
चावल
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वैश्विक बाजार में चावल की कीमतों में पिछले दो सप्ताह के दौरान मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन व्यापारियों का मानना है कि यह रुझान टिकाऊ नहीं है। भारत और दुनिया में रिकॉर्ड उत्पादन तथा विशाल स्टॉक के चलते अंतरराष्ट्रीय दामों पर जल्द ही दबाव बढ़ने के आसार हैं। इसके साथ ही अफ्रीकी देश सेनेगल में आयातकों के लाइसेंस खत्म होने से भारतीय निर्यात को अस्थायी झटका लगा है।भारत के पास 10 साल का सबसे बड़ा चावल भंडार
दिल्ली स्थित निर्यातक राजेश पहाड़िया जैन ने बताया कि कीमतों में हल्की मजबूती के बावजूद भारत के पास मौजूद भारी स्टॉक बाजार पर दबाव बनाए रखेगा। फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के पास वर्तमान में 33.6 मिलियन टन चावल और 30.91 मिलियन टन धान (लगभग 21 मिलियन टन चावल के बराबर) का भंडार है। यह पिछले एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर है।
भारत का चावल अब भी सबसे प्रतिस्पर्धी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत का 5% टूटे दाने वाला सफेद चावल 346 डॉलर प्रति टन की दर से ऑफर हो रहा है, जो थाईलैंड और वियतनाम से सस्ता है। हालांकि पाकिस्तान 340 डॉलर प्रति टन की दर के साथ सबसे प्रतिस्पर्धी बना हुआ है। उद्योग का मानना है कि भारी फसल उत्पादन कीमतों को और दबा सकता है। कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ सीजन में देश का चावल उत्पादन 125.40 मिलियन टन के नए रिकॉर्ड पर पहुंच सकता है, जो पिछले वर्ष 122.77 मिलियन टन था। इंटरनेशनल ग्रेन्स काउंसिल के अनुसार वैश्विक उत्पादन भी 543 मिलियन टन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 541 मिलियन टन था।
विशेष किस्मों का उत्पादन घटा
जलवायु-अनुपालक चावल का निर्यात करने वाली कंपनी स्वास्थ इकोहार्वेस्ट के प्रबंध निदेशक एस. चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत की बंपर पैदावार से कीमतें और नीचे आ सकती हैं। तेलंगाना में कलेश्वरम परियोजना से अतिरिक्त उत्पादन आने की भी संभावना है। हालांकि सोना मसूरी और बीपीटी जैसी विशेष किस्मों का उत्पादन इस वर्ष कम है, क्योंकि पिछले वर्ष किसानों को इन किस्मों के दाम लाभकारी नहीं मिले थे।
आवक अधिक, फिर भी घरेलू बाजार में कुछ राज्यों में दाम ऊंचे
व्यापारियों का कहना है कि पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद तेलंगाना के घरेलू बाजारों में कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। वहीं, निर्यात मोर्चे पर इस वर्ष कोई विशेष तेजी नहीं दिख रही है।
निर्यात 2022-23 के मुकाबले कमजोर
एपेडा के आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में गैर-बासमती चावल निर्यात 7.02 मिलियन टन रहा है। हालांकि पिछले वर्ष इसी अवधि में निर्यात प्रतिबंध लागू था, लेकिन 2022-23 की समान अवधि की तुलना में यह काफी कम है, जब निर्यात 8.96 मिलियन टन पर था। निर्यातकों के अनुसार अफ्रीकी देशों में डॉलर की कमी से मांग धीमी है। कई खरीदार स्थानीय मुद्रा में भुगतान करने को तैयार हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में यह व्यावहारिक नहीं है।
सेनेगल में आयात लाइसेंस खत्म, भेजान पर असर
सेनेगल में आयातकों के लाइसेंस समाप्त होने से भारत से निर्यात प्रभावित हुआ है। जैन ने बताया कि यह असर अस्थायी है और इससे ज्यादा से ज्यादा 50,000 टन के आसपास की मात्रा ही प्रभावित होगी।
चक्रवात और ला नीना से उत्पादन पर खतरा
उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में बाजार दबाव में है, लेकिन स्थिति पूरी तरह उत्पादन पर निर्भर करेगी। चंद्रशेखरन ने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में चक्रवात ‘सेन्यार’ और दिसंबर से संभावित ला नीना की स्थिति एशिया और भारत में धान की फसलों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे किसी भी व्यवधान से वैश्विक कीमतें फिर उछाल पकड़ सकती हैं।




