BMC चुनाव से पहले बीजेपी का ‘एक हैं तो सेफ है’ प्रयोग, विपक्ष ने बताया वोट ध्रुवीकरण की साजिश

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इन किट्स पर बीजेपी का नया स्लोगन ‘एक हैं तो सेफ है’ लिखा हुआ है। बीजेपी का दावा है कि यह एकता और भाईचारे का संदेश है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह वोट बैंक ध्रुवीकरण की चाल है।

आगामी बीएमसी चुनाव से पहले बीजेपी ने एक नया ‘सामाजिक संवाद अभियान’ शुरू किया है, जो अब सीधे राजनीतिक विवाद में बदल गया है। पार्टी ने ‘दीवाली मिलन’ के तहत घर-घर मिठाई और नमकीन के पैकेट बांटने की पहल की है, जो तुलसी विवाह तक जारी रहेगी। इस मुहिम में ऑटो वाले,टैक्सी वालों, खोमचा रेहड़ी लगाने वालो को सड़क पर उतर बीजेपी उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के नेता कार्यकर्ता दीवाली का ये किट बांट रहे है।

इन किट्स पर बीजेपी का नया स्लोगन ‘एक हैं तो सेफ है’ लिखा हुआ है। बीजेपी का दावा है कि यह एकता और भाईचारे का संदेश है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह वोट बैंक ध्रुवीकरण की चाल है।यह अभियान फिलहाल दहिसर, अंधेरी, वर्सोवा, अंबोली, मालाड, दिंडोशी और गोरेगांव जैसे उत्तर मुंबई के इलाकों में चलाया जा रहा है।

इस पूरी पहल की कमान महाराष्ट्र बीजेपी के उपाध्यक्ष और महाराष्ट्र बीजेपी उत्तर भारतीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष संजय पांडे के पास है। पांडे का कहना है कि ‘यह कोई राजनीतिक अभियान नहीं बल्कि दिवाली मिलन का आयोजन है। हमारा उद्देश्य गरीब और सामान्य वर्ग के बीच पहुंचना है। यह किट जूट से बनी है, जिसे आदिवासियों ने तैयार किया है। इस पर आदिवासी कला की झलक भी है और संदेश भी ‘हम सब एक हैं, अलग नहीं।’

बातचीत में उन्होंने कहा कि बीजेपी इस कार्यक्रम को ‘समाज के जुड़ाव का प्रतीक’ मानती है, न कि चुनावी प्रचार का हिस्सा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मुंबई के बहु-सांस्कृतिक सामाजिक ढांचे में यह अभियान बहुसंख्यक वोटों को एकजुट करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।

बीजेपी जहां इसे ‘सामाजिक सौहार्द अभियान’ बता रही है, वहीं विपक्ष इसे ‘धार्मिक भावनाएं भड़काने का राजनीतिक प्रयास’ करार दे रहा है। बीएमसी चुनाव से पहले इस ‘मिठाई कूटनीति’ ने मुंबई की राजनीति में एक बार फिर ध्रुवीकरण बनाम विकास की बहस को जगा दिया है।