Marine Export: भारत के मरीन प्रोडक्ट्स निर्यात में 16% उछाल; एशिया और यूरोप में मांग बढ़ी

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झींगा

झींगा
– फोटो : सोशल मीडिया

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भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात ने अप्रैल-अक्तूबर 2025 के दौरान शानदार प्रदर्शन करते हुए 16.18 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। इस अवधि में निर्यात 4.20 अरब डॉलर से बढ़कर 4.87 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह पिछले कुछ वर्षों का सबसे मजबूत मध्य-वर्षीय प्रदर्शन माना जा रहा है। निर्यात में यह तेजी वैश्विक मांग में सुधार, एशियाई और यूरोपीय बाजारों में जबरदस्त रिकवरी और निर्यात गंतव्यों में तेजी से हो रहे विविधीकरण का संकेत देती है।मासिक निर्यात में लगातार छलांग
अप्रैल–अक्टूबर 2025 के दौरान कई महीनों में दो अंकों की वृद्धि देखी गई। मई और सितंबर: 20% से अधिक वृद्धि दर्ज हुई है। 

  • अप्रैल: 17.82%
  • जून: 13.33%
  • जुलाई: 14.08%
  • अक्टूबर: 11.08%

झींगा और प्रॉन बने निर्यात की रीढ़, 17.43% की बढ़ोतरी
समुद्री निर्यात के कुल उछाल में सबसे बड़ा योगदान झींगा और प्रॉन का रहा। अप्रैल-अक्टूबर 2025 में इनका निर्यात 2.64 अरब डॉलर से बढ़कर 3.10 अरब डॉलर हो गया, यानी 17.43% की वृद्धि।

अमेरिका में गिरावट, लेकिन एशिया-यूरोप ने संभाला मोर्चा
भारत का सबसे बड़ा पारंपरिक झींगा बाजार अमेरिका इस अवधि में कमजोर रहा, जहां निर्यात में 7.43% गिरावट आई और लगभग 85.47 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ। लेकिन यह कमी कई बाजारों में असाधारण वृद्धि से पूरी हो गई:

  • चीन
  • वियतनाम
  • बेल्जियम
  • जापान
  • रूस
  • कनाडा
  • यूके

इन बाजारों में तेज मांग ने संकेत दिया है कि दुनिया अब एकल बाजार पर निर्भरता घटाकर भारत को एक प्रमुख, विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में देख रही है। कंपटीटिव कीमतों, स्थिर गुणवत्ता और बढ़ते एक्वाकल्चर उत्पादन के चलते।

वित्तीय वर्ष 2026 के बाकी महीनों के लिए उम्मीदें मजबूत
पीक हार्वेस्ट सीजन आने के साथ भारत का एक्वाकल्चर उत्पादन और बढ़ने की उम्मीद है। निर्यातक मानते हैं कि गैर-अमेरिकी बाजारों में निरंतर मांग, अमेरिका में संभावित रिकवरी मिलकर भारत के निर्यात ग्रोथ ट्रेंड को बनाए रखेंगे।

वन प्रोडक्ट–वन मार्केट से आगे बढ़ने की रणनीति सफल
सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEAI) के महासचिव के एन राघवन ने कहा कि भारत ने समुद्री उत्पादों में वन प्रोडक्ट, वन मार्केट मॉडल से आगे बढ़ते हुए विविधीकरण को तेज किया है, जिससे अब कई प्रोडक्ट्स और कई देशों में निर्यात का दायरा बढ़ा है।

उन्होंने बताया पारंपरिक रूप से अमेरिका 40% तक हिस्सेदारी वाला प्रमुख बाजार था। अमेरिका द्वारा लगाई गई उच्च आयात शुल्क ने भारत को नए बाजारों की ओर देखने के लिए प्रेरित किया। वाणिज्य मंत्रालय के प्रयासों से 102 फिशरी यूनिट्स को यूरोपीय संघ (EU) में निर्यात की अनुमति मिली, जिससे EU को निर्यात करीब 40% बढ़ा। रूस के साथ सहयोग बढ़ाने और 20 से अधिक भारतीय यूनिट्स को रूस निर्यात की मंजूरी भी बड़े अवसर पैदा कर रही है।

चीन, वियतनाम, कनाडा, जापान में भी मजबूत उछाल
राघवन ने कहा कि इन बाजारों में बढ़ता निर्यात भारत की वैश्विक उपस्थिति को मजबूत कर रहा है और आने वाले वर्षों में समुद्री उत्पाद क्षेत्र के लिए बड़ी संभावनाएं खोल रहा है।