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ट्रक से भिड़ा एयर कनाडा का विमान, कई घायल, न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा


न्यूयॉर्क के व्यस्त ला-गार्डिया (LaGuardia) एयरपोर्ट पर हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने विमान सुरक्षा और रनवे मैनेजमेंट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मॉन्ट्रियल से आ रहा एयर कनाडा एक्सप्रेस (Air Canada Express) का एक यात्री विमान लैंडिंग के दौरान रनवे पर खड़े दमकल विभाग के एक ट्रक (Fire Truck) से टकरा गया। इस जोरदार टक्कर के बाद पूरे एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और आनन-फानन में सभी उड़ानों को रोक दिया गया।

 

एयर कनाडा एक्सप्रेस की एक फ्लाइट कनाडा के मॉन्ट्रियल शहर से अपनी नियमित उड़ान पूरी कर न्यूयॉर्क के ला-गार्डिया एयरपोर्ट पर लैंड कर रही थी। विमान रनवे पर अपनी सामान्य गति से उतर रहा था, तभी अचानक सामने दमकल विभाग की गाड़ी आ गई। फ्लाइट ट्रैकिंग वेबसाइट ‘FlightRadar24’ की रिपोर्ट के अनुसार, विमान रनवे पर दौड़ ही रहा था कि उसकी भिड़ंत वहां मौजूद फायर ट्रक से हो गई। इस हादसे की खबर मिलते ही एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत वहां पहुंचे।

 

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विमान को पहुंचा भारी नुकसान

टक्कर इतनी जोरदार थी कि प्लेन का अगला हिस्सा, जिसे ‘नोज’ कहते हैं, बुरी तरह से दब गया है। सोशल मीडिया पर जो फोटो और वीडियो सामने आए हैं, उनमें साफ दिख रहा है कि प्लेन का मुंह आगे से पिचक गया है। अच्छी बात यह रही कि इतनी बड़ी टक्कर के बाद भी विमान में आग नहीं लगी, वरना यह एक बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। अभी तक यात्रियों को कितनी चोट आई है, इसकी पूरी जानकारी नहीं मिली है। एम्बुलेंस और मदद करने वाली टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गई थीं।

 

 

एयरपोर्ट पर ‘ग्राउंड स्टॉप’ और उड़ानों का चक्का जाम

हादसे की गंभीरता को देखते हुए अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने तुरंत एक्शन लिया और पूरे ला-गार्डिया एयरपोर्ट पर ‘ग्राउंड स्टॉप’ घोषित कर दिया। इसका सीधा मतलब यह था कि जब तक रनवे साफ नहीं हो जाता और स्थिति काबू में नहीं आती, तब तक न तो कोई विमान वहां लैंड कर सकता था और न ही कोई उड़ान भर सकता था। शुरुआत में यह पाबंदी कुछ घंटों के लिए थी। लेकिन बाद में इसे शाम तक के लिए बढ़ा दिया गया। इस वजह से हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंस गए और कई घरेलू व अंतरराष्ट्रीय उड़ानें या तो रद्द कर दी गईं या उनका रास्ता बदल दिया गया।

 

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अब आगे की कार्रवाई क्या है?

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब एक विमान लैंड कर रहा था, तो रनवे के उस संवेदनशील हिस्से पर फायर ट्रक क्या कर रहा था? क्या यह एटीसी (Air Traffic Control) की गलती थी या ट्रक ड्राइवर और पायलट के बीच तालमेल की कमी? FAA और न्यूयॉर्क फायर डिपार्टमेंट ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। एयर कनाडा से भी इस बारे में जवाब मांगा गया है कि क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी थी जिसकी वजह से वह ट्रक से नहीं बच पाया। फिलहाल पूरे रनवे की सुरक्षा जांच की जा रही है ताकि आने वाले समय में ऐसी जानलेवा गलतियां दोबारा न हों।

‘अमेरिका-इजरायल जो कहते हैं, PM वही करते हैं,’ ईरान संकट पर बोले राहुल गांधी


लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि भारत की विदेश नीति, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत नीति बन गई है। उन्होने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिका और इजरायल के इशारे पर काम कर रहे हैं, इसके दूरगामी परिणाम होंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया है कि वह विदेशी शक्तियों के आदेशों पर फैसले ले रहे हैं।
 

राहुल गांधी ने कहा है कि भारत की अब सार्वभौमिक नीतिक का मजाक उड़ रहा है। भारत कोई पक्ष नहीं ले रहा है, जिसका नुकसान भारत को होना तय है। उन्होंने दावा किया कि अभी सिर्फ शुरुआती मुश्किलें हैं। परिस्थितियां आने वाले दिनों में और बिगड़ने वाली हैं।

