़ा दी है। दिनदहाड़े हुई इस हत्या ने इलाके में दहशत फैला दी है।हत्या के बाद जमीन पर गिरे बिलाल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 

 

 

 

 

वीडियो में देखा जा सकता है कि मर्डर के बाद अफरा-तफरी मच गई है। इस वीडियो को देखने के बाद कई एक्स अकाउंट्स पर लोगों ने कहा है कि यह हत्या बिल्कुल धुरंधर फिल्म के एक सीन जैसी है।

 

 

 एक व्यक्ति ने वीडियो देखकर कहा, ‘धुरंधर की घटना अभी-अभी असल जिंदगी में घटी है, जो अविश्वसनीय है। इसे देखकर बहुत खुशी हुई।’

 

 

किरी नाम के व्यक्ति ने कहा, ‘अज्ञात बंदूकधारी भी धुरंधर 2 की रिलीज का जश्न मना रहे हैं।’

 

 

 

ईशा पूने ने कहा, ‘अभी भी काम चल रहा है। यह मर्डर सीन धुरंधर 3 में आएगा।’

पश्चिम एशिया के संकट से कैसे उबरेगा भारत? लोकसभा में PM मोदी ने बताया


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया के तनाव पर पहली बार संसद में संबोधित दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि प्रभावित देशों में काम कर रहे मिशन, भारतीयों की मदद कर रहे हैं। पर्यटकों से लेकर वहां काम कर रहे लोगों को मदद दी जा रही है। प्रभावित देशों में 24 घंटे निगरानी की जा रही है। सभी प्रभावित देशों को जरूरी जानकारियां दी जा रही है। देश-विदेश में भारतीयों की प्राथमिकता हमारी प्राथमिकता रही है। 3.75 से ज्यादा भारतीय लौट चुके हैं। ईरान से 1 हजार भारतीय सुरक्षित लौटे हैं। 700 से ज्यादा मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, प्रभावित देशों में हर भारतीय को मदद दी गई है। मैंने ज़्यादातर पश्चिम एशियाई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से 2 बार फ़ोन पर बात की है। सभी ने भारतीयों की सुरक्षा का भरोसा दिया है। संघर्ष के दौरान कुछ लोगों की जान गई है और कुछ घायल हुए हैं।’

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नरेंद्र मोदी, प्रधानमत्री:-
‘मैं पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और इस कारण भारत में आई समस्या पर बात रखने के लिए उपस्थित हुआ हूं। वहां हालात चिंताजनक हैं। इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। इससे पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी की हैं।’

पश्चिम एशिया के तनाव को रोकने के लिए भारत क्या कर रहा है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैंने सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है। नागरिक, एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसपोर्ट पर हमला करने की भारत निंदा करता है। ऐसे हमले मंजूर नहीं हैं। मैंने सभी से तनाव कम करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर रोक की अपील भारत करता रहा है। भारत हमेशा से मानवता के हित में और शांति के पक्ष में आवाज उठाता रही है। बातचीत और कूटनीति से ही राह निकालने की कोशिश हो सकती है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:-
एक बड़ा सवाल यह है कि युद्ध का खेती पर क्या प्रभाव होगा। देश के किसानों ने हमारे अन्न के भंडार भर रखे हैं, इसलिए भारत के पास पर्याप्त खाद्यान्न है। हमारा यह भी प्रयास है कि खरीफ सीजन की ठीक से बुआई हो सके। सरकार ने बीते सालों में आपात स्थिति से निपटने के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था भी की है।

