
थारू जनजाति – फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें
उत्तर प्रदेश सरकार की योजनाओं ने 11 लाख से अधिक जनजातीय लोगों के जीवन में बदलाव लाने का काम किया है। थारू, बुक्सा, गोंड और सहरिया जैसे समुदायों को अब मूलभूत सुविधाओं के साथ सामाजिक और आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है।
धरती आबा अभियान से 517 गांवों में विकास की सीधी पहुंच
सरकार का धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान इस बदलाव का केंद्र बिंदु बताया जा रहा है। इस अभियान के तहत 26 जिलों में 517 जनजातीय बहुल गांवों पर फोकस कर विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। इन गांवों में आयुष्मान कार्ड, उज्ज्वला योजना, जनधन खाते और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं का लाभ हर पात्र परिवार तक पहुंचाया गया है। पीएम जनमन योजना के माध्यम से बुक्सा जनजाति के 815 परिवारों को बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से सीधे जोड़ा गया है।
जंगल में रहने वाले परिवारों को घर, थारू हस्तशिल्प को बाजार
जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर बनाने पर भी सरकार का खास ध्यान है। मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को पक्के घर दिए गए हैं। वहीं, थारू समुदाय के पारंपरिक हस्तशिल्प को राष्ट्रीय बाजार दिलाने के लिए लखीमपुर खीरी में एक थारू हस्तशिल्प कंपनी बनाई गई है। इस कंपनी से 371 स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा गया है, जिन्हें आर्थिक सहायता देकर उनके उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
जनजातीय युवाओं के लिए पहल
जनजातीय युवाओं के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में भी काम हुआ है। लखीमपुर खीरी, बहराइच, सोनभद्र और ललितपुर में स्थापित एकलव्य मॉडल स्कूल दूर-दराज के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का केंद्र बन गए हैं। इसके अतिरिक्त, सर्वोदय छात्रावासों और आश्रम पद्धति विद्यालयों के जरिए बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ रहने और खाने की पूरी सुविधा मिल रही है। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने हेतु चलाए जा रहे ‘परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र’ भी सफल साबित हो रहे हैं, जहां से प्रशिक्षण लेकर 700 से अधिक युवा प्रशासनिक सेवाओं में जगह बना चुके हैं।
घुमंतू समुदायों को स्थायित्व प्रदान करने पर फोकस
सरकार ने विमुक्त और घुमंतू समुदायों जैसे नट, बंजारा, और कालबेलिया के जीवन में स्थायित्व लाने के लिए भी कदम उठाए हैं। इन समुदायों के बच्चों के लिए 101 आश्रम पद्धति विद्यालय और 9 सर्वोदय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा मिल रही है। इन पहलों का उद्देश्य इन समुदायों को एक सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है।



