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ईरान जंग में बेहाल एयर इंडिया! 2,500 उड़ानें रद्द, कंपनी को सताने लगी चिंता


अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में अबतक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अरबों डॉलर का नुकसान अभी तक हो चुका है। भारत भी इस नुकसान से अछूता नहीं है। इस बीच खबर आमने आई है कि एयर इंडिया ने पिछले तीन हफ्तों में पश्चिम एशिया जाने वाली तकरीबन 2,500 फ्लाइट्स कैंसिल कर दी हैं। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन ने बताया है कि वह इस पूरे इलाके में अपने फुल शेड्यूल ऑरेशन का सिर्फ 30% ही फ्लाइट उड़ा रही है।

 

एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने शुक्रवार को कर्मचारियों को भेजे एक संदेश में कहा कि यह कदम ईरान में चल रहे युद्ध की वजह से उठाया गया है। विल्सन ने कहा, ‘दुनिया, हमारा इलाका और हमारी इंडस्ट्री मिडिल ईस्ट में चल रहे झगड़े के असर से जूझ रही है। मिडिल ईस्ट में और उसके जरिए हमारे ऑपरेशन के आम स्केल को देखते हुए एयर इंडिया ग्रुप पर इसका असर काफी ज्यादा है।’

 

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एयरपोर्ट और एयरस्पेस बंद हैं

उन्होंने कहा, ‘झगड़ा शुरू होने के तीन हफ्तों में हमें इस इलाके के लिए करीब 2,500 फ्लाइट्स कैंसिल करनी पड़ी हैं। आज की तारीख में हम अपने नॉर्मल मिडिल ईस्ट शेड्यूल का सिर्फ 30% ही ऑपरेट कर पा रहे हैं क्योंकि एयरपोर्ट और एयरस्पेस बंद हैं। उन्हें हमारी सुरक्षा लिमिट से बाहर माना जा रहा है।’

इंडस्ट्री पर असर पड़ना शुरू

विल्सन ने कहा कि इस रुकावट की वजह से हमारी इंडस्ट्री पर असर पड़ना शुरू हो गया है, जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। उन्हने कहा, ‘ज्यादा असर अगले महीने से ही पड़ेगा। एयरलाइन ने बढ़ती लागत को थोड़ा कम करने के लिए पहले ही नए टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज लगा दिया है।’

 

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एयर इंडिया तलाश रहा नया मार्केट

उन्होंने आगे कहा, ‘ब्रिटेन, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली दूसरी फ्लाइट्स को पिछले साल पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद से इस्तेमाल किए जा रहे लंबे फ्लाइट रास्तों से और भी दूर भेजा जा रहा है, जिससे ज्यादा तेल खर्च हो रहा है और ज्यादा समय लग रहा है।’ हालांकि, उन्होंने बड़ी आर्थिक अनिश्चितता के बीच यात्रा की मांग में कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हर कस्टमर ज्यादा हवाई किराया देने को तैयार नहीं है इसलिए डिमांड कम होने से पहले हम कितनी ज्यादा कीमतें रख सकते हैं, इसकी एक सीमा है।

 

उन्होंने कहा कि एयर इंडिया यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे मार्केट में नए मौके देख रही है। इस क्षेत्र में एयर इंडिया की  फ्लाइट्स चला रही हैं।

नेल पेंट और लिप्सटिक से भी हो सकता है कैंसर? हैरान कर देगी यह रिपोर्ट


आजकल हर कोई सबसे अलग और खूबसूरत दिखना चाहता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके मेकअप बॉक्स में रखी लिपस्टिक और नेल पेंट आपकी जान की दुश्मन भी बन सकती हैं। हाल ही में आई कई बड़ी वैज्ञानिक रिपोर्ट्स और रिसर्च ने इस बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इन ब्यूटी प्रोडक्ट्स को बनाने में इस्तेमाल होने वाले कुछ जहरीले तत्व (Elements) सीधे तौर पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी को न्योता दे रहे हैं। लिपस्टिक में मिलाया जाने वाला लेड और नेल पेंट को चमकाने वाले केमिकल्स आपके शरीर के अंदर जाकर हार्मोन का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ सकते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इन चीजों का लगातार इस्तेमाल शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, जो आगे चलकर कैंसर का मुख्य कारण बन सकता है।

 

यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में रिसर्चर कैथरीन हैमंड (S. Katharine Hammond) और उनकी टीम ने लिपस्टिक और लिप ग्लॉस के 32 अलग-अलग ब्रांड्स पर एक बड़ी जांच की है। इस रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 75%  प्रोडक्ट्स में लेड जैसे खतरनाक तत्व मौजूद थे। रिपोर्ट कहती है कि अगर कोई महिला दिन में दो से तीन बार लिपस्टिक लगाती है, तो वह अनजाने में ही तय सीमा से ज्यादा क्रोमियम शरीर के अंदर ले लेती है।

 

