
चावल
– फोटो : ai
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वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि आगामी भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस (Bharat International Rice Conference) पूरी तरह से एक निजी संस्था इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) द्वारा आयोजित की जा रही है। सरकार इस आयोजन को सिर्फ गैर-आर्थिक (non-financial) सहयोग दे रही है। मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद दिया है जिनमें IREF के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग को लेकर कुछ आरोप लगाए गए थे।सरकार ने दी गैर-आर्थिक सहायता
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2025 का आयोजन 30-31 अक्टूबर 2025 को भारत मंडपम (नई दिल्ली) में किया जा रहा है। इस आयोजन में केंद्र सरकार की ओर से किसी तरह की वित्तीय सहायता या फंडिंग नहीं की जा रही है। सरकार केवल कॉन्फ्रेंस में भाग लेने वाले मंत्रालयों और विभागों के बीच सहयोग और समन्वय सुनिश्चित कर रही है ताकि चावल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत रणनीति तैयार हो सके।
IREF और साझेदार उठा रहे पूरा खर्च
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस आयोजन का संपूर्ण खर्च IREF और उसके साझेदार वहन कर रहे हैं। इसमें स्थल किराया, आयोजन से जुड़ी सभी लॉजिस्टिक व्यवस्थाएं, विदेशी खरीदारों की यात्रा और आवास व्यय जैसे सभी खर्च शामिल हैं।
ये सभी खर्च IREF के स्वयं के फंड या निजी प्रायोजकों (private sponsorships) के माध्यम से किए जा रहे हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी कहा कि उसका IREF के संचालन या इसके अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्ति में कोई भी भूमिका नहीं है।
एपीडा की भूमिका और सरकारी समन्वय
एपीडा (APEDA) यानी कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण, इस आयोजन में समन्वयक भूमिका निभा रहा है। एपीडा ने संबंधित मंत्रालयों और विभागों को शामिल करने की पहल की है ताकि भारत के चावल निर्यात को बढ़ाने के लिए व्यापक और समन्वित कार्ययोजना बनाई जा सके। मंत्रालय के अनुसार, यह आयोजन भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र, खासकर चावल व्यापार को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
चावल निर्यात भारत के कृषि व्यापार की रीढ़
- भारत का चावल निर्यात उसके कृषि व्यापार का सबसे बड़ा हिस्सा है।
- वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का चावल निर्यात मूल्य लगभग 12.95 अरब डॉलर रहा है।
- भारत न केवल दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, बल्कि सबसे बड़ा उत्पादक देश भी बनने की दिशा में अग्रसर है।
- इसी कारण सरकार ने इस क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए निजी क्षेत्र के साथ सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है।
मंत्रालय का स्पष्ट रुख
मंत्रालय ने कहा, “वाणिज्य विभाग का उद्देश्य हर आर्थिक क्षेत्र के सभी हितधारकों से संवाद और सहयोग के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया को सहभागी बनाना और व्यापार को बढ़ावा देना है।” साथ ही, IREF के अध्यक्ष या संगठन से जुड़ी किसी भी शिकायत या आरोप पर मंत्रालय ने टिप्पणी करने से इनकार किया और कहा कि यह पूरी तरह से एक निजी संस्था का आंतरिक मामला है।