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राहुल गांधी:-
‘हमारी विदेश नीति प्रधानमंत्री मोदी की निजी पॉलिसी बन गई है। अब यह एक यूनिवर्सल मजाक जैसा हो गया है। अगर हमारे प्रधानमंत्री कॉम्प्रोमाइज्ड हैं तो फॉरेन पॉलिसी कॉम्प्रोमाइज्ड है।’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘हमारी क्या पोजीशन है? कोई पोजीशन नहीं है लोगों को इसका नुकसान होगा। अभी केवल शुरुआत हुई है। अभी सभी चीजों में परेशानी होगी। अमेरिका और इजराइल जो कहेगा प्रधानमंत्री मोदी वहीं कहेंगे।’

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राहुल गांधी ने ऐसा क्यों कहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, भारत पर एक के बाद एक लगातार कई आर्थिक प्रतिबंध लगा रहे थे। उन्होंने भारत पर दबाव दिया कि अगर रूस के साथ भारत व्यापार जारी रखेगा तो उस पर लगा 50 फीसदी टैरिफ बढ़ाया भी जा सकता है। भारत और अमेरिका के बीच जनवरी से फरवरी के बीच एक व्यापार समझौता हुआ, जिसमें अमेरिका ने 18 फीसदी टैरिफ का एलान किया। यह कहा कि भारत, अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा।

 भारत ने रूस के साथ तेल आयात घटाया। अमेरिका ने फिर, ईरान युद्ध छिड़ने के बाद कहा कि अब अमेरिका, ईरान संकट की वजह से तेल खरीद सकता है। अमेरिका की ओर से दावा किया गया कि भारत को 30 दिनों की राहत दी जा रही है। राहुल गांधी का सवाल यह है कि भारत जैसा बड़ा और संप्रभु देश, अमेरिका के इशारे पर अपना व्यापार क्यों करेगा। उनका कहना है कि किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यकाल में भारत पर ऐसी बयानबाजी कभी नहीं हुई, जैसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान हो रही है। 

नवरात्र के व्रत में खाएं ये चीजें, दिन भर बनी रहेगी एनर्जी


चैत्र नवरात्र का पावन पर्व चल रहा है। भक्त नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना करते हैं। कुछ लोग नवरात्र में नौ दिनों तक उपवास रखते हैं। इन नौ दिनों तक हल्का, सात्विक और पौष्टिक भोजन खाना होता है जो पाचन सुधारता है और मन को शांति देता है। 

 

व्रत के दौरान उन चीजों को खाना चाहिए जो शरीर के लिए हेल्दी और एनर्जेटिक हो क्योंकि लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में थकान और  हिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है। शाम के समय में चेहरा थका हुआ नजर आता है। हम आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में बता रहे हैं जिसे खाने के बाद आपको इंस्टेंट एनर्जी मिलेगी। आइए इन चीजों के बारे में जानते हैं।

 

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व्रत में खाएं ये पौष्टिक आहार

मखाना

 

व्रत के दौरान काफी लोग भूना हुआ मखाना खाते हैं। मखाना खाने से एनर्जी मिलती है और पाचन बेहतर होता है। मखाना में प्रोटीन और फाइबर की भरपूर की मात्रा होती है जिसकी वजह से आपको लंबे समय तक भूख नहीं लगती है।

 

शकरकंद का चाट

 

व्रत में शकरकंद का चाट खा सकते हैं। यह एक हेल्दी और पौष्टिक नाश्ता  है। इसमें फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है। व्रत में यह नाश्ता सिर्फ आपका पेट ही नहीं भरता है बल्कि एनर्जी भी बनाए रखता है।

 

कुट्टू और सिंघाड़े का आटा

 

व्रत में कुट्टू और सिंघाड़े के आटे की रोटी खाएं। इसमें फाइबर और प्रोटीन की भरपूर मात्रा होती है जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करता है।

 

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साबूदाना

 

साबूदाना एक सुपरफूड है। यह आसानी से पच जाता है। इसमें कैल्शियम, पोटैशियम और विटामिन्स की भरपूर मात्रा में होती है। साबूदाना की आप खिचड़ी, वड़ा या खीर बनाकर खा सकते हैं।

 

मौसमी फल

 

व्रत के दौरान मौसमी फल और रायता का सेवन कर सकते हैं। ये दोनों पौष्टिक आहार हैं। इसमें मौजूद प्रोटीन, कैल्शियम शरीर को तरोताजा रखता है। इसके अलावा शरीर को हाइड्रेटेड रखने के लिए नारियल पानी, हर्बल टी समेत अन्य चीजों का सेवन करें।

 

