
निजी मंडियों को मिलेंगी कई सुविधाएं, किसानों को होगा फायदा।
– फोटो : गांव जंक्शन
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किसानों की उपज को बाजार दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश में अभी 249 विनियमित मंडियां एवं 356 उप-मंडियां संचालित हो रही हैं। अब योगी सरकार निजी क्षेत्र की मंडियों की स्थापना का भी प्रयास कर रही है। इसके लिए, वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन मंडी (21वां) संशोधन नियमावली लाई गई। इसके तहत 17 प्रमुख नगरों में लाइसेंस शुल्क दो लाख एवं अन्य स्थानों पर एक लाख रखा गया। हालांकि, अभी तक निजी निवेशकर्ता मंडी स्थापना के लिए आगे नहीं आए हैं।निजी क्षेत्र के लिए सरल नियम बना रही सरकार
अब निजी क्षेत्र में मंडी स्थापना के लिए नियमों के सरल बनाए जाने की तैयारी है ताकि निजी क्षेत्र में भी मंडियों की स्थापना हो सके और किसानों को उनकी उपज का ज्यादा से ज्यादा मूल्य मिल सके। कृषि विपणन एवं कृषि विदेश व्यापार विभाग की ओर से अन्य राज्यों में स्थापित निजी मंडियों की कार्यप्रणाली का अध्ययन किया जा रहा है। वहां मौजूद सुविधाओं और शुल्क की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
मंडी स्थापना के लिए संभावित मानक
सूत्रों का कहना है कि अभी तक बड़े शहरों के लिए परियोजना लागत 10 करोड़ और दो हेक्येटर भूमि का मानक रखा गया है। इतनी अधिक जमीन शहरी इलाके में नहीं मिल पा रही है। इसी तरह, बैंक प्रतिभूति राशि 50 लाख रखी गई है। इसमें करीब 50 फीसदी तक कम करने का विचार है। इसी तरह, छोटे शहरों में परियोजना लागत पांच करोड़ और जमीन तीन से चार हेक्येटर एवं प्रतिभूति राशि 25 लाख रखा गया है। इस मानक में भी कटौती की तैयारी है। सरकार की ओर से भी निवेशकर्ता को कई तरह की अलग-अलग सुविधाएं देने पर भी विचार किया जा रहा है।
निजी मंडियों को मिलेंगी कई सुविधाएं
निजी मंडी स्थल पर नीलामी हाल, शेड्स, दुकानें, गोदाम, भंडारण, कैंटीन, प्रयोगशाला, पैकेजिंग, लोडिंग एवं अनलोडिंग स्थल, पेजयल, सड़क सहित कई तरह की व्यवस्थाएं जरूरी हैं। इसमें से कुछ संसाधनों में सरकार की ओर से सहूलियतें दी जाएंगी। भूमि हस्तांतरण के दौरान स्टांप, बिजली, पेयजल आदि की सुविधाएं सरकार की ओर से देने पर विचार चल रहा है। विभाग का मानना है कि सरकारी और निजी क्षेत्र की मंडियां होने से किसानों को ज्यादा फायदा होगा।
किन स्थानों पर स्थापित की जाएंगी निजी मंडिया
10 करोड़ परियोजना लागत वाले स्थलों में आगरा, लखनऊ, कानपुर, बरेली, बाराबंकी, वाराणसी, ललितपुर, गोरखपुर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, लखीमपुर, गाजियाबाद, मेरठ, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, मुरादाबाद और सहारनपुर को शामिल किया गया है। वहीं, पांच करोड़ की परियोजना में जिला मुख्यालय व अन्य स्थल शामिल हैं। विभाग का मानना है कि लागत मूल्य कम करने अथवा नियमों में छूट देने से निजी निवेशकर्ताओं का इस क्षेत्र में भी आकर्षण बढ़ेगा।
प्रतिस्पर्धा बढ़ने से किसानों को मिलेंगी सुविधाएं
एफपीओ संचालक दयाशंकर सिंह कहते हैं, उत्तर प्रदेश में निजी क्षेत्र की मंडियां आने से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। बाजार के लिए प्रतिस्पर्धा जरूरी है। किसानों को जहां ज्यादा फायदा और सुविधाएं मिलेंगी, वहां जाएंगे। निजी मंडी शुरू होने से वहां प्रसंस्करण, शीतगृह सहित अन्य सुविधाएं भी मिल सकेंगी। भविष्य की रणनीति के लिहाज से यह बेहतर कदम होगा।
किसानों को अधिक मुनाफा दिलाने का प्रयास
प्रमुख कृषि सचिव रविंद्र कुमार कहते हैं, किसानों को अधिक मुनाफा दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। सरकारी मंडियों में भी पहले की अपेक्षा तमाम सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। निजी क्षेत्र की मंडियां खुलने से किसानों को फायदा मिलेगा। उसे जहां ज्यादा सुविधाएं और भाव मिलेगा, वहां फल, सब्जी व अनाज बेच सकेगा। जहां सरकारी मंडियां नहीं हैं, वहां निजी क्षेत्र की मंडियां खुलने से किसानों को उनके घर के आसपास ही विपणन की सुविधा मिल सकेगी।





