रबी सीजन : कम पानी में भी होगी भरपूर पैदावार, सही फसल चुनकर पाएं दुगना लाभ, जानें

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सांकेतिक तस्वीर – फोटो : सोशल मीडिया

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किसान समय पर खेत की तैयारी करें और अपने क्षेत्र की परिस्थितियों के अनुसार फसलों का चयन करें, तो कम पानी वाले इलाकों में भी वे अच्छी पैदावार और मुनाफा हासिल कर सकते हैं। कृषि विशेषज्ञ  कहते हैं कि दलहन, तिलहन और हाइब्रिड फसलों लिए किसान फसल चक्र जरूर अपनाएं, ताकि मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे।

अलग फसल व्यवस्था

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, दो प्रकार की कृषि व्यवस्था प्रचलित है, सिंचित और असिंचित क्षेत्रीय खेती। जिन क्षेत्रों में पानी की कमी है, वहां किसानों को तिवड़ा (कुतेरा) जैसी फसलों की खेती करनी चाहिए। प्रतीक, रतन और महातिवड़ा जैसी उन्नत प्रजातियां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई हैं, जो अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ बीमारियों के प्रति भी काफी प्रतिरोधी हैं।

कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए लाभदायक फसलें

कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि कम पानी वाले खेतों में चना, मसूर और मूंग जैसी दलहनी फसलें काफी लाभदायक साबित हो सकती हैं। अगर फसल की बुवाई में कुछ देर हो जाए, तो किसान मूंग की खेती को भी अपनाकर नुकसान से बच सकते हैं। वहीं तिलहनी फसलों में कुसुम, सूरजमुखी और आलसी (अलसी) की खेती किसानों के लिए बेहतर विकल्प है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो सकती है।

हाइब्रिड सूरजमुखी से होगी अधिक पैदावार

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित सूरजमुखी की हाइब्रिड प्रजाति से किसानों को उच्च गुणवत्ता और अधिक पैदावार प्राप्त हो सकती है। यह हाइब्रिड बीज बाजार में उपलब्ध है, जिसे किसान आसानी से खरीद सकते हैं और कम लागत में बेहतर उत्पादन ले सकते हैं। किसान धान की फसल कटते ही खेत की नमी के अनुसार तुरंत तैयारी शुरू करें ताकि समय पर रबी फसल की बुवाई हो सके। समय पर खेत तैयार होने से फसल अंकुरण बेहतर होता है और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।

फसल चक्र अपनाएं

कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाने की सलाह दी है। हर साल एक ही फसल बोने से मिट्टी की उर्वरता घटती है और रोगों का प्रकोप बढ़ता है। फसल बदल-बदलकर बुवाई करने से न केवल मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है, बल्कि उत्पादन में स्थिरता और विविधता भी आती है।