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900 से अधिक मंदिरों का पहाड़, लेकिन सूरज ढलते ही क्यों छा जाता सन्नाटा?


गुजरात के पालिताना में स्थित शत्रुंजय पहाड़ी को ‘सिद्धक्षेत्र’ माना जाता है। यहां पत्थरों को तराश कर बनाए गए 863 से लेकर 900 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं। सफेद संगमरमर से बने ये मंदिर वास्तुकला का अद्भुत नमूना पेश करते हैं। जैन धर्मावलंबियों के लिए यह सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है, जहां प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव ने तपस्या की थी।

 

इस पहाड़ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे ‘देवताओं का शहर’ कहा जाता है। यहां की सीढ़ियां चढ़ना और इन मंदिरों के दर्शन करना मोक्ष का द्वार माना जाता है लेकिन जैसे ही सूरज ढलने लगता है, इस पूरे इलाके का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार रहने वाला यह पहाड़ शाम होते ही एकदम सुनसान हो जाता है।

 

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सूरज ढलते ही सन्नाटा क्यों?

शत्रुंजय पहाड़ी पर सूर्यास्त के बाद सन्नाटा छाने के पीछे गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक कारण है। जैन धर्म में ‘अहिंसा’ को सर्वोपरि माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, रात के समय सूक्ष्म जीव और कीड़े अधिक सक्रिय हो जाते हैं। अंधेरे में अनजाने में भी किसी जीव की हत्या न हो, इसलिए यहां रात में ठहरना सख्त मना है।

नियम और परंपराएं

  • शाम की आरती के बाद सभी पुजारियों और भक्तों को पहाड़ से नीचे उतरना पड़ता है। रात के समय यहां केवल ‘देवताओं का वास’ माना जाता है।
  • इस पवित्र पर्वत पर कुछ भी खाना या साथ ले जाना वर्जित है। भक्त नीचे से ही उपवास रखकर ऊपर जाते हैं।
  • पालिताना को दुनिया का पहला आधिकारिक शाकाहारी शहर घोषित किया गया है, जहां मांस और अंडे की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध है।

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प्रमुख मंदिर और वास्तुकला

यहां का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर भगवान आदिनाथ का है। मंदिरों का निर्माण 11वीं शताब्दी से शुरू हुआ था और पीढ़ी दर पीढ़ी इसे भव्य बनाया गया। नक्काशी इतनी बारीक है कि इसे देखकर प्राचीन भारतीय शिल्प कौशल की श्रेष्ठता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

कतर में सैन्य हेलीकॉप्टर क्रैश, 6 की मौत एक गायब, तकनीकी खराबी या कुछ और है वजह?


कतर में एक सैन्य हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया है जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई है और एक शख्स का अभी तक पता नहीं चल पाया है। रक्षा मंत्रालय ने रविवार को इस बात की जानकारी दी। बताया जा रहा है कि उसमें तकनीकी खराबी आने की वजह से क्रैश हुआ।

 

रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘कतर के एक हेलीकॉप्टर की रूटीन ड्यूटी के दौरान तकनीकी खराबी आई, जिससे वह देश के ही टेरिटोरियल वॉटर में गिर गया।’ हालांकि, अभी तक क्रैश के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

 

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बचाव कार्य जारी

कतर के गृह मंत्रालय ने कहा कि विशेष टीमें बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। ये टीमें देश के तटीय और सीमा सुरक्षा महानिदेशालय की समुद्री खोज-बचाव टीम और आंतरिक सुरक्षा बल (लेखविया) की कतर इंटरनेशनल सर्च एंड रेस्क्यू ग्रुप के साथ मिलकर काम कर रही हैं। बचाव अभियान जारी है।

 

यह हादसा तब हुआ है जब मध्य-पूर्व में तनाव बहुत बढ़ गया है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर समेत कई बड़े अधिकारी मारे गए थे।

ईरान ने किए हमले

ईरान ने जवाब में इज़रायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। साथ ही अमेरिकी सैन्य अड्डों और खाड़ी देशों (जैसे कतर, बहरीन, कुवैत, यूएई, जॉर्डन और सऊदी अरब) में उनके सहयोगी ठिकानों पर भी हमले किए। ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए बंद कर दिया है, जो दुनिया के लिए तेल की बहुत महत्वपूर्ण राह है।

 

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अभी तक कतर के इस हेलीकॉप्टर हादसे को क्षेत्रीय संघर्ष से जोड़कर नहीं बताया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ तकनीकी खराबी की वजह से हुआ। लेकिन पूरा इलाका तनाव से भरा हुआ है।

‘रोको, टोको और ठोको’, गोरक्षा के नाम पर कैसी सेना बना रहे अविमुक्तेश्वरानंद?


