Tuesday, March 3, 2026
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भारत-नेपाल सीमा पर नशीली दवाओं का तस्कर गिरफ्तार, 950 कैप्सूल बरामद।*

रिपोर्ट:हेमंत कुमार दुबे।

महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा पर नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सोमवार देर शाम एक बड़ी सफलता मिली। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक तस्कर को गिरफ्तार कर उसके पास से 950 प्रासिको स्पॉस कैप्सूल और एक होंडा साइन बाइक बरामद की है।यह गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब 500 मीटर पहले एसएसबी रोड पर की गई। गिरफ्तार किए गए तस्कर की पहचान ठूठीबारी थाना क्षेत्र के निपनिया गांव निवासी बबलू कुमार मद्धेशिया के रूप में हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार, बरामद की गई इन नशीली दवाओं को अवैध रूप से नेपाल भेजा जाना था।
इस संयुक्त अभियान का नेतृत्व सहायक कमांडेंट दालसानिया हरसुखलाल रूपा भाई और बीओपी इंचार्ज शिवपूजन ने किया। टीम में एसआई बृजेश कुमार पांडेय, कांस्टेबल बलवंत यादव, अनूप यादव, और मृत्युंजय तिवारी भी शामिल थे।प्रभारी कोतवाल महेंद्र मिश्रा ने बताया कि आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पर नशा तस्करी रोकने के लिए गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर

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भारत-अमेरिका डील में सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

उद्योग जगत ने समझौते पर नजरें लगा रखी हैं। – फोटो : गांव जंक्शन

चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

अमेरिका को सूखे पशु चारे (डीडीजीएस) पर सिर्फ 5 लाख टन कोटा। – फोटो : गांव जंक्शन

बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

पशु चारे की मांग बढ़ने के कारण जरूरी हो जाता है आयात। – फोटो : गांव जंक्शन

सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर

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भारत-अमेरिका डील में सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

उद्योग जगत ने समझौते पर नजरें लगा रखी हैं। – फोटो : गांव जंक्शन

चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

अमेरिका को सूखे पशु चारे (डीडीजीएस) पर सिर्फ 5 लाख टन कोटा। – फोटो : गांव जंक्शन

बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

पशु चारे की मांग बढ़ने के कारण जरूरी हो जाता है आयात। – फोटो : गांव जंक्शन

सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर

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भारत-अमेरिका डील में सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

उद्योग जगत ने समझौते पर नजरें लगा रखी हैं। – फोटो : गांव जंक्शन

चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

अमेरिका को सूखे पशु चारे (डीडीजीएस) पर सिर्फ 5 लाख टन कोटा। – फोटो : गांव जंक्शन

बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

पशु चारे की मांग बढ़ने के कारण जरूरी हो जाता है आयात। – फोटो : गांव जंक्शन

सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।

होली के जश्न पर प्रशासन की पैनी नजर, मथुरा-वृंदावन में भारी पुलिस बल तैनात

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ब्रज में रंगों के त्योहार को लेकर उत्साह चरम पर है, लेकिन प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जश्न के बीच कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा। होलिका दहन के बाद होने वाली रंगों की होली को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

1500 पुलिसकर्मी तैनात

मथुरा और वृंदावन में रंगों की होली शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर वहां अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। करीब 1500 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग स्थानों पर जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि पीएसी की कंपनियां भी उनके साथ लगातार गश्त करेंगी।

भीड़भाड़ वाले मंदिरों, प्रमुख बाजारों और चौराहों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। कई स्थानों पर सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे, जो हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिले को जोन और सेक्टरों में बांटा गया है और प्रत्येक जोन की कमान राजपत्रित अधिकारियों को दी गई है।

एसएसपी ने कहा ये

एसएसपी श्लोक कुमार ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी ने होली के नाम पर हुड़दंग या उपद्रव करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि त्योहार को सौहार्दपूर्ण और सुरक्षित वातावरण में मनाना ही प्राथमिकता है।

