शारदीय नवरात्रि के पांचवें दिन देवी दुर्गा के चतुर्थ स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। यह स्वरूप ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री मानी जाती हैं। मान्यता है कि अपनी मुस्कान और ऊर्जा से उन्होंने समस्त ब्रह्मांड का निर्माण किया। मां की आराधना से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
इस वर्ष तृतीया तिथि दो दिन पड़ने के कारण नवरात्रि का पर्व 10 दिनों तक चलेगा। ऐसे में पांचवें दिन मां कूष्मांडा की विशेष पूजा का विधान रहेगा।
पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।
मां की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर गंगाजल से पवित्र करें।
कलश स्थापना कर दीप प्रज्वलित करें।
लाल फूल, चंदन, सिंदूर, धूप और दीप अर्पित करें।
मालपुए, फल और मीठा प्रसाद भोग में चढ़ाएं।
“ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः” मंत्र का 108 बार जप करें।
अंत में मां की आरती कर परिवार की मंगलकामना करें।
विशेष भोग
मां कूष्मांडा को मालपुए और मीठा भोग अत्यंत प्रिय है। भक्तगण पूरे श्रद्धा भाव से यह प्रसाद अर्पित करते हैं।
मां कूष्मांडा मंत्र
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
इस मंत्र के नियमित जप से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
मां कूष्मांडा की महिमा
उनकी उपासना से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है।
परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
जीवन की कठिनाइयाँ और संकट दूर हो जाते हैं।












