
मसूर की दाल
– फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और रूस से हाल ही में दालों की भारी आवक ने वैश्विक बाजार में कीमतों को लुढ़का दिया है। भारतीय आयातक अमेरिकी हरी मसूर का आयात फिर शुरू कर चुके हैं, लेकिन वे निर्यातकों से पुराने सौदों की ऊंची कीमतों पर पुनर्सौदेबाजी की मांग कर रहे हैं। एगकोर ट्रेडिंग के अध्यक्ष और सीईओ अमीर मेहदी बुहारी ने बताया, “भारतीय खरीदारों की मांग है कि कीमतों में भारी कटौती हो, क्योंकि बाजार अब 560 डॉलर प्रति टन पर आ गया है, जबकि पिछले साल वायदा अनुबंध 850 डॉलर तक पहुंचे थे।”
कनाडा-अमेरिका की अच्छी फसल का असर
बुहारी ने बिजनेसलाइन को कहा कि कनाडा और अमेरिका में दालों, खासकर हरी मसूर की अच्छी पैदावार ने कीमतों को नीचे धकेला है। कनाडा से हरी मसूर की कीमत अगस्त के 765 डॉलर से गिरकर 640 डॉलर प्रति टन रह गई, जबकि रूस से 785 डॉलर से 610 डॉलर हो गई। अफ्रीकी देशों में अरहर की अच्छी फसल और ऑस्ट्रेलिया-रूस में मटर-मसूर की बढ़ती पैदावार ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
जवाबी शुल्कों का डर, आयात पर ब्रेक
जुलाई-सितंबर में भारतीय आयातकों ने अमेरिकी दालों और बीन्स का आयात रोक दिया था, क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के 7 अगस्त से लगाए 25% दंडात्मक शुल्कों का जवाब भारत दे सकता था। वाशिंगटन ने भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भी 27 अगस्त से 25% अतिरिक्त शुल्क लगाया। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत जल्दबाजी में कोई द्विपक्षीय समझौता नहीं करेगा। बुहारी ने चेतावनी दी कि ये तनाव आयात पर असर डाल सकते हैं।
दालों के उत्पादन अनुमान
ग्लोबल पल्सेस कन्फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार, अफ्रीकी अरहर की कीमतें 600 डॉलर से घटकर 550 डॉलर प्रति टन रह गईं, जबकि म्यांमार ने 775 डॉलर पर बरकरार रखी। चने की कीमतें 700 डॉलर से नीचे 500 डॉलर आ गईं, और पीली मटर 415 डॉलर से 300-320 डॉलर तक लुढ़की। यूएसडीए ने अमेरिकी सूखे मटर उत्पादन 8 लाख टन और मसूर 4.25 लाख टन अनुमानित किया। कनाडा में सूखे मटर 35 लाख टन से अधिक, जिसमें पीली मटर 30 लाख टन होगी। ऑस्ट्रेलिया में चना 21 लाख टन और मसूर 17 लाख टन का अनुमान है।
मंदी के संकेत, लेकिन रिकवरी की उम्मीद
रूस में 68 लाख टन दालें (चना-मटर), यूक्रेन में 6.1 लाख टन का अनुमान है। कनाडा का मसूर उत्पादन 27.5 लाख टन (हरी मसूर 11.5-12 लाख टन) रहेगा। ये आंकड़े बाजार में मंदी के संकेत देते हैं, लेकिन पिछले हफ्ते भारतीय खरीदारी से थोड़ी तेजी आई। अमेरिकी हरी मसूर तमिलनाडु पहुंच रही है, जहां राशन दुकानों के जरिए वितरण हो रहा है। पिछले साल अमेरिका से 44,000 टन निर्यात हुआ था।





