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बच्चे की मौत के मामले में वांछित आरोपी गिरफ्तार:पुरंदरपुर पुलिस ने मंजेश पासवान को पकड़ा, न्यायालय भेजा

महराजगंज में सड़क हादसे में बच्चे की मौत के मामले में वांछित आरोपी मंजेश पासवान को पुरंदरपुर पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसे न्यायालय भेज दिया। पुलिस के मुताबिक, मंजेश पासवान पुत्र रामचंद्र पासवान (26), ग्राम रघुनाथपुर, टोला गिद्धा, थाना पुरंदरपुर, महराजगंज का निवासी है। वह पुरंदरपुर थाने में दर्ज मुकदमा संख्या 239/2026 में वांछित था। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 281/105 से जुड़ा है। आरोप है कि मंजेश बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चला रहा था। लापरवाही से हुए सड़क हादसे में एक बच्चे की मौत हो गई थी। जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों के आधार पर धारा 106(1) बीएनएस को धारा 105 बीएनएस में बदला गया। पुलिस अधीक्षक महराजगंज शक्ति मोहन अवस्थी के निर्देश पर वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी का अभियान चल रहा है। अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ और क्षेत्राधिकारी फरेंदा दीपीशिखा वर्मा की निगरानी में थानाध्यक्ष पुरंदरपुर के नेतृत्व वाली टीम ने कार्रवाई की। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर 30 अक्टूबर 2026 को शाम करीब 6 बजे रानीपुर चौराहे से आगे पुल के पास मंजेश को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी करने वाली टीम में उपनिरीक्षक राकेश कुमार और कांस्टेबल शुभम पाल शामिल थे। दोनों पुरंदरपुर थाने में तैनात हैं।

बस्ती की लैब में खाद्य और दवाओं की जांच शुरू:20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी प्रयोगशाला में तीन जिलों के नमूनों की होगी जांच

बस्ती मंडल के लोगों को खाद्य पदार्थों और दवाओं की गुणवत्ता जांच के लिए अब दूसरे जिलों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मुख्यमंत्री की परियोजना के तहत 20 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी क्षेत्रीय खाद्य एवं औषधि प्रयोगशाला में शनिवार से नमूनों की जांच शुरू हो गई। इससे बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर को लाभ मिलेगा। शनिवार सुबह 11 बजे धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ के बाद सहायक आयुक्त (खाद्य), बस्ती मंडल ने फीता काटकर जांच का काम शुरू किया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब और बस्ती के मंडलायुक्त के प्रयासों से प्रयोगशाला शुरू हो सकी। फिलहाल यहां बस्ती मंडल के तीन जिलों बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर से आने वाले नमूनों की जांच होगी। अब तक खाद्य पदार्थों के 26 और दवाओं के 12 नमूने जांच के लिए मिले हैं। शुरुआती चरण में अलग-अलग खाद्यान्न, दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूनों की जांच शुरू की गई है। जल्द ही अन्य खाद्य उत्पादों की जांच भी शुरू होगी। तस्वीरें देखिए…

‘अगर मैच का अंपायर ही पक्षपाती हो तो खेलने का क्या मतलब?’, सचिन पायलट ने CEC को घेरा

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डिजिटल डेस्क नई दिल्ली। कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के आचरण, उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया और पद से हटने के बाद उन्हें मिलने वाली छूट (इम्युनिटी) ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

न्यूज एजेंसी एएनआई के साथ एक इंटरव्यू में पायलट ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कदमों ने चुनावी संस्था में जनता के भरोसे को कम किया है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोपों पर जवाबदेही की मांग की।

‘चुनावों पर कैसे भरोसा करें मतदाता?’

पायलट ने सवाल किया, “अगर मैच का अंपायर ही पक्षपाती हो तो खेलने का क्या मतलब है?” उन्होंने पूछा कि अगर चुनाव कराने वाली संस्था की निष्पक्षता पर ही सवाल उठ रहे हों तो मतदाता चुनावों पर भरोसा कैसे कर सकते हैं?

