
स्ट्रॉबेरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन
विस्तार
सर्दी के आगमन के साथ ही झारखंड के हजारीबाग जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती इस बार और बड़े पैमाने पर शुरू होने जा रही है। सदर और कटकमदाग प्रखंड में किसान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर अब तकनीक-आधारित स्ट्रॉबेरी उत्पादन में निवेश कर रहे हैं। बेहतर बाजार कीमत, बढ़ती मांग और कम अवधि में उत्पादन मिलने के कारण यह फसल किसानों के लिए बड़ी कमाई का जरिया बनती जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सही तरीके से अपनाई गई स्ट्रॉबेरी खेती किसानों की आय कई गुना बढ़ा सकती है, खासकर उन किसानों के लिए जिनके पास सीमित पूंजी है।सही समय और वैज्ञानिक पद्धति, सफलता की कुंजी
आईसेक्ट विश्वविद्यालय हज़ारीबाग के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि जिले में स्ट्रॉबेरी की मांग लगातार बढ़ रही है और किसान पहले से ज्यादा क्षेत्र में इसकी खेती अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्ट्रॉबेरी रोपाई का सर्वश्रेष्ठ समय अक्टूबर के अंत से नवंबर के अंतिम सप्ताह तक होता है, जब तापमान 15–25 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है।
कैसी जमीन सबसे बेहतर?
- हल्की दोमट मिट्टी स्ट्रॉबेरी उत्पादन के लिए सर्वोत्तम
- खेत में पानी रुकना सबसे बड़ा खतरा
- ऊंची-ऊंची क्यारियां बनाना आवश्यक ताकि जल निकासी बेहतर रहे
- बीज नहीं, रनर प्लांट से होती है स्ट्रॉबेरी की शुरुआत
डॉ. अरविंद ने बताया कि स्ट्रॉबेरी बीज से नहीं बल्कि रनर प्लांट से लगाई जाती है, जिससे यह जल्दी और अधिक उत्पादन देती है।
- पौधों के बीच दूरी: 12–15 इंच
- कतारों के बीच दूरी: 2.5–3 फीट
इससे पौधे पूर्ण धूप और हवा प्राप्त कर पाते हैं, जो फल विकास के लिए आवश्यक है।
मल्चिंग शीट और ड्रिप सिस्टम: तीन बड़े फायदे
- खरपतवार नियंत्रण
- मिट्टी में नमी संरक्षण
- फल साफ और रोग-मुक्त
सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम को सबसे बेहतर बताया गया है क्योंकि
- इससे पानी की बचत होती है
- ओवर-वॉटरिंग का खतरा नहीं रहता
- रोपाई के 45–60 दिनों में फसल तैयार होने लगती है। शुरुआती 30 दिन हल्की सिंचाई आवश्यक है।
रोग नियंत्रण के लिए सावधानियां जरूरी
- स्ट्रॉबेरी पौधे रोगों के प्रति संवेदनशील होते हैं। इसलिए विशेषज्ञों ने सुझाव दिया:
- रोपाई से पहले मिट्टी में ट्राइकोडर्मा मिलाएं
- पाउडरी मिल्ड्यू और एफिड नियंत्रण के लिए हल्का जैविक/कीटनाशक छिड़काव करें
- सर्टिफाइड नर्सरी से ही खरीदें रनर प्लांट
डॉ. अरविंद ने किसानों को चेतावनी देते हुए कहा कि अविश्वसनीय स्रोत से लाए गए रनर प्लांट अक्सर रोगग्रस्त होते हैं, जो पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए
- केवल प्रमाणित नर्सरी कृषि विज्ञान केंद्र से ही पौधे खरीदें।
- कम लागत, अच्छी कीमत और तेज उत्पादन—किसानों के लिए सुनहरा मौका
स्थानीय तथा बाहरी बाजारों में स्ट्रॉबेरी की बढ़ती मांग के कारण हज़ारीबाग के किसान इसे आय बढ़ाने का एक विश्वसनीय विकल्प मान रहे हैं। विशेषज्ञों का दावा है कि यदि वैज्ञानिक तकनीक और सावधानियां अपनाई जाएं तो कम लागत में भी स्ट्रॉबेरी खेती से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।




