Chhath Puja 2025: इस बार छठ पर्व पर बन रहे हैं दुर्लभ योग, ‘रवि योग’ में बरसेगी सूर्य देव और छठ मैया की असीम कृपा

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27-28 नवंबर को आस्था और श्रद्धा का महासमागम, छठ पूजा पर बन रहे हैं अद्भुत योग, सूर्य उपासना से खुलेगा भाग्य का द्वार

ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि इस वर्ष छठ पूजा का प्रत्येक चरण अत्यंत शुभ है। ‘रवि योग’ और ‘सुकर्मा योग’ जैसे दुर्लभ संयोगों में सूर्य उपासना से न केवल आरोग्यता प्राप्त होगी बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि और शांति भी बनी रहेगी।

कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक चलने वाला लोक आस्था का सबसे बड़ा पर्व छठ पूजा (Chhath Puja Date 2025) इस वर्ष भी विशेष खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है। इस पर्व की शुरुआत ‘नहाय-खाय’ से होती है, जो कार्तिक शुक्ल चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। इसके अगले दिन ‘खरना’ होता है, और फिर षष्ठी तिथि को डूबते सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा की जाती है। सप्तमी के दिन प्रातः काल उगते सूर्य को अर्घ्य देकर यह पावन पर्व संपन्न होता है।

इस बार छठ महापर्व को और भी खास बना रहा है एक दुर्लभ ‘रवि योग’, जो कई वर्षों बाद बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस योग में सूर्य देव और छठ मैया की आराधना करने से व्रती को असाधारण पुण्य फल प्राप्त होगा और जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि बढ़ेगी।

छठ पूजा का शुभ मुहूर्त



वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि का प्रारंभ 27 अक्टूबर 2025 की सुबह 06 बजकर 04 मिनट से होगा और इसका समापन 28 अक्टूबर 2025 को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर होगा। इसी अवधि में व्रतीजन सूर्य देव की उपासना और अर्घ्य प्रदान करेंगे। इसके बाद सप्तमी तिथि प्रारंभ होगी, जिस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

छठ पूजा पर बन रहे शुभ योग



इस बार छठ पूजा के दिन दो महत्वपूर्ण योग बन रहे हैं- ‘सुकर्मा योग’ और ‘रवि योग’।

रवि योग: रात 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस समय सूर्य देव को अर्घ्य देना अत्यंत शुभ माना गया है।
    
सुकर्मा योग: यह योग पूरी रात्रि तक रहेगा। इस योग में की गई पूजा व्रती को दीर्घायु और सौभाग्य प्रदान करती है।

करण और नक्षत्र का विशेष संयोग



इस छठ पर कौलव और तैतिल करण का शुभ मेल भी बन रहा है।

कौलव करण: शाम 07 बजकर 05 मिनट तक रहेगा।

इसके बाद तैतिल करण प्रारंभ होगा, जो भी शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।
इसके साथ ही पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का संयोग इस पर्व को और अधिक मंगलकारी बना रहा है।