भिंडी की खेती से होगी बंपर कमाई : अपराजिता जैसी किस्म और वैज्ञानिक विधि अपनाकर पाएं 125 क्विंटल तक उपज…

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रबी सीजन में भिंडी की बुवाई के लिए अक्तूबर और नवंबर का महीना काफी अच्छा होता है। किसान अपने क्षेत्र के हिसाब से किस्म और खेती की वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर भिंडी से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। खास बात यह है कि बाजार में इस सब्जी की लगभग हमेशा मांग बनी रहती है। 

 रबी सीजन में भिंडी (Okra) की बुवाई के लिए अक्तूबर और नवंबर का महीना काफी अच्छा होता है। किसान अपने क्षेत्र के हिसाब से किस्म और खेती की वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर भिंडी से अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। खास बात यह है कि बाजार में इस सब्जी की लगभग हमेशा मांग बनी रहती है। 

ऐसे करें खेत की तैयारी 

भिंडी (Okra Crop) के लिए भुरभुरी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी होती है। खेती में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। खेत को तैयार करने के लिए तीन से चार बार अच्छी तरह जुताई करके पाटा चलाकर समतल कर लेना चाहिए।

अपराजिता और शक्ति से बंपर उपज

सही किस्म का चुनाव पैदावार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। अपराजिता किस्म के पौधे 35-40 सेमी ऊंचे होते हैं और इसके फल 15-18 सेमी लंबे और गहरे हरे रंग के होते हैं। इसकी औसत उपज 125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। शक्ति किस्म के पौधे 30-35 सेमी ऊंचे होते हैं और इसके फल 12-15 सेमी लंबे होते हैं। बुवाई के 45-50 दिन बाद फलों की तुड़ाई शुरू हो जाती है। इसकी औसत उपज 120 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

कब और कितनी डालें खाद 

खेत तैयार करते समय 120 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए। इसके साथ ही, बुवाई से पहले 30 किलो नत्रजन, 30 किलो फॉस्फोरस और 30 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर की दर से डालें। बेहतर विकास के लिए बुवाई के एक महीने बाद खड़ी फसल में 30 किलो नत्रजन का अतिरिक्त छिड़काव करें।

बुवाई का सही समय और तरीका

भिंडी की बुवाई का समय मौसम पर निर्भर करता है। रबी में अक्तूबर से नवंबर महीने में बुवाई का काम किया जाता है। बुवाई से पहले बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोने से अंकुरण जल्दी और बेहतर होता है।

फसल को कीटों और बीमारियों से कैसे बचाएं?

भिंडी की फसल को कई कीट और बीमारियां नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे पैदावार में भारी कमी आ सकती है। हरा तेला, मोयला, सफेद मक्खी और फली छेदक जैसे कीट पत्तियों और फलों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनके नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस 25 ई.सी. या साइपरमेथ्रिन 25 ई.सी. जैसी दवाओं का छिड़काव विशेषज्ञ की सलाह अनुसार करें। दवा छिड़काव और फल तोड़ने के बीच कम से कम 5 से 7 दिन का अंतर अवश्य रखें।

जड़ गलन और पीत शिरा मोजेक भिंडी के प्रमुख रोग हैं। पीत शिरा मोजेक सफेद मक्खी द्वारा फैलता है, जिससे पत्तियां और फल पीले पड़ जाते हैं और पैदावार कम हो जाती है। इसकी रोकथाम के लिए मैलाथियॉन 50 ई.सी. का छिड़काव करें और रोगग्रस्त पौधों को खेत से हटा दें। बीज को हमेशा कार्बेंडाजिम से उपचारित करके ही बोना चाहिए।