उन्होंने मतदाता सूची से 13.3 करोड़ नाम हटाए जाने के आरोपों का जिक्र करते हुए इसे वोट देने के मौलिक अधिकार के लिए एक चुनौती बताया। उन्होंने कहा, “मतदाता सूची से 13.3 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं। यह हमारे गणतंत्र के सबसे बुनियादी मुद्दे यानी वोट देने के अधिकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।”

‘कांग्रेस ने गड़बड़ियों के ठोस सबूत दिए हैं’

पायलट ने दावा किया कि कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ज्ञानेश कुमार द्वारा की गई कथित गड़बड़ियों के दस्तावेजी सबूत पेश किए हैं। उन्होंने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान ज्ञानेश कुमार द्वारा की गई गड़बड़ियों के लिए पर्याप्त ठोस आंकड़े और दस्तावेजी सबूत दिए गए हैं।”

पायलट के सवाल

पायलट ने सीईसी की नियुक्ति प्रक्रिया और छूट (इम्युनिटी) देने वाले कानून पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से जुड़े कानूनी प्रावधानों और पद छोड़ने के बाद उस पद पर रहे व्यक्ति को मिलने वाली छूट पर सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा कि पहले की चयन प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल होते थे। उन्होंने चयन पैनल की संरचना बदलने के सरकार के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि पद छोड़ने के बाद सीईसी को छूट देने वाले कानून की क्या जरूरत थी।

पायलट ने कहा, “सरकार को एक ऐसा नया कानून लाने की क्या जरूरत थी, जो मुख्य चुनाव आयुक्त को जीवन भर के लिए छूट (इम्युनिटी) देता हो? अब देश में वे इकलौते व्यक्ति हैं न तो प्रधानमंत्री, न मुख्यमंत्री, न ही इंटेलिजेंस डायरेक्टर या सेना प्रमुख बल्कि सिर्फ वे ही ऐसे व्यक्ति हैं, जिन्हें पद छोड़ने के बाद जीवन भर के लिए छूट मिलेगी।”

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देने में विफल रही है। उन्होंने तर्क दिया कि जवाब न मिलने की वजह से ही इस मुद्दे को जनता के सामने ले जाना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा, “एक राजनीतिक दल के रूप में हमें यह मुद्दा उठाने और जवाब मांगने का पूरा अधिकार है।”

कांग्रेस का CEC के खिलाफ सार्वजनिक महाभियोग

पायलट ने कहा कि विपक्ष खासकर युवाओं के बीच स्वतंत्र चुनावी संस्थाओं के महत्व को लेकर जागरूकता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन संस्थानों से पारदर्शी तरीके से काम करने की उम्मीद की जाती है, उन्हें राजनीतिक जुड़ावों से ऊपर रहना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि कानूनी चुनौती पहले ही शुरू हो चुकी है और मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

उन्होंने कहा, “यह लड़ाई पहले से ही कई स्तरों पर चल रही है। हम सुप्रीम कोर्ट भी गए थे। मामले अभी चल रहे हैं और अदालत के विचाराधीन हैं। चुनाव आयोग ने भी इस पर स्पष्टीकरण दिया है, जिससे जाहिर तौर पर आप संतुष्ट नहीं हैं।”

इंडी गठबंधन शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक जन महाभियोग ला रही है। बारिश के कारण शुक्रवार को यह कार्यक्रम टाल दिया गया था। इसके अलावा, विपक्षी गठबंधन रविवार को रामलीला मैदान में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ एक रैली भी आयोजित करने वाला है।

यह भी पढ़ें: ‘कांग्रेस लगातार तीन चुनाव क्यों हारी?’, दिल्ली में इंडी गठबंधन की रैली से पहले किरेन रिजीजू ने पूछे सवाल

आप पार्टी ने सरदार पटेल की जयंती मनाई:गिलौला के धरसंवा चौराहे पर धूमधाम से हुआ कार्यक्रम

श्रावस्ती के गिलौला में धरसंवा चौराहे पर शनिवार को शाम 3 बजे सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम आम आदमी पार्टी के जिला सचिव जयप्रकाश सिंह के प्रतिष्ठान पर हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने सरदार वल्लभभाई पटेल के देश के लिए योगदान को याद किया। इस दौरान जिला सचिव जयप्रकाश सिंह, जिला सचिव साबिर अली बकाई, गिलौला ब्लॉक अध्यक्ष शेष राज चक्रवर्ती, ब्लॉक उपाध्यक्ष पंकज कुमार सिंह, बलवंत कुमार और अब्दुल्ला खां मौजूद रहे। आम आदमी पार्टी श्रावस्ती के जिला अध्यक्ष शैलेंद्र तिवारी आशीष ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। अन्य लोगों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

