क्या लालच इंसान को अंधा बना देता है? ईसा मसीह के शिष्य यहूदा की कहानी से समझिए

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लालच एक ऐसी भावना है, जो कई व्यक्तियों को कभी न कभी होती है। इसी लालच की वजह से व्यक्ति अपना ईश्वर, प्रेम, दोस्ती और रिश्ता भूल जाता है। इंसान लालच में अंधा हो जाता है। ईसाई धर्म की बाइबल के मुताबिक, ईसा मसीह के बारहवें शिष्य भी लालच के जाल में फंस गए थे, जो ईसा मसीह के प्रेम, शिक्षा और उपदेश को भूल चुके थे। उन्होंने लालच में आकर ईसा मसीह को ही धोखा दे दिया था। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, व्यक्ति के मन में ही शैतान छिपा होता है। इसी शैतानी भावना की वजह से ईसा मसीह के 12 शिष्य यहूदा इस्करियोती फंस गए थे।

 

ईसाई धर्म की बाइबल के मुताबिक, ईसा मसीह के 12 शिष्य थे। उन्हीं के आखिरी शिष्य का नाम यहूदा इस्करियोती था। वह ईसा मसीह के बेहद प्रिय शिष्यों में से एक थे। हालांकि, यहूदा के विचार बाकी 11 शिष्यों से अलग थे। इसी ने लालच की वजह से ईसा मसीह के साथ छल किया था। यहूदा ने किस प्रकार लालच की वजह से ईसा मसीह को धोखा दिया था, आइए समझते हैं।

 

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बाइबल में लालच के बारे में क्या लिखा है?

बाइबल में बताया गया है कि जब किसी व्यक्ति को लालच हो जाता है, तो वह पहले छोटे-छोटे समझौतों से शुरुआत करता है। उसके बाद वह लोगों से बेईमानी करने लगता है। धीरे-धीरे इंसान की अंतरात्मा की भावना सुन्न होने लगती है, जिसके बाद उस व्यक्ति को पाप भी गलत नहीं लगता।

बाकी शिष्यों से क्यों अलग था यहूदा?

धार्मिक कहानियों के मुताबिक, यहूदा इस्करियोती यहूदिया के एक गांव में रहता था। वहीं ज्यादातर शिष्य गलील प्रांत के थे। उस दौरान ईसा मसीह के सभी शिष्यों से संबंधित पैसों की जिम्मेदारी यहूदा के हाथ में थी। वहीं भेंट में मिले पैसों का हिसाब-किताब रखता था। यहूदा लगातार 3 सालों तक ईसा मसीह के साथ रहा। इस दौरान उसने ईसा मसीह के प्रेम, दया, चमत्कार और उपदेश को महसूस किया।

लालच में सब भूल गया

कुछ समय बाद यहूदा को दान पेटी में मिले पैसों का लालच हो गया। वह धीरे-धीरे इस लालच में सब भूल गया। यहूदा बड़ी चालाकी से धन कोष के रुपयों को चुराने लगा। इसी चालाकी में वह ईसा मसीह के प्रेम, उपदेश और सीख सब भूल गया। यहूदा शुरुआत में थोड़े-बहुत पैसे चुराता था, उसके बाद वह पाप की चरम सीमा तक पहुंच गया। वह दिन में ईसा मसीह से धर्म से जुड़े उपदेश सुनता था, वहीं रात के समय पैसे चुराता था।


एक बार गांव की एक महिला ने 300 दीनार का इत्र ईसा मसीह के चरणों में समर्पित किया था। यह देख यहूदा ने विरोध जताते हुए कहा कि इतने पैसे गरीबों को भेंट दिए जा सकते थे। हालांकि, मन ही मन वह पैसे इसलिए चाहता था ताकि उन्हें चुरा सके।

 

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लालच की वजह से ईसा मसीह को दिया धोखा

कुछ समय बाद यहूदा खुद उन लोगों के पास गया, जिन्होंने ईसा मसीह को गिरफ्तार किया था। बाइबल के मुताबिक, 30 चांदी के सिक्कों के लालच में यहूदा ने पुजारियों को वादा किया। यानी यहूदा ने पैसों के लालच में अपने प्रभु को धोखा दे दिया। इसी लालच की वजह से उसने उस प्रभु को खो दिया, जो करोड़ों लोगों को जीना सिखाते थे।

 

ईसा मसीह शाम के समय एक जंगल में प्रार्थना कर रहे थे। उसी दौरान यहूदा ने ईसा मसीह को प्रेम दिखाते हुए चूमा। हालांकि, यह प्रेम का संदेश नहीं था, बल्कि एक चाल थी। दरअसल, यहूदा ने चूमकर पुजारियों को संकेत दिया कि ईसा मसीह कौन हैं, ताकि दूसरे लोग उन्हें गिरफ्तार कर सकें। इसके बाद ऐसा ही हुआ। उन लोगों ने ईसा मसीह को गिरफ्तार कर लिया। बदले में यहूदा को 30 चांदी के सिक्के मिले। हालांकि, जल्द ही यहूदा को अपने कर्मों का एहसास हुआ और वह पछताने लगा।

 

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सब खोने के बाद यहूदा को हुआ पछतावा

ईसा मसीह की गिरफ्तारी के बाद जब पुजारियों ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया, तब जाकर यहूदा को होश आया। इसके बाद यहूदा दौड़कर पुजारियों के पास गया और ईसा मसीह के मृत्युदंड को रोकने लगा। उसने पुजारियों से मिले सारे सिक्के फेंक दिए और ईसा मसीह की रक्षा की गुहार लगाई। वह चिल्ला-चिल्लाकर कहने लगा, ‘मैंने बहुत बड़ा पाप किया है।’तब पुजारियों ने कहा, ‘अब बहुत देर हो चुकी है, तुम जाओ।’ इसके बाद यहूदा ने फांसी लगा ली। इस कहानी से साफ संदेश मिलता है कि लालच एक ऐसी भावना है, जो बड़े से बड़े विद्वान व्यक्ति को भी अंधा बना सकती है।

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