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किसानों की सुरक्षा के लिए क्या कर रही है सरकार?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘देश के किसानों को संकट से बचाने के लिए ऐसे कदम उठाए गए हैं। 76 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया उत्पादन भारत कर रहा है। भारत ने तेल और गैस की तरह खाद के आयात को भी बढ़ाया गया है। सरकार ने मैड इन नैनो यूरिया का विकल्प भी दिया है। सरकार किसानों को प्राकृतिक योजना के लिए भी प्रेरित कर रही है। किसानों को 22 लाख से ज्यादा सोलर पंप दिए गए हैं। डीजल पर उनकी निर्भरता कम हुई है। देश के किसानों को भरोसा दिलाता हूं सरकार किसानों की हर संभव मदद करती रहेगी।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘देश के किसानों ने अनाज भंडार भर रखा है। भारत के पास पर्याप्त अनाज है। सरकार ने आपात स्थिति से निपटने के लिए अनाज की पर्याप्त व्यवस्था की है। अतीत में भी भारत सरकार ने किसानों पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ने दिया था। युद्ध के दौरान वैश्विक चेन सप्लाई में बाधा आई थी। दुनिया के बाजार में यूरिया की कीमत 3 हजार पहुंच गई थी, तब भारतीय किसानों को 300 रुपये में यूरिया मिली।’

 

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होर्मुज पर क्या निकाल रहा है भारत?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है। पिछले 11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रॉन्डिग पर अभूतपूर्व काम हुआ है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग कैपसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल बैंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है।’

सरकार का एथेनॉल प्लान क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी:-
एक दशक पहले तक देश में सिर्फ एक से डेढ़ प्रतिशत एथेनॉल बैंडिंग कैपसिटी थी। आज हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल बैंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। इसके कारण प्रति वर्ष करीब साढ़े 4 करोड़ बैरल कम ऑयल इम्पोर्ट करना पड़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘बीते दिनों हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे हमारे कई जहाज भारत आए भी हैं। संकट के इस समय में देश की एक और तैयारी भी है, जो बहुत काम आ रही है। पिछले 11 साल में इथेनॉल के उत्पादन और उसकी ब्रॉन्डिग पर अभूतपूर्व काम हुआ है।’

एंटीबायोटिक बेअसर, सुपरबग के खतरे से 2050 तक 80 लाख मौतों की आशंका


दुनिया भर में दवाओं के बेअसर होने यानी ‘एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस’ (AMR) का खतरा गहराता जा रहा है। दशकों से एंटीबायोटिक दवाओं ने लाखों लोगों की जान बचाई है लेकिन अब ये दवाएं बेअसर हो रही हैं। बैक्टीरिया, वायरस, फंगस जैसे सूक्ष्मजीवों ने खुद को इस तरह विकसित कर लिया है कि वे मौजूदा दवाओं को बेअसर कर देते हैं। हाल ही में आई ‘2026 एएमआर बेंचमार्क’ रिपोर्ट के मुताबिक, अगर हालात नहीं सुधरे तो साल 2050 तक इस वजह से हर साल करीब 80 लाख लोगों की जान जा सकती है। फिलहाल, हर साल लगभग 10 लाख लोग सीधे तौर पर इन सुपरबग्स का शिकार हो रहे हैं।

 

हालिया शोध और एक्सपर्ट्स की चेतावनी के अनुसार, यदि इस ओर तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक हर साल लाखों मौतें होंगी। बुजुर्गों और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों के लिए यह खतरा सबसे अधिक है क्योंकि अस्पताल में मिलने वाले संक्रमण अब दवाओं से ठीक नहीं हो रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि हालांकि कंपनियां लड़ाई लड़ रही हैं लेकिन जिस रफ्तार से बीमारियां दवाओं को बेअसर कर रही हैं, उस मुकाबले नई दवाओं पर रिसर्च बहुत धीमी है।

 

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नई दवाओं की कमी और कुछ उम्मीदें

रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता कमजोर पाइपलाइन को लेकर जताई गई है, जिसका मतलब है कि बाजार में नई एंटीबायोटिक दवाएं बहुत कम आ रही हैं। बड़ी कंपनियां अब इंफेक्शन की दवाओं पर रिसर्च करने से पीछे हट रही हैं, जिसकी वजह से अब छोटी कंपनियों पर जिम्मेदारी बढ़ गई है।

 

द लांसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 1990 से 2021 के बीच AMR की वजह से हर साल 10 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। आने वाले समय में यह आंकड़ा और भी डरावना होने वाला है। अनुमान है कि 2050 तक सुपरबग के कारण होने वाली कुल मौतों का आंकड़ा कई गुना तक पहुंच सकता है।

 

