आज से पूरे देश में शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरुआत हो चुकी है। यह पर्व धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। शारदीय नवरात्रि वर्ष की चार प्रमुख नवरात्रियों में से एक है, जो आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। इस बार यह पर्व 21 सितंबर 2025, रविवार से आरंभ होकर 29 सितंबर 2025, सोमवार को समाप्त होगा।
नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त उपवास रखते हैं, व्रत कथा पढ़ते हैं, और मां से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस पर्व की शुरुआत मां शैलपुत्री की पूजा से होती है और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना के साथ इसका समापन होता है।
पूजा विधि
- प्रातः काल स्नान आदि करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल पर कलश स्थापित करें जिसे घटस्थापना कहते हैं। इसमें मिट्टी डालकर जौ बोए जाते हैं।
- कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखें।
- मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीप प्रज्वलित करें।
- दुर्गा सप्तशती, देवी कवच, या नवरात्रि व्रत कथा का पाठ करें।
- भोग में फल, मिष्ठान्न, और विशेष रूप से ‘सात्विक भोजन’ अर्पित करें।
- नवरात्रि के अंतिम दिन ‘कन्या पूजन’ कर व्रत का समापन करें।
शुभ मुहूर्त
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 21 सितंबर 2025, सुबह 06:14 बजे
- घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 06:20 से 07:45 बजे तक (अवधि – 1 घंटा 25 मिनट)
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 22 सितंबर 2025, सुबह 08:02 बजे
घटस्थापना के साथ ही नवरात्रि की पूजा विधि आरंभ होती है। इसे शुभ मुहूर्त में ही करना अति आवश्यक माना जाता है, क्योंकि इससे देवी का आह्वान सही रूप में होता है।
नवरात्रि का महत्व
शारदीय नवरात्रि का संबंध असुरों पर देवी दुर्गा की विजय से है। यह पर्व अंधकार पर प्रकाश, अधर्म पर धर्म और नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत का प्रतीक है। यह समय आत्मशुद्धि, साधना और शक्ति उपासना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।












