‘हथियार डालकर, कुछ बचा लो’, ट्रंप ने ईरान पर किया अबतक का सबसे शक्तिशाली हमला

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अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लगातार 15 दिनों से युद्ध जारी है, जिसमें लगभग 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को एक बयान जारी करके कहा कि यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के क्राउन ज्वेल, खार्ग आइलैंड पर जबरदस्त हमले किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के खिलाफ चेतावनी दी।

 

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जब अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी की है। ऐसे में समय में अमेरिका ने ईरान के खार्ग आइलैंड पर तेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को वैसे ही सुरक्षित छोड़ दिया है। बता दें कि इस आइलैंड को अमेरिका हथियाना चाह रहा है।  

 

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‘मेरे निर्देश पर हुआ हमला’

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया ट्रूथ पोस्ट में कहा, ‘कुछ देर पहले मेरे निर्देश पर यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने मध्य पूर्व के इतिहास में सबसे शक्तिशाली बमबारी हमलों में से एक को अंजाम दिया, और ईरान के सबसे अहम ठिकाने, खर्ग द्वीप पर मौजूद हर सैन्य लक्ष्य को पूरी तरह से तबाह कर दिया।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने आइलैंड पर तेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को खत्म नहीं करने का फैसला किया है।’

 

 

 

‘ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे’

उन्होंने आगे लिखा, ‘ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे और न ही उसके पास अमेरिका, मध्य पूर्व या पूरी दुनिया को धमकाने की क्षमता होगी। ईरान की सेना और इस आतंकवादी शासन से जुड़े बाकी सभी लोगों के लिए यही समझदारी होगी कि वे अपने हथियार डाल दें और अपने देश का जो कुछ भी बचा है, उसे बचा लें, जो कि अब ज्यादा नहीं बचा है।’

 

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दरअसल, यह छोटा सा आइलैंड ईरान के 90 फीसदी तेल शिपमेंट के लिए एक्सपोर्ट टर्मिनल के तौर पर काम करता है। यह होमुर्ज स्ट्रेट से लगभग 483 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी के खिलाफ भी चेतावनी दी। 

पूर्वी क्षेत्र सेना की भारी तैनाती

यह नई चेतावनी तब आई है जब अमेरिकी पूर्वी क्षेत्र में 2,500 और मरीन और तीन वॉरशिप तैनात कर रहा है। 2,500 मरीन सैनिक और कम से कम एक युद्धपोत पश्चिम एशिया की ओर रवाना हो रहे हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट और युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली को पश्चिम एशिया जाने का आदेश दिया गया है। इस कदम से क्षेत्र में सैनिकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी।

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