Shardiya Navratri 2025 : समंदर से माया नगरी की रक्षा करती हैं मां मुंबा देवी, जानें मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य

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इतिहासकारों की मानें तो मुंबा देवी के नाम पर ही माया नगरी का नाम मुंबई पड़ा है। अंग्रेजों के जमाने में मुंबई को बम्बई या बॉम्बे कहा जाता था। वर्ष 1995 में बम्बई का नाम बदलकर मुंबई रखा गया। उस समय से सागर किनारे बसे खूबसरत शहर को मुंबई कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि कोली समाज के लोग पूर्व से ही बम्बई को मुंबई ही कहते थे। 
सदाशिव महादू लोहट

  • HighLights

  1. मुंबा देवी मंदिर 400 साल पुराना है।
  2. मां मुंबा देवी सोमवार को नंदी पर विराजती हैं।
  3. कोली समाज के लोगों ने मंदिर का निर्माण कराया है।

Mumba Devi Temple History: जगत जननी आदिशक्ति मां दुर्गा की महिमा निराली है। अपने भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। वहीं, दुष्टों का संहार करती हैं। मां के शरण में रहने वाले लोगों को जीवन में कभी किसी चीज की कमी नहीं रहती है। साथ ही समय के साथ भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मां के विभिन्न रूपों की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। देशभर में जगत जननी मां दुर्गा के कई प्रमुख एवं ख्याति प्राप्त मंदिर हैं। इनमें एक माया नगरी स्थित मुंबा देवी मंदिर है। इस मंदिर में मां मुंबा की पूजा की जाती है। धार्मिक मत है कि मां मुंबा देवी माया नगरी मुंबई वासियों की समंदर से रक्षा करती हैं। आइए, इस मंदिर के बारे में सबकुछ जानते हैं-

मुंबा मंदिर का इतिहास

इतिहास के पन्नों को पलटने से पता चलता है कि मुंबा देवी मंदिर 400 साल पुराना है। इस मंदिर का निर्माण सन 1737 में किया गया था। उस समय कोली समाज के लोगों ने बोरी बंदर में मुंबा देवी मंदिर का निर्माण करवाया। हालांकि, अंग्रेज सरकार ने मुंबा देवी मंदिर को बोरी बंदर से कालबादेवी में स्थानांतरित कर दिया। इस मंदिर के निर्माण हेतु भूमि पांडु सेठ ने दान में दी थी। तत्कालीन समय में पांडु सेठ के परिवार वाले ही मंदिर की देखरेख करते थे। वर्षों बाद हाई कोर्ट के निर्देशानुसार समिति का गठन किया गया। वर्तमान समय में मंदिर की देखरेख न्यास समिति करती है।

मुंबा देवी मंदिर मुंबई के भूलेश्वर में स्थित है। मुंबई का नाम ही देवी मुंबा आई यानि मुंबा माता के नाम से निकला है। यहां इनकी बहुत मान्यता है। यह मंदिर लगभग ४०० वर्ष पुराना है। मुंबई आरंभ में निषाद मछुआरों (शिकारियों)की बस्ती थी। लोगों ने यहां बोरी बंदर में तब मुंबा देवी के मंदिर की स्थापना की। इन देवी की कृपा से उन्हें कभी सागर ने नुकसान नहीं पहुंचाया। यह मंदिर अपने मूल स्थान पर १७३७ में बना था, ठीक उस स्थान पर जहां आज विक्टोरिया टर्मिनस इमारत है।[1] बाद में अंग्रेजों के शासन में मंदिर को मैरीन लाइन्स-पूर्व क्षेत्र में बाजार के बीच स्थापित किया। तब मंदिर के तीन ओर एक बड़ा तालाब था, जो अब पाट दिया गया है। इस मंदिर की भूमि पांडु सेठ ने दान में दी थी, व मंदिर की देखरेख भी उन्हीं का परिवार करता था। बाद में मुंबई उच्च न्यायालय के आदेशा्नुसार मंदिर के न्यास की स्थापना की गई। अब भी वही मंदिर न्यास यहां की देखरेख करता है। यहां मुंबा देवी की नारंगी चेहरे वाली रजत मुकुट से सुशोभित मूर्ति स्थापित हई।[1] इस न्यास ने यहां अन्नपूर्णा एवं जगदंबा मां की मूर्तियां भी मुंबा देवी के अगल बगल स्थापित करवायीं थीं। मंदिर में प्रतिदिन छः बार आरती की जाती है। मंगलवार का दिन यहां शुभ माना जाता है। यहां मन्नत मांगने के लिए यहां रखे कठवा (लकड़ी) पर सिक्कों को कीलों से ठोका जाता है। श्रद्धालुओं की भीड़ बहुत रहती है। यह मंदिर लगभग ५० लाख रु. सालाना मंदिर के अनुरक्षण कार्य एवं उत्सव आयोजनों में व्यय करता है।

मुंबा देवी मंदिर
धर्म संबंधी जानकारी
सम्बद्धताहिन्दू धर्म
देवतामुंबा देवी
त्यौहारनवरात्रिदीपावलीगणेश चतुर्थी
अवस्थिति जानकारी
अवस्थितिमुंबईमहाराष्ट्र
ज़िलामुंबई
राज्यमहाराष्ट्र
देश भारत
वास्तु विवरण
स्थापित१७३७[1]