इस पूरे रिसर्च में एक अच्छी खबर यह है कि कुछ कंपनियों ने यूरिन इन्फेक्शन (UTI) के लिए करीब 30 साल बाद एक नई ओरल दवा तैयार की है। साथ ही, गोनोरिया जैसी बीमारी, जिस पर लगभग सभी दवाएं बेअसर हो चुकी थीं, उसके लिए भी नए विकल्प सामने आए हैं।

बच्चों के लिए दवाओं का संकट

रिपोर्ट एक और गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है जिसमें कहा गया है कि बच्चों के लिए बेहतर दवाओं की कमी है। कम आय वाले देशों जैसे अफ्रीका के कई देश में बच्चों के हिसाब से बनी एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध ही नहीं हैं। जब बच्चों को बड़ों वाली या अधूरी दवा दी जाती है, तो बैक्टीरिया और ज्यादा ताकतवर हो जाते हैं और दवाएं उन पर काम करना बंद कर देती हैं।

सुपरबग क्यों बन रहे हैं चुनौती?

  • दवाओं का दुरुपयोग: बिना डॉक्टर की सलाह के छोटी-मोटी बीमारियों (जैसे जुकाम-खांसी) में एंटीबायोटिक लेना।
  • कोर्स अधूरा छोड़ना: दवा का पूरा कोर्स न करने से बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते और दवाओं के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर लेते हैं।
  • पशुपालन में उपयोग: मांस उत्पादन बढ़ाने के लिए जानवरों को दी जाने वाली एंटीबायोटिक दवाएं भोजन के जरिए इंसानों तक पहुंच रही हैं।

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इसका क्या होगा असर?

अगर एंटीबायोटिक काम करना बंद कर दें, तो सिजेरियन डिलीवरी, हिप रिप्लेसमेंट, कैंसर की कीमोथेरेपी और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसी सामान्य प्रक्रियाएं भी जानलेवा हो जाएंगी क्योंकि संक्रमण को रोकने का कोई तरीका नहीं बचेगा।

आगे की राह

विश्लेषण से पता चला है कि 2021 के मुकाबले फार्मा इंडस्ट्री का प्रदर्शन इस क्षेत्र में थोड़ा गिरा है। रिपोर्ट का साफ कहना है कि कोई भी कंपनी या सरकार अकेले इस ‘सुपरबग’ से नहीं लड़ सकती। इसके लिए सरकारों को भी निवेश बढ़ाना होगा और कंपनियों को मुनाफे से हटकर दुनिया को बचाने के लिए नई दवाओं और उनकी सप्लाई पर ध्यान देना होगा।

नेपाल के ‘विदेशी देवता’, कैसे बन गए उत्तराखंड के स्थानीय भगवान?

उत्तराखंड की पहाड़ियों में गूंजती जागर की थाप और देव-डांगरों के नृत्य में नेपाल का इतिहास गहराई से रचा-बसा है। ऐतिहासिक रूप से, डोटी (पश्चिमी नेपाल) और कुमाऊं के बीच पारिवारिक और राजनैतिक संबंध इतने गहरे थे कि वहां के राजकुमार और रक्षक समय-समय पर सीमा पार कर यहां आए। इनमें कई ऐसे थे जिनकी मृत्यु के बाद समाज ने उन्हें दैवीय शक्ति के रूप में अपना लिया। 

 

आज गंगनाथ से लेकर गोरिया तक, इन देवताओं को ‘विदेशी’ नहीं बल्कि घर का बड़ा बुजुर्ग माना जाता है। इनकी पूजा पद्धति में ‘जागर’ का विशेष महत्व है, जिसमें उनके नेपाल से आने के कठिन रास्तों और चमत्कारों का विस्तार से वर्णन किया जाता है। यही कारण है कि हिमालय के इस पार और उस पार की आस्था एक ही धुरी पर टिकी है।

 

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नेपाल से उत्तराखंड तक- प्रमुख देवता

राजकुमार से देवता बने ‘गंगनाथ’

गंगनाथ नेपाल के डोटी के राजकुमार थे। उन्हें वैराग्य हुआ और वह नाथ संप्रदाय में दीक्षित होकर कुमाऊं पहुंचे। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, प्रेम और ईर्ष्या के एक दुखद घटनाक्रम में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनके बलिदान के कारण उन्हें अन्याय के विरुद्ध लड़ने वाला देवता माना गया। आज वह अल्मोड़ा और आसपास के क्षेत्रों में विशेष पूजनीय हैं।

