क्या आत्मा को रास्ता दिखाती थी ‘बुक ऑफ द डेड’? जानिए प्राचीन मिस्र का विश्वास

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आज के दौर में हम मानते हैं कि जीवित व्यक्ति कठिन परिस्थितियों या चुनौतियों का सामना करता है, जबकि मिस्र के लोग इसके ठीक विपरीत विचार मानते थे। मिस्र के लोगों का मानना था कि व्यक्ति को मृत्यु के बाद कठिन मार्ग से गुजरना पड़ता है, तभी जाकर उसकी आत्मा को स्वर्ग में स्थान मिलता है। कुछ साल पहले मिस्र में पुरातत्वविदों ने हजारों साल पुरानी कब्रों की खोज की थी। इन कब्रों में एक ग्रंथ मिला था, जिसमें व्यक्ति की आत्मा के लिए मंत्र लिखे थे। इस ग्रंथ को मिस्र के लोग ‘कमिंग फोर्थ बाय डे’ कहते थे, जबकि 1842 में जर्मनी के इतिहासकार कार्ल रिचर्ड लेप्सियस ने इस ग्रंथ को ‘द बुक ऑफ द डेड’ नाम दिया था।

 

बुक ऑफ द डेड ग्रंथ को मिस्र के पुरातत्वविदों ने खोजा था, जिसमें स्वर्ग पहुंचाने वाले लगभग 200 मंत्र, प्रार्थनाएं और कई चमत्कारी श्लोक लिखे थे। मिस्र के लोगों का मानना था कि इन मंत्रों के जरिए आत्मा को मुक्ति मिलती है। अब इस ग्रंथ में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा के बारे में क्या लिखा था?

 

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लिखे थे 200 जादुई मंत्र 

 

बुक ऑफ द डेड लगभग 2000 ईसा पूर्व का ग्रंथ है, जिसमें लिखे गए मंत्र कई महान पुजारियों ने लिखे थे। मिस्र के प्राचीन धर्म की मान्यता थी कि व्यक्ति को मृत्यु के बाद राक्षसों, मगरमच्छों और सांपों का सामना करना पड़ता था। इसी वजह से व्यक्ति के शव के साथ बुक ऑफ द डेड रखी जाती थी, जिसमें मृत व्यक्ति की आत्मा की रक्षा के लिए लगभग 200 मंत्र लिखे थे। इसमें मृत व्यक्ति की रक्षा के लिए अलग-अलग मंत्र थे। व्यक्ति की आत्मा को परलोक में कोई जीव न काटे, इससे जुड़े मंत्र भी इसमें लिखे गए थे। इसके अलावा मिस्र की लोक मान्यताओं के अनुसार, इस ग्रंथ में कुछ ऐसे मंत्र भी लिखे थे, जिन्हें बोलकर मृत व्यक्ति अपनी मनपसंद चीज हासिल कर सकता था।

 

हजारों साल पहले यह किताब सिर्फ राजाओं की कब्रों में रखी जाती थी। यानी इसका अधिकार केवल अमीर लोगों को मिला था। उस दौरान बुक ऑफ द डेड को भोजपत्र पर लिखकर शवों के पास रखा जाता था। धीरे-धीरे समय बदलने के बाद आम लोगों की कब्रों में भी यह किताब रखी जाने लगी, बस इन किताबों में किसी प्रकार के चित्र नहीं होते थे।

 

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आत्माओं की लगती थी अदालत

 

मिस्र की प्राचीन लोक मान्यताओं के मुताबिक, मृत्यु के बाद व्यक्ति को न सिर्फ स्वर्ग के लिए कठिन मार्ग से गुजरना पड़ता था, बल्कि आत्मा को जीवन की गलतियों की सजा भी मिलती थी। इस लोक मान्यता के मुताबिक, व्यक्ति की आत्मा को परलोक की अदालत में पेश किया जाता था, जहां न्याय करने वाले देवता एनुबिस और होरस थे, जो व्यक्ति के कर्मों का लेखा-जोखा रखते थे। व्यक्ति के हृदय को एक तराजू में रखा जाता था और दूसरी तरफ उसके पापों का लेखा रखा जाता था। अगर पापों का पलड़ा भारी होता, तो व्यक्ति की आत्मा को राक्षस सजा देते थे।

 

हालांकि इतिहासकारों के अनुसार, ‘बुक ऑफ द डेड’ को वास्तव में आत्मा को स्वर्ग पहुंचाने वाली जादुई किताब नहीं माना जा सकता। यह प्राचीन मिस्र की धार्मिक मान्यताओं, अंतिम संस्कार की परंपराओं और मृत्यु के बाद की यात्रा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ था, जिसे उस समय के लोग आत्मा का मार्गदर्शक मानते थे।

 

नोट: यह लेख लोक मान्यताओं  पर आधारित है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।

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