
गन्ने की खेती – फोटो : गांव जंक्शन
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भारत में हमेशा कहा जाता है कि “जरूरत ही आविष्कार की जननी है”, और हरियाणा के करनाल जिले के प्रगतिशील किसान जगबीर सिंह ने इसे साबित कर दिखाया है। गन्ने की पारंपरिक खेती में बीज की भारी लागत और बढ़ते खर्च से परेशान होकर उन्होंने एक ऐसी तकनीक विकसित की, जिसने बीज उत्पादन को कई गुना बढ़ाया और खेती को अत्यंत लाभकारी बना दिया।उनकी खोज ‘सिंगल बड मेथड’ (एक आँख वाली गन्ने की पोरी से खेती) आज गन्ना किसानों के बीच चर्चा का विषय है। यह तकनीक न सिर्फ सस्ती है, बल्कि बाकी महंगी तकनीकों की तुलना में ज्यादा सरल और तेज है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह एक बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकती है।
कैसे मिली सफलता?
जगबीर सिंह पिछले 8 वर्षों से इस तकनीक पर काम कर रहे हैं। उनकी प्रक्रिया इस प्रकार है—
1. फरवरी–मार्च में शुरुआत
- सिंगल बड (एक आंख वाली) पोरियों की बुवाई की जाती है।
- 90 दिनों में एक ‘मदर शूट’ तैयार हो जाती है।
- एक मदर शूट में 3–4 पोरियां बन जाती हैं।
2. मदर शूट से तैयार होते हैं नए पौधे
- मदर शूट को काटकर दोबारा जमीन में लगाया जाता है।
- केवल 25 दिनों में नई कल्ले निकल आती हैं।
- इससे 5–6 नई पोरियां बन जाती हैं।
3. एक साल में बीज उत्पादन 200–250 गुना
- इस क्रम को दोहराते हुए एक साल में वही किसान पारंपरिक तरीके की तुलना में 250 गुना अधिक बीज सामग्री तैयार कर सकता है।
- लागत घटी, मुनाफा कई गुना बढ़ा
- पारंपरिक विधि की लागत
- प्रति एकड़ बीज: 40 क्विंटल
- खर्च: 18,000–20,000 रुपये
जगबीर सिंह की सिंगल बड विधि
- प्रति एकड़ बीज: सिर्फ 6 क्विंटल
- खर्च: 10,000 रुपये
- यानी बीज की मात्रा में 85% तक कमी और लागत लगभग आधी। इसके साथ ही जगबीर सिंह उन्नत किस्मों का बीज तैयार करके बेचते हैं।
कमाई का मॉडल
- 1 हेक्टेयर से आय: 10–12 लाख रुपये
- निवेश पर रिटर्न: 1 रुपये पर 5 रुपये तक की कमाई
- यह मॉडल किसानों को बीज उत्पादक बनाकर उन्हें एक कृषि उद्यमी (Agri-Entrepreneur) के रूप में स्थापित करता है।
टिश्यू कल्चर की जगह सस्ती देसी तकनीक
आजकल गन्ने के बीज के लिए टिश्यू कल्चर का खूब प्रचार है, लेकिन इसमें भारी खर्च, बड़े सेटअप की जरूरत, छोटे किसानों के लिए कठिनाई जैसी चुनौतियां हैं। इसके मुकाबले ‘सिंगल बड विधि’—
- बेहद सस्ती
- सरल
- तेज़
- बीमारी रहित बीज तैयार करने वाली
- स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल तकनीक है, जिसे आम किसान भी आसानी से अपना सकता है।
खेती में बदलाव जरूरी
जगबीर सिंह कहते हैं, “खेती में विज्ञान और समझदारी दोनों चाहिए।” वह आगे कहते हैं, “लागत कम करना ही नहीं, किसानों को उत्पादक–उद्यमी बनाना जरूरी है। “अगर सरकार इसे बड़े स्तर पर बढ़ावा दे तो यह तकनीक एक क्रांति ला सकती है।”




