
अजमेर जिले के किशनगढ़ में मार्बल वेस्ट का डपिंग यार्ड पर्यटन स्थल बना हुआ है। यह डपिंग यार्ड देखने में किसी बर्फीली पहाड़ी जैसा लगता है। कुछ लोग इसके दृश्य को गुलमर्ग या स्विजरलैंड जैसा बता रहे हैं। असल में यह एशिया का सबसे बड़ा मार्बल डपिंग यार्ड है। यह एक जहरीली जगह है। यह जगह इन दिनों लोगों के लिए रील्स और फोटोशूट का प्वाइंट बना हुआ है। यहां दूर से दूर से लोग फोटो खींच वाने के लिए पहुंच रहे हैं।
इस डपिंग यार्ड पर रोजाना 700 टैंकर्स 22 लाख लीटर मार्बल स्लरी फेंकी जाती है। मार्बल स्लरी एक गाढ़ा कीचड़ है जो मार्बल की कटाई, घिसाई और पॉलिशिंग के दौरान निकलता है। यह जगह एक कचड़े का ढेर है। इसमें संगमरमर से निकलने वाला कचड़ा फेंका जाता है।
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वैज्ञानिकों ने क्यों बताया टॉक्सिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन?
यहां पर रोजाना 5000 पर्यटक आते हैं। जबकि वीकेंड के दिन पर्यटकों की संख्या 20,000 तक पहुंच जाती है। इस जगह पर लोग प्री वेडिंग और फोटोशूट करवा रहे हैं। सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान की साइटिफिक स्टीडीज ने इस जगह को टॉक्सिक टूरिस्ट डेस्टिनेशन बताया है। एक ऐसी जगह जहां पर जाना किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। यह एक ऐसा डपिंग यार्ड है जिसे बिना किसी सेफ्टी मेनजमेंट के चलाया जा रहा है।
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सेहत के लिए खतरनक है यह जगह
सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ राजस्थान में एनवायरमेंटल साइंस के प्रोफेसर लक्ष्मी कांत शर्मा ने बताया, ‘सेफ्टी तकनीक होने की वजह से ग्राउंडवॉटर कंटेमिनेशन हुआ है जिससे खेती की जमीन खराब हुई है। धूल की वजह से प्रदूषण बढ़ा है। ऐसी जगह पर सांस लेना भी खतरनाक है। सरकार को इस जगह को लोगों के बंद कर देना चाहिए। ऐसी जगहों पर खाने पीने की दुकानें खोलना सेहत के लिए बेहद हानिकारक है। यहां पर कोई टूरिस्ट एक्टिविटी नहीं होनी चाहिए।’