
टमाटर की खेती
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रबी के मौसम के दौरान किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर ज्यादा लाभ देने वाली सब्जियों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में टमाटर की खेती ने किसानों के लिए नए अवसर खोल दिए हैं। इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट (IARI), पूसा में विकसित नई टमाटर किस्में—पूसा रक्षित, पूसा टोमैटो हाइब्रिड-1, पूसा चेरी-1 और पूसा गोल्डन चेरी टोमैटो-2—न सिर्फ उच्च पैदावार देती हैं बल्कि बीमारी प्रतिरोधक भी हैं। प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन तकनीक जैसे पॉलीहाउस और नेटहाउस के तहत इनकी खेती करने से किसान सिर्फ 1000 वर्गमीटर जमीन में 1.3 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।पॉलीहाउस और नेटहाउस का फायदा
प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन तकनीक फसल की उम्र बढ़ाने, साल भर उत्पादन और बाजार की बेहतर कीमतों का फायदा देती है। पारंपरिक टमाटर की खेती आमतौर पर 3–4 महीने की होती है, लेकिन इन किस्मों को पॉलीहाउस या नेटहाउस में उगाने से 10–11 महीने तक फल मिल सकता है। इससे किसान लगातार कटाई कर सकते हैं और ऑफ-सीजन में ज्यादा बाजार मांग का फायदा उठा सकते हैं।
किस्मों की विशेषताएं
- पूसा रक्षित: मजबूत ग्रोथ, लंबी स्टोरेज क्षमता और बीमारी प्रतिरोधक।
- पूसा टोमैटो हाइब्रिड-1: गोल, आकर्षक और चमकीले लाल फल, प्रीमियम मार्केट के लिए उपयुक्त।
- पूसा चेरी-1: चमकदार लाल चेरी टमाटर, सलाद और एक्सपोर्ट के लिए आदर्श।
- पूसा गोल्डन चेरी टोमैटो-2: सुनहरा-पीला फल, बीटा-कैरोटीन और विटामिन C से भरपूर, सेहत-प्रेमी ग्राहकों के लिए उत्तम।
आधुनिक खेती तकनीक
इन किस्मों को बीज के बजाय तने की कटिंग से उगाया जा सकता है। हाइड्रोपोनिक्स जैसी नियंत्रित परिस्थितियों में कटिंग 8–10 दिनों में जड़ें तैयार कर लेती है और तीन हफ्तों में मुख्य स्ट्रक्चर में रोपाई के लिए तैयार हो जाती है। इससे समय की बचत होती है और उत्पादन बढ़ता है।
किसानों के लिए सलाह
कृषि विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि पौधों के बीच 50 सेंटीमीटर और पंक्तियों के बीच 100 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाए। पौधों को सिंगल स्टेम तरीके से लगाया जाए ताकि वर्टिकल ग्रोथ बढ़े और फल उत्पादन अधिक हो। यह प्रणाली हवा का प्रवाह बेहतर करती है, कटाई आसान बनाती है और बीमारियों का खतरा कम करती है।