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न्यूयॉर्क के प्रसिद्ध डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. मिशेल कोहेन (Dr. Mitchell Cohen) ने भी अपनी रिसर्च में बताया है कि लिपस्टिक में मौजूद क्रोमियम का सीधा संबंध पेट के ट्यूमर और किडनी की समस्याओं से पाया गया है। लेड की मौजूदगी न केवल कैंसर का खतरा बढ़ाती है बल्कि यह दिमाग और नसों के लिए भी बहुत खतरनाक है।

नेल पेंट और यूवी लैंप से होने वाले नुकसान का बड़ा खुलासा

नेल पॉलिश और नेल आर्ट के शौकीनों के लिए ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ में छपी साल 2023 की स्टडी काफी डराने वाली है। इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया कि नेल पेंट को सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अल्ट्रावायलेट (UV) लैंप्स कैंसर की वजह बन सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन लैंप्स से निकलने वाली किरणें साधे तौर पर इंसान के शरीर के डीएनए को नुकसान पहुंचती हैं। लैब में किए गए प्रयोगों में देखा गया कि सिर्फ 20 मिनट के एक बार के इस्तेमाल से ही हाथ की 20 से 30 प्रतिशत सेल (Cell) मर सकती हैं। इसके साथ ही नेल पेंट को सख्त बनाने वाला तत्व ‘फॉर्मलडिहाइड’ (Formaldehyde) एक प्रमाणित कैंसर पैदा करने वाला तत्व है।

केस स्टडी और टॉक्सिक तत्वों के गंभीर मामले

दुनियाभर में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां ब्यूटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों पर इन तत्वों का बुरा असर दिखा है। अमेरिका की एक केस स्टडी में एक ऐसी महिला का जिक्र आता है, जो सालों तक नेल सैलून में काम करती थी। इसी तरह ‘एनवायर्नमेंटल वर्किंग ग्रुप’ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि सैलून में काम करने वाले कर्मचारियों में थायराइड और सांस की बीमारियों के मामले आम लोगों के मुकाबले 40%  ज्यादा पाए गए हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है समस्या सिर्फ एक बार लगाने से नहीं है, बल्कि सालों तक इन तत्वों के लगातार संपर्क में रहने से शरीर की बनावट बदलने लगती है।

 

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बचाव के लिए बस इन छोटी बातों का रखें ध्यान

डॉक्टरों का कहना है कि आपको पूरी तरह सजना-संवरना छोड़ने की जरूरत नहीं है, बस खरीदारी के वक्त समझदारी दिखानी होगी। हमेशा ऐसे प्रोडक्ट्स चुनें जिन पर ‘टॉक्सिक-फ्री’ या ‘5-फ्री’ लिखा हो क्योंकि इनमें जहरीले तत्व कम होते हैं। डार्क शेड्स की लिपस्टिक का इस्तेमाल कम करें क्योंकि उनमें भारी तत्व ज्यादा होने का डर रहता है। नेल पेंट लगाते समय कमरे की खिड़कियां खुली रखें ताकि उसकी तेज गंध फेफड़ों में न जाए। आपकी यह छोटी सी सावधानी आपको बड़ी बीमारी से बचा सकती है।

होली पर राहु के अंक 4 और चंद्रमा के गोचर से बनेंगे सफलता के योग, जानें राशिफल


ज्योतिषीय दृष्टि से 4 मार्च बुधवार होली का दिन बेहद खास है। चंद्रमा आज सिंह राशि से निकलकर दोपहर बाद कन्या राशि में प्रवेश करेंगे, जो हमारे भीतर कॉन्फिडेंस और व्यवस्था की भावना जगाएगा। आज का मूलांक 4 है, जिसका स्वामी खुद राहु है। राहु की ऊर्जा अक्सर जीवन में बदलाव और नए रास्ते खोलती है।

 

यह दिन उन लोगों के लिए बहुत अच्छा है जो रचनात्मक कार्यों से जुड़े हैं या कुछ नया करने की योजना बना रहे हैं। मेहनत और सही दिशा में उठाए गए कदम आज आपको अप्रत्याशित सफलता दिला सकते हैं। आइए जानते हैं आपकी राशि के लिए सुझाव।

 

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राशिफल- क्या करें और क्या न करें

मेष राशि

क्या करें: अपनी लीडरशिप क्वालिटी का इस्तेमाल करें। नए प्रोजेक्ट शुरू करें। परिवार को समय दें और कसरत से अपनी एनर्जी बढ़ाएं।

क्या न करें: पैसों के मामले में जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। गुस्से पर काबू रखें और फालतू की बहस से दूर रहें।

वृषभ राशि

क्या करें: कार्यस्थल पर अपनी मेहनत जारी रखें, तरक्की के योग हैं। पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताएं और भविष्य के लिए पैसों की प्लानिंग करें।

क्या न करें: फिजूलखर्ची से बचें और पुरानी हार को लेकर न बैठें। सेहत, खासकर पेट का ख्याल रखें।

मिथुन राशि

क्या करें: अपनी बातों से लोगों का दिल जीतें, मीटिंग्स और करियर में इसका फायदा मिलेगा। नए दोस्त बनाएं और नेटवर्किंग पर ध्यान दें।