मोष्टामनु (मोष्टा देवता)

मोष्टा को भगवान शिव का अंश माना जाता है, जिनका उद्गम स्थल नेपाल का सिराड़ क्षेत्र है। पिथौरागढ़ में स्थित ‘मोष्टामनु’ मंदिर इसका जीवंत प्रमाण है। इन्हें बारिश और खेती का देवता माना जाता है। नेपाल से आए कत्यूरी और अन्य प्रवासियों के साथ यह आस्था उत्तराखंड पहुंची।

गोलू देवता (गोरिल/गोरिया)

गोलू देवता को कुमाऊं में ‘न्याय का देवता’ कहा जाता है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, वह चम्पावत के राजा झालू राई के पुत्र थे और उनकी वंशावली कत्यूरी राजाओं से जुड़ी है, जिनके तार नेपाल से मिलते हैं। उनकी न्यायप्रियता के किस्से इतने प्रभावी थे कि उन्हें राजसी देवता से लोक देवता बनने में समय नहीं लगा।

 

गोलू देवता, Photo Credit- Wikipedia

ऐरी और कलवा भैरव

ऐरी को शिकार का देवता माना जाता है। इनकी उत्पत्ति का संबंध भी सीमावर्ती क्षेत्रों और नेपाल के जंगलों से जोड़ा जाता है।

कलवा भैरव को गंगनाथ और अन्य देवताओं के साथ रक्षक या द्वारपाल के रूप में पूजे जाते हैं। इनका चरित्र साहसी योद्धाओं का रहा है जो सीमा सुरक्षा और धर्म की रक्षा के लिए नेपाल से पहाड़ों की ओर आए थे।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

‘अमेरिका ने हमला किया तो भारत पर हमला कर देना है..’, अब्दुल बासित ने क्यों कहा?


पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने भारत के खिलाफ एक बार फिर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है तो इस्लामाबाद बिना किसी हिचकिचाहट के भारत के कई प्रमुख शहरों को निशाना बना सकता है। उन्होंने यहां तक कहा मुंबई पर ही मिसाइल दाग देनी चाहिए।|

अब्दुल बासित ने कहा कि यह सबसे खराब स्थिति हो सकती है। उन्होंने कहा था कि वह ऐसा नहीं चाहते, लेकिन ऐसी स्थिति में भारत उनका  डिफॉल्ट लक्ष्य होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका या इजरायल पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम पर हमला करने की स्थिति में भी यही रास्ता अपनाएगा। पाकिस्तान अमेरिका तक नहीं पहुंच सकता है।

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अब्दुल बासित, पूर्व उच्चायुक्त, पाकिस्तान:-
‘अगर अमेरिका पाकिस्तान पर हमला करता है तो हमें भारत पर हमला करना होगा। हमारे मिसाइल अमेरिका तक नहीं पहुंच सकतीं, लेकिन हम भारत में मुंबई और नई दिल्ली पर बिना किसी दूसरी सोच के हमला करेंगे। हम इसे नहीं छोड़ेंगे, बाद में जो होगा देखा जाएगा।’

पाकिस्तान को उकसा रहे अब्दुल बासित?

यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव चरम पर है। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हो गई थी। देश के आम नागरिकों को निशाना बनाया गया था। इस हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ढांचे पर हमले किए गए। 

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ऑपरेशन सिंदूर का सबक भूल रहा पाकिस्तान?

भारत ने इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज्बुल मुजाहिदीन के कई ठिकानों को तबाह किया था। हमले में 100 से ज्यादा आतंकियों को मारा गया था। 

कौन हैं अब्दुल बासित?

अब्दुल बासित 2014 से 2017 तक भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके हैं। भारत और पाकिस्तान के संबंध, तब भी तनावपूर्ण थे। उनके बयान ने एक बार फिर क्षेत्रीय चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत सरकार ने अभी तक इस बयान पर कोई जवाब नहीं दिया है। लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं।