
इलायची
– फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
भारत में इलायची (Cardamom) क्षेत्र में एक बार फिर रौनक लौट आई है। केरल के इडुक्की जिले में तुड़ाई के सीजन के चरम पर पहुंचते ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती मांग ने किसानों और व्यापारियों दोनों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है।हालांकि मई से अक्टूबर तक लगातार बारिश ने उत्पादन को करीब 15 से 20 प्रतिशत तक प्रभावित किया, लेकिन खेती का रकबा बढ़ने और बेहतर निवेश के कारण इस बार फसल की आवक में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीजन में इलायची उत्पादन 32,000 से 34,000 टन के बीच रहने का अनुमान है।
कीमतें ₹2,400 से ₹2,700 प्रति किलो तक रहने की उम्मीद
कार्डमम प्लांटर एस.बी. प्रभाकर ने बताया कि फिलहाल इलायची के दाम ₹2,400 से ₹2,700 प्रति किलो के बीच स्थिर हैं और अगले 3-4 महीनों तक इसी स्तर पर बने रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि “वसंत ऋतु की बारिश कीमतों में अगली हलचल तय करेगी, लेकिन फिलहाल भाव में बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है।”
भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा इलायची उत्पादक देश
ग्वाटेमाला में पिछले साल एल नीनो की भयंकर सूखे से फसल बुरी तरह प्रभावित हुई थी। अब वहां का उत्पादन केवल 16,000 से 20,000 टन के बीच रह गया है, जबकि सामान्य उत्पादन 45,000 टन होता है। इसी के चलते भारत ने लगातार दो सीजन (2023-24 और 2024-25) में दुनिया का सबसे बड़ा इलायची उत्पादक देश बनकर ग्वाटेमाला को पीछे छोड़ दिया है। यह उपलब्धि भारत ने 44 साल बाद हासिल की है (पहली बार 1981-82 में)।
इस अंतरराष्ट्रीय कमी ने वैश्विक बाजार में भारतीय इलायची की मांग बढ़ा दी है, जिससे आने वाले महीनों में भारत के निर्यात में इजाफा होने की संभावना है।
बाजार में रिकॉर्ड आवक, मजबूत घरेलू और निर्यात मांग
इकोस्पाइस के जोसेफ सेबेस्टियन ने बताया कि इस बार नीलामी केंद्रों पर इलायची की रिकॉर्ड आवक दर्ज की जा रही है। घरेलू और निर्यात दोनों ही स्तर पर मजबूत मांग बनी हुई है। उन्होंने कहा, “ग्वाटेमाला की सीमित रिकवरी और वैश्विक मांग के चलते भारत का इलायची बाजार मजबूत और स्थिर रहेगा।” हालांकि ग्वाटेमाला में इलायची की खेती का क्षेत्र भारत से 40% अधिक है, लेकिन वहां वैज्ञानिक खेती और फसल प्रबंधन की कमी के कारण उत्पादन क्षमता कम है।
किसान अब समझदारी से कर रहे हैं बिक्री
घरेलू किसान अब वैश्विक बाजार रुझानों पर नजर रखकर अपनी उपज को रणनीतिक रूप से बेच रहे हैं। पहले जहां किसान मजबूरी में कम दामों पर फसल बेच देते थे, वहीं अब वे फसल कटाई के बाद उचित कीमत पर तुरंत बिक्री कर रहे हैं, जिससे उन्हें नकदी प्रवाह भी बना रहता है और बेहतर मुनाफा भी मिल रहा है।
रामदान और गल्फफूड 2026 से पहले बढ़ी खाड़ी देशों की मांग
एसकेएम धनावंदन, जो तमिलनाडु के बोडिनायक्कनूर स्थित इलायची निर्यातक हैं, ने बताया कि रामदान 2026 की बुकिंग और गल्फफूड 2026 (जनवरी) के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। खाड़ी देशों से 6-7 मिमी, 7-8 मिमी और 8 मिमी (सुपीरियर ग्रेड) की इलायची की मांग सबसे ज्यादा है। हालांकि इस समय छोटे आकार की इलायची की मात्रा सीमित है, जिससे आपूर्ति और मांग में असंतुलन बना हुआ है।
धनावंदन का कहना है कि भारत को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रीमियम ग्रेड इलायची के औसत निर्यात मूल्य ($28–30 प्रति किलो) में रणनीतिक कमी करनी चाहिए, ताकि भारतीय इलायची वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सके।