आज आपके भाग्य में क्या है? मीन राशि में आ रहा चंद्रमा, जानिए राशिफल


17 मार्च 2026, आज मंगलवार का दिन है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज चंद्रमा कुंभ राशि से निकलकर मीन राशि में प्रवेश करेगा, जहां पहले से ही सूर्य और राहु विराजमान हैं। आज का मूलांक 8 है, जो शनि देव का प्रतीक है और मंगलवार का दिन होने के कारण मंगल की सक्रियता बनी रहेगी। ग्रहों का यह संयोग कुछ राशियों के लिए अनुशासन और धैर्य की परीक्षा लेगा। वहीं कुछ के लिए साहस और पराक्रम से सफलता के द्वार खोलेगा।


आज का दिन निवेश के मामलों में सावधानी बरतने और व्यक्तिगत संबंधों में स्पष्टता बनाए रखने का है। उत्तर दिशा की यात्रा में सावधानी बरतें और हनुमान जी की उपासना से दिन को अधिक सकारात्मक बनाएं। आइए जानते हैं मेष से लेकर मीन राशि तक के जातकों के लिए आज का दिन कैसा रहने वाला है।

क्या है आज का राशिफल?

मेष राशिफल


मेष राशि वालों के लिए आज का दिन ऊर्जा और उत्साह से भरा रहेगा। आपके पराक्रम में वृद्धि होगी और रुके हुए काम गति पकड़ेंगे।
आज क्या करें: हनुमान चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: जल्दबाजी में कोई बड़ा वित्तीय फैसला न लें।


वृषभ राशिफल


आज आप स्वयं को काफी संतुलित महसूस करेंगे। कला और लेखन से जुड़े लोगों को विशेष सम्मान मिल सकता है।
आज क्या करें: छोटी कन्याओं को कुछ मीठा खिलाएं।
आज क्या न करें: दूसरों के विवादों में पड़ने से बचें।


मिथुन राशिफल


मिथुन राशि वालों के लिए आज का दिन मिला-जुला रहेगा। संचार कौशल से आप बिगड़े हुए काम बना लेंगे।
आज क्या करें: पक्षियों को दाना डालें।
आज क्या न करें: अपनी गुप्त बातें किसी अजनबी से साझा न करें।


कर्क राशिफल


आज आप अधिक भावुक महसूस कर सकते हैं। महत्वपूर्ण निर्णयों में दिल की जगह दिमाग का इस्तेमाल करें।
आज क्या करें: शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
आज क्या न करें: देर रात तक जागने से बचें।


सिंह राशिफल


सिंह राशि वालों के लिए आज का दिन सफलतादायक है। आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी।
आज क्या करें: उगते सूर्य को जल का अर्घ्य दें।
आज क्या न करें: अहंकार में आकर किसी का अपमान न करें।


कन्या राशिफल


आज आपको अपनी मेहनत का फल मिलेगा। व्यवस्थित ढंग से किए गए कार्यों में सफलता सुनिश्चित है।
आज क्या करें: गाय को हरी घास खिलाएं।
आज क्या न करें: किसी से उधार न लें और न दें।


तुला राशिफल


आज का दिन सुख-सुविधाओं में वृद्धि वाला रहेगा। अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन करने का मौका मिलेगा।
आज क्या करें: सफेद रंग के वस्त्र धारण करें या रुमाल पास रखें।
आज क्या न करें: काम को कल पर न टालें।


वृश्चिक राशिफल


वृश्चिक राशि वालों के लिए आज का दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वाणी पर संयम रखना अनिवार्य है।
आज क्या करें: हनुमान जी के मंदिर में चोला चढ़ाएं।
आज क्या न करें: क्रोध में आकर कोई तीखी बात न बोलें।


धनु राशिफल


आज का दिन आपके लिए ज्ञानवर्धन और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ाने वाला रहेगा। भाग्य का साथ मिलेगा।
आज क्या करें: मंदिर में चने की दाल दान करें।
आज क्या न करें: आज किसी की बुराई न करें।


मकर राशिफल


मकर राशि वालों के लिए आज का दिन कड़ी मेहनत वाला रहेगा। अनुशासन ही आपकी सफलता की कुंजी है।
आज क्या करें: जरूरतमंदों को कंबल या काले तिल दान करें।
आज क्या न करें: आलस्य को अपने ऊपर हावी न होने दें।


कुंभ राशिफल


आज का दिन आपके लिए नए अवसर लेकर आएगा। सामाजिक दायरे में बढ़ोतरी होगी और प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनेगा।
आज क्या करें: शनि चालीसा का पाठ करें।
आज क्या न करें: घर के बड़ों की सलाह को अनसुना न करें।


मीन राशिफल


आपकी राशि में ग्रहों का जमावड़ा होने से आप अंतर्मुखी महसूस करेंगे। एकांत में समय बिताना आपको शांति देगा।
आज क्या करें: ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करें।
आज क्या न करें: भ्रम की स्थिति में कोई बड़ा निवेश न करें।

 

नोट: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। अपनी मेहनत पर भरोसा रखें और सकारात्मकता के साथ दिन का आनंद लें।

 

 

अमेरिका को सिर पर बिठाया, ईरान से पंगा, खाड़ी के देशों की मजबूरी क्या है ?

