
मां का दूध नवजात शिशु के लिए सबसे संपूर्ण और सुरक्षित आहार माना जाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व, एंटीबॉडी और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले गुण बच्चे को संक्रमणों से बचाने में मदद करते हैं। लेकिन कई बार कुछ माताएं स्वास्थ्य समस्याओं, समय से पहले डिलीवरी, कम दूध बनने या अन्य कारणों से अपने शिशु को पर्याप्त स्तनपान नहीं करा पातीं। ऐसे में ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन यानी स्तन दूध दान कई नवजात बच्चों के लिए वरदान साबित होता है।
बैडमिंटन प्लेयर ज्वाला गुट्टा ने 1 साल के अंदर 60 लीटर ब्रेस्ट मिल्क दान किया है। वह अन्य महिलाओं से भी ब्रेस्ट मिल्क दान करने की अपील करती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कौन सी महिलाएं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं? ब्रेस्ट को मिल्क कैसे स्टोर कर सकते हैं और इसकी क्या प्रकिया है। इसके बारे में हमने गुड़गांव सेक्टर 14 की क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ अस्पताल में स्त्री विभाग की विशेषज्ञ डॉक्टर चेतना जैन से बात की।
यह भी पढ़ें: गर्मी में चाय और कॉफी पीना सेहत के लिए खतरनाक, डाइटिशियन से समझें कैसे?
कौन सी महिलाएं ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं?
स्वस्थ स्तनपान कराने वाली महिलाएं, जिनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में दूध बन रहा हो, ब्रेस्ट मिल्क डोनेट कर सकती हैं। हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें होती हैं:
मां पूरी तरह स्वस्थ हो।
- कोई गंभीर संक्रमण या संक्रामक बीमारी न हो।
- एचआईवी (HIV), हेपेटाइटिस B/C, सिफलिस जैसी बीमारियों की जांच नेगेटिव हो।
- धूम्रपान, शराब या नशीले पदार्थों का सेवन न करती हो।
- डॉक्टर द्वारा प्रतिबंधित दवाइयों का सेवन न कर रही हो।
- बच्चे की उम्र सामान्यतः 6 महीने से कम हो तो दूध की गुणवत्ता बेहतर मानी जाती है।
- डोनर मां की मेडिकल हिस्ट्री और ब्लड टेस्ट के बाद ही दूध स्वीकार किया जाता है।
- अगर कोई महिला ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करना चाहती हैं तो उन्हें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
कुछ महत्वपूर्ण बातें:
1. हाथों की सफाई- दूध निकालने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं।
2. ब्रेस्ट पंप की सफाई- पंप के सभी हिस्सों को हर इस्तेमाल के बाद गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह साफ करें और सुखाएं।
3. सही कंटेनर का उपयोग- दूध को केवल स्टरलाइज्ड और फूड-ग्रेड कंटेनर या मिल्क स्टोरेज बैग में ही रखें।
4. एक्सपायरी और स्टोरेज टाइम लिखें- दूध निकालने की तारीख और समय कंटेनर पर लिखना जरूरी होता है।
5. बीमारी में डोनेट न करें- अगर मां को बुखार, संक्रमण, सर्दी-जुकाम या कोई बीमारी हो तो डॉक्टर की सलाह के बिना दूध डोनेट नहीं करना चाहिए।
6. संतुलित आहार लें- डोनर मां को पौष्टिक भोजन, पर्याप्त पानी और आराम लेना चाहिए ताकि दूध की गुणवत्ता अच्छी बनी रहे।
ब्रेस्ट मिल्क को कितने दिन का पंप करके फ्रीज में रख सकते हैं?