 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने वाराणसी में एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि चतुरंगिणी सेना का गठन किया गया है। इसके लिए श्रीशंकराचार्य ने 27 सदस्यीय एक चतुरंगिणी सभा का गठन किया है। उन्होंने इस सेना के काम करने के तरीके के बारे में बात करते हुए कहा कि रोको टोको और ठोको की तर्ज पर काम करेगी। यह सेना आगे चलकर गोरक्षा के लिए काम करेगी। उन्होंने बताया कि यह पहल हिंदू समाज में फैले भय को दूर करने और सत्य के साथ खड़े होने का साहस पैदा करने के लिए की जा रही है।

 

इस सेना का ड्रेस कोड पीला वस्त्र और हाथ में परशु होगा।  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बताया कि चतुरंगिनी सेना में सैनिकों की संख्या 2 लाख 18 हजार के करीब होगी, जिसमें महिलाओं की भागीदारी भी होगी। इस सेना के पास अस्त्र-शस्त्र भी होंगे।  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती  ने कहा कि इस सेना में हर एक सनातनी की भागीदारी होगी। सेना के सैनिक फरसे,लाठी, तलवार और एयर बंदूकों से लैस होंगे, जो साधु-संतों के साथ-साथ सामान्य सनातनी हिन्दुओं के अधिकारों की रक्षा करेगी।

 

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10 महीने में बन जाएगी सेना

 शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस सेना का एलान करते हुए बताया कि यह सेना 10 महीने में धरातल पर उतर जाएगी। इसके लिए उन्होंने 2 लाख 18 हजार 700 सदस्य बनाने का टारगेट रखा है। उन्होंने कहा कि 27 सदस्यों वाली चतुरंगिणी सभा अगले 10 महीनों के भीतर विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रूप से काम करती हुई नजर आएगी और लोगों के बीच विश्वास व सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगी। 

गौ रक्षा के लिए करेगी काम

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपने प्लान के बारे में बताते हुए कहा कि इस सेना का आगे विस्तार किया जाएगा और यह सेना गौरक्षा के लिए काम करेगी। उन्होंने कहा कि चतुरंगिणी सेना को गौ रक्षा के लिए विस्तारित करने की योजना है। 

टोको, रोको और ठोको पर क्या बोले?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि आज के समय में हिंदू समाज में कई लोग भय के कारण सच का साथ नहीं दे पाते और मजबूरी में गलत का समर्थन करने लगते हैं। ऐसे में चतुरंगिनी सेना का मुख्य उद्देश्य निर्बलों का बल बनना और समाज में न्याय स्थापित करना होगा। उन्होंने बताया कि संगठन के काम करेने का तरीका ‘टोको, रोको और ठोको होगा।’ हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले किसी गलत काम को टोका जाएगा और फिर उसको रोकने की कोशिश की जाएगी। अगर फिर भी कोई गलत काम करेगा तो उसे ठोका जाएगा और ठोकने का मतलब उसे मारना नहीं है। उन्होंने कहा कि ठोकने का मतलब उसकी शिकायत करना और कानूनी कार्रवाई करना है। 

 

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फरसे को लेकर क्या बोले?

फरसा को लेकर जब अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि यह भगवान परशुराम जी ने धारण किया था। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम ने पहले वेदों का अध्ययन किया और पपस्या में जीवन बिताया। उनके आश्रम में गाये थीं और जब सहस्त्रार्जुन नामक राजा ने उन पर आक्रमण कर गायों को कष्ट पहुंचाया, तब उन्होंने उनकी रतक्षा के लिए फरसा धारण किया। 

7 से 8 घंटे की नींद के बाद भी क्यों महसूस होती है थकान?


