अरुणाचल प्रदेश में सियांग बांध को लेकर क्यों हो रहा हिंसक प्रदर्शन? समझिए पूरा विवाद

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डिजिटल डेस्क, ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश की प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की स्थिति बनी है। शुक्रवार रात पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में हिंसक हो गया।

क्या है पूरा मामला?

अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में तनाव की स्थिति बनी हुई है, जो एक बड़े डैम के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध का केंद्र बन गया है। राज्य के सियांग घाटी क्षेत्र के तीन जिलों में पिछले दो हफ्तों से हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद तनाव जारी है।

प्रशासन और पुलिस ने यह पक्का करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं कि कोई हड़ताल न हो। पासीघाट शहर और पूरे ईस्ट सियांग जिले में सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स की बड़ी टुकड़ियों को तैनात किया गया।

गाड़ियों की आवाजाही रेगुलर थी और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन, सरकारी ऑफिस और बैंकों में कामकाज नॉर्मल था। मार्केट खुले थे और लोग सड़कों पर दिखे।

नई दिल्ली का अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट से 40 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी डायवर्ट हो सकता है। इससे निपटने के लिए, सरकार ने सियांग अपर मल्टीपर्पस प्रोजेक्ट या SUMP की योजना बनाई है, जिसे नेशनल हाइड्रो पावर कॉर्पोरेशन या NHPC संभाल रही है।

क्या है विरोध का कारण? 

इस फैसले से सियांग वैली में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों में से ज्यादातर Gen Z से हैं उनका कहना है कि प्रस्तावित जलाशय से 32 गांवों में बाढ़ आ जाएगी। 

23 अक्टूबर को, प्रदर्शनकारियों ने जो प्रोजेक्ट को रद करने की मांग कर रहे थे कथित तौर पर NHPC ऑफिस और पुलिस की गाड़ियों में आग लगा दी। कहा जा रहा है कि उन्होंने दो MLA और राज्य BJP चीफ के घरों में भी तोड़फोड़ और लूटपाट की।

करीब 10 पुलिस केस दर्ज किए गए हैं और 26 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

कब शुरू हुई हिंसा?

यह हिंसा तब शुरू हुई जब आदि बाने केबांग यूनाइटेड और अन्य संगठनों द्वारा प्रस्तावित प्रोजेक्ट के खिलाफ बुलाया गया। 12 घंटे का बंद शाम 5 बजे शांतिपूर्ण ढंग से खत्म हुआ। हालांकि पासीघाट इलाके में इस बंद का असर नहीं दिखा।

पुलिस स्टेशन में लगाई आग

पुलिस ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार सुबह करीब नौ घंटे तक रुक रुक कर हिंसा होती रही। जिसमें पत्थरबाजी के कारण 40 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। एक प्रदर्शनकारी के पैर में आंसू गैस का गोला लग गया जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रशासन ने कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई

पूर्वी सियांग जिला प्रशासन ने पासीघाट मेबो और रुक्सिन में लोगों के इकट्ठा होने और जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है। प्रशासन को आशंका है कि विरोध प्रदर्शन और बंद से जुड़ी गतिविधियों कारण तोड़फोड़ और आगजनी हो सकती है।

प्रशासन ने कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई है। शनिवार को जारी एक आदेश में डिप्टी कमिश्नर जयंती पर्टिन ने कहा कि ये पाबंदियां 24 अक्टूबर को शाम 5 बजे से लागू हो जाएंगी और तब तक बनी रहेंगी जब तक कि इन्हें वापस न ले लिया जाए या इनमें कोई बदलाव न किया जाए।

पुलिस ने मामले की दी जानकारी

पासीघाट के IGP हिबू तमांग ने बताया कि केंद्रीय पुलिस बल के जवान भी बुरी तरह घायल हुए हैं। भीड़ ने उस अस्पताल पर भी पथराव किया, जहां घायल केंद्रीय बलों के जवानों को ले जाया गया था। पुलिस के कम से कम नौ वाहनों को नुकसान पहुंचा है। सुबह करीब 4 बजे भीड़ इधर-उधर हो गई थी।

तमांग ने बताया, ‘खुद को जेन जी कहने वाला युवाओं का एक समूह अचानक सामने आया और मेबो की तरफ धरने पर बैठ गया। दोपहर करीब 2 बजे यह समूह पासीघाट के इलाके में दाखिल हो गया। उन्होंने पासीघाट-बोलेंग हाईवे को जाम कर दिया और गाड़ियों की आवाजाही रोक दी। उनकी कोई स्पष्ट मांग नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे और इस दौरान नारेबाजी भी की गई है।’

अंधेरा होते ही हिंसक हुई भीड़

IGP ने बताया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने इस समूह को हाईवे से हटने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन दो घंटे तक चली बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला।

आईजीपी ने कहा, ‘अंधेरा होते ही यह समूह काफी हिंसक और बेकाबू हो गया। 200-300 लोगों की एक हिंसक भीड़ ने पुलिस और मजिस्ट्रेट पर पथराव शुरू कर दिया। उनमें से कुछ के हाथों में शराब और बीयर की बोतलें थीं और वे नशे में थे। पुलिस ने संयम से काम लिया और आंसू गैस के गोले छोड़ने के अलावा कोई और सख्त कदम नहीं उठाया।’ पुलिस ने बताया कि उन्होंने इस घटना की वीडियो और तस्वीरें रिकॉर्ड कर ली हैं।’

प्रदर्शनकारी की क्या है मांग?

यह बंद अदी बाने केबांग यूनाइटेड, SUMP अफेक्टेड एरिया यूथ एसोसिएशन, सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम यूथ विंग, और अदी गालो वेलफेयर सोसाइटी ने मिलकर सियांग, अपर सियांग और ईस्ट सियांग जिलों में बुलाया था।

ये संगठन 10 गिरफ्तार एक्टिविस्ट की रिहाई, सस्पेंड किए गए गांव बुरहा (गांव के मुखिया) को वापस लेने, प्रोजेक्ट के लिए प्री-फीजिबिलिटी सर्वे से जुड़ी एक्टिविटी को वापस लेने और इलाके में तैनात पैरामिलिट्री और सेंट्रल फोर्स को हटाने की मांग कर रहे हैं।

अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस ने भी हिंसा की निंदा की है और बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले के कथित इस्तेमाल की स्वतंत्र जांच की मांग की है।

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