मुलायम यादव | मकड़ौर(शोहरतगढ़), सिद्धार्थनगर9 घंटे पहले
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छठ पर्व संपन्न।
छठ पर्व का समापन महली सागर स्थित समय माता मंदिर पर हुआ। पर्व के चौथे और अंतिम दिन, व्रतियों ने उगते सूर्य को अर्घ्य देकर अपना व्रत तोड़ा। यह अर्घ्य छठ पूजा के विधिवत समापन का प्रतीक है।
इस दौरान व्रतियों ने उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और शांति की कामना की। यह पर्व जीवन में आशा, नवीकरण और नकारात्मकता पर प्रकाश की जीत का संदेश देता है।
इस अवसर पर प्रधान गिरजेश कुमार चौधरी, पूर्व प्रधान रामबुझावन यादव, रामदेवेन्द्र मिश्रा, रवि मिश्रा, तौलेश्वर वर्मा, राजू यादव, पुलू, झगरू यादव, पलटू गौड़, बुद्धिराम, कटू, राममिलन, रामकेवल, रूपेश मिश्रा, हरिराम, मुबारक, रिजवान, शकील, नंदलाल, दिनेश और रामसेवक सहित समस्त ग्रामवासी उपस्थित रहे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उगते सूर्य को ‘ऊषा’ के लिए अर्घ्य दिया जाता है, जो मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यह सूर्यदेव को धन्यवाद देने और उनके आशीर्वाद से जीवन को प्रकाशमय बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, सूर्य को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। उगते सूर्य की किरणें नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती हैं।
अर्घ्य देने की विधि के तहत, छठ पूजा के चौथे दिन सूर्योदय के समय घाट या नदी के किनारे जल अर्पित किया जाता है। इस जल में लाल चंदन, सिंदूर और लाल फूल मिलाए जाते हैं।
सूर्य को जल अर्पित करते समय ‘ॐ सूर्याय नमः’ जैसे मंत्रों का जाप किया जाता है। व्रती कमर तक पानी में रहकर यह अर्घ्य देते हैं।

















