‘DPDP Act खोजी पत्रकारिता को नहीं करेगा सीमित’, अश्विनी वैष्णव ने चर्चा के लिए संपादकों को किया आमंत्रित

0
2

पीटीआई, नई दिल्ली। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को उन आशंकाओं को खारिज किया कि डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम खोजी पत्रकारिता को सीमित कर सकता है।

उन्होंने कहा कि संविधान में प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है। उन्होंने संपादकों तथा मीडिया पेशेवरों को अपनी चिंताओं पर सरकार से चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया।

वैष्णव ने कहा, पत्रकारिता की स्वतंत्रता की गारंटी भारत का संविधान देता है। इस स्वतंत्रता को प्रभावित करने का कोई इरादा नहीं है। निजता कानून मीडिया की स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी को पूरी तरह बरकरार रखता है। सरकार पत्रकारों की चिंता को सुनने और जरूरत पड़ने पर सुझावों पर विचार करने के लिए तैयार है।

केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी मीडिया संस्थानों की ओर से अधिनियम के संभावित असर को कानूनी चुनौती दिए जाने के बीच आई है।

मीडिया संस्थानों का तर्क है कि पत्रकारिता से जुड़ी गतिविधियों के लिए स्पष्ट छूट न होने से उन मामलों की जांच मुश्किल हो सकती है, जिनमें संबंधित लोगों की सहमति के बिना जुटाई गई निजी जानकारी शामिल हो।

उन्होंने गोपनीय स्रोतों और जनहित की खबरों के लिए प्रासंगिक सामग्री को सुरक्षित रखने को लेकर भी चिंता जताई है।इस बीच, सूत्रों ने संकेत दिया कि सरकार पत्रकारिता से जुड़ी गतिविधियों को संरक्षण देने और चिंताओं का समाधान करने के लिए कानून में संशोधन पर विचार कर सकती है।

सरकार के एक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अगर पत्रकारिता के लिए स्पष्ट वैधानिक संरक्षण जरूरी माना गया, तो संशोधन पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, वैष्णव ने किसी संशोधन के बारे में बात नहीं की।

उन्होंने कहा कि डीपीडीपी अधिनियम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद लाया गया, जिसमें निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था। इस कानून का मसौदा एक साल से अधिक समय तक चले परामर्श के बाद तैयार किया गया।

इस विचार-विमर्श में समाचार पत्रों, टेलीविजन चैनलों, मीडिया प्रतिनिधियों, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग और अन्य संबंधित पक्षों ने हिस्सा लिया था।

मंत्री ने कहा कि निजता कानून सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनाया गया है। उस फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना गया था। संसद ने वास्तव में उस फैसले को कानून का रूप दिया। वैष्णव के मुताबिक, परामर्श के दौरान सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह कानून प्रेस की स्वतंत्रता को कमजोर नहीं करेगा।

उन्होंने निजी जानकारी के दुरुपयोग और पत्रकारिता में उसके वैध इस्तेमाल के बीच अंतर बताया। कहा कि डाटा निजता का मतलब यह नहीं है कि आप किसी बात को खबर नहीं बना सकते। पत्रकारों को स्वतंत्रता संविधान से मिलती है। इसे किसी कानून से खत्म नहीं किया जा सकता।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here