मेगा ब्लाक : जबलपुर-गोंदिया पैसेंजर टर्मिनेट, रीवा-इतवारी एक्सप्रेस छिंदवाड़ा होकर चलेगी

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जबलपुर. दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, नागपुर मंडल के गोंदिया रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म-4 पर वॉशेबल एप्रॉन अधोसंरचनात्मक कार्य हेतु नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के लिए प्रस्तावित ब्लॉक के कारण कुछ ट्रेनें निरस्त, मार्ग परिवर्तित एवं शॉर्ट टर्मिनेट/ओरिजिनेट करने का निर्णय लिया गया है।पमरे से प्रारम्भ/टर्मिनेट होने वाली प्रभावित ट्रेनों का विवरण1- 02 मई से 18 मई तक रीवा से चलने वाली गाड़ी संख्या 11754 रीवा-नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी जंक्शन एक्सप्रेस ट्रेन 08 ट्रिप वाया जबलपुर-नैनपुर-छिंदवाड़ा होकर गंतव्य को जाएगी चलेगी। 2- 03 मई से 19 मई तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी जंक्शन से चलने वाली गाड़ी संख्या 11753 नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी जंक्शन-रीवा एक्सप्रेस ट्रेन 08 ट्रिप वाया छिंदवाड़ा-नैनपुर-जबलपुर होकर गंतव्य को जाएगी चलेगी।शॉर्ट टर्मिनेट/ओरिजिनेट/आंशिक रूप से निरस्त ट्रेनें1- गाड़ी संख्या 51707 जबलपुर-गोंदिया पैसेंजर ट्रेन 03 मई से 22 मई तक बिरसोला स्टेशन पर शॉर्ट टर्मिनेट होगी तथा बिरसोला से गोंदिया के मध्य निरस्त रहेगी। 2) गाड़ी संख्या 51708 गोंदिया-जबलपुर पैसेंजर ट्रेन 03 मई से 22 मई तक बिरसोला रेलवे स्टेशन से शॉर्ट ओरिजिनेट होगी तथा गोंदिया से बिरसोला के मध्य निरस्त रहेगी। रेलवे ने यात्रियों से अनुरोध है कि असुविधा से बचने के लिए उक्त ट्रेनों की उचित जानकारी रेलवे की आधिकारिक पूछताछ सेवा, एनटीईएस, रेल मदद 139 से प्राप्त कर यात्रा करें।

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पशु आहार पर सीमित छूट, सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर

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भारत-अमेरिका डील में सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा दिया गया है। – फोटो : सोशल मीडिया

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भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण में कृषि और खाद्य तेल क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों को लेकर तस्वीर धीरे-धीरे साफ हो रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को सूखा अनाज आधारित पशु आहार (DDGS) पर दी गई रियायत बेहद सीमित है और इससे घरेलू किसानों या बाजार पर बड़े असर की आशंका नहीं है। हालांकि, सोयाबीन तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर संभावित टैरिफ कटौती को लेकर उद्योग जगत अब भी विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार कर रहा है।

पशु आहार पर सिर्फ 5 लाख टन का कोटा
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक भारत ने अमेरिका को DDGS यानी सूखा अनाज आधारित पशु आहार पर अधिकतम 5 लाख टन का ही कोटा दिया है। यह देश की कुल पशु आहार खपत का करीब एक फीसदी है। भारत में पशु चारे की सालाना खपत लगभग 500 लाख टन आंकी जाती है। सरकार का कहना है कि यह सीमित आयात घरेलू आपूर्ति में कमी की भरपाई करेगा, न कि बाजार में असंतुलन पैदा करेगा।