हर व्यक्ति को 7 से 8 घंटे तक सोना चाहिए। नियमित मात्रा में नींद लेने से शरीर स्वस्थ रहता है। कई लोग इस सलाह को मानते हैं कि इसके बावजूद थका हुआ महसूस करते हैं। आलर्म बजते ही हम उठ तो जाते हैं लेकिन दिमाग सुस्त महसूस करता है। ऐसा लगता है कि शरीर को बिल्कुल भी आराम नहीं मिला है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर लोग इस बात को गंभीरता से नहीं लेते हैं। नींद की गुणवत्ता का हमारा सेहत पर गहरा प्रभाव पड़ता है। आइए जानते हैं कि कारणों से नींद पर प्रभाव पड़ता है।

 

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 क्यों महसूस होती है थकान?

थायराइड इंबैलेंस

 

थायराइड ग्लैंड हमारे गले में पाया जाता है जो शरीर में एनर्जी को बनाएं रखने में मदद करता है। जब थायराइड एक्टिव नहीं होता है तो उसे हाइपोथायरडिज्म कहा जाता है। इस दौरान शरीर में मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है।

 

लक्षण

  • लगातार थकान
  • एकदम से वजन बढ़ना
  • ठंडक महसूस होना

यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के मुताबिक हाइपोथायराडिज्म शरीर के मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है और पर्याप्त नींद के बाद भी थकान महसूस होती है।

विटामिन की कमी

विटामिन की कमी की वजह से भी शरीर में एनर्जी महसूस नहीं होती है। जब शरीर में विटामिन और मिनरल्स की कमी होती है तब शरीर भोजन का इस्तेमाल एनर्जी बनाने के लिए करता है।

 

विटामिन बी12 की कमी
विटामिन डी की कमी
आयरन की कमी

 

विटामिन बी12 रेड ब्लड सेल्स को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शरीर में खून की कमी के कारण ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नसों में नहीं पहुंचेगा। इस वजह से थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। विटामिन डी की कमी की वजह से इम्यून फंक्शन भी प्रभावित होता है। इसकी कमी के कारण थकान महसूस होती है। 

 

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तनाव बढ़ना

नींद की कमी सिर्फ शरीर को ही नहीं दिमाग को भी प्रभावित करता है। जब शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का लेवल बढ़ता है तो दिमाग नींद के दौरान भी सतर्क रहता है। शरीर शारीरिक रूप से आराम कर सकता है लेकिन मन चिंताओं और तनाव से भरा रहता है। अधिक तनाव की वजह से शरीर में शुगर का लेवल बढ़ता है।

इन आदतों से नींद पर पड़ता है प्रभाव

  • रात को देर तक फोन चलाना।
  • रात को अधिक खाना खा लेना।
  • अनियमिक स्लीप शेड्यूल
  • अधिक मात्रा में कॉफी पीना

नींद को कैसे बेहतर करें?

  • टाइम से सोना। 
  • रात को सोने से आधे घंटे पहले फोन बंद कर दें।
  • सुबह उठकर नियमित मात्रा में एक्सरसाइज करें।
  • रात को कॉफी या चाय का सेवन करने से बचें।

18 या 19, कब से शुरू हो रही है नवरात्रि? सही तारीख जान लीजिए


अगर आप चैत्र नवरात्रि 2026 की सही तारीख को लेकर परेशान हैं तो अब सारा भ्रम दूर कर लीजिए। इस साल चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 19 मार्च 2026, गुरुवार से होने जा रही है। खास बात यह है कि इसी दिन से हिंदू कैलेंडर का नया साल (विक्रम संवत 2083) भी शुरू होगा। होली बीतते ही लोग अब माता रानी के स्वागत की तैयारियों में जुट गए हैं। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने का सबसे बड़ा महत्व है और माना जाता है कि अगर शुभ मुहूर्त में पूजा की जाए, तो माता रानी की विशेष कृपा मिलती है।

 

नवरात्रि का पहले दिन कलश स्थापना, सबसे अहम है। इसे आसान भाषा में मां दुर्गा को अपने घर बुलाने का तरीका माना जाता है। इस बार 19 मार्च को कलश रखने के लिए दो अच्छे समय हैं। सुबह का मुहूर्त 6:11 बजे से 8:35 बजे तक है। अगर आप सुबह जल्दी पूजा नहीं कर पाते है, तो दोपहर में ‘अभिजीत मुहूर्त’ सबसे बढ़िया है। इसका समय 12:05 बजे से 12:53 बजे तक रहेगा। नवरात्रि की पहली तिथि 18 मार्च की रात 9:34 बजे से शुरू होगी और 19 मार्च की रात 10:15 बजे खत्म होगी।

 

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कलश स्थापना क्यों की जाती है?

