
सांकेतिक तस्वीर
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सब्जी उत्पादन में मेड़ों पर बुवाई को सबसे प्रभावी तकनीक माना जाता है। इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जड़ें अच्छे से विकसित होती हैं और फसलों का विकास समान रूप से होता है। खासकर रबी सीजन में कई सब्जियों की बुवाई मेड़ों पर करने से उत्पादन में 20-30% तक बढ़ोतरी देखी गई है।गाजर की बुवाई मेड़ों पर करना सबसे अच्छा माना जाता है। उन्नत किस्म पूसा रुधिरा की बीज दर लगभग 2 किलो प्रति एकड़ है। बुवाई से पहले बीज को केप्टान @ 2 ग्राम प्रति किलो बीज से उपचारित करना चाहिए, इससे बीजजनित रोगों से सुरक्षा मिलती है और अंकुरण बेहतर होता है।
इन किस्मों की करें बुवाई
किसान इस समय सरसों साग (पूसा साग-1), मूली (जापानी व्हाइट, हिल क्वीन), पालक (ऑल ग्रीन), शलगम (पूसा स्वेती), बथुआ (पूसा बथुआ-1), मेथी (पूसा कसुरी), गांठ गोभी (व्हाइट वियना) और धनिया (पंत हरितमा) सब्जियों की उन्नत किस्मों की बुवाई उथली क्यारियों और मेड़ों पर कर सकते हैं। ये सब्जियां ठंड के मौसम में अच्छी वृद्धि करती हैं और मेड़ों पर लगाने से जल निकास बेहतर रहता है।
बुवाई से पहले की जरूरी तैयारियां
मिट्टी में उचित नमी जरूर बनाएं, ताकि बीज आसानी से अंकुरित हो सकें। क्यारियों को अच्छी तरह साफ और समतल रखें। जैविक खाद या सड़ी गोबर खाद मिलाने से मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ती है। सही नमी और उपचारित बीज से अंकुरण तेज होता है और पौधे अधिक स्वस्थ बनते हैं। मेड़ों पर बुवाई से फसल को हवा, पानी और पोषक तत्वों का संतुलित लाभ मिलता है, जिससे सब्जियों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बढ़ते हैं। यह तकनीक कम लागत में अधिक लाभ देने वाली साबित होती है।