उद्योग जगत ने समझौते पर नजरें लगा रखी हैं। – फोटो : गांव जंक्शन

चारे की लागत और खाद्य महंगाई पर नियंत्रण की कोशिश
सरकार का तर्क है कि सीमित मात्रा में DDGS आयात से मक्का और सोयाबीन जैसे कच्चे माल पर दबाव घटेगा। इससे इंसानों के उपभोग योग्य अनाज को पशु चारे में इस्तेमाल करने की मजबूरी कम होगी। पोल्ट्री, डेयरी, एक्वाकल्चर और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में लागत स्थिर रहने की उम्मीद जताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति को काबू में रखने में भी सहायक हो सकता है।
 

अमेरिका को सूखे पशु चारे (डीडीजीएस) पर सिर्फ 5 लाख टन कोटा। – फोटो : गांव जंक्शन

बढ़ती मांग ने पहले भी बढ़ाया आयात
पिछले कुछ वर्षों में पशु आहार की मांग तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2021 में घरेलू कीमतों में उछाल के कारण भारत को करीब 15 लाख टन सोयाबीन मील का आयात करना पड़ा था। इसके अलावा 6 लाख टन से अधिक पशु आहार श्रीलंका, चीन, अमेरिका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देशों से मंगाया गया। म्यांमार, यूक्रेन, सिंगापुर और यूएई से मक्का, जबकि कुछ अफ्रीकी देशों से सोयाबीन का भी आयात हुआ है।

पशु चारे की मांग बढ़ने के कारण जरूरी हो जाता है आयात। – फोटो : गांव जंक्शन

सोयाबीन तेल पर उद्योग की नजर, लेकिन सतर्कता बरकरार
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मसौदे को खाद्य तेल और सोयाबीन प्रसंस्करण उद्योग ने सतर्क आशावाद के साथ देखा है। प्रस्तावित समझौते के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर शुल्क 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमत है। इसके बदले भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं, सोयाबीन तेल, पशु आहार, अखरोट और कुछ फलों पर शुल्क घटाने या हटाने पर विचार कर रहा है।

कीमत, कोटा और जीएम उत्पादों पर सवाल
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि भारत पहले से ही सोयाबीन तेल के आयात पर काफी निर्भर है, ऐसे में यह समझौता अवसर भी बन सकता है। फिलहाल अमेरिका से आने वाला सोयाबीन तेल ऊंचे शुल्क के कारण महंगा पड़ता है और अर्जेंटीना की तुलना में 30-40 डॉलर प्रति टन ज्यादा कीमत पर आता है। हालांकि, उद्योग संगठनों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) और नॉन-GM उत्पादों को लेकर सरकार का रुख अभी साफ नहीं है। टैरिफ कटौती, कोटा व्यवस्था और गुणवत्ता मानकों पर अंतिम दिशा-निर्देश सामने आने के बाद ही उद्योग कोई ठोस निष्कर्ष निकाल पाएगा।

मेरठ में CO के ऑडियो विवाद पर SSP का बयान, कहा- मीडिया की वैध रिपोर्टिंग पर नहीं प्रतिबंध

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मेरठ में ब्रह्मपुरी सर्किल की सीओ सौम्या अस्थाना का एक 29 सेकंड का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। ऑडियो में कथित तौर पर वह थाने के भीतर पत्रकारों द्वारा की जा रही वीडियोग्राफी पर मुकदमा दर्ज करने का निर्देश देती सुनाई दे रही हैं। मामले ने तूल पकड़ा तो वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अविनाश पांडेय सामने आए और पूरे प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट की।

एसएसपी ने कहा ये

एसएसपी अविनाश पांडेय ने कहा कि ऑडियो को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सीओ का निर्देश प्रिंट मीडिया के लिए नहीं था, बल्कि कुछ ऑनलाइन पोर्टल संचालकों के लिए था, जो थाने के भीतर अनावश्यक और अनर्गल तरीके से वीडियो बना रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रिंट मीडिया पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं है और मीडिया के वैध कार्य में बाधा डालने का सवाल ही नहीं उठता।