गल्फ कॉपरेशन काउंसिल (GCC) के देश इन दिनों जंग की आग में झुलस रहे हैं। इन देशों में आपसी लड़ाई नहीं है। न ही यहां गृह युद्ध की स्थिति है। तेल का कारोबार अच्छा चल रहा है, कमाई तगड़ी है, सीमाई विवाद नहीं है, पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी नहीं हैं, फिर भी जंग की लपट में इन्हें जलना पड़ रहा है। ईरान, इन देशों के पेट्रोलियम प्लांट पर हमले कर रहा है, यहां मौजूद अमेरिकी ठिकाने तबाह हो रहे हैं। जिस संकट की आग में ये लोग झुलसे हैं, उसके जिम्मेदार भी, यही देश हैं। खाड़ी सहयोग परिषद के 6 सदस्य देश हैं। बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE)। ये देश, फारस की खाड़ी के पास बसे हैं। इन देशों के पास अपनी समृद्ध तेल और गैस संपदा है। 

यूएस एनर्जी इनफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम उत्पादन का लगभग 23 से 30 फीसदी हिस्सा उत्पादित होता है। इन देशों से हर दिन 1.7 करोड़ बैरल से ज्यादा उत्पादित होता है, दुनिया के कुल कच्चे तेल के भंडार का करीब आधा हिस्सा इनके पास है। समृद्धियों के ढेर पर बैठे होने के बाद भी ये देश अशांत हैं। पड़ोसियों से इन देशों की कभी नहीं बनी। आपस में अतीत में भिड़ते रहे हैं। पड़ोसियों पर इनका भरोसा कम है, अमेरिका पर ज्यादा है। अमेरिका पर ही इन्हें अशांत रखने के आरोप भी लगते रहे हैं। 

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खाड़ी के देशों की ईरान से बनती क्यों नहीं है?

ईरान ने 9 देशों पर हमला किया है, जहां बड़े पैमाने पर उन्हें नुकसान पहुंचा है। इन देशों में बहरीन, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, ईराक, जॉर्डन जैसे देश शामिल हैं। ये देश, ईरान से नजदीक हैं, कुछ देश इनमें से ईरान के पड़ोसी भी हैं, फिर भी ईरान उन्हें नहीं बख्शता है। वजह यह है कि इन देशों से ही ईरान पर हमले होते हैं। इजरायल और अमेरिका, इन देशों को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करते हैं, ईरान को यह बर्दाश्त नहीं होता है। इन देशों के सामरिक हित भी टकराते हैं। 80 के दशक से ही ऐसी स्थिति है। 

कहां-कहां हैं अमेरिकी सैन्य बेस?

  • कतर: 10 हजार सैनिकों के साथ अल उदीद एयर बेस, यहां का सबसे बड़ा अमेरिकी एयर बेस है। कतर पर भी ईरान ने हमले किए हैं। 
  • बहरीन: नेवल सपोर्ट एक्टिविटी (NSA) बहरीन, अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय है। बहरीन को भी ईरान ने निशाना बनाया है। 
  • कुवैत: कैंप अरिफजान और अली अल-सालेम एयर बेस यहां हैं। अमेरिकी रसद और टैंकों के विशाल भंडार यही हैं। कुवैत पर ईरान ने मिसाइलें दागी हैं। 
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE): अल धफरा एयरबेस पर अमेरिकी फाइटर जेट और सर्विलांस ड्रोन तैनात हैं। यहां भी ईरान ने हमला किया है। 
  • सऊदी अरब: प्रिंस सुल्तान एयर बेस, अमेरिका के लिए बेहद खास है। यहां अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम है, पैट्रियल मिसाइलें तैनात है। यहां भी ईरान ने हमले किए हैं। यहां की कई रिफ्यूलिंग प्लेन, ईरान ने तबाह कर दिया। 
  • ओमान: अमेरिका ने यहां अपने सैन्य ठिकाने नहीं बनाए  हैं लेकिन यहां के एयर बेस को इस्तेमाल करने की इजाजत अमेरिकी सेना को है। साल 1980 में अमेरिका के साथ एक रक्षा समझौता हुआ था। यहां डुक्म बंदरगाह, सलालाह बंदरगाह, थुमराईत और मसीराह एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिका कर सकता है। ओमान पर भी ईरान ने हमला किया है। यहां समुद्री टैंकर को ही ईरान ने तबाह कर दिया था। 
नेवल सपोर्ट एक्टिविटी (NSA) बहरीन।

