Bihar Election 2025: आज बिहार में गरजेंगे PM मोदी, जनसभा में भरेंगे चुनावी हुंकार

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बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल अब पूरी तरह बज चुका है। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब राज्य में चुनावी प्रचार की सरगर्मी तेज़ हो गई है। सभी राजनीतिक दल राजद, जदयू, बीजेपी और जनसुराज सहित अन्य पार्टियों के दिग्गज मैदान में उतर चुके हैं और मतदाताओं को लुभाने की कवायद जोरों पर है।

इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 24 अक्टूबर को बिहार के समस्तीपुर जिले के कर्पूरी ग्राम से एनडीए के चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। यह वही गांव है जहां जननायक कर्पूरी ठाकुर, जो 1970 के दशक में बिहार के मुख्यमंत्री रहे, का जन्म हुआ था। इस वर्ष केंद्र सरकार ने उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया है।

कर्पूरी ग्राम से शुरुआत का राजनीतिक संदेश

कर्पूरी ठाकुर बिहार के पिछड़े और अत्यंत पिछड़े वर्गों के सबसे बड़े नेताओं में से एक माने जाते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनके गांव से चुनावी अभियान की शुरुआत करना न केवल भावनात्मक बल्कि राजनीतिक रूप से भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। भाजपा और एनडीए की रणनीति साफ है वह सामाजिक न्याय के प्रतीक माने जाने वाले कर्पूरी ठाकुर के नाम पर पिछड़े वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मोदी की यह रैली बिहार के वोट बैंक समीकरणों पर गहरा असर डाल सकती है। यह संदेश देने की कोशिश होगी कि केंद्र की मोदी सरकार कर्पूरी ठाकुर के विचारों गरीबों और पिछड़ों को सशक्त बनाने के रास्ते पर चल रही है।

मोदी, शाह और नड्डा की तिकड़ी मैदान में

आज न सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी बल्कि गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी बिहार में अलग-अलग जनसभाओं को संबोधित करेंगे। शाह की दो जनसभाएं निर्धारित हैं, जबकि नड्डा का कार्यक्रम हाजीपुर में है। भाजपा ने राज्यभर में अपने प्रचार अभियान को संगठित ढंग से चलाने के लिए शीर्ष नेतृत्व को मैदान में उतार दिया है।

बिहार में बढ़ेगी सियासी गर्मी

पीएम मोदी की इस सभा को बिहार विधानसभा चुनाव की औपचारिक शुरुआत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रधानमंत्री राज्य के विभिन्न जिलों में कई रैलियां करने वाले हैं। उधर, विपक्षी दल राजद और महागठबंधन भी अपने प्रचार अभियान को धार देने में जुट गए हैं।

कर्पूरी ठाकुर की धरती से मोदी का यह आगाज़ एनडीए के लिए चुनावी हुंकार साबित हो सकता है। अब देखना होगा कि इस प्रतीकात्मक शुरुआत का असर बिहार की राजनीति पर कितना गहरा पड़ता है।