तमिलनाडु में पुरातत्व विभाग को मिलीं भगवान नटराज और देवी शिवकामी की कांस्य प्रतिमाएं, चोल युग से है नाता

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डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु राज्य पुरातत्व विभाग ने नागपट्टिनम में खुदाई के दौरान चोल-युग की कुछ अनोखी कांस्य प्रतिमाएं खोजी हैं। इनमें भगवान नटराज की आनंद तांडव मुद्रा वाली प्रतिमा और देवी शिवकामी की अत्यंत सुंदर प्रतिमा शामिल है। इस बात की जानकारी मंत्री ए. राजमोहन ने दी। उन्होंने बताया कि 3 अगस्त से चल रही खुदाई के दौरान एक मीटर की गहराई पर दो मूर्तियां उनके आधार के साथ मिली हैं।

तमिल विकास मंत्री राजमोहन ने शुक्रवार को एक्स पर तस्वीरें साझा करते हुए कहा, “तमिलनाडु सरकार के पुरातत्व विभाग की देखरेख में नागपट्टिनम में खुदाई का काम चल रहा है। इन प्रयासों के जरिए ऐसे सबूत सामने आ रहे हैं जो तमिल लोगों की प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि कई मूर्तियां मिली हैं, जिनमें चोल काल की नटराज और शिवकामी अम्मन की कांस्य प्रतिमाएं शामिल हैं।”

110 सेमी ऊंची और 100 सेमी चौड़ी भगवान नटराज की मूर्ति

स्कूली शिक्षा और सूचना एवं प्रचार विभाग के मंत्री राजमोहन ने आगे कहा, “माननीय मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में तमिल लोगों की प्राचीनता, संस्कृति और इतिहास को उजागर करने वाले पुरातात्विक अनुसंधान कार्य और भी बेहतर ढंग से आगे बढ़ रहे हैं।”

भगवान नटराज की खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति 110 सेमी ऊंची और 100 सेमी चौड़ी है। चार भुजाओं वाले देवता को पारंपरिक आनंद तांडव मुद्रा में दर्शाया गया है। वहीं, देवी शिवकामी की मूर्ति भी खड़ी मुद्रा में है, जो 82 सेमी ऊंची और 23 सेमी चौड़ी है। दो भुजाओं वाली देवी को पारंपरिक त्रिभंग (तीन मोड़ों वाली) मुद्रा में बहुत ही सुंदर ढंग से गढ़ा गया है।

चोल काल से है संबंध

इन मूर्तियों की शारीरिक विशेषताओं, प्रतीकात्मक लक्षणों, सजावटी नक्काशी और आधार (पेडस्टल) की शैली के शुरुआती विश्लेषण के आधार पर विशेषज्ञों का अनुमान है कि ये मूर्तियां 12वीं शताब्दी ईस्वी (उत्तर चोल काल) की हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि ये कलाकृतियां चोल शासन के दौरान नागपट्टिनम में प्रचलित धार्मिक प्रथाओं, धातु-निर्माण तकनीक और समुद्री व्यापार के दौर की धातु-मूर्ति कला शैलियों के बारे में महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करती हैं। नागपट्टिनम जमीन के नीचे दबे विविध धातु-खजानों के कारण पुरातात्विक इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है।

लाइसेंस प्रक्रिया के आरोपों पर अधिवक्ताओं ने काम रोका:एआरटीओ कार्यालय में कार्य बहिष्कार; डीएम से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

महराजगंज में वाहन लाइसेंस बनवाने और नवीनीकरण की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर अधिवक्ताओं ने शनिवार को एआरटीओ कार्यालय में काम बंद रखा। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
गुरुवार को अधिवक्ता जुगल किशोर पटेल के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल को शिकायत पत्र सौंपा था। इसमें एआरटीओ और डीटीआई की भूमिका की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
शिकायत पत्र में आरोप है कि 1 जुलाई 2026 से लाइसेंस नवीनीकरण, परिवहन लाइसेंस और स्थायी लाइसेंस का परीक्षण डीटीआई को सौंपा गया है। इसके बावजूद फाइल और परीक्षण शुल्क जमा करने के बाद सफल परीक्षण की प्रक्रिया आरआई अपने लॉगइन से पूरी करते हैं।
अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि डीटीआई कार्यालय अलग-अलग लाइसेंस शुल्क की साफ जानकारी नहीं देता। उन्होंने बिचौलियों के जरिए अलग-अलग फाइलों में 5,500 से 7,500 रुपए तक वसूले जाने की शिकायत की।
अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से तत्काल जांच कराने, कथित अनियमितताओं पर रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।