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पश्चिम एशिया के दूसरे देशों में है अमेरिकी मौजूदगी 

  • इराक: ऐन अल-असद और एरबिल एयर बेस अमेरिका ने यहां बनाया है। यहां ISIS के खिलाफ अभियान और प्रशिक्षण केंद्र बनाया गया है। ईरान ने यहां भी धावा बोला है। 
  • जॉर्डन: अमेरिका के पास इस देश में मुवाफ्फक अल-साल्टी एयर बेस है। यहां से ईरान पर हमले कर सकता है। ईरान ने खतरा भांपते हुए यहां भी मिसाइलें दागी हैं।
  • सीरिया: सीरिया में भी कट्टरपंथी ताकतों से निपटने के लिए अल तनफ बेस पर अमेरिकी जवान मौजूद रहते हैं। ईरान ने सीरिया में भी मिसाइलें दागी हैं। 
  • तुर्की: इंजिलिक एयरबेस में अमेरिकी मौजूदगी है। साल 1955 से ही यहां अमेरिका है। तुर्की, नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन का हिस्सा है। अमेरिकी एयरफोर्स की 39वीं विंग यहां मौजूद है। 
अल उदीद एयर बेस।

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‘पश्चिम’ को सिर पर क्यों बिठाते हैं खाड़ी के देश?

दीवान लॉ कॉलेज में इंटरनेशनल स्टडी पढ़ाने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता बताते हैं, ‘खाड़ी के देश, ईरान पर भरोसा कर नहीं पाते हैं। ईरान के साथ उनके हितों का टकराव है। खाड़ी के ज्यादातर देश, पूरी तरह से व्यापार पर निर्भर हैं। पश्चिम एशिया में हमेशा अस्थिरता रही है, जिसे उन्हें ईरान नहीं निकाल सकता है। उन्हें सुरक्षा के लिए अमेरिकी मदद पर निर्भर रहना ही पड़ाता है। इन देशों की सेनाएं कमजोर भी हैं। सुरक्षा के लिए पूरी तरह से अमेरिका पर निर्भर हैं। 

GCC की विदेश नीति, उनके अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है। खाड़ी देशों के पास अकूत संपत्ति है लेकिन सेना नहीं। रक्षा के लिए अमेरिकी निर्भरता मजबूरी है। ईरान, खुद टकराव में है। इजरायल के साथ लंबा संघर्ष रहा है। 80 के दशक से ही ईरान, इजरायल को खतरे के तौर पर देख रहा है। 

सउदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, डोनाल्ड ट्रंप के साथ।

खाड़ी के देश, ईरान को वैचारिक और क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखते हैं। ये देश, सुन्नी बाहुल हैं, ईरान में शिया ज्यादा हैं, दोनों के बीच ऐतिहासिक और धार्मिक टकराव भी रहे हैं। ईरान, अगर परमाणु बम बनाएगा तो इन देशों के अस्तित्व पर खतरा मंडराएगा। अमेरिका, जिसे खतरा मानता है, ये देश, उसे भी खतरा मानते हैं। अमेरिका, इन देशों को सुरक्षा देता है। अमेरिका, यहां क्षेत्रीय सुरक्षा बनाने का भी काम करता है।  

खाड़ी के देशों के सबसे बड़े खरीदार भी अमेरिका और पश्चिमी देश रहे हैं। खाड़ी के देश, अब रूस और चीन जैसे देशों के साथ भी रिश्ते दुरुस्त कर रहे हैं। नए हमलों के बाद, ईरान के साथ ऐसे संबंधों की उम्मीद भी बेमानी लग रही है। ईरान के साथ रिश्ते और बिगड़ने वाले हैं। अब खाड़ी के देश भी ईरान के हमलों का जवाब देने वाले हैं।

AIMIM नेता के बयान और महिला रिजर्वेशन बिल पर क्या बोलीं इकरा हसन?


कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने महिला रिजर्वेशन बिल पर अपनी सहमति जताई और कहा कि विपक्ष इस बिल का समर्थन करता है। हालांकि, इसको लागू किए जाने को लेकर उन्होंने चिंता भी जाहिर की।

 

उन्होंने कहा कि सरकार ने इससे पहले भी तमाम बिल की घोषणा की है लेकिन उचित कदम नहीं उठा सकी जिससे वे जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो सके।

 

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सरकार को घेरने की कोशिश

महिलाओं के सशक्तीकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में महिलाओं को सशक्त करना बेहद जरूरी है क्योंकि यह देश की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक तरीके से अपनी भूमिका निभाएगा।

 

 

 

 

इकरा हसन ने कहा, ‘सरकार ने सिर्फ बिल का एलान किया है और सरकार बहुत से बिल का एलान करती है लेकिन उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए कोई कदम नहीं उठाती है। अब महिलाओं को सशक्त बनाने की काफी जरूरत है। यह हमारे इकॉनमी के लिए काफी अच्छा साबित होगा।’

AIMIM नेता के बयान पर क्या बोलीं?

