डीजीपी ने कहा ये
जानकारी के मुताबिक, कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि साइबर अपराध आज समाज के हर वर्ग को प्रभावित कर रहा है। ऑनलाइन ठगी, फ्रॉड लिंक, फेक कॉल्स और डेटा चोरी जैसे अपराधों से बचने के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने बताया कि अधिकांश लोग लालच, भय या लापरवाही के कारण साइबर ठगी का शिकार होते हैं।
डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी को सलाह दी कि यदि कोई व्यक्ति साइबर अपराध का शिकार हो जाता है, तो तुरंत 1930 पर कॉल करके या cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। इससे पुलिस को गोल्डन टाइम में कार्यवाही करने का मौका मिलता है और धनराशि फ्रीज कर पीड़ित को राहत मिल सकती है।
मेरठ के बड़े अफसर भी रहे मौजूद
उन्होंने बताया कि पिछले दो महीनों में उत्तर प्रदेश पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़ी लगभग 24% धनराशि फ्रीज कराई है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। कार्यक्रम में एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर, डीआईजी मेरठ कलानिधि नैथानी, एसएसपी मेरठ विपिन टाडा तथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। इस कार्यशाला ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को साइबर सुरक्षा के प्रति सजग और जिम्मेदार बनने का संदेश दिया।