कलश स्थापना नवरात्रि का सबसे जरूरी हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश को पूरे ब्रह्मांड का रुप माना जाता है और इसमें सभी देवी-देवताओं का वास होता है। इसे स्थापित करने का अर्थ है मां दुर्गा का अपने घर में आदर के साथ स्वागत करना और उन्हें नौ दिनों तक विराजमान होने की प्रार्थना करना। कलश को सुख, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे हमेशा शुभ मुहूर्त में ही रखना चाहिए।

पालकी पर बैठकर आएंगी मां दुर्गा

हर बार की तरह इस बार भी लोग जानना चाहते हैं कि माता रानी किस सवारी पर आएंगी। क्योंकि इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए मां दुर्गा ‘पालकी'(डोली) पर बैठकर आ रही हैं। ज्योतिष के अनुसार, पालकी पर आना खुशहाली तो लगता ही है, साथ ही यह शांति और सावधानी से काम लेने का इशारा भी है। वहीं जब नवरात्रि खत्म होगी, तो मां ‘हाथी’ पर सवार होकर विदा होंगी। हाथी पर विदाई को अच्छी बारिश और सुख-समृद्धि का संकेत माना जाता है।

 

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पूजा के वक्त इन बातों का रखें ध्यान 

शास्त्रों की मानें तो कलश हमेशा शुभ समय देखकर ही बैठना चाहिए। पूजा करते समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग जैसे समय का ध्यान रखें और इनसे बचें। कलश को पूरे संसार का रुप माना जाता है जिसमें सारे देवी-देवता बसते है। इसलिए इसे पूरी सफाई और नियम के साथ स्थापित करें। चैत्र महीने की ये नवरात्रि न सिर्फ भक्ति का पर्व है, बल्कि यह नए साल की नई शुरुआत का भी संदेश देती है।

फंसा या फंसाया गया? अमेरिकी मूल के जज पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस


अमेरिका में भारतीय मूल के एक जज मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले में दोषी ठहराए गए हैं। केपी जॉर्ज को चुनाव प्रचार से संबंधित मामले में मनी लॉन्ड्रिंग करते हुए पकड़ा गया है। केपी जॉर्ज मूल रूप से केरल के रहने वाले हैं। 2018 में वह टेक्सास के फोर्ट बेंड काउंटी के जज चुने गए थे और इस पद तक पहुंचने वाले पहले भारतीय व्यक्ति थे। उन पर चुनाव प्रचार के दौरान धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप लगे थे।

 

कोर्ट में वकीलों ने दावा किया है कि केपी जॉर्ज ने अपने राजनीतिक विरोधियों को नीचा दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट्स का सहारा लिया और चुनावी चंदे का इस्तेमाल अपने निजी लाभ के लिए किया। दोषी ठहराए जाने के बाद केपी जॉर्ज को जज के पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है साथ ही उन्हें 10 साल तक की जेल की सजा भी हो सकती है।

 

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क्या है पूरा मामला?

टेक्सास की एक कोर्ट में जज केपी जॉर्ज के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। जहां एक तरफ अभियोजन पक्ष (सरकारी वकील) ने आरोप लगाया है कि केपी जॉर्ज ने चुनावी फंड को अपनी निजी जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया। इसके अलावा अभियोजन का दावा है कि केपी ने अलग-अलग राज्यों में अलग खातों में पैसे ट्रांसफर किए। वहीं दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वकीलों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि विपक्षी पक्ष के पास अधूरी जानकारी है। केपी जॉर्ज ने गैरकानूनी तरीके से पैसों का इस्तेमाल नहीं किया है।

सजा मिली तो क्या हो सकता है?

