स्ट्रॉबेरी बनी किसानों की कैश क्रॉप : कम समय और लागत में मिलता है ज्यादा मुनाफा

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स्ट्रॉबेरी की खेती

स्ट्रॉबेरी की खेती
– फोटो : गांव जंक्शन

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देशभर में स्ट्रॉबेरी की खेती तेजी से बढ़ रही है। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए बड़े मुनाफे का नया विकल्प बनकर उभर रही है। ठंडे और पहाड़ी इलाकों में किसान आधुनिक तकनीक अपनाकर स्ट्रॉबेरी की खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सही जलवायु और वैज्ञानिक पद्धति अपनाने पर किसान कम लागत में 8 से 12 टन तक उत्पादन लेकर बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, स्ट्रॉबेरी ठंडे और समशीतोष्ण मौसम में अच्छी तरह बढ़ती है। 15-25 डिग्री तापमान इसके लिए सबसे अच्छा माना जाता है। मिट्टी हल्की, बलुई-दोमट और जैविक पदार्थों से भरपूर होनी चाहिए। पीएच 5.5-6.5 वाली मिट्टी आदर्श है। पानी निकलने की अच्छी व्यवस्था जरूरी है, वरना जड़ें सड़ सकती हैं। 

बेहतर मानी जाती हैं ये किस्में

अच्छी और रोगमुक्त पौध तैयार करना बहुत जरूरी है। स्ट्रॉबेरी खेती मुख्य रूप से दो तरीकों से होती है- ऊंची क्यारियों पर रोपण, मल्चिंग और ड्रिप सिंचाई के साथ। रोपाई का सही समय अक्टूबर से नवंबर है। किसानों के लिए कैमरोसा, चैंडलर, फेस्टिवल, स्वीट चार्ली, विंटर डॉन किस्में सबसे बेहतर मानी जाती हैं।  

करें ये जरूरी उपाय

  • पौधों के बीच 30×45 सेमी दूरी रखना जरूरी है।
  • ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से बढ़ती है उपज
  • स्ट्रॉबेरी के लिए ड्रिप सिंचाई सबसे उपयुक्त है।
  • काला प्लास्टिक मल्च लगाने से नमी बनी रहती है और खरपतवार नहीं उगते।
  • खाद के लिए गोबर, वर्मी कम्पोस्ट और एनपीके का संतुलित उपयोग होता है।
  • फूल आते समय जैविक खाद और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स देने से फल ज्यादा और बेहतर आते हैं।

रोग और कीट नियंत्रण

स्ट्रॉबेरी में ये रोग आम हैं-

  • पाउडरी मिल्ड्यू
  • लीफ स्पॉट
  • जड़ सड़न

इनसे निपटने के उपाय-

  • खेत की सफाई
  • संतुलित सिंचाई
  • रोगमुक्त पौधे

कीटों में थ्रिप्स और मिली बग प्रमुख हैं। इनके लिए-

  • नीम का तेल
  • ट्राइकोडर्मा
  • लहसुन-अदरक का घोल बहुत प्रभावी हैं।

60-75 दिनों में तैयार हो जाती है फसल

रोपाई के लगभग 2-2.5 महीने बाद स्ट्रॉबेरी तोड़ने लायक हो जाती है। फल पूरी तरह लाल होने पर तोड़ना चाहिए। फल को हल्के हाथों से तुड़ें। ताजगी बनाए रखने के लिए तुरंत ठंडी जगह पर रखें। पैकिंग छोटे प्लास्टिक बॉक्स या पननेट्स में की जाती है। स्ट्रॉबेरी की मांग पूरे साल बनी रहती है। यह सप्लाई स्थानीय बाजार, बड़े शहर, सुपरमार्केट, प्रोसेसिंग यूनिट्स से होती है। कम समय में किसान अच्छी आय प्राप्त कर रहे हैं, इसलिए स्ट्रॉबेरी खेती युवाओं और छोटे किसानों के लिए भी एक बड़ा अवसर बन गई है।