
सरसों की फसल – फोटो : सोशल मीडिया
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नवंबर का महीना सरसों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस बीच किसान सही समय पर और सही तरीके से बुवाई करें तो उपज भी बढ़ती है और तेल की मात्रा भी अच्छी मिलती है। इसलिए सरसों की फसल लगाने से पहले किस्म का चयन, खेत की तैयारी और बीज शोधन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।कृषि विशेषज्ञ बताते हैं कि अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी है। सही खेत तैयारी के लिए दो से तीन बार जुताई करें। पहली जुताई गहरी होनी चाहिए। मिट्टी को भुरभुरा बनाएं ताकि बीज आसानी से अंकुरित हो सकें। खेत को समतल करें, मिट्टी को मुलायम कर लें, ताकि नमी बनी रहे।
मिट्टी और बीज का शोधन करना भी जरूरी है, जिससे फसल में रोग लगने की संभावना कम होती है। इस बीच बीज बुवाई के समय दूरी का ध्यान रखें। सरसों की बुवाई हमेशा लाइन से लाइन करनी चाहिए। लाइन से लाइन दूरी- 45 सेंटीमीटर, पौधे से पौधे की दूरी- 15 से 20 सेंटीमीटर होनी चाहिए।
इस तरह की बुवाई से निराई-गुड़ाई में आसानी होती है, पौधों को उचित पोषण मिलता है और फसल की कटाई भी सरल हो जाती है। बीज बोने के बाद उन्हें हल्की मिट्टी से ढकना भी जरूरी है। सरसों की फसल में संतुलित उर्वरक का उपयोग अनिवार्य है। बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर 60 किलो नाइट्रोजन, 40 किलो फास्फोरस, 40 किलो पोटाश डालना चाहिए।
उर्वरक की अधिक मात्रा फसल को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए अनुशंसित मात्रा ही डालें। बुवाई के बाद और फसल बढ़ते समय समय-समय पर सिंचाई करनी चाहिए। इससे उत्पादन में वृद्धि होती है और तेल की मात्रा भी बढ़ती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लाइन से लाइन बुवाई, उर्वरक प्रबंधन और सिंचाई ये तीनों बातों का पालन करने से किसान सरसों की फसल से बेहतर कमाई कर सकते हैं।