बस्ती में सरदार पटेल की प्रतिमा पर माल्यार्पण:जिला पंचायत में 151वीं जयंती का कार्यक्रम आयोजित

बस्ती साउघाट के ग्राम पंचायत गौरा चौराहे के निवासी भारतीय जनता पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष संजय चौधरी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। कार्यक्रम में सरदार पटेल के जीवन और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने के उनके विचारों का जिक्र किया गया। कहा गया कि उन्होंने सैकड़ों रियासतों को एक सूत्र में जोड़कर अखंड भारत के निर्माण में योगदान दिया। उनके नेतृत्व को व्यक्तिगत हितों से ऊपर राष्ट्रहित रखने का उदाहरण बताया गया। कार्यक्रम में भारत की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का संकल्प लेने की बात कही गई। वक्तव्य में कहा गया, “राष्ट्र सर्वोपरि था, राष्ट्र सर्वोपरि है और राष्ट्र सर्वोपरि रहेगा।”

अरुणाचल प्रदेश: ‘जनता की सहमति के बिना आगे नहीं बढे़ंगे’, सियांग मेगा बांध के विरोध के बीच बोले सीएम पेमा खांडू

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डिजिटल डेस्क, ईटानगर। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने स्थानीय लोगों को भरोसा दिलाया है कि प्रस्तावित ‘सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट’ उन पर थोपा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार अभी केवल अपनी प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने के लिए लोगों का सहयोग मांग रही है।

पत्रकारों से बात करते हुए खांडू ने कहा कि वे ‘आदि बाने केबांग’ के युवा विंग और ‘आदि स्टूडेंट्स यूनियन’ को चर्चा के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इन संगठनों ने हाल ही में इस परियोजनाओं को लेकर मीडिया के सामने अपनी बात रखी थी।

केवल PFR तैयार करने की प्रक्रिया चल रही – पेमा खांडू

उन्होंने कहा कि मैं सियांग क्षेत्र के सभी संगठनों और समूहों तक पहुंचना चाहता हूं ताकि इस परियोजना के बारे में और स्पष्टता दी जा सके। अभी हम बांध बनाने की बात भी नहीं कर रहे हैं। फिलहाल, केवल PFR तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।

खांडू ने कहा कि बांध के काम को आगे बढ़ाने का फैसला तभी लिया जाएगा, जब PFR से यह साबित हो जाए कि परियोजना व्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि अगर परियोजना व्यावहारिक भी पाई जाती है, तो भी सरकार कानूनी प्रावधानों के अनुसार के अनुसार स्थानीय लोगों से परामर्श करेगी।

जनता से बात किए बिना यह परियोजना आगे नहीं बढे़गी- पेमा खांडू 

खांडू ने कहा कि जनता से बात किए बिना यह परियोजना आगे नहीं बढे़गी। उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में स्थानीय संगठनों के साथ हुई बातचीत से उन्हें सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने कहा जब तक PFR की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, वे सियांग क्षेत्र का दौरा करते रहेंगे।

मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि विशेष रूप से सियांग और अपर सियांग जिलों के लोगों को इस परियोजना के बारे में गलत जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार सीधे बातचीत के जरिए लोगों की चिंताओं को दूर करना चाहती है।

विद्यालय से चोरी के सामान के साथ आरोपी गिरफ्तार:भिनगा पुलिस ने 2 पंखे, 45 किलो चावल और 700 रुपए बरामद किए