अभियोजन पक्ष धोखाधड़ी के आरोप कोर्ट में साबित नहीं कर पाया है लेकिन जूरी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केपी जॉर्ज को दोषी ठहराया है। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें 10 साल की जेल की सजा और भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। सजा सुनाए जाने के बाद से ही उन पर पद से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ गया है। हालांकि उन्होंने शुरुआत में इन आरोपों को राजनीतिक रंजिश बताया था। कानून के मुताबिक दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें तुरंत पद से हटाया जा सकता है।

 

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भारतीय लोगों पर असर

केपी जॉर्ज की जीत को कभी अमेरिका में भारतीयों की बढ़ती राजनीतिक ताकत के रूप में देखा गया था लेकिन अब इस सजा ने वहां के भारतीय मूल के लोगों को स्तब्ध कर दिया है।

पिछले 10 सालों में 11 एयरलाइंस बंद, कहां आई दिक्कत? जानिए वजह


देश में विमानन क्षेत्र को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पिछले 10 वर्षों में भारत की 11 एयरलाइंस विभिन्न कारणों से बंद हो चुकी हैं। यह जानकारी सरकार ने राज्यसभा में दी। जिससे साफ होता है कि एविएशन सेक्टर में चुनौतियां लगातार बनी हुई हैं।

 

साकेत गोखले ने राज्यसभा में एयरलाइन की नाकामियों पर सवाल उठाए थे। जिसका जवाब 23 मार्च को नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने लिखित में दिया। अपने जवाब में मुरलीधर मोहोल ने बताया कि एयरलाइंस क्यों बंद हुईं। यह भी बताया कि विमानन क्षेत्र पूरी तरह बाजार आधारित है और एयरलाइंस अपने व्यावसायिक निर्णय खुद लेती हैं।

 

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क्यों बंद हुई कंपनियां?

सरकार के मुताबिक, एयरलाइंस के बंद होने के पीछे तीन मुख्य कारण रहे हैं पहला भारी वित्तीय दबाव, दूसरा विमानों की अनुपलब्धता और तीसरा कंपनियों के भीतर के आंतरिक मुद्दे। कई कंपनियां ईंधन की बढ़ती कीमतों और कम किराए के बीच तालमेल नहीं बैठा सकीं, जिससे उनका कर्ज बढ़ता गया।

 

इसके अलावा, सरकार ने यह भी बताया कि एयरएशिया इंडिया और विस्तारा जैसी बड़ी कंपनियां खत्म नहीं हुईं, बल्कि उन्हें एयर इंडिया एक्सप्रेस और एयर इंडिया लिमिटेड में विलय कर दिया गया है। ताकि वे एक बड़ी कंपनी के तौर पर ज्यादा अच्छा से काम कर सकें।

 

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किंगफिशर पर अभी भी करोड़ों रुपये बकाया

बंद हो चुकी कंपनियों के बकाए को लेकर सरकार ने चौकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की ‘किंगफिशर एयरलाइंस’ ने भले ही 2012 में उड़ान बंद कर दी थी लेकिन भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI) के 380.51 करोड़ रुपये आज भी उस पर बकाया हैं। यह मामला फिलहाल बेंगलुरु के आधिकारिक लिक्विडेटर के पास लंबित है। वहीं, ‘ट्रूजेट’ पर 0.03 करोड़ रुपये बकाया हैं। राहत की बात यह है कि जेट एयरवेज और हाल ही में बंद हुई गो फर्स्ट का AAI पर कोई बकाया दर्ज नहीं है।

पूरी तरह से लड़की बनीं अनाया बांगर, वैजिनोप्लास्टी सर्जरी करवाई, क्या होता है?


पूर्व क्रिकेटर संजय बांगड़ की बेटी अनाया अब पूरी तरह से लड़की बन गई हैं। उन्होंने हाल ही में बताया था कि वह बैंकॉक में जेंडर अफर्मिंग सर्जरी करवाने वाली हैं। इस प्रक्रिया में वजाइना को क्रिएट किया जाता है। सोशल मीडिया पर वैजिनोप्लास्टी को लेकर काफी चर्चा हो रही थी। आइए जानते हैं इस सर्जरी की जरूरत किन लोगों को पड़ती है? इस सर्जरी को करवाने में कितना खर्च आता है?

