
सब्जी की खेती
– फोटो : ai
विस्तार
सर्दियों में सब्जियों की खेती हमेशा से किसानों के लिए चुनौती रही है। ठंड, पाला, कम सूर्य प्रकाश और तेज हवाएं फसलों की ग्रोथ को प्रभावित करती हैं। महंगे पॉलीहाउस विकल्प होने के बावजूद हर किसान इसे नहीं लगा पाता। इसी समस्या का हल खोजते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) ने एक नई और सस्ती तकनीक विकसित की है—लो टनल तकनीक, जिसके जरिए किसान कम लागत में ऑफ-सीजन सब्जियां उगा सकते हैं और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।क्या है लो टनल तकनीक?
ICAR के अनुसार, लो टनल तकनीक में क्यारियों के ऊपर लचीली, पारदर्शी प्लास्टिक शीट लगाई जाती है। यह प्लास्टिक पौधों के आसपास गर्म वातावरण बनाकर उन्हें ठंड और पाले से बचाती है। इसका ढांचा पॉलीहाउस जैसा होता है, लेकिन इसकी लागत कई गुना कम होती है।
इस तकनीक के प्रमुख फायदे
- अत्यधिक ठंड, पाला, बारिश और तेज हवा से फसलों की सुरक्षा
- पौधों के आसपास तापमान संतुलित रहता है
- सब्जियां समय से पहले तैयार होती हैं
- कम लागत में ऑफ-सीजन खेती संभव
- पैदावार बढ़ने से किसानों को दोगुना तक मुनाफा
लो टनल कैसे तैयार करें?
यह तकनीक न केवल किसानों बल्कि घर पर किचन गार्डन बनाने वालों के लिए भी उपयोगी है। इसे तैयार करना बेहद आसान है:
- 1–1.25 मीटर के अंतर पर लोहे की अर्धवृत्ताकार रॉड लगाएं
- इन रॉड्स पर 100 माइक्रोन IR ग्रेड प्लास्टिक शीट चढ़ाएं
- टनल की ऊंचाई 30–60 सेमी रखें
- 50 सेमी की दूरी पर ड्रिप सिंचाई लाइनों की व्यवस्था करें
- प्रत्येक कतार के बीच 1.5 मीटर की दूरी रखने से वेंटिलेशन और रखरखाव आसान होता है
किन सब्जियों की खेती कर सकते हैं?
लो टनल तकनीक में कई तरह की सब्जियों की सफल खेती की जा सकती है, जैसे खीरा, लौकी, करेला, तुरई, टमाटर, मिर्च, बैंगन, पत्ता गोभी, फूल गोभी, ब्रोकली आदि।
किसानों के लिए बड़ा अवसर
कम लागत, आसान संरचना और बेहतर उत्पादन के कारण लो टनल तकनीक किसानों के लिए गेम चेंजर बन सकती है। सर्दियों में भी सब्जियां तेजी से बढ़ेंगी और ऑफ-सीजन में मिलने वाला बढ़ा हुआ बाजार भाव किसानों के लिए मुनाफे का बड़ा मौका साबित होगा।