श्रावस्ती के भिनगा में पुलिस ने प्राथमिक विद्यालय मक्कनपुर से चोरी के मामले में सलीम उर्फ निबई को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उसके पास से 2 सीलिंग फैन, 45 किलो चावल और 700 रुपए बरामद किए।
प्रभारी निरीक्षक राज प्रकाश सिंह के नेतृत्व में कोतवाली भिनगा पुलिस ने किशुनपुर चोरवाभारी पुलिया के पास रात की गश्त के दौरान सलीम को पकड़ा। वह गोली उर्फ इब्राहिम का बेटा है और मुजहेनिया, थाना इकौना, जिला श्रावस्ती का रहने वाला है।
प्राथमिक विद्यालय मक्कनपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक कृष्ण प्रताप मौर्य ने 29 अक्टूबर 2026 को पुलिस को शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि 27 अक्टूबर को अज्ञात चोर ने स्कूल का ताला तोड़कर 2 सीलिंग फैन, 2 बोरी चावल और एक भगौना चुरा लिया था।
पुलिस ने केस नंबर 515/2026 में बीएनएस की धारा 305(ए) के तहत मामला दर्ज किया था। सब-इंस्पेक्टर प्रेमानन्द इसकी जांच कर रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, सलीम ने पूछताछ में बताया कि उसने चोरी का सामान छिपाकर रखा था। उसने एक भगौना और एक बोरी चावल बेच दी थी। बिक्री के 700 रुपए उसके पास बचे थे, जिन्हें पुलिस ने बरामद किया।
गिरफ्तारी और सामान की बरामदगी के बाद केस में बीएनएस की धारा 331(4) और 317(2) जोड़ी गई। पुलिस ने आरोपी को चालान कर अदालत भेज दिया।
सलीम के खिलाफ पहले भी तीन मामले दर्ज हैं: 2022 में कोतवाली भिनगा में आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत केस नंबर 182/2022; इकौना थाने में आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत केस नंबर 141/2022; और एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/20 के तहत केस नंबर 268/2022।

‘कांग्रेस लगातार तीन चुनाव क्यों हारी?’, दिल्ली में इंडी गठबंधन की रैली से पहले किरेन रिजीजू ने पूछे सवाल

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली के रामलीला मैदान में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने जा रही इंडी गठबंधन की महारैली को लेकर देशभर की सियासत में गर्माहट तेज है।

ऐसे में इस महारैली ठीक एक दिन पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पार्टी के सामने 5 बड़े और कड़े सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने कांग्रेस को खुली चुनौती दी है।

पहला सवाल- 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर

केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कांग्रेस की महारैली से पहले पहला सवाल पूछा कि जब 2014 के लोकसभा चुनाव उस चुनाव आयोग द्वारा कराए गए थे, जिसके सदस्यों को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए (UPA) सरकार ने ही नियुक्त किया था, तो ऐसे में कांग्रेस सिर्फ 44 सीटों पर कैसे सिमट गई थी?

दूसरा सवाल हालिया हार पर

रिजिजू ने पूछा कि वर्तमान CEC ज्ञानेश कुमार 2024 के आम चुनावों के समय मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे उन्हें चुनाव से ठीक पहले EC नियुक्त किया गया था और 2025 में शीर्ष पद पर प्रमोट किया गया। इसके बावजूद कांग्रेस 2024 का चुनाव क्यों हार गई और उसे लगातार तीसरी बार लोकसभा चुनाव में हार का सामना क्यों करना पड़ा?

तीसरा सवाल इस्तीफे और माफी पर

केंद्रीय मंत्री ने पूछा कि यदि कांग्रेस का यह दावा है कि चुनाव भाजपा के पक्ष में मैनेज किए जाते हैं, तो क्या कांग्रेस पार्टी उन सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इस्तीफा दिलवाएगी और जनता से माफी मांगेगी, जहां 2014 से 2026 के बीच कांग्रेस या उसके सहयोगियों की सरकारें बनी हैं?

मतदाता सूची को लेकर पूछा चौथा सवाल

किरेन रिजजू ने आगे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या वोटर लिस्ट से अवैध प्रवासियों, मृत व्यक्तियों और अपनी जगह बदल चुके लोगों के नाम हटाए जाने चाहिए या नहीं?

इसके अलावा पांचवा सवाल रिजिजू ने पुराने संशोधनों को लेकर पूछा। उन्होंने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग की तरफ से इससे पहले की गई 8 ऐसी ही रिविजन प्रक्रियाएं भी ‘अवैध’ थीं?