श्राप या संयोग? क्यों सिमट गई ब्रह्मा की पूजा सिर्फ पुष्कर मंदिर तक

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हिंदू धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता हैं। माना जाता है कि उनकी कृपा से ही इस संसार की उत्पत्ति हुई है लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि सृष्टि के रचयिता होने के बावजूद पृथ्वी लोक में उनका केवल एक ही प्रमुख मंदिर है, जहां उनकी पूजा की जाती है। यह मंदिर राजस्थान के पुष्कर में स्थित है। इस मंदिर से जुड़ी एक पौराणिक कथा है, जिसे जानने के बाद यह समझ में आता है कि भगवान ब्रह्मा की पूजा केवल यहीं क्यों होती है।

 

भगवान ब्रह्मा से संबंधित एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा के अनुसार उन्हें उनकी पत्नी देवी सावित्री ने श्राप दिया था। इसी श्राप के कारण, देवता होने के बावजूद, उनकी पूजा अन्य स्थानों पर नहीं की जाती। हालांकि पुष्कर में स्थित मंदिर में आज भी उनकी पूजा-अर्चना होती है। अब सवाल यह उठता है कि देवी सावित्री ने ऐसा श्राप क्यों दिया और पुष्कर ही क्यों एकमात्र स्थान बना?

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पुष्कर के ब्रह्मा मंदिर की खासियत

 

राजस्थान के पुष्कर में एक पवित्र झील है, जिसके पास भगवान ब्रह्मा का मंदिर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण लगभग 2000 वर्ष पहले हुआ था। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं, खासकर कार्तिक मास में यहां भारी भीड़ होती है। मंदिर के पास स्थित झील इसकी सुंदरता को और बढ़ा देती है।


भगवान ब्रह्मा से जुड़ी पौराणिक कथा

पद्म पुराण के अनुसार, पृथ्वी पर वज्रनाश नामक एक राक्षस लोगों को परेशान कर रहा था। उसकी अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान ब्रह्मा ने उसका वध किया। उसी समय उनके हाथ से तीन कमल के फूल धरती पर गिरे, जिनसे तीन पवित्र झीलों का निर्माण हुआ। इनमें से एक स्थान पुष्कर कहलाया, जहां बाद में भगवान ब्रह्मा का मंदिर स्थापित हुआ।

 

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 पद्म पुराण की कथा के अनुसार, भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रक्षा के लिए पुष्कर झील के पास एक यज्ञ का आयोजन किया। इस यज्ञ में उनकी पत्नी देवी सावित्री का उपस्थित होना अनिवार्य था लेकिन वे समय पर नहीं पहुंच सकीं। यज्ञ का शुभ मुहूर्त निकलता जा रहा था इसलिए ब्रह्मा जी ने नंदीनी गाय के मुख से गायत्री नाम की कन्या को प्रकट किया और उनसे विवाह कर लिया ताकि यज्ञ समय पर पूर्ण हो सके। इसके बाद वे गायत्री के साथ बैठकर यज्ञ करने लगे।

 

जब यज्ञ शुरू हो गया, तभी देवी सावित्री वहां पहुंचीं। ब्रह्मा जी के पास गायत्री को बैठा देखकर वे क्रोधित हो गईं। क्रोध में आकर उन्होंने ब्रह्मा जी को श्राप दिया कि पृथ्वी लोक में उनकी कहीं भी पूजा नहीं होगी। जब उनका क्रोध शांत हुआ तो ब्रह्मा जी के अनुरोध पर सावित्री ने अपने श्राप में थोड़ी शिथिलता दी और कहा कि केवल पुष्कर में ही उनकी पूजा की जाएगी। यही कारण है कि आज भी भगवान ब्रह्मा की पूजा केवल पुष्कर के इस मंदिर में ही प्रमुख रूप से होती है।

 

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कैसे जाएं पुष्कर ब्रह्मा मंदिर?

 

भगवान ब्रह्मा के मंदिर तक पहुंचने के लिए आप अपने शहर से नजदीकी रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट या बस स्टैंड से यात्रा शुरू कर सकते हैं। इसके बाद राजस्थान के अजमेर पहुंचें। अजमेर से पुष्कर की दूरी लगभग 14 किलोमीटर है, जिसे आप बस, टैक्सी या निजी वाहन से आसानी से तय कर सकते हैं।

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