इसके अलावा जब इकरा हसन से पूछा गया कि एआईएमआईएम के उत्तर प्रदेश के प्रेसिडेंट हाजी शौकत अली ने कहा है कि अगर उनकी सरकार बनती है जो लोग मुसलानों को गोली मारते हैं उनको वह गोली मार देंगे, तो इस पर इकरा हसन ने कहा कि देश आज भी संविधान के आधार पर चलता है और आगे भी ऐसा ही होगा। उन्होंने कहा कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन सी सरकार आती है, संविधान सबसे ऊपर और सभी को कानून और व्यवस्था का पालन करना चाहिए। 

 

इससे पहले 14 मार्च को कांग्रेस ने कहा था कि केंद्र सरकार को ऑल-पार्टी मीटिंग करनी चाहिए ताकि महिला रिजर्वेशन बिल पर चर्चा की जा सके और यह भी कहा कि ‘बांटो और राज करो’ की राजनीति रुकनी चाहिए।

2023 में हुआ था पारित

संविधान में 106वां संविधान संशोधन ऐक्ट, 2023 पारित किया गया है जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा गया। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत का रिजर्वेशन दिया गया है।

 

कानून के तहत लोकसभा और संघ राज्य क्षेत्र सहित सभी राज्यों में भी महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट को रिजर्व किया गया है ताकि राजनीति में और निर्णय लेने के स्तर पर महिलाओं के रिप्रेजेंटेशन को बढ़ाया जा सके।

 

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इस ऐक्ट को सितंबर 2023 में पारित किया गया था। इसके तहत महिलाओं के लिए किए गए एक तिहाई रिजर्वेशन में एससी-एसटी आरक्षण के तहत भी महिलाओं को रिजर्वेशन दिया गया था।

खर्राटों को आम आदत समझने की गलती न करें, हो सकती है गंभीर बीमारी


खराब लाइफस्टाइल की वजह से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसका असर हमारी नींद पर भी पड़ता है। आपने देखा होगा कई लोगों को खर्राटे लेने की समस्या होती हैं। महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को खर्राटे लेने की समस्या होती है।

 

कभी-कभी खर्राटे लेना आमतौर पर कोई गंभीर समस्या नहीं है। यह सिर्फ आपके पार्टनर के लिए खराब नहीं है बल्कि नींद की क्वॉलिटी भी खराब होती है। खर्राटे लेने की वजह से ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

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क्या होता है स्लीप एपनिया?

स्लीप एपनिया में व्यक्ति को सोते समय ठीक से सांस नहीं आती है या रुकती है जिसकी वजह से खर्राटे आते है। इस बीमारी से पीड़ित मरीज की नींद पूरी नहीं होती है जिससे वह दिन भर थका हुआ महसूस करते हैं।

खर्राटे लेने की वजह से बार-बार आपकी नींद टूटती है। इसके अलावा हार्ट पर प्रभाव पड़ता है। दरअसल स्लीप एपनीया से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और इस वजह से हार्ट अटैक या स्ट्रोक आने का खतरा बढ़ जाता है।

खर्राटे लेने के मुख्य कारण क्या हैं?

  • कोई व्यक्ति खर्राटे तब लेता जब नाक और मुंह से हवा को पास होने में दिक्कत महसूस होती है।  
  • नाक में ब्लॉकेज होना
  • कुछ लोग केवल एलर्जी के मौसम में या साइनस संक्रमण होने पर ही खर्राटे लेते हैं। इसके अलावा नाक से जाने वाले वायुमार्ग में ब्लॉकेज होता है। 
  • जींभ और गले की मांसपेशियों की टोन खराब होना- जब जींभ और गले की मांस पेशिया बहुत ज्यादा रिलेक्स होती है तब वायुमार्ग सिकुड़ जाता है। कुछ बच्चों में बड़े टॉन्सिल और एडेनोइड्स होते हैं जिसके कारण वे खर्राटे लेते हैं।
  • शराब और नशीले पदार्थ का सेवन- अधिक मात्रा में शराब और नशीले पदार्थ का सेवन करने से गले और जींभ की मांस पेशिया बहुत रिलेक्स हो जाती है जिसके कारण खर्राटे आते हैं।
  • कम नींद लेने की वजह से भी खर्राटे आ सकते हैं।

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खर्राटे को ठीक करने का इलाज क्या है?
 