ब्रेस्ट मिल्क की सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सही तापमान पर स्टोर करना बहुत जरूरी है।
सामान्य स्टोरेज गाइडलाइन:
- कमरे के तापमान (25°C तक): लगभग 4 घंटे
- रेफ्रिजरेटर (4°C): 3–4 दिन
- फ्रीजर (-18°C या उससे कम): लगभग 6 महीने तक सुरक्षित
- डीप फ्रीजर: 6–12 महीने तक
- हालांकि, जितना जल्दी दूध उपयोग किया जाए, उतना बेहतर माना जाता है।
कुछ जरूरी सावधानियां-
- दूध को छोटे-छोटे हिस्सों में स्टोर करें।
- एक बार पिघलाया हुआ दूध दोबारा फ्रीज न करें।
- दूध को माइक्रोवेव में गर्म न करें।
- फ्रीज किए गए दूध को फ्रिज में धीरे-धीरे डीफ्रॉस्ट करना बेहतर होता है।
यह भी पढ़ें: घंटों फोन और लैपटॉप चलाने से बढ़ रहा है डायबिटीज का खतरा, स्टडी में दावा
क्या ब्रेस्ट मिल्क को स्टोर करने के लिए खास तरह का पैकेट चाहिए होता है?
जी हां, ब्रेस्ट मिल्क को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रकार के स्टोरेज बैग या कंटेनर का उपयोग किया जाता है।
सही स्टोरेज विकल्प:
BPA-free प्लास्टिक या ग्लास कंटेनर
विशेष Breast Milk Storage Bags
एयरटाइट और फूड-ग्रेड कंटेनर
साधारण प्लास्टिक बैग या बोतलों का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इनमें संक्रमण या लीकेज का खतरा हो सकता है।
स्टोरेज बैग चुनते समय ध्यान रखें:
बैग मजबूत और लीक-प्रूफ हो।
उस पर तारीख और मात्रा लिखने की जगह हो।
एक बार उपयोग के बाद दोबारा इस्तेमाल न करें।
ब्रेस्ट मिल्क डोनेट करने की प्रक्रिया क्या है?
भारत में अब कई अस्पताल और ह्यूमन मिल्क बैंक ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। प्रक्रिया सामान्यतः इस प्रकार होती है:
1. रजिस्ट्रेशन– डोनर मां को मिल्क बैंक या अस्पताल में रजिस्ट्रेशन करवाना होता है।
2. हेल्थ स्क्रीनिंग-मां की मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है और कुछ ब्लड टेस्ट किए जाते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि दूध सुरक्षित है।
3. दूध निकालना-मां घर पर या अस्पताल में स्वच्छ तरीके से दूध निकाल सकती है।
4. स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट– दूध को सही तापमान पर स्टोर करके मिल्क बैंक तक पहुंचाया जाता है।
5. पाश्चराइजेशन-मिल्क बैंक में दूध को पाश्चराइज किया जाता है ताकि किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया या संक्रमण का खतरा समाप्त हो जाए।
जरूरतमंद शिशुओं को उपलब्ध कराना इसके बाद यह दूध विशेष रूप से समय से पहले जन्मे (preterm), कम वजन वाले या बीमार बच्चों को दिया जाता है।
यह भी पढ़ें: ना देखना पसंद है, ना पढ़ना, न्यूज से क्यों दूर हो रहे लोग? हो गया खुलासा
ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन क्यों महत्वपूर्ण है?
समय से पहले जन्मे बच्चों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
संक्रमण और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा कम करता है।
नवजात की इम्यूनिटी मजबूत करता है।
मां के दूध का विकल्प होने के कारण यह फार्मूला मिल्क से अधिक सुरक्षित माना जाता है।
निष्कर्ष
ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन एक संवेदनशील और मानवीय पहल है जो कई नवजात बच्चों को स्वस्थ जीवन देने में मदद करती है। यदि किसी मां के पास अतिरिक्त दूध है और वह स्वस्थ हैं, तो वे डॉक्टर की सलाह लेकर मिल्क डोनेशन कर सकती हैं। सही स्वच्छता, सुरक्षित स्टोरेज और मेडिकल गाइडलाइन का पालन करके यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और लाभकारी बनाई जा सकती है।