एसएसपी ने यह भी कहा कि पुलिस और मीडिया के बीच समन्वय बना रहना बेहद जरूरी है। यदि कोई भी व्यक्ति थाने के कामकाज में बाधा डालता है या संवेदनशील दस्तावेजों और प्रक्रियाओं की अनुचित रिकॉर्डिंग करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि सामान्य रिपोर्टिंग या कवरेज को लेकर कोई रोक नहीं है।

क्या कहता है नियम

गौरतलब है कि अदालत पहले स्पष्ट कर चुकी है कि पुलिस थाने में वीडियोग्राफी अपने आप में आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम 1923 का उल्लंघन नहीं है, जब तक कि इससे अधिकारियों के कर्तव्यों में व्यवधान न हो। इस बीच, सीओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। फिलहाल एसएसपी के बयान के बाद पुलिस प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।

लखनऊ में 3729 स्थानों पर होलिका दहन, सुरक्षा में 4000 पुलिसकर्मी तैनात

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लखनऊ में होली पर्व को सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां कर ली हैं। शहर में सोमवार को 3729 स्थानों पर होलिका दहन किया जाएगा, जबकि बुधवार को गली-मोहल्लों में रंगोत्सव मनाया जाएगा। रंग खेलने का कार्यक्रम दोपहर करीब 12 बजे तक चलेगा, जिसके बाद विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक आयोजन और शोभायात्राएं भी निकाली जाएंगी। त्योहार के मद्देनजर पुलिस कमिश्नरेट पूरी तरह अलर्ट मोड में है ताकि कहीं भी अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।

अफसरों ने दी जानकारी

संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बबलू कुमार के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए करीब चार हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। इसके अतिरिक्त 50 राजपत्रित अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है, जो विभिन्न क्षेत्रों में निगरानी रखेंगे। उच्चाधिकारियों को पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संवेदनशील इलाकों में 14 कंपनी पीएसी और आरएएफ के जवान भी तैनात रहेंगे।

शोभायात्रा मार्गों और होलिका दहन स्थलों पर ड्रोन कैमरों से नजर रखी जाएगी। इसके लिए छह आधुनिक ड्रोन लगाए गए हैं, जो भीड़ और गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग करेंगे। साथ ही पिंक पेट्रोल, एंटी रोमियो स्क्वायड और डायल 112 की टीमें भी सक्रिय रहेंगी। महिला और पुरुष पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में भीड़भाड़ वाले इलाकों में तैनात रहेंगे।

हर जगह रहेगी नजर

इंटरनेट मीडिया पर अफवाह या आपत्तिजनक पोस्ट पर नजर रखने के लिए विशेष निगरानी दल बनाए गए हैं। एक्स, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप समूहों की मॉनिटरिंग 24 घंटे की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की अराजकता या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे भाईचारे और शांति के साथ त्योहार मनाएं।

मेट्रो लाइन 9 का ट्रायल रन सफल रहा

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दहिसर – मीरा-भायंदर मेट्रो का पहला फेज़ जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।मुंबई मेट्रो लाइन 9 का पहला फेज़ दहिसर और काशीगांव के बीच चलेगा। इस रूट का ट्रायल रन पूरा हो चुका है।साथ ही, फाइनल सेफ्टी क्लीयरेंस का प्रोसेस चल रहा है। यह प्रोसेस पूरा होने और अप्रूवल मिलने के बाद, यह रूट पैसेंजर्स के लिए खोल दिया जाएगा। (Metro Line 9 trial run successful)

मेट्रो लाइन 9 नॉर्थ मुंबई के दहिसर और मीरा रोड एरिया के काशीगांव के बीच डायरेक्ट कनेक्शन