लाइफस्टाइल में बदलाव- डॉक्टर आपसे वजन घटाने, धूम्रपान छोड़ने और शराब छोड़ने को कहता है।

हमेशा करवट लेकर सोएं। कभी भी पीठ के बल न सोएं।

व्यायाम करें।

मशीन भी आती है- आप खर्राटों को कम करने के लिए मशीन का भी इस्तेमाल कर सकते हैं जिसे आपको रात को सोने से पहले लगाना है। इसके अलावा कुछ गंभीर मामलों में सर्जरी भी करनी पड़ सकती है। डॉक्टर आपकी स्लीप साइकिल के बारे में पूछेगा। इसके बाद एक्स रे, एमआरआई स्कैन और सीटी स्कैन करेगा ताकि कारण का पता चल सकें।

 

 

20 या 21 मार्च, किस तारीख को मनाई जाएगी इस बार की ईद? जान लीजिए


इस्लाम धर्म में रमजान के महीने में सभी लोग भूखे-प्यासे रोजा रखते हैं और अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान खत्म होते ही ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जाता है। इस त्योहार में सभी लोगों के घर में अलग-अलग प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। महिलाएं घर में नमाज पढ़कर अल्लाह का शुक्र अदा करती हैं, वहीं पुरुष मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ते हैं। हर साल लोगों के मन में ईद-उल-फितर की तारीख को लेकर कन्फ्यूजन रहता है। इस साल भी यही कन्फ्यूजन है कि ईद 20 मार्च को या 21 मार्च को मनाई जाएगी।

 

ईद-उल-फितर की तारीख चांद दिखने पर तय की जाती है। रमजान वैसे तो 30 दिनों का होता है लेकिन कई बार 29 दिनों का भी हो जाता है। अगर इस बार 19 तारीख को चांद नजर आता है, तो इस साल रमजान 29 दिनों का होगा। अब सवाल उठता है कि 2026 में ईद- उल- फितर किस तारीख को होगी।

 

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कब मनाई जाएगी ईद-उल-फितर?

भारत में ईद-उल-फितर का त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार मनाया जाता है। यह कैलेंडर पूरी तरह चांद दिखने पर आधारित होता है, इसलिए कई बार अलग-अलग देशों में ईद अलग-अलग दिन मनाई जाती है। अनुमान के अनुसार, इस साल 2026 में संभव है कि 19 मार्च की रात को चांद नजर आ जाए। अगर ऐसा होता है, तो 20 मार्च को ईद-उल-फितर मनाई जाएगी।

 

अगर 19 मार्च की रात को चांद नजर नहीं आता है, तो 20 मार्च की रात को चांद दिख सकता है और ऐसे में 21 मार्च को ईद मनाई जाएगी। कुल मिलाकर, ईद कब होगी यह पूरी तरह चांद दिखने पर निर्भर करता है।

 

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ईद-उल-फितर के दिन क्या करना चाहिए?

इस्लाम धर्म में मान्यता है कि सभी पुरुषों को ईद के शुभ अवसर पर अल्लाह की इबादत करनी चाहिए, खासकर सामूहिक रूप से नमाज अदा करने की विशेष परंपरा है। महिलाओं को भी घर पर एक साथ मिलकर नमाज पढ़नी चाहिए। इस दिन गरीब और असहाय लोगों की मदद करने की परंपरा है। इसके लिए गरीबों को अनाज और कपड़ों का दान किया जाता है। यह त्योहार खुशियों का प्रतीक माना जाता है, इसलिए घर के छोटे बच्चों को ईदी देकर खुश किया जाता है।

अमेरिका से जंग मुनाफे का सौदा? होर्मुज से तगड़ी कमाई कर रहा ईरान


स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, ईरान के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रहा है। ईरान, अब यहां से गुजरने वाले जहाजों से तगड़ी फीस वसूल रहा है। अमेरिका, होर्मुज से ईरान को हटाने का दावा कर रहा है लेकिन अपने समुद्री इलाके में ईरान की मजबूत पकड़ है। अमेरिका के कई विमान, ईरान के समुद्री इलाके में घुसने की कोशिश में ढेर हो चुके हैं। 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया के कुल तेल और गैस का 20 फिसदी हिस्सा गुजरता है। यह हिस्सा, पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में है। पहले ईरान ने इस राह में आम सहमति दी थी, जिसकी वजह से यहां से मालवाहक विमान आसानी से गुजरते थे। 

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ईरान, बंद होर्मुज से कितना कमा रहा है?

ईरानी संसद के सांसद अलाउद्दीन बोरौजेर्दी ने कहा है कि ईरान अब यहां से जहाजों को गुजरने की इजाजत देने के बदले में कमाई कर रहा है। ईरान, हर जहाज को तभी गुजरने दे रहा है, जब उसे 2 मिलियन अमेरिकी डॉलर शुल्क के तौर पर दिए जाएं। यह राशि, करीब 19 करोड़ रुपये से ज्यादा होगी। 

होर्मुज पर जहाजों को रोक क्यों रो रहा है ईरान?

