पीएसी की गौरवपूर्ण परंपरा को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में शुक्रवार का दिन मील का पत्थर साबित हुआ। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने 35वीं वाहिनी पीएसी, लखनऊ परिसर में बने नेताजी सुभाष चंद्र बोस क्रीड़ा भवन के नए रूप का लोकार्पण करते हुए कहा कि यह कदम न केवल बल की शारीरिक क्षमता बढ़ाएगा, बल्कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता में भी महत्वपूर्ण सुधार लाएगा।
डीजीपी ने किया अवलोकन
उद्घाटन कार्यक्रम के बाद डीजीपी ने परिसर में स्थित पीएसी संग्रहालय का विस्तृत अवलोकन किया। संग्रहालय में प्रांतीय सशस्त्र बल के गठन से लेकर अब तक के महत्वपूर्ण चरण, ऐतिहासिक अभियान, युद्धक उपलब्धियां और बलिदानों से जुड़ी धरोहरें सुरक्षित रखी गई हैं। दस्तावेजों और दुर्लभ संस्मरणों को देखते हुए उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय जवानों के मनोबल को मजबूत करने वाला प्रेरणादायक स्थान है, जहां पीएसी के शौर्य की जीवंत गाथा दिखाई देती है।
डीजीपी ने कार्यक्रम के दौरान पीएसी अधिकारियों के साथ भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा भी की। इसमें संसाधनों के आधुनिकीकरण, प्रशिक्षण पद्धतियों की उन्नति, तकनीकी क्षमता बढ़ाने और फोर्स को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
उन्होंने कहा कि पीएसी न केवल राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की मजबूत रीढ़ है, बल्कि संकट के हर दौर में सबसे पहले मोर्चे पर खड़ी होने वाली फोर्स भी है। इसलिए उसके संरचनात्मक विकास और क्षमता-वृद्धि के लिए लगातार निवेश किया जा रहा है।
ये अफसर रहे मौजूद
कार्यक्रम में एडीजी पीएसी डॉ. आर.के. स्वर्णकार, डीआईजी पीएसी मुख्यालय लखनऊ अनीस अहमद, डीआईजी पीएसी लखनऊ सुनीता सिंह, डीआईजी पीएसी अनुभाग लखनऊ किरीट राठोड और सेनानायक 35वीं वाहिनी पीएसी अमित कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी ने क्रीड़ा भवन के उच्चिकीकरण को पीएसी की नई ऊर्जा और भविष्य की तैयारी का प्रतीक बताया।