क्या न करें: अफवाहों पर भरोसा न करें। किसी से बेवजह मुकाबला करने से बचें और सफर के दौरान सावधान रहें।

कर्क राशि

क्या करें: भावनाओं पर काबू रखें और परिवार का साथ दें। नौकरी में मिलने वाले नए मौकों को हाथ से न जाने दें। मन की शांति के लिए योग करें।

क्या न करें: पुरानी बातों को सोचकर परेशान न हों। निवेश के मामले में कोई रिस्क न लें।

सिंह राशि

क्या करें: आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व करें। कला या लेखन जैसे रचनात्मक कामों में मन लगाएं। पार्टनर को कोई सरप्राइज देकर खुश करें।

क्या न करें: मन में अहंकार न लाएं और दूसरों की अच्छी सलाह को नजरअंदाज न करें। ज्यादा थकान से बचें।

कन्या राशि

क्या करें: अपने काम को व्यवस्थित करें, इससे लाभ होगा। सेहत के लिए एक रूटीन बनाएं और स्मार्ट तरीके से बचत करें।

क्या न करें: छोटी बातों का तनाव न लें और हर काम में ‘परफेक्शन’ की जिद न पालें। रिश्तों में शक को जगह न दें।

तुला राशि

क्या करें: रिश्तों और काम के बीच बैलेंस बनाकर रखें। पार्टनरशिप वाले बिजनेस में लाभ होगा। कला और सुंदरता से जुड़े कार्यों में हाथ आजमाएं।

क्या न करें: फैसले लेने में बहुत ज्यादा देर न करें। सेहत के लिए खान-पान पर पूरा ध्यान दें।

वृश्चिक राशि

क्या करें: अपनी मानसिक ऊर्जा का इस्तेमाल रिसर्च या गहरे कामों में करें। पार्टनर पर भरोसा बढ़ाएं। कमाई के नए मौके पहचानें।

क्या न करें: ईर्ष्या या शक की भावना से बचें। गुस्से में आकर किसी भी जोखिम भरे काम में पैसा न लगाएं।

 

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धनु राशि

क्या करें: कुछ नया सीखने या यात्रा करने का मौका मिले तो जरूर जाएं। पढ़ाई में तरक्की होगी। परिवार के साथ खुशियां बांटें।

क्या न करें: जोश में आकर होश न खोएं और किए हुए वादे न तोड़ें। पैसों के लेन-देन में लापरवाही न बरतें।

मकर राशि

क्या करें: अनुशासन के साथ अपने काम पर फोकस करें, करियर में उन्नति मिलेगी। लंबी अवधि के लक्ष्यों पर काम करें और नियमित व्यायाम करें।

क्या न करें: काम के दबाव में खुद को तनाव न दें और अपनों को नजरअंदाज न करें।

कुंभ राशि

क्या करें: नए आइडियाज पर काम करें, सफलता मिलेगी। सामाजिक कार्यक्रमों में हिस्सा लें और रिश्तों में एक-दूसरे को स्पेस दें।

क्या न करें: विद्रोही स्वभाव से बचें और पुराने दोस्तों से रिश्ता न तोड़ें। सेहत के प्रति सजग रहें।

मीन राशि

क्या करें: अपनी कल्पना शक्ति को रचनात्मक कार्यों में लगाएं। शांति के लिए आध्यात्मिक अभ्यास करें और रिश्तों में दयालुता दिखाएं।

क्या न करें: हकीकत से मुंह न मोड़ें और ख्यालों में न खोएं। पैसों से जुड़े फैसले बहुत सोच-समझकर ही लें।

 

डिस्क्लेमर: यह राशिफल सामान्य ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। व्यक्तिगत जानकारी के लिए ज्योतिषि से संपर्क करें।

ट्विटर डील में एलन मस्क ने ऐसा क्या किया, जो अब लग सकता है अरबों का जुर्माना?


एलन मस्क एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। ट्विटर (अब एक्स) की खरीद से जुड़ा मामला अब कोर्ट तक पहुंच गया है और जूरी के फैसले ने मस्क की परेशानी बढ़ा दी है। अमेरिका की एक अदालत में चली सुनवाई में जूरी ने माना है कि मस्क ने 2022 में ट्विटर डील के दौरान निवेशकों को गुमराह किया था, जिससे कंपनी के शेयर की कीमत पर असर पड़ा। जूरी ने कहा कि 2022 में सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर को 44 अरब डॉलर में खरीदने से पहले के महीनों में उन्होंने जान-बूझकर ट्विटर के शेयर की कीमत गिराई थी। 

 

इस फैसले के बाद अब एलन मस्क पर अरबों डॉलर का जुर्माना लग सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रकम करीब 2 अरब डॉलर से लेकर 2.5 अरब डॉलर या उससे भी ज्यादा हो सकती है। हालांकि, जूरी ने उन्हें धोखाधड़ी के कुछ आरोपों से यह कहते हुए बरी कर दिया कि उन्होंने निवेशकों को गुमराह करने के लिए कोई बड़ी साजिश नहीं रची थी। 

 

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क्या है पूरा मामला?