 

वैजिनोप्लास्टी में सर्जरी के जरिए वजाइना को बनाया जाता है। अगर वैजाइना ठीक से नहीं बनी है तो यह सर्जरी करवाने की जरूरत पड़ती है। इस सर्जरी को ट्रांसजेंडर महिलाएं भी करवाती हैं जिससे उनके शरीर में सर्जरी की मदद से वजाइना बनाया जाता है। कुछ महिलाओं में जन्म से ही वैजाइना ठीक से डेवलप नहीं होता है वे भी वैजिनोप्लास्टी करवाते हैं। यह एक लंबी प्रकिया है। इस प्रकिया में प्राइवेट पार्ट की त्वचा को वजाइना का रूप दिया जाता है।  इस सर्जरी के बाद दवाइयां चलती हैं और मरीज को ठीक होने में कुछ हफ्तों का समय लग जाता है।

 

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वैजिनोप्लास्टी कितने प्रकार का होता है?

वैजिनोप्लास्टी अलग-अलग कारणों से होती है। इसके कई प्रकार हैं।

  • रिकंस्ट्रक्टिव वैजिनोप्लास्टी- अगर किसी महिला की योनी में जन्मजात दिक्कत है या खराब संरचना हो गई है तो शरीर के दूसरे अंगों से स्किन लेकर उसे ठीक किया जाता है।
  • कॉस्मेटिक वैजिनोप्लास्टी- महिलाओं में उम्र बढ़ने या डिलीवरी के बाद वैजाइना में ढीलापन आ जाता है। इस प्रकिया की मदद से योनी में कसावट को बनाया जाता है। 
  • जेंडर अफर्मिंग वैजिनोप्लास्टी- इस सर्जरी में योनी का निर्माण किया जाता है। अनाया बांगर ने हाल ही में यही सर्जरी करवाई है। उनकी सर्जरी सफल रही थी।
  • वल्वोपलास्टी- इसमें योनी के ऊपरी भाग को बनाया जाता है। गहराई वाले भागों को नहीं बनाया जाता है।

सर्जरी से पहले कौन से चेकअप किए जाते हैं?

  • सबसे पहले मरीज का फिजिक्ल टेस्ट, बायोमेट्रिक और ब्लड टेस्ट किया जाता है।
  • डॉक्टर मरीज को सभी प्रकार के रिस्क के बारे में जानकारी देता है।
  • इस सर्जरी से पहले हार्मोन थेरेपी कराने की सलाह दी जाती है।
  • सिगरेट, शराब और कुछ दवाइयों को नहीं लेने की सलाह दी जाती है।

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वैजिनोप्लास्टी सर्जरी के बाद क्या रिस्क होते हैं?

वैजिनोप्लस्टी करवाने के बाद रिस्क फैक्टर्स बढ़ जाते हैं। Cleveland Clinic के मुताबिक वैजिनोप्लास्टी के बाद इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग जल्दी रिकवर कर जाते हैं। कुछ लोगों को समय लगता है।

  • सर्जरी के बाद इंफेक्शन और ब्लड फ्लो का खतरा बढ़ सकता है।
  • सूजन और दर्द की समस्या।

कितना खर्च आता है?

वैजिनोप्लास्टी की सर्जरी का खर्च डॉक्टर के अनुभव, केस की जटिलता और किस जगह पर हो रहा है? इन सभी बातों पर निर्भर करता है। इस सर्जरी में 3 से 10 लाख तक का खर्च आता है। इस तरह की सर्जरी की क्वालिफाइड प्लास्टिक सर्जन से ही करवाएं।

 

कम पैसे में कैसे करें बद्रीनाथ धाम की यात्रा? तरीका जानिए


बद्रीनाथ धाम हिंदू धर्म के लोगों के लिए बेहद पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। बद्रीनाथ में यात्रा करने दूर-दूर से लोग आते हैं, क्योंकि यह चार धामों में से एक है। कई लोग ऐसे भी हैं जो आर्थिक तंगी की वजह से बद्रीनाथ यात्रा नहीं कर पाते हैं। उन लोगों के लिए बद्रीनाथ की यात्रा केवल एक सपना बनकर रह जाती है।

 

कई लोगों को लगता है कि बद्रीनाथ की यात्रा करने में आराम से 10,000 रुपये लग जाएंगे। हालांकि कम पैसों में भी बद्रीनाथ की यात्रा की जा सकती है। अब सवाल उठता है कि कम पैसों में बद्रीनाथ की यात्रा कैसे हो पाएगी।

 

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कम बजट में कैसे करें यात्रा?

