सहजन : औषधीय पौधे की खेती से बदल रही किस्मत, किसान कर रहे लाखों की आमदनी

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एटा जिले के मारहरा क्षेत्र में सहजन की खेती – फोटो : गांव जंक्शन

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उत्तर प्रदेश के एटा जिले के मारहरा ब्लॉक में किसान अब परंपरागत खेती से हटकर आधुनिक और वैकल्पिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इसी परिवर्तन का सबसे सफल उदाहरण हैं गांव महमूदपुर नगरिया के प्रगतिशील किसान सुखवीर, जिन्होंने स्थानीय किसानों को संगठित कर मारहरा फार्मर प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी बनाई है और औषधीय पौधे सहजन (मोरिंगा) की व्यावसायिक खेती शुरू की है। यह खेती न केवल किसानों की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि गांव में रोजगार और नई कृषि तकनीक का मार्ग भी खोल रही है।

कैसे होती है आधुनिक खेती?

मोरिंगा खेती की शुरुआत उच्च गुणवत्ता के बीज से होती है। सुखवीर लखनऊ से बीज मंगाकर पहले पौधशाला में रोपाई करते हैं। लगभग एक महीने में पौध तैयार हो जाती है, जिसके बाद इसे खेत में निर्धारित दूरी पर रोप दिया जाता है। मात्र दो से ढाई महीने बाद पौधों से पहली पत्ती हार्वेस्टिंग शुरू हो जाती है। यह प्रक्रिया वर्षभर चलती रहती है, जिससे किसानों को निरंतर आय मिलती है। एक एकड़ में लगाने के लिए एक किलो बीज ही पर्याप्त होता है, जिससे लगभग 3,000 पौधे तैयार हो जाते हैं। बीज की कीमत लगभग ₹2,000 प्रति किलो है।

मुनाफे का मजबूत समीकरण

सहजन की पत्तियों की बाजार में भारी मांग है, क्योंकि देश की बड़ी आयुर्वेदिक कंपनियां इन्हें दवाओं और पाउडर बनाने में उपयोग करती हैं। सुखाई गई पत्तियों की कीमत ₹250–₹300 प्रति किलो तक मिल रही है। एक एकड़ खेत से हर दो महीने में लगभग 1 क्विंटल पत्ती उत्पादन होता है। इस प्रकार एक वर्ष में किसान डेढ़ से दो लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई आसानी से कर लेते हैं, वह भी बहुत कम लागत में।

क्यों बढ़ रही है सहजन की मांग?

सहजन एक अत्यंत औषधीय पौधा है, जिसकी पत्तियां एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन A, C और K, प्रोटीन, आयरन से भरपूर होती हैं। साथ ही, इसकी मांग आयुर्वेदिक दवा कंपनियों, पोषण सप्लिमेंट उद्योग और स्वास्थ्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों में लगातार बढ़ती जा रही है।

अनुदान अभी नहीं, पर मदद मिलेगी: उद्यान अधिकारी

एटा जिला उद्यान अधिकारी सुघर सिंह के अनुसार, “सहजन अभी अनुदान सूची में शामिल नहीं है। लेकिन यदि कोई किसान इस खेती में रुचि रखता है, तो कार्यालय से संपर्क करें। शासन स्तर से मदद और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इसको प्रोत्साहित करने के लिए प्रस्ताव भी भेजा जाएगा।” महमूदपुर नगरिया गांव में सहजन की खेती ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई है, बल्कि यह उदाहरण बनकर पूरे जिले में फैल रहा है। कम लागत, कम पानी, कम मेहनत और उच्च लाभ वाली यह खेती आने वाले समय में किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।

रिपोर्ट- विकास भारतीय (एटा)