यह मामला 2022 में ट्विटर की 44 अरब डॉलर की डील से जुड़ा है। उस समय एलन मस्क ने ट्विटर खरीदने का एलान किया था लेकिन बीच में उन्होंने कई ऐसे बयान दिए जिससे मार्केट में हलचल मच गई। खास तौर पर उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि यह डील अस्थायी तौर पर रोक दी गई है क्योंकि उन्हें ट्विटर पर फेक और स्पैम अकाउंट की संख्या पर संदेह है। इन बयानों के बाद ट्विटर के शेयर में भारी गिरावट आई। निवेशकों का आरोप था कि मस्क ने जानबूझकर ऐसे बयान दिए ताकि कंपनी की कीमत कम हो जाए और उन्हें सौदे में फायदा मिल सके। 

अब क्या फैसला हुआ?

अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में निवेशकों ने एलन मस्क के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया। सैन फ्रांसिस्कों में चले इस सिविल केस में जूरी ने माना कि मस्क के दो ट्वीट भ्रामक थे। इन ट्वीट्स की वजह से कई निवेशकों ने अपने शेयर कम कीमत पर बेच दिए और उन्हें नुकसान हुआ। हालांक, जूरी ने मस्क को पूरी तरह दोषी नहीं ठहराया और किसी बड़ी साजिश से इनकार किया। जूरी ने कहा कि उन्होंने निवेशकों को गुमराह तो किया है लेकिन यह कोई सोची समझी धोखाधड़ी की बड़ी साजिश नहीं थी। 

क्या अब लगेगा जुर्माना?

एलन मस्क के खिलाफ इस केस में हजारों निवेशक शामिल हैं, जिन्होंने मस्क के ट्वीट के बाद ट्वीटर के शेयर बेच दिए थे और उन्हें उससे आर्थिक नुकसान हुआ था। ऐसे में अब मस्क को भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। अभी जूरी ने जुर्माने पर कोई फैसला नहीं किया है लेकिन  रिपोर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों को हुए नुकसान के आधार पर मस्क को अरबों डॉलर का भुगतान करना पड़ सकता है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह रकम 2 अरब डॉलर से ज्यादा बताई जा रही है। 

 

एक्सपर्ट्स के कहना है कि कोर्ट अब इस बात की जांत करेगा कि एलन मस्क के ट्वीट के बाद मार्केट में जो उतार-चढ़ाव हुआ था उससे किस निवेशक को कितना नुकसान हुआ है। इसके बाद ही जूरी जुर्माने पर फैसला सुनाएगी। इसके साथ ही एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह फैसला टेक इंडस्ट्री के लिए भी बड़ा संदेश है कि बड़े बिजनेसमैन के बयान मार्केट को प्रभावित कर सकते हैं और इसके लिए उन्हें जिम्मेदार भी ठहराया जा सकता है। 

 

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अपने बचाव में मस्क ने क्या कहा?

एलन मस्क ने अपने वकीलों के जरिए कोर्ट में कहा कि उन्होंने जो भी बयान दिए वह उनकी समझ और उपलब्ध जानकारी के आधार पर थे। उनका दावा था कि ट्विटर ने फेक अकाउंट की संख्या सही तरीके से नहीं बताई थी और वही इस विवाद की जड़ है। मस्क की लीगल टीम ने साफ किया है कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। उनका कहना है कि यह फैसला पूरी तरह सही नहीं है और आगे की कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। 

होर्मुज पर गहराते संकट के बीच भारत तैयारी में, पीएम मोदी ने की हाई-लेवल मीटिंग


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक तेल बाजार में बहुत उतार-चढ़ाव है। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 109-112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। एक समय में तो यह 119 डॉलर तक भी पहुंच गई थी।

यह बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत तेल का बड़ा आयातक देश है। दुनिया के अधिकांश तेल पश्चिम एशिया से आते हैं। वहां का तनाव बढ़ने से ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है।

 

बैठक के दौरान एक अच्छी खबर भी आई। अमेरिका से एक एलपीजी टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचा। इससे देश में गैस की आपूर्ति में कुछ राहत मिली है। लोग चिंतित थे कि ऊर्जा की कमी हो सकती है, लेकिन यह टैंकर मददगार साबित हुआ।

 

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पश्चिम एशिया में हालात खराब

पश्चिम एशिया में हालात अभी भी खराब हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखेगा, तो वाशिंगटन ईरान के बिजली ढांचे पर हमला कर सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है, जहां से बहुत सारे तेल वाले जहाज गुजरते हैं।

ईरान ने भी दागीं मिसाइलें

ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है। इजरायल ने ईरान के नतांज न्यूक्लियर फेसिलिटी पर हमला किया था, जिसके बदले ईरान ने इजराइल के मध्य भाग में एक न्यूक्लियर फेसिलिटी पर हमला किया। दोनों तरफ से हमले हो रहे हैं, जिससे युद्ध और फैलने का खतरा बढ़ गया है।