दिल्ली से बद्रीनाथ धाम लगभग 516 किलोमीटर दूर है, जहां कई लोग कार से जाते हैं। अगर हम बस से जाएं तो 700 से 1200 रुपये देकर बद्रीनाथ पहुंच सकते हैं। इसके बाद बद्रीनाथ पहुंचने के बाद धर्मशाला में ठहर सकते हैं, साथ ही भंडारे में भोजन कर सकते हैं। इससे व्यक्ति कम पैसों में ही सफल यात्रा कर सकता है।

कैसे जाएं?

दिल्ली से बद्रीनाथ सड़क के रास्ते जाने में लगभग 14 से 15 घंटे लगते हैं। अगर बजट कम है तो बस से बद्रीनाथ जाना सबसे सही विकल्प है। दिल्ली से बद्रीनाथ बस से जाने पर केवल 700-1200 रुपये खर्च होंगे, जबकि कैब से जाने पर लगभग 6000 से 16000 रुपये तक लग सकते हैं।


दिल्ली से बद्रीनाथ जाने के लिए हमें दिल्ली के कश्मीरी गेट अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) जाना होगा। उसके बाद ISBT पर जाकर बद्रीनाथ की टिकट बुक करनी होगी। फिर समय के अनुसार बस के जरिए बद्रीनाथ पहुंच सकते हैं।

 

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होटल की जगह धर्मशाला में ठहरें

बद्रीनाथ मंदिर के पास कई धर्मशालाएं हैं, जहां रहने का किराया बड़े होटलों की तुलना में बहुत कम होता है। बद्रीनाथ मंदिर के पास भवन आश्रम, बंगुर भवन और जालाराम आश्रम नाम की धर्मशालाएं हैं। इन आश्रमों का किराया 500 से 1500 रुपये के बीच हो सकता है। इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने बद्रीनाथ घूमने आए लोगों के लिए सस्ती होटल सुविधा भी दी है, जो प्राइवेट होटल की तुलना में कम कीमत में मिलती है।


GMVN यात्री निवास- यह उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाया गया है। जीएमवीएन यात्री निवास में अक्सर लोग एक रात के लिए ठहर सकते हैं। यहां लोगों को रात का भोजन भी दिया जाता है। यहां रहने का प्रतिव्यक्ति खर्च लगभग 600-700 रुपये होता है।

खाना कहां खाएं?

बद्रीनाथ धाम में कई संस्थान भंडारा करते हैं, जहां जाकर लोग भोजन कर सकते हैं और अपनी इच्छा के अनुसार दान पेटी में रुपये दे सकते हैं। हालांकि भंडारे में भोजन निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।

पाकिस्तान में सिख छात्रा की पिटाई, जबरन उतारी पगड़ी; जानें पूरा मामला


पाकिस्तान के फैसलाबाद जिले से एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एक सिख छात्रा के साथ कथित तौर पर मारपीट और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटना हुई है। बताया जा रहा है कि वारिसपुरा इलाके के सेंट कैथरीन गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ने वाली इस छात्रा को जबरन ईसाई प्रार्थना में शामिल होने के लिए कहा गया।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्रा ने जब प्रार्थना में शामिल होने से इनकार किया तो स्कूल के स्टाफ ने उसके साथ मारपीट की और उसकी पगड़ी जबरन उतार दी। सिख धर्म में पगड़ी को सम्मान और आस्था का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इस घटना से सिख समुदाय में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है।

 

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मां ने लगाए गंभीर आरोप

पीड़ित छात्रा की मां ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी बेटी को पेट में लात-घूंसे मारे गए। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी अस्थमा की मरीज है और घटना के दौरान उसकी हालत बिगड़ गई थी। जब उसकी बहन मदद के लिए आगे आई तो शिक्षकों ने उसे रोक दिया और कहा कि वह नाटक कर रही है।

 

घटना के सामने आने के बाद सिख संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। सिख ब्रदरहुड इंटरनेशनल समेत कई संगठनों ने इस घटना की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता की मां ने भी प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है।

 

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पहले भी परिवार पर उत्पीड़न के आरोप

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता की मां ने दावा किया है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके परिवार को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पहले भी नौ महीने तक बंधक बनाकर रखा गया और इस दौरान उनके साथ मारपीट और यातनाएं दी गईं। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि उनके बेटे के बाल जबरन काट दिए गए थे जो सिख धर्म में बेहद पवित्र माने जाते हैं।