काला आलू पूरी तरह काले रंग का होता है, अंदर से भी इसका रंग काला होता है। यह 30-35 दिनों में तैयार हो जाता है और एक जड़ से ही लगभग 3-4 किलो आलू प्राप्त होते हैं।
काला आलू स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों (Health-conscious) में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। किसान इसकी खेती में रुचि दिखा रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि काला आलू अपनी मेडिसिन वैल्यू के कारण खास महत्व रखता है। इसमें कैलोरी और स्टार्च बेहद कम मात्रा में होती है, जिससे यह डायबिटीज और अन्य स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए उपयुक्त माना जाता है।
छोटी सी जगह में आसानी से उगाए
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट के मुताबिक, काला आलू पूरी तरह काले रंग का होता है, अंदर से भी इसका रंग काला होता है। यह 30-35 दिनों में तैयार हो जाता है और एक जड़ से ही लगभग 3-4 किलो आलू प्राप्त होते हैं। छोटी जगह में भी इसे आसानी से उगाया जा सकता है और एक बार की पैदावार में 70-80 किलो आलू हासिल किया जा सकता है।
डायबिटीज दवाओं के लिए मांग
फार्मेसी कंपनियों में काले आलू की मांग काफी अधिक है, क्योंकि इसे डायबिटीज की दवाओं के निर्माण में उपयोग किया जाता है। कंपनियां सीधे किसानों से माल खरीदती हैं और एक किलो आलू की कीमत 130 से 150 रुपये तक मिलती है। इसके अलावा, हेल्थ-कॉन्शियस उपभोक्ता भी इसे अपनी डाइट में शामिल करना पसंद करते हैं।
किसान करेंगे हजारों रुपये की कमाई
काले आलू की खेती से किसान महीने में 30-40 हजार रुपये तक की आय कमा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए नियमित ध्यान देना आवश्यक है। विशेषज्ञ ने कहा कि फसल को समय पर ऑर्गेनिक खाद और केंचुआ खाद देना चाहिए। इसके साथ ही पानी और धूप का सही संतुलन बनाए रखना जरूरी है। काले आलू की खेती छोटे प्लॉट में भी की जा सकती है, और सही देखभाल से यह फसल आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हो सकती है।