हूती विद्रोहियों ने दी चेतावनी

इसके अलावा, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी चेतावनी दी है। वे ईरान के साथ मिलकर युद्ध में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने लाल सागर और स्वेज नहर में जहाजों पर हमले की धमकी दी है। अगर ऐसा हुआ तो वैश्विक व्यापार और तेल की आपूर्ति पर बहुत बुरा असर पड़ेगा।

आपूर्ति पर चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में मुख्य रूप से इस बात पर जोर दिया कि देश के जरूरी क्षेत्रों में कोई रुकावट न आए। पेट्रोलियम, क्रूड ऑयल, गैस, बिजली और खाद की आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहे। बैठक में इन सभी चीजों की विस्तार से समीक्षा की गई।

 

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सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने लॉजिस्टिक्स और वितरण नेटवर्क की भी जांच की। उन्होंने कहा कि पूरे देश में आपूर्ति स्थिर रहे और कहीं भी रुकावट न आए। सरकार का प्रयास है कि आम लोगों पर तेल की ऊंची कीमतों का बोझ न पड़े। भारत रूस से भी तेल खरीद रहा है और अन्य विकल्प तलाश रहा है। लेकिन पश्चिम एशिया का संघर्ष बड़ा चुनौती है।

फार्मा सेक्टर में बढ़ती ही जा रही भारत की ताकत, वजह क्या है?

भारत का फार्मा सेक्टर इस समय पूरी दुनिया का ‘मेडिसिन हब’ बन चुका है। हाल ही में आई रिपोर्ट्स और सरकारी आंकड़ों से यह साफ हो गया है कि भारतीय फार्मा कंपनियां ग्लोबल मार्केट में अपना दबदबा तेजी से बढ़ा रही हैं।

 

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दवाइयों के उत्पादन के मामले में दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच गया है। आज भारत दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाइयों की जरूरत को अकेले पूरा कर रहा है। वित्त वर्ष 2025 में भारतीय फार्मा सेक्टर का कुल कारोबार 4.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत दुनिया के 191 देशों को दवाइयां एक्सपोर्ट कर रहा है, जिसमें अमेरिका और यूरोप जैसे बड़े और सख्त रेग्युलेशन वाले बाजार भी शामिल हैं।

 

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बायोफार्मा शक्ति योजना

भारत सरकार ने फार्मा सेक्टर को और मजबूत करने के लिए बजट 2026-27 में ‘बायोफार्मा शक्ति’ नाम की एक नई योजना का एलान किया है। कैंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मिशन के लिए अगले 5 सालों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत को केवल सस्ती जेनेरिक दवाइयों तक सीमित न रखकर, उसे नई और आधुनिक ‘बायोलॉजिक्स’ और ‘बायोसिमिलर’ दवाओं का ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। इस बड़े निवेश से भारत की कंपनियां अब कैंसर और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की जटिल दवाइयां भी देश में ही कम खर्च पर बना सकेंगी।

 

एक्सपोर्ट में जबरदस्त उछाल

फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में भारत का फार्मा एक्सपोर्ट 30.46 बिलियन डॉलर यानी कि करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। मार्च 2025 के महीने में तो एक्सपोर्ट में पिछले साल के मुकाबले 31 प्रतिशत से ज्यादा की भारी बढ़ोतरी देखी गई। इस कामयाबी में सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला, ल्यूपिन और ऑरोबिंदो फार्मा जैसी दिग्गज कंपनियों का बहुत बड़ा हाथ है। ये कंपनियां न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में अपनी दवाओं की क्वॉलिटी और कम कीमत के लिए जानी जा रही हैं।

 

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2030 तक 130 बिलियन डॉलर का होगा कारोबार

इंडस्ट्री एक्सपटर्स और इन्वेस्ट इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि भारतीय फार्मा मार्केट 2030 तक 120 से 130 बिलियन डॉलर का आंकड़ा छू सकता है। रेटिंग एजेंसी इकरा (ICRA) ने भी अनुमान लगाया है कि आने वाले सालों में भारतीय कंपनियों की कमाई में 9 से 11 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ बनी रहेगी। सरकार देश में तीन बड़े ‘बल्क ड्रग पाकर्स’ भी बना रही है ताकि दवाइयां बनाने के लिए कच्चे माल (API) के मामले में भी भारत आत्मनिर्भर बन सके। इन सब कदमों से यह पक्का हो गया है कि आने वाले समय में भारत दुनिया की फार्मेसी के रुप में अपनी पहचान और भी गहरी करेगा।

महाकाल की भस्म आरती के समय महिलाओं को क्यों करना पड़ता है घूंघट? जानें वजह


उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती दुनिया भर में मान्यता प्राप्त है। महाशिवरात्रि हो या सावन का महीना साल के प्रत्येक दिन महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती होती है। यह परंपरा कभी नहीं टूटती लेकिन क्या आपको पता है भस्म आरती के दौरान एक समय ऐसा आता है जब महिलाओं को अपने चेहरे पर घूंघट करना पड़ता है।  आइए जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है। 

 

दरअसल, आरती के एक विशेष चरण में भगवान शिव का ‘शृंगार’ उतार दिया जाता है और उन्हें ताजी भस्म अर्पित की जाती है। इस समय महादेव अपने दिगंबर स्वरूप में होते हैं। शास्त्रों के अनुसार, महिलाओं के लिए भगवान के इस रूप के दर्शन करना वर्जित माना जाता है। 

 

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क्या है इसके पीछे की मान्यता?