मेट्रो लाइन 9 नॉर्थ मुंबई के दहिसर और मीरा रोड एरिया के काशीगांव के बीच डायरेक्ट कनेक्शन देगी।इसके अलावा, यह मेट्रो दहिसर स्टेशन से दहिसर से गुंडावली तक चलने वाली मेट्रो लाइन 7 से सीधे दहिसर को कनेक्ट करेगी। इस मेट्रो के शुरू होने के बाद, वेस्टर्न एक्सप्रेस रूट पर ट्रैफिक कंजेशन कम होने की उम्मीद है।दहिसर से काशीगांव सेक्शन 4.973 km लंबा है। दहिसर ईस्ट को मीरा रोड से जोड़ने वाले इस सेक्शन का काम MMRDA शुरू कर रहा है।

 इस रूट पर कुल 8 स्टेशन

लोकल पैसेंजर्स भी इस मेट्रो का इस्तेमाल करेंगे। इस रूट पर कुल 8 स्टेशन हैं। यह पूरा रूट 13.5 km लंबा है। अभी दहिसर से मीरा भयंदर जाने में 1 घंटा लगता है। ट्रैफिक जाम के दौरान इसमें 75 मिनट तक लग जाते हैं। इस मेट्रो रूट पर सफर करने में सिर्फ 25-30 मिनट लगेंगे। इस मेट्रो रूट का काम पिछले 7 साल से चल रहा है। कमिश्नर फॉर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) ने मेट्रो का इंस्पेक्शन करने के बाद कुछ छोटे-मोटे टेक्निकल सुधार के ऑर्डर दिए हैं।

इन कामों को पूरा करके अगले कुछ दिनों में मेट्रो शुरू करने का मकसद है। काम पूरा होते ही इस रूट का उद्घाटन मुख्यमंत्री करेंगे और इसे यात्रियों के लिए खोल दिया जाएगा। इस बीच, 2026 में मुंबई में मेट्रो लाइन 2B का 23.6 km लंबा रूट भी शुरू किया जाएगा। यह रूट अंधेरी के डीएन नगर से मानखुर्द के पास मांडले तक होगा। इस रूट पर कुल 20 स्टेशन होंगे। इसके साथ ही अंधेरी, बांद्रा-कुर्ला संकुल, चेंबूर और मानखुर्द स्टेशनों पर इंटरचेंज भी बनाए जाएंगे।

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गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड 2028 तक पूरा होने की संभावना

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2026 तक खुल सकता है GMLR फेज़-1

मुंबई में ईस्ट-वेस्ट कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के मकसद से गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड (GMLR) प्रोजेक्ट का बेसब्री से इंतज़ार था, और अब इसके दिसंबर 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) कर रहा है।लगभग 12.2 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर सीधे पश्चिमी इलाकों में गोरेगांव को पूर्वी इलाकों में मुलुंड से जोड़ेगा। एक बार चालू हो जाने पर, इस सड़क से दोनों इलाकों के बीच यात्रा का समय लगभग 90 मिनट से घटकर लगभग 20 मिनट हो जाने की उम्मीद है, जिससे आने-जाने वालों को बड़ी राहत मिलेगी। (Mumbai Goregaon Mulund Link Road Likely to Be Completed by 2028)

संजय गांधी नेशनल पार्क और आरे इलाके के नीचे से गुजरने वाली एक ट्विन टनल

GMLR प्रोजेक्ट कई फेज़ में बनाया जा रहा है और इसमें फ्लाईओवर, एलिवेटेड रोड और इंटरचेंज बनाना शामिल है। प्रोजेक्ट की एक खास बात संजय गांधी नेशनल पार्क और आरे इलाके के नीचे से गुजरने वाली एक ट्विन टनल है, जिसे ट्रैफिक मूवमेंट को आसान बनाने और मौजूदा ईस्ट-वेस्ट रूट पर भीड़ कम करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

हालांकि अलग-अलग हिस्सों पर काम आगे बढ़ रहा है, लेकिन कुछ फेज़ में देरी के कारण इसे 2028 तक पूरा करने का टारगेट बदल दिया गया है। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि एक बार पूरा हो जाने पर जीएमएलआर मुंबई के उपनगरीय नेटवर्क में यातायात के दबाव को कम करने और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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