
तेल – फोटो : सोशल मीडिया
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सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई 1 लाख करोड़ रुपये की आरडीआई (रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन) योजना घरेलू खाद्य तेल उद्योग की दिशा बदलने वाली साबित हो सकती है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स’ एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने इस योजना को तकनीक आधारित विकास के लिए दूरदर्शी कदम बताते हुए कहा है कि इससे तिलहनी बीज उत्पादन, खेती की तकनीक और प्रसंस्करण प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव की शुरुआत होगी।SEA अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने अपने मासिक पत्र में कहा कि लंबे समय तक कम लागत वाली फाइनेंसिंग का यह मॉडल हाई-रिस्क और हाई-इम्पैक्ट रिसर्च को गति देगा। इससे तिलहन की बेहतर किस्मों, जलवायु-लचीली खेती, प्रिसिजन एग्रिकल्चर, प्रोसेसिंग ऑप्टिमाइजेशन और डिजिटल ट्रैसेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में नवाचार का रास्ता खुलेगा। इन प्रयासों से भारत की 60% आयात निर्भरता कम करने और घरेलू क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
निर्यात प्रोत्साहन मिशन से MSMEs को बढ़त
SEA ने सरकार द्वारा मंजूर 25,060 करोड़ रुपये के निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM) का भी स्वागत किया। इस मिशन के तहत ‘निर्यात प्रोत्साहन’ और ‘निर्यात दिशा’ जैसे प्लेटफॉर्म व्यापारिक वित्त की उपलब्धता आसान करेंगे, कंप्लायंस बोझ घटाएंगे और MSME सेक्टर की वैश्विक तैयारी को मजबूत बनाएंगे। अस्थाना के अनुसार कृषि और उससे जुड़े उत्पादों के लिए इन दोनों योजनाओं से घरेलू और विदेशी बाजारों में नए अवसर बनेंगे।
तिलहन उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सरकार के अंतिम अनुमान के अनुसार 2024–25 में तिलहन उत्पादन रिकॉर्ड 429.89 लाख टन पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से 32.20 लाख टन अधिक है।
- सोयाबीन—152.68 लाख टन
- मूंगफली—119.42 लाख टन
दोनों फसलों में दो अंकों की वृद्धि दर्ज हुई है। SEA ने इसे सेक्टर के लिए उत्साहजनक करार दिया है, हालांकि तिलहन उत्पादन बढ़ने के बावजूद खाद्य तेल आयात में अब तक समानांतर कमी नहीं दिखी है। अस्थाना ने कहा कि उत्पादन और बाजार मांग के बीच इस असमानता को दूर करने के लिए सरकार-उद्योग सहयोग आवश्यक है।
रबी सीजन में सरसों क्षेत्र बढ़ा
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 14 नवंबर तक रबी सीजन में तिलहन की बुवाई 3 लाख हेक्टेयर बढ़कर 66.2 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है। सरसों किसानों को मिले बेहतर दामों का असर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। सरसों का MSP 6,200 रुपये प्रति क्विंटल है और बाजार में इससे बेहतर भाव मिलने के कारण किसान तेजी से इस फसल की ओर लौट रहे हैं।
राजस्थान में लगभग 30.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जो सामान्य क्षेत्र का 85% है। SEA का मानना है कि मौसम अनुकूल रहा तो इस वर्ष सरसों की बड़ी फसल निकल सकती है।
खाद्य तेल आयात बिल बढ़ा, चिंता गहरी
हालांकि तिलहन उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन भारत का खाद्य तेल आयात बिल चिंता का विषय बना हुआ है। SEA के अनुसार, वार्षिक खाद्य तेल आयात: लगभग 160 लाख टन (पिछले वर्ष के समान) लेकिन आयात मूल्य 1.31 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.61 लाख करोड़ रुपये हो गया है। अस्थाना ने कहा कि MSP संरचना अभी भी किसानों को धान और गेहूं की ओर आकर्षित करती है, जिससे तिलहन क्षेत्र में अपेक्षित विस्तार नहीं हो पा रहा।
नेपाल से रिफाइंड तेल की बढ़ी शून्य-ड्यूटी आयात का मसला
जुलाई में सरकार ने कच्चे और परिष्कृत तेलों की इंपोर्ट ड्यूटी के अंतर को 8.25% से बढ़ाकर 19.25% किया था, जिससे RBD पाम ऑयल का आयात लगभग बंद हो गया। लेकिन SAFTA समझौते के तहत नेपाल से बड़े पैमाने पर रिफाइंड सोयाबीन ऑयल, रिफाइंड सूरजमुखी तेल का शून्य-ड्यूटी आयात बढ़ गया है, जो 70,000–80,000 टन प्रतिमाह तक पहुंच गया है। SEA ने इस पर रोक लगाने के लिए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को सुझाव दिया है कि ऐसे आयात को NAFED या सरकारी एजेंसियों के माध्यम से चैनलाइज किया जाए।
ऑलिव ऑयल पर कस्टम ड्यूटी में बड़ी राहत
14 नवंबर को केंद्र सरकार ने कच्चे पामेस ऑलिव ऑयल पर कस्टम ड्यूटी को 38.5% से घटाकर 16.5% कर दिया। SEA के अनुसार, यह कदम घरेलू प्रोसेसर्स को राहत देगा और उपभोक्ताओं के लिए ऑलिव ऑयल को सस्ता बनाएगा। क्रूड पामेस ऑलिव ऑयल भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ऑलिव ऑयल प्रकार है, और ड्यूटी कटौती से इसकी कीमतों में कमी आएगी।