महिलाओं को भगवान के दिगंबर रूप के दर्शन के अलावा एक और मान्यता है। एक अन्य तर्क यह भी है कि भस्म आरती एक तांत्रिक क्रिया है। इसमें श्मशान की भस्म का उपयोग होता है और कड़े नियमों का पालन किया जाता है। 

माना जाता है कि इस ऊर्जावान प्रक्रिया के दौरान कुछ विशेष क्षणों में केवल पुरुष पंडित ही पूजा संपन्न करते हैं और स्त्री शक्ति की सौम्यता को बनाए रखने के लिए उन्हें उस समय सीधे दर्शन से रोका जाता है।

 

भस्म आरती में घूंघट और ड्रेस कोड

महादेव का दिगंबर स्वरूप

भस्म चढ़ाने से पूर्व भगवान शिव के शरीर से सभी वस्त्र और आभूषण हटा दिए जाते हैं। ‘दिगंबर’ का अर्थ है जिसकी दिशाएं ही वस्त्र हों। भारतीय संस्कृति और वैराग्य के नियमों के अनुसार, भगवान के इस अत्यंत वैराग्यपूर्ण और निरावरण स्वरूप को देखना महिलाओं के लिए उचित नहीं माना जाता।

तांत्रिक अनुष्ठान की मर्यादा

भस्म आरती कोई सामान्य आरती नहीं बल्कि एक कठिन अनुष्ठान है। इस दौरान जो मंत्रोच्चार और भस्म अर्पण की विधि होती है, वह अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली होती है। घूंघट करना उस आध्यात्मिक ऊर्जा और मर्यादा के प्रति सम्मान प्रकट करने का एक तरीका है।

 

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परंपरागत वेशभूषा का नियम

केवल घूंघट ही नहीं बल्कि भस्म आरती में शामिल होने के लिए महिलाओं और पुरुषों के लिए विशिष्ट ड्रेस कोड भी अनिवार्य है- 

 

महिलाओं के लिए: केवल साड़ी पहनकर ही गर्भगृह या नंदी हॉल में बैठने की अनुमति होती है।

पुरुषों के लिए: पुरुषों को केवल सूती धोती पहननी पड़ती है, सिली हुई शर्ट या पैंट वर्जित है।

 

नोट: इस खबर में लिखी गई बातें धार्मिक और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

डर या मजबूरी, ईरान से जंग में ट्रंप का साथ क्यों दे रहा ब्रिटेन? इनसाइड स्टोरी


ईरान के खिलाफ जंग में अमेरिका को अब ब्रिटेन का साथ मिल गया है। ब्रिटिश सरकार ने शुक्रवार को अमेरिकी सेना को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी है। अमेरिका यहां से उन मिसाइल साइटों पर हमले कर सकेगा, जिनकी मदद से होर्मुज स्ट्रेट में ईरान तबाही मचा रहा है। ईरान, होर्मुज में अमेरिकी दखल बर्दाश्त नहीं कर रहा है। अब तक कई जहाजों को तबाह कर चुका है। 

डाउनिंग स्ट्रीट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ब्रिटिश मंत्रियों की बैठक में इस पर चर्चा हुई है। अमेरिका को यूनाइटेड किंगडम के सैन्य बेस को इस्तेमाल करने की इजाजत दी जा रही है। यह मदद, क्षेत्र की सामूहिक आत्मरक्षा के मकसद से की जा रही है। ब्रिटेन, रक्षात्मक कार्रवाई के तहत, इस तरह की मंजूरी दे रहा है।

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने पहले अमेरिका की इस मांग को खारिज कर दिया था, लेकिन अब उनका रुख बदल गया है। ईरान ने ब्रिटिश सहयोगियों देशों पर हमले किए, जिसके बाद ब्रिटिश सरकार ने अपने रुख में बदलाव करने का फैसला लिया है।

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क्या चाहता है यूनाइटेड किंगडम?

ब्रिटिश सरकार की अपील है कि अब जंग थमनी चाहिए। ईरान, इजरायल और अमेरिका को तनाव कम करने पर जोर देना चाहिए। युद्ध के त्वरित समाधान की जरूरत है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कीर स्टार्मर की आलोचना की थी कि वह मदद नहीं कर रहे हैं।

ब्रिटेन को अपना रुख क्यों बदलना पड़ा?

प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि ब्रिटेन ईरान युद्ध में नहीं हिस्सा लेगा। अब ईरान के हमलों के बाद उन्होंने अमेरिका को ग्लूस्टरशायर स्थित RAF फेयरफोर्ड और हिंद महासागार में अमेरिका-यूके के संयुक्त बेस डिएगो गार्सिया के इस्तेमाल की इजाजत दी है।

 

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इससे क्या होगा?