अमेरिका, इजरायल मिलकर ईरान पर हमला कर रहे हैं। ईरान इस हमले पर भड़क गया है। ईरान ने कहा है कि जब तक अमेरिका और इजरायल की तरफ से हमले बंद नहीं होते, ईरान मिसाइल हमले नहीं रोकेगा। होर्मुज में ईरान ने कई स्तर बारूदी सुरंगों को तैनात किया है। ड्रोन से चलने वाली जहाजें हैं। जबरन घुसना, कई देशों को भारी पड़ा है। ईरान, इस रोक को अपनी संप्रभुता की नई ताकत बताकर पेश कर रहा है। 

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जंग का मैदान बना है होर्मुज?

अमेरिका ने होर्मुज को खाली करने के लिए ईरान को 48 घंटे की समयसीमा दी थी। अमेरिका ने कहा था कि अगर होर्मुज नहीं खुला तो ईरान के पेट्रोलियम संसाधनों पर हमले किए जाएंगे। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाउद्दीन बोरौजेर्दी ने कहा है कि युद्ध के खर्चों की वजह से अब ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस वसूल रहा है। ईरान को प्रति जहाज 2 मिलियन डॉलर मिल रहे हैं। भारतीय रुपये में यह कीमत करीब 19 करोड़ रुपये है।

कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा, क्या हैं आरोप?


दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी को उम्रकैद की सजा दे दी है। उनके दो साथी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरीन को भी 30-30 साल की जेल हुई है। अदालत ने उन्हें आतंकवादी संगठन चलाने और जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साजिश रचने का दोषी पाया।

 

यह फैसला 14 जनवरी 2026 को सुनाया गया था। तीनों महिलाओं को अनलॉफुल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट (UAPA) और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया। आरोप था कि उन्होंने देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की कोशिश की।

 

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NIA अदालत ने दी थी सजा

इससे पहले दिल्ली की एनआईए कोर्ट ने भी आसिया अंद्राबी को अलगाववाद के मामले में दोषी करार दिया था। अंद्राबी, यास्मीन मलिक के बाद दूसरी नेता हैं जिन्हें जम्मू कश्मीर का स्पेशल स्टेटस हटाने के बाद एनआईए ने दोषी करार दिया है।

दुख्तरान-ए-मिल्लत की मुखिया

आसिया अंद्राबी दुख्तरान-ए-मिल्लत नामक संगठन की मुखिया हैं। यह संगठन पहले ही भारत सरकार द्वारा बैन कर दिया गया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक, आसिया और उनके साथी लंबे समय से नफरत फैलाने वाले भाषण दे रहे थे, प्रचार कर रहे थे और लोगों को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए उकसा रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया और दूसरी जगहों पर जम्मू-कश्मीर को अलग करने की बातें फैलाईं।

आतंकी संगठन चलाने का आरोप

तीनों के ऊपर एक आतंकवादी संगठन चलाने का आरोप है। इसका मकसद भारत की एकता और अखंडता को तोड़ना था। अदालत ने उन्हें साजिश रचने और आतंकवादी संगठन का सदस्य होने का दोषी माना।

 

आसिया अंद्राबी 64 साल की हैं। सोफी फहमीदा 40 साल और नाहिदा नसरीन 58 साल की बताई जाती हैं। तीनों को 2018 में गिरफ्तार किया गया था। तब से वे जेल में हैं। करीब 8 साल तक मुकदमा चला। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट में सुनवाई हुई।

क्या बोला बचाव पक्ष

NIA ने अदालत से कहा कि इन तीनों को उम्रकैद दी जाए। इससे कानून पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा और लोगों का भरोसा बनेगा। बचाव पक्ष ने कहा कि ये महिलाएं पढ़ी-लिखी हैं, बीमार हैं और लंबे समय से जेल में हैं। एक को स्पाइन की सर्जरी की जरूरत है, लेकिन नहीं हो पाई।

 

अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि देश के खिलाफ साजिश बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अलगाववाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले किसी भी काम को सख्ती से रोका जाएगा।

2018 का है मामला

यह मामला 2018 का है। NIA ने FIR दर्ज की थी। आरोप था कि आसिया अंद्राबी अपने संगठन के जरिए युवाओं को गुमराह कर रही थीं और पाकिस्तान समर्थक गतिविधियां चला रही थीं।

 

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कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं। 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र सरकार ने कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववाद पर सख्ती बढ़ाई है। कई नेता गिरफ्तार हुए और संगठन बैन किए गए। यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। NIA ने कहा कि कानून का राज स्थापित करने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।