अमेरिका के भारी बॉम्बर विमानों के लिए ये बेस बेहद अहम हैं। ब्रिटिश सरकार ने साफ कहा है कि यह केवल रक्षात्मक कार्रवाई है, जिसमें ईरान की मिसाइल क्षमताओं को कमजोर करना शामिल है। इसकी इजाजत सिर्फ इसलिए दी जा रही है, क्योंकि ईरान, जहाजों पर मिसाइल हमले कर रहा है। 

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ऐसा हमला करना क्यों पड़ रहा है?

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। वह सिर्फ चीन और सहयोगी देशों के जहाजों को आवाजाही की इजाजत दे रहा है। यह वह, समुद्री गलियारा है, जहां से 20 फीसदी तेल गुजरता है। बिना ईरान की मंजूरी से यहां कोई जहाज गुजर नहीं सकती है। अब दुनिया में तेल संकट पैदा हो रहा है। भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में गैस संकट बढ़ता जा रहा है। 

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होर्मुज पर क्या कर सकता है अमेरिका?

अमेरिकी और इजरायली हमलों से ईरान की नौसेना और मिसाइल भंडार को नुकसान पहुंचा है। छोटे जहाजों, माइन शिप और आत्मघाती हमलों से अमेरिका पर अभी खतरा बरकरार है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोलना आसान नहीं है। इसे खुलवाने में 1 से 6 महीने लग सकते हैं।

क्या मजबूरी में अमेरिका की मदद कर रहा है ब्रिटेन?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कीर स्टार्मर को कई बार निशाना बनाया था। उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन एक महान सहयोगी था लेकिन अब पर्याप्त मदद नहीं कर रहा। डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने की कोशिश की। वह फ्रांस, चीन, ब्रिटेन और नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) जैसे देशों से मद मांग रहे थे।

 यूरोपीय देशों ने युद्धपोत भेजने से ही इनकार कर दिया। खिसियाए ट्रंप ने फिर कहा कि उन्हें किसी देश की मदद की जरूरत नहीं है, वह जंग जीत लेंगे। हैरान करने वाली बात यह है कि ट्रंप फिर भी इन देशों से मदद मांगते रहे। 

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अब भविष्य की चुनौतियां क्या हैं?

अमेरिका ने बीते सप्ताह, खार्ग द्वीप पर हमला किया था। यहां से ही ईरान का 90 फीसदी कच्चा तेल निर्यात होता है। ईरान पर दबाव बनाने के लिए ऐसे हमले किए जा रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि अगर खार्ग आइलैंड पर कब्जा हो गया, तेल ठिकाने तबाह हुए तो ईरान घुटने टेकेगा और जंग खत्म करेगा। खार्ग आइलैंड पर कब्जा तभी हो पाएगा, जब अमेरिका जमीन पर अपनी सेनाएं भेजे। 

डोनाल्ड ट्रंप, जमीनी कार्रवाई से इनकार कर रहे हैं। उन्हे एहसास है कि जब आसमान में ईरान से नहीं जीत पा रहे हैं, दो देश संयुक्त होकर लड़ रहे हैं, तब भी हार रहे हैं तो जमीनी लड़ाई और मुश्किल होगी। ईरान के पास अभी भी छोटे हथियार और असममित युद्ध की क्षमता बाकी है।

अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खुला तो क्या होगा? 

अगर होर्मुज स्ट्रेट नहीं खुला तो तेल की कीमतें और बढ़ेंगी। ऊर्जा संकट पैदा होगा। गैस की कीमतें यूरोप और अमेरिका में बेतहाशा बढ़ जाएंगी। अमेरिका और ब्रिटेन की मजबूरी भी है कि उन्हें होर्मुज खुलवाना ही होगा। ईरान ने अब इतना गंवा दिया है कि उसके अधिकारी बार-बार कह रहे हैं कि अब वे किसी भी दबाव में नहीं आएंगे। खून का बदला खून से ही लिया जाएगा। होर्मुज पर जंग, आने वाले दिनों में और कठिन होने वाली है। 

 

साउथ चाइना सी में यू-टर्न मारा और भारत पहुंच गया लाखों बैरल रूसी तेल वाला जहाज  


रूसी क्रूड ऑयल से भरा टैंकर ‘एक्वा टाइटन’ रविवार सुबह न्यू मैंगलुरु पोर्ट पर पहुंच गया। इस जहाज पर कैमरून का झंडा लगा हुआ था और इसने सुबह करीब 11:30 बजे पोर्ट पर लंगर डाला। शिप ट्रैकर मरीन ट्रैफिक के अनुसार, यह टैंकर पहले चीन के लिए जा रहा था लेकिन साउथ चाइना सी में अपना रास्ता बदलकर भारत की ओर मुड़ गया। मार्च के मध्य में यह जहाज दक्षिण-पूर्व एशियाई पानी में था, जहां इसने अचानक यू-टर्न लिया और भारत की तरफ बढ़ा।

 

यह रूस से क्रूड ऑयल लेकर आया है, जो जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक पोर्ट से लोड किया गया था। जहाज को मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) ने चार्टर किया है। इसमें लगभग 7.7 लाख बैरल (करीब 1.1 लाख टन) तेल है।

 

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मंगलौर पोर्ट पहुंचा जहाज

शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने 19 मार्च को बताया था कि यह टैंकर 21 मार्च को न्यू मंगलौर पोर्ट पहुंचेगा। इससे पहले विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही थी और बाद में अपडेट देने की बात कही।

 

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मध्य-पूर्व में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण तेल की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण रास्ते बंद होने से वैश्विक तेल संकट गहरा गया है।

अमेरिका ने कही थी छूट देने की बात

इस संकट के बीच अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी छूट दी है। यूएस ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा कि यह छूट इसलिए दी गई क्योंकि ईरान वैश्विक ऊर्जा को ‘रोकने’ की कोशिश कर रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने कहा कि भारत ‘अच्छा सहयोगी’ रहा है और पहले रूसी सैंक्शन वाले तेल से दूर रहा था, इसलिए अब अस्थायी रूप से अनुमति दी गई है।

 

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अनुमति के बाद भारतीय रिफाइनरों ने 3 करोड़ बैरल से ज्यादा रूसी तेल खरीदा है।

कई अन्य तेल टैंकर भी पहुंचे

इसके अलावा, हाल ही में भारत में कई अन्य तेल टैंकर भी पहुंचे हैं। गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर भारतीय जहाज ‘जग लाडकी’ UAE से मुर्बन क्रूड लेकर पहुंचा। मुंबई में एक लाइबेरिया फ्लैग वाला जहाज ‘शेनलॉन्ग’ सऊदी अरब से होकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरा। 

 

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साथ ही दो भारतीय जहाज ‘शिवालिक’ और ‘एमटी नंदा देवी’ एलपीजी लेकर भारत पहुंचे। यह सब वैश्विक तेल संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश दिखाता है।

 

SPF 30 या 50, कौन सी सनस्क्रीन त्वचा के लिए फायदेमंद है? डॉक्टर से समझें

सूरज की हानिकारक किरणें त्वचा के लिए नुकसानदायक होती है। इन हानिकारक किरणों से त्वचा को बचाने के लिए लोग सनस्क्रीन का इस्तेमाल करते हैं। सिर्फ गर्मी ही नहीं सर्दी और बारिश के मौसम में भी त्वचा विशेषज्ञ सनस्क्रीन लगाने की सलाह देते हैं।

 

मार्केट में विभिन्न प्रकार के सनस्क्रीन मिलते हैं। मार्केट में एसपीएफ 30 और 50 सनस्क्रीन मिलती है। आइए जानते हैं त्वचा के लिए कौन सी सनस्क्रीन ज्यादा फायदेमंद होती है?

 

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कौन सी सनस्क्रीन त्वचा के लिए फायदेमंद है?

एसपीएफ फैक्टर आपके स्किन टाइप के हिसाब से डिसाइड होता है। अगर आपकी त्वचा बहुत ज्यादा ऑयली है और ज्यादा देर तक धूप में नहीं रहते हैं तो एसपीएफ 30 काफी है। अगर आपका फील्ड वर्क है और ज्यादा देर तक धूप में रहते हैं तो एसपीएफ 50 का इस्तेमाल करें। जिस सनस्क्रीन में ज्यादा एसपीएफ है वह त्वचा को लंबे समय तक धूप से बचाकर रखती है।

 

अगर किसी व्यक्ति को धूप में जाने पर सनबर्न की समस्या होती है तो त्वचा विशेषज्ञ उसे एसपीएफ 50 लगाने की सलाह देते हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग है। किसी भी तरह के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

क्या कहते हैं डॉक्टर?

Aster CMI अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट Dr. Shireen Furtado के मुताबिक एसपीएफ 30 सनस्क्रीन 97% UVB की हानिकारक किरणों को रोकने का काम करता है। जबकि एसपीएफ 50 सनस्क्रीन 98% तक UVB की हानिकारक किरणों को रोकता है।

 

 

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कितने देर तक चलता है सनस्क्रीन?

डॉक्टर के मुताबिक सनस्क्रीन को दिन भर में 2 बार लगाना चाहिए। कोई भी मौसम हो सनस्क्रीन जरूर लगाना चाहिए। घर से बाहर निकलने से 20 से 25 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाना चाहिए। ज्यादातर लोग घर से निकलने से कुछ मिनटों पहले सनस्क्रीन लगाते हैं जिसका कोई खास असर देखने को नहीं मिलता है। हर किसी की त्वचा अलग होती है। अपनी त्वचा के हिसाब से सनस्क्रीन लगाएं। अगर आपकी स्किन सेंसिटिव हैं तो मिनरल बेस्ड प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें। अधिक केमिकल वाले प्रोडक्ट्स को लगाने से बचें। सनस्क्रीन सिर्फ त्वचा को हानिकारक किरणों से ही नहीं बचाता। इसके कई फायदे हैं। सनस्क्रीन त्वचा के धाग-धब्बों को भी धीरे-धीरे कम करने में मदद करता है। किसी भी सनस्क्रीन को लगाने से पहले हथेली पर पैच टेस्